Saturday, February 8, 2020

सत्संग के उपदेश

**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज - सतसंग के उपदेश-( भाग- 2)-(23)- 【बाहरी कार्रवाई व साधन सच्चे परमार्थ का आदर्श नहीं है।】:- एक सिक्ख भाई ने बयान किया कि मैं अब पक्का सिक्ख बन गया हूँ।  मैं पांचो कके के हर वक्त सजाए रखता हूँ। सिर पर साफे के नीचे हमेशा नीली पगड़ी बांधता हूँ। जो शख्स केशधारी नहीं है उसके हाथ की कोई चीज नहीं खाता हूँ।  प्रातः काल स्नान करके "जप जी साहब" वगैरह का और दिन में दसवीं पादशाही (गुरु गोविंद सिंह साहब) की वाणी का पाठ करता हूं। यह बातें सुनकर पूछा गया - आया इन कार्रवाइयों से कोई अंदरूनी तब्दीली भी वाकै हुई है ? उन्होंने जवाब दिया कि यह तब्दीली वाकै हुई है कि मुझे सिवाय सिक्खों के कोई शख्स प्यारा नहीं लगता। सिर्फ सिक्खो ही के साथ उठना बैठना और 10 गुरुओं के गुन गाना अच्छा लगता है । इस पर कहा गया कि जरा आंखें बंद करके बताओ कि क्या दिखाई देता है ? जवाब मिला कि अंधेरा दिखाई देता है। उनसे कहा गया कि इससे जाहिर है कि पक्का सिख बनने के मुतअल्लिक़ जितनी कारर्वाईयाँ आपने कींक्ष उन सब का ताल्लुक जागृत अवस्था से है यानी आप सिर्फ जागृत अवस्था में सिक्खी ख्यालात, सिक्ख मजहब की तालीम और गुरु साहिबान का चिन्तवन कर सकते हैं इसलिए आंखें बंद करके अंतर्मुख वृति करने पर आपको महज अंधकार दिखाई देता है । आप अभी पक्के सिक्ख नहीं बने हैं। पक्का सिक्ख बनना उसे कहते हैं कि बाहर से दृष्टि हटाकर अन्तर्मुख होने पर आपको अपनी आत्मा का या सच्चे मालिक का या गुरु महाराज का दर्शन प्राप्त हो क्रमशः🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**

