Wednesday, September 30, 2015

कुल्लू का दशहरा



प्रस्तुति- रूही सिन्हा


मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
कुल्‍लु का दशहरा पुरे देश में प्रसि‍द्ध है। अन्य स्थानों की ही भाँति यहाँ भी दस दिन अथवा एक सप्ताह पूर्व इस पर्व की तैयारी आरंभ हो जाती है। स्त्रियाँ और पुरुष सभी सुंदर वस्त्रों से सज्जित होकर तुरही, बिगुल, ढोल, नगाड़े, बाँसुरी आदि-आदि जिसके पास जो वाद्य होता है, उसे लेकर बाहर निकलते हैं। पहाड़ी लोग अपने ग्रामीण देवता का धूम धाम से जुलूस निकाल कर पूजन करते हैं। देवताओं की मूर्तियों को बहुत ही आकर्षक पालकी में सुंदर ढंग से सजाया जाता है। साथ ही वे अपने मुख्य देवता रघुनाथ जी की भी पूजा करते हैं। इस जुलूस में प्रशिक्षित नर्तक नटी नृत्य करते हैं। इस प्रकार जुलूस बनाकर नगर के मुख्य भागों से होते हुए नगर परिक्रमा करते हैं और कुल्लू नगर में देवता रघुनाथजी की वंदना से दशहरे के उत्सव का आरंभ करते हैं। दशमी के दिन इस उत्सव की शोभा निराली होती है। इसकी खासियत है कि जब पूरे देश में दशहरा खत्‍म हो जाता है तब यहां शुरु होता है। देश के बाकी हिस्‍सों की तरह यहां दशहरा रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करके नहीं मनाया जाता। सात दिनों तक चलने वाला यह उत्‍सव हिमाचल के लोगों की संस्‍कृति और धार्मिक आस्‍था का प्रतीक है। उत्‍सव के दौरान भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा निकाली जाती है। यहां के लोगों का मानना है कि करीब 1000 देवी-देवता इस अवसर पर पृथ्‍वी पर आकर इसमें शामिल होते हैं।
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Thursday, September 17, 2015

चाणक्य नीति और अनमोल विचार






प्रस्तुति- रूही सिन्हा, जूही सिन्हा


'चाणक्य नीति' भारतीय इतिहास और संस्कृति की ऐसी अनमोल निधि है, जिस पर हम भारत के नागरिक गर्व से मस्तक ऊंचा करके इस बात को कह सकते है कि भारतीय दार्शनिक, चिंतक, विचारक और लेखक यूनान के विद्वानो से किसी भी तरह कम नहीं रहे। लगभग दो हजार चार सौ वर्ष पूर्व नालन्दा विश्वविद्यालय के आचार्य चाणक्य ने उस काल की व्यवस्था का वर्णन अपनी 'चाणक्य नीति' में किया है, जिसके द्वारा मित्र-भेद से लेकर दुश्मन तक की पहचान, पति-परायण तथा चरित्र हीन स्त्रियों में विभेद, राजा का कर्तव्य और जनता के अधिकारों तथा वर्ण व्यवस्था का उचित निदान हो जाता है। महापंडित आचार्य चाणक्य की 'चाणक्य नीति' के सत्रह अध्याय है। यह ग्रन्थ आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस समय था। यहाँ आप सब के लिए प्रस्तुत है चाणक्य नीति के सम्पूर्ण सत्रह (17) अध्याय।

 (यह भी पढ़े - आचार्य चाणक्य के 600 अनमोल विचार )

Complete Chanakya Neeti In Hindi (सम्पूर्ण चाणक्य नीति) :

Chanakya Neeti in Hindi - First Chapter (चाणक्य नीति - प्रथम अध्याय)

Chanakya Neeti in Hindi - Second Chapter (चाणक्य नीति - दूसरा अध्याय)

Chanakya Neeti in Hindi - Third Chapter (चाणक्य नीति - तीसरा अध्याय)

Chanakya Neeti In Hindi - Fourth Chapter (चाणक्य नीति - चौथा अध्याय)

