का पंथ निराला है।।टेक।। (प्रेमबानी-4-शब्द-5-पृ.सं.93) (कार्यनगर मोहल्ला-उपस्थिति-207)
(4) यथार्थ प्रकाश-भाग तीसरग-कल से आगे। सतसंग के बाद:- (1)-राधास्वामी मूल नाम। (2)-मिश्रित शब्द पाठ एवं मेरे तो राधास्वामी दयाल दूसरो न कोई। सबके तो राधास्वामी दयाल। मेरे तो तेरे तो सबके तो। राधास्वामी दयाल दूसरो न कोई।राधास्वामी सुमिरन ध्यान भजन से जनम सुफल कर ले।। 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
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