अभ्यास में विध्न दूर करने का जतन




 [08/02, 18:12] +91 92346 58709: **परम गुरु हुजूर महाराज- प्रेम पत्र-( भाग 1)-(5)- 【अभ्यास में विघ्न और उनके दूर करने का जतन】:- कोई लोग भजन में रस न मिलने की शिकायत करते हैं या यह कि अंतर में उनको कुछ नहीं खुला।  इसका सबब यह है कि या तो उनका मन वक्त अभ्यास के संसारी चाहों या कामों की गुनावध या ख्याल में लगा रहता है, या संसारी काम या उनकी गुनावन करके के अभ्यास में बैठते हैं, या उनको जो कुछ अंतर में सुनाई या दिखाई देता है उसकी उनको पहचान और कदर नहीं है।।              जाहिर है कि जब कोई अभ्यास के वक्त दुनिया के कामों का ख्याल या तरंग उठाएगा, उस वक्त उसके मन और सुरत की धार उसकी इंद्री की तरफ जारी होगी। क्योंकि मन से एक वक्त में एक ही काम हो सकता है और रस ऊपर यानी नीचे की धार में है, तो भजन का रस मन को, जब तक कि उसकी धार ऊपर के चैतन्य से चढ़ कर न मिले, क्योकर आ सकता है?    जो कोई काम या उसका ख्याल करके अभ्यास में बैठता है तो मन और सुरत उसके संसारिक वासना की धार से भीगे हुए हैं और उस वक्त उनका झुकाव और ख्याल नीचे की तरफ हो रहा है, तो जब तक गहरा शौक और प्रेम अंग लेकर भजन में मुतव्वज्जह ना होगा तब तक सुरत और मन निर्मल होकर न लगेंगे और रस नहीं आएगा। इस सूरत में मुनासिब है कि कोई चेतावनी या बिरहा या प्रेम के शब्द का बड़ी पोथी सार बचन नज्म से होशियारी से पाठ करें और अपने ख्याल को बदलें तो अलबत्ता कुछ रस या आनंद अभ्यास में मिल सकता है।।                    कोई शख्सों का यह हाल है कि जैसा कि उनको भेद स्थानों का मिला है जरा अभ्यास में बैठते हैं तो चाहते है कि पहला मुकाम तो फौरन ही खुल जावे, और जो कुछ उसकी झलक दिखलाई देवे तो चाहते है कि बराबर उनके सामने खड़ी या कायम रहे, और जो आवाज उनको पहले मुकाम की सुनाई देती है  तो उसको  जैसा कि चाहिए कदर नहीं करते। क्रमशः🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**
[08/02, 18:12] +91 92346 58709: **परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज - सतसंग के उपदेश-( भाग- 2)-(23)- 【बाहरी कार्रवाई व साधन सच्चे परमार्थ का आदर्श नहीं है।】:- एक सिक्ख भाई ने बयान किया कि मैं अब पक्का सिक्ख बन गया हूँ।  मैं पांचो कके के हर वक्त सजाए रखता हूँ। सिर पर साफे के नीचे हमेशा नीली पगड़ी बांधता हूँ। जो शख्स केशधारी नहीं है उसके हाथ की कोई चीज नहीं खाता हूँ।  प्रातः काल स्नान करके "जप जी साहब" वगैरह का और दिन में दसवीं पादशाही (गुरु गोविंद सिंह साहब) की वाणी का पाठ करता हूं। यह बातें सुनकर पूछा गया - आया इन कार्रवाइयों से कोई अंदरूनी तब्दीली भी वाकै हुई है ? उन्होंने जवाब दिया कि यह तब्दीली वाकै हुई है कि मुझे सिवाय सिक्खों के कोई शख्स प्यारा नहीं लगता। सिर्फ सिक्खो ही के साथ उठना बैठना और 10 गुरुओं के गुन गाना अच्छा लगता है । इस पर कहा गया कि जरा आंखें बंद करके बताओ कि क्या दिखाई देता है ? जवाब मिला कि अंधेरा दिखाई देता है। उनसे कहा गया कि इससे जाहिर है कि पक्का सिख बनने के मुतअल्लिक़ जितनी कारर्वाईयाँ आपने कींक्ष उन सब का ताल्लुक जागृत अवस्था से है यानी आप सिर्फ जागृत अवस्था में सिक्खी ख्यालात, सिक्ख मजहब की तालीम और गुरु साहिबान का चिन्तवन कर सकते हैं इसलिए आंखें बंद करके अंतर्मुख वृति करने पर आपको महज अंधकार दिखाई देता है । आप अभी पक्के सिक्ख नहीं बने हैं। पक्का सिक्ख बनना उसे कहते हैं कि बाहर से दृष्टि हटाकर अन्तर्मुख होने पर आपको अपनी आत्मा का या सच्चे मालिक का या गुरु महाराज का दर्शन प्राप्त हो क्रमशः🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**

प्रस्तुति - उषा रानी सिन्हा /राजेंद्र प्रसाद सिन्हा 

सत्संग समाचार

ऊ
सप्ताहिक सूचना  08/02/2020


*कृप्या नोट करें-*


1. मुंबई का ग्रेश बाथींग साबुन सेंटर उपलब्ध है जिन भाई व बहन को ग्रेश साबुन की जरूरत हो , वह कल मॉर्निंग सतसंग के बाद ले सकते हैं l

            बड़ौदा ऊनिट के मछरदानी का भी औडर भेजा जाना है अत: जिन भाई-बहन को मच्छरदानी की ज़रूरत है , वे लोग अपना नाम लिखवा दे तथा मच्छरदानी के लिए रूपये भी पहले जमा कर दे l

