राधास्वामी किरपा छिन २ चाहूँ॥८॥ मैं अति दीन हीन सरनागत ।
टारो काल करम की आफ़त॥९॥
अपना कर मोहि लेव सुधारी ।
मैं चरनन पर छिन छिन वारी॥१०॥ घट में मोहि धुन शब्द सुनावो ।
मन और सूरत अधर चढ़ावो॥११॥ देख बिलास मगन रहूँ मन में ।
झाँकत रहूँ रूप तिल पट में॥१२॥
सुनूँ गगन में अनहद बाजा ।
सुन में जाय सुरत मन साधा॥१३॥
भँवर गुफा देखत उजियारी।
सत्तपुरुष के चरनन लागी॥१४॥
प्रेम सहित नित आरत साज ।
राधास्वामी चरनन आई भाज॥१५॥
(प्रेमबानी-1-शब्दं-60-पृ.सं.224,225,226)**
[शाम सतसंग में पढा जाने वाला पहला पाठ:-
आज मैं पाई सरन गुरु पूरे।।टेक।।
(प्रेमबानी-3-शब्द-7-पृ.सं.199,200)-
(महापुरा ब्राँच(राजस्थान) बहुत बहुत बधाई।**
**राधास्वामी! आज शाम सतसंग में पढा जाने वाला तीसरा पाठ:-
चलो घट मैं दौरा करो री सखी।
जहाँ अनहद बाजे बाज रहे।।टेक।। (प्रेमबानी-3-शब्द-2-पृ.सं.241)-(स्वेतनगर मोहल्ला-उपस्थित-57)**
[11/20, 16:46] +91 94173 03452: **
राधास्वामी! - 20-11-2021-आज शाम सतसंग में पढे गये पाठ:- (1) आज मैं पाई सरन गुरु पूरे।।टेक।।-(राधास्वामी महिमा अतिसै भारी। सुरत हुई उन चरनन धूरे।।) (प्रेमबानी-3-शब्द-7-पृ.सं.199,200)- (अधिकतम् उपस्थिति-महापुरा ब्राँच (राजस्थान)- @ -2:29-दर्ज-189) (2) गुरू दरशन मोहिं लागे प्यारे। बचन सुनत हिये हरष बढ़ा रे ।।-(रहूँ उदास चरन नित ध्याऊँ। राधास्वामी किरपा छिन २ चाहूँ।।(प्रेमबानी-1- शब्द-60-पृ.सं.224,225,226) (3) चलो घट का दौरा करो री सखी। जहाँ अनहद बाजे बाज रहे।।टेक।।(प्रेमबानी-3-शब्द-2-पृ.सं.241,242)- (स्वेतनगर मोहल्ला -उपस्थिति-57) (4) यथार्थ प्रकाश-भाग तीसरा-कल से आगे। (5) तमन्ना यही है कि जब तक जिऊँ।।(हिन्दी एवं संस्कृत)-होली फेमली द्वारा।) (6) करूँ बिनती दोऊ कर जोरी। अरज सुनों राधास्वामी मोरी।। सतसंग के बाद:-मिश्रित शब्द- (1) हे दयाल सद् कृपाल। हम जीवन आधारे।। (हिन्दी एवं संस्कृत) (2) राधास्वामी रक्षक जीव के जीव न जाने भेद।(हिन्दी एवं संस्कृत) (3) गुरु धरा सीस पर हाथ मन क्यों करे।।(हिन्दी एवं संस्कृत) (4) तमन्ना यही है कि जब तक जिऊँ। चलूँ या फिरूँ या कि मेहनत करूँ।।(हिन्दी एवं संस्कृत) (5)-मेरे तो राधास्वामी दयाल दूसरो न कोई। सबके तो राधास्वामी दयाल। मेरे तो तेरे तो सबके तो। राधास्वामी दयाल दूसरो न कोई।राधास्वामी सुमिरन ध्यान भजन से जनम सुफल कर ले।। 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
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