           और इन्दौर ऊनिट के कपड़े का भी औडर भेजा गया है , औडर पास हो जाने पर इन्दौर ऊनिट का कपड़ा भी सेंटर मे आयेगा l

2. मालिक राधास्वामी दयाल  की अपार दया व मेहर से, सुबह और शाम का ई - सत्संग का औडियो- विडीयो  लाइव प्रसारण सेंटर को रोजाना प्राप्त हो रहा है ।

      अत: आप सभी सुबह 3:45 से पहले मॉर्निंग सत्संग के लिए सेंटर मे पहूँचे  l

 और शाम को 2:30 से पहले l

कृपया अपनी सहमती ब्यक्त करें :-

सेंटर में कितने भाई-बहन और ज़िग्यासू हैं जो सुबह और शाम के सत्संग, दोनो बक्त या शिर्फ एक बक्त  में भाग लेना चाहेंगें। कृपया इवनिंग और मॉर्निंग या दोनो समय, अपनी सहमती ब्यकत कर हमारी हौसला को बढाये , ताकी इस दया व मेहर की सेवा नियमित रुप से सेंटर मे दिया जा  सकें l आपकी सहभागी सेंटर की ताकत है, अत: आप सभी भाई -बहन से हाथ जोड़कर प्रार्थना है की इस अपार दया व मेहर की लहर का भरपुर लाभ उठाया जाये l

3. अब जिज्ञासु esatsang में ई-सतसंग ऑडियो ट्रांसमिशन के लिए लॉगिन कर सकते हैं ।  लॉगिन और पासवर्ड के रुप मे अपना यूआई डी और जन्म तिथि Itas.in मे डाले l

https://esatsang.itas.in/auth/login?next=%2F

4. बजट, स्टोर , प्रदर्शनी या किसी भी तरह के कोई भी सतसंग का बकाया राषी  हो उसे सतसंग account मे जमा कर दे l जैसा की पिछले रविवार को भी बताया गया था l कृप्या इस काम मे जरा भी कोताही न करें l

5. संत-शु के सभी बच्चे सेंटर मे ई-सतसंग के बाद मार्च पास के लिए उपस्थित रहेंगें l

6. याद रखने के लिए :-

         *||| अति विशिष्ट महान जन्म दिवस |||*

1) परम गुरु हुज़ूर डॉ. लाल साहब -         31 जनवरी

2) ग्रेशस हुज़ूर डॉ. सत्संगी साहब - 09 मार्च

3) परम गुरु हुज़ूर महाराज - 14 मार्च

4) परम गुरु महाराज साहब - 28 मार्च

5) परम गुरु हुज़ूर साहबजी महाराज - 06 अगस्त

6) परम पुरुष पूरन धनी हुज़ूर स्वामीजी महाराज - 24 अगस्त

7) परम गुरु हुज़ूर सरकार  साहब - 12 दिसंबर

8) परम गुरु हुज़ूर मेहताजी  महाराज - 20 दिसंबर

कृप्या यह भी नोट करे l

6. सभी सतसंगी भाई बहन अपना-अपना  QR Code और ID card बनाबाने के लिए अपना-अपना :

1. आधार नम्बर

2. मुबाईल नम्बर

3. फोटो

सेंटर मे जमा करा दे l

7. दिनांक 05/01/2020 (रविवार) को ई-सतसंग के  वॉलंटियर :

1. प्रेमी भाई परशुराम प्रसाद

2. प्रेमी भाई सरजु प्रसाद

3. संत सरन

4. प्रेमी बहन शब्द प्यारी

आप सभी कल अपना आना सुनिश्चित करें। कल न आना हो तो बता दें।

8. सेंटर मे ई-सतसंग के लिए volunteer की आवश्यकता है, यदि कोई सतसंगी भाई-बहन इस सेवा को नियमित रुप से करना चाहें तो अपना नाम सेंटर मे सेंटर इंचार्ज को लिखा दे या बता दे l


सेंटर इंचार्ज भदेजी

राधास्वामी



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सत्संग के उपदेश

[10/01, 07:37] +91 79090 13535: *सतसंग के उपदेश*
भाग-1
*(परम गुरु हुज़ूर साहबजी महाराज)*
*मिश्रित बचन*

       *38- दुनिया के लोग बड़े शौक़ के साथ देवताओं की पूजा करते हैं और आशा रखते हैं कि इस पूजा से देवता उन्हें मुक्ति प्रदान करेंगे। मगर तअज्जुब यह है कि कोई भी यह तहक़ीक़ करने की कोशिश नहीं करता आया उन देवताओं को ख़ुद भी मोक्ष प्राप्त है। जब कि ये देवता सृष्टि के काम में लगे हैं और सृष्टि की सँभाल की सेवा उनके सुपुर्द है, तो उनसे मोक्ष हासिल करने की आशा बाँधना लाहासिल है। वे सृष्टि के ही अन्दर नीच ऊँच योनि दिला सकते हैं, इससे ज़्यादा उन्हें अधिकार हासिल नहीं है। उपनिषद् में एक जगह लिखा है कि जब कोई शख़्स देवताओं की उपासना छोड़ कर ब्रह्मविद्या की जानिब मुख़ातिब होता है तो वे उससे ऐसे ही नाराज़ होते हैं जैसे कोई अपने पशु चुराये जाने पर नाराज़ होता है। ऐसी हालत में मोक्ष के तलबगारों को चाहिये कि देवताओं की पूजा को छोड़ कर सच्चे मालिक की भक्ति में लगें और सच्चे मालिक की भक्ति की रीति सच्चे सतगुरु से दरियाफ़्त करें।* 

*राधास्वामी*
[12/01, 17:27] +91 79090 13535: **राधास्वामी!!- 12-01- 2020- आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन- कल से आगे -(27 )-जब तक किसी सत्संगी के अंदर जब्त यानी मन को काबू में रखने का माद्दा पैदा नहीं होता वह सत्संग से असली फायदा नहीं उठा सकता। सत्संगी के लिए काफी नहीं है कि मन को काबू में रखने से जो लाभ होते हैं उनमें श्रद्धा कायम कर ले या मन को काबू में लाने का इरादा करले। उसको चाहिए कि नीचे लिखे हुए तरीकों से मन को काबू में रखने की आदत डालें:- अब चलने फिरने का अव्वल-जब चलने फिरने व काज करने से खूब भूख लग जाए तो खाने के लिए बैठे और जब खाना सामने आवे तो परहेज करें यानी बिना खाए उठ जाय।।          दोयम-तेज प्यास लगने पर ठंडा पानी या शरबत मंगाये लेकिन उनके सामने आने पर प्यासा रहना मंजूर करें ।            इन दो परीक्षाओं में पास होने पर आदत डालें कि निंदा होने पर मिजाज काबू में रहे और स्तुति होने पर मन फूलने न पावे।।                                  सत्संग में असाधारण दया होने पर तबीयत सावधान रहें ।अंतर में कोई परचा मिलने पर उसका जिक्र जबान पर ना आवे और अंतर में दर्शन की गहरी दया होने पर ऐसे बरतें कि पड़ोसी तक को खबर ना होने पावे की कोई गैरमामूली बक्शीश हुई है। इन सात परीक्षाओं में पूरा उतर आने पर सत्संगी इत्मीनान के साथ जिंदगी बसर कर सकता है ।🙏🏻राधास्वामी🙏🏻( सत्संग के उपदेश -भाग तीसरा- पेज नंबर 27)**
प्रस्तुति - ऊषा रानी सिन्हा /राजेंद्र प्रसाद सिन्हा


Radhaswami

RS

EXPOSITION ON TRUTH ULTIMATE REALITY AND SUPREME BEING

(FROM VANTAGE POINTS OF RADHASOAMI FAITH AND SYSTEMS SCIENCE)

BY GRACIOUS HUZUR PROF. PREM SARAN SATSANGI SAHAB

EXPOSITION OF CREATION: CONVERGING VIEWPOINTS OF RADHASOAMI FAITH AND MODERN SCIENCE

                                                       (Arti Satsang, 26.10.2008)                                 

331.20

However, the idea of multiple universes of Hugh Everette would seem to be eventually correct. Now the scientists also endorse the idea that there may exist many universes. But his conceptualization that there is a copy of the observer in each of the universes with different observable states in reality does not seem to be right. Those universes may be in different stages of their evolution and accordingly the same phenomena are not occurring simultaneously in all of them. Contd…

Radhasoami

🙏

Friday, February 7, 2020

मौन रहने की सीख




*अच्छा होगा कि हम सब इस समय कम से कम पाँच मिनट के लिये चुप होकर मालिक के चरणों का ध्यान करें और अन्तर ही अन्तर उसका शुकराना बजा लायें। यह कार्रवाई अत्यन्त उचित व समयानुसार होगी।*
 (इन शब्दों के साथ ही उपस्थित जनों ने आज्ञानुसार चुप होकर मालिक के हुज़ूर में प्रार्थना की) हुज़ूर ने फिर फ़रमाया-

     इतिहास पढ़ने से ज्ञात होता है कि
*जब हज़रत मसीह पैदा हुए, आसमान पर फ़ रिश्तों ने ख़ुशी मनाई और बाजे बजाये।*
*हज़रत मोहम्मद साहब पैदा हुए,आसमान से सितारे टूटे और ख़ास क़िस्म की रोशनी हुई और बाजे बजे।*

 *कृष्ण महाराज पैदा हुए तो सख़्त अँधेरा छा गया और वर्षा हुई, उसी हालत में वसुदेव उन्हें नन्द के घर ले गये।*

 *हज़रत मसीह सूली पर चढ़ाये गये और उनके साथ वह बर्ताव किया गया जिसे पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।*
*हज़रत मोहम्मद साहब को 17 बार युद्ध करना पड़ा।*

*कृष्ण महाराज को पाँच वर्ष की अवस्था से ही राक्षसों से लड़ना पड़ा। उसके बाद महाभारत का दृश्य देखना पड़ा।*

प्रस्तुति - उषा रानी सिन्हा /राजेंद्र प्रसाद सिन्हा 

बचन

*जो मालिक को देना है, छप्पर फाड़ के देगा*

*परम गुरु हुज़ूर प्रोफ़ेसर प्रेम सरन सतसंगी साहब द्वारा फ़रमाया अमृत बचन*
25.10.2019 - सायं सतसंग में
(पिछले दिन का शेष)
             *वैसे ही जिसने उपदेश इस जीवन में नहीं लिया, उसको कई जीवन बिताने पड़ेंगे, उपदेश मिलेगा, सब कर्मों का भार चुकता हो जाएगा, तब उद्धार होता है।* पहले ब्रह्माण्ड में पहुँचे, फिर उसके बाद ब्रह्माण्ड में मानसरोवर में गए जो threshold पर है, महाप्रलय के बाद और उस स्थान में भी वर्णन है हँस और हँसनियों का। तो हँस पहले निर्मल चेतन देश में पहुँच जाते हैं, हँसनियाँ कुछ अन्तराल के बाद, वह भी हँस बन जाते हैं और वह भी पहुँच जाते हैं। तो स्त्री पुरुष दोनों ही पहुँचते हैं, पर जैसा कहा जाता है कि देवी-देवताओं के नाम तो आप ब्रह्माण्ड तक ही पाते हैं, उसके आगे सत्तपुरुष होते हैं। *तो यह नहीं कि इस चोले में जो स्त्रियाँ हैं, उनका उद्धार नहीं होता, उनका भी उद्धार होता है। उनके कर्म उन्होंने यहीं काट दिए, तो बहुत थोड़े समय के लिये उनका मानसरोवर में हँसनी के रूप में रहना होता है। फिर वह भी हँस बन कर के निर्मल चेतन देश में स्थान प्राप्त करते हैं। तो इसलिए उनको कोई कमी नहीं होती। स्त्रियों का मान-सम्मान करना आदर्श बताया जाता है।*
राधास्वामी

पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...