Chanakya Neeti In Hindi - Fifth Chapter (चाणक्य नीति - पांचवा अध्याय)

Chanakya Neeti In Hindi - Sixth Chapter (चाणक्य नीति - छठवां अध्याय)

Chanakya Niti In Hindi - Seventh Chapter (चाणक्य नीति - सातवां अध्याय)

Chanakya Niti In Hindi - Eighth Chapter (चाणक्य नीति - आंठवा अध्याय)

Chanakya Niti in Hindi Ninth Chapter (चाणक्य नीति - नववा अध्याय)

Chanakya Niti in Hindi Tenth Chapter (चाणक्य नीति - दसवा अध्याय)

Chanakya Niti in Hindi - Eleventh Chapter (चाणक्य नीति - ग्यारहवा अध्याय)

Chanakya Neeti - Twelfth Chapter in Hindi (चाणक्य नीति - बारहवा अध्याय)

Chanakya Neeti - Thirteenth Chapter in Hindi (चाणक्य नीति - तेरहवा अध्याय)

Chanakya Neeti - Fourteenth Chapter in Hindi (चाणक्य नीति - चौहदवा अध्याय)

Chanakya Neeti - Fifteenth Chapter in Hindi (चाणक्य नीति - पन्द्रहवां अध्याय)

Chanakya Niti - Sixteenth Chapter in Hindi (चाणक्य नीति - सोलहवां अध्याय)

Chanakya Niti - Seventeenth Chapter in Hindi (चाणक्य नीति - सत्रहवां अध्याय)

चाणक्य नीति: इन 5 के बीच में से कभी नहीं निकलना चाहिए

चाणक्य नीति: सफल होने के लिए मालूम होने चाहिए इन 6 प्रश्नों के उत्तर

चाणक्य नीति- पुरुषों को ये 4 बातें कभी भी किसी को बतानी नहीं चाहिए

चाणक्य नीति: जब हो जाए ऐसी 4 बातें तो तुरंत भाग जाना चाहिए

चाणक्य नीति- जानिए किसी व्यक्ति के गलत कामो का फल किस-किस इंसान को भुगतना पड़ता है

चाणक्य नीति- हमें उस जगह रहना चाहिए जहां हों ये पांच बातें

चाणक्य नीति- ये तीन स्थितियां पुरुषों के लिए है अति दुखदायी

इस सटीक चाणक्य नीति से आप परख सकते है किसी भी स्त्री या पुरुष को

चाणक्य नीति- ये चार काम कोई किसी को सीखा नहीं सकता

चाणक्य नीति: पति के लिए अच्छी नहीं होती हैं पत्नी की ये बातें

चाणक्य नीति- किसी को नींद से जगाते समय ध्यान रखें ये बातें

चाणक्य नीति: जानिए किस समय पिया गया पानी होता है विष समान

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चाणक्य नीति- हम सोच भी नहीं सकते, ये 4 कर सकते हैं ऐसे काम

चाणक्य नीति- जो इन 6 हालातों में भी दे आपका साथ, वो ही है आपका सच्चा हितैषी

चाणक्य नीति- जानिए राजा, ब्राह्मण और स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

चाणक्य नीति- ये 6 बातें इंसान को जीते जी जलाती है आग में

बच्चों की परवरिश में सभी माता-पिता को ध्यान रखनी चाहिए ये चाणक्य नीति

चाणक्य नीति- जिनमें ये पांच गुण न हो उनसे नहीं करनी चाहिए दोस्ती

चाणक्य नीति- इन 5 पर नहीं करना चाहिए विश्वास

चाणक्य नीति- किसी व्यक्ति को कैसे करें वश में ?

चाणक्य नीति- जानिए किस तरह के धर्म, गुरु, पत्नी और भाई-बहन का त्याग कर देना चाहिए

चाणक्य नीति- ध्यान रखें इन सातों को आपका पैर नहीं लगना चाहिए

हर काम में चाहते है सफलता तो अमल करे इस चाणक्य नीति पर

चाणक्य नीति- किसी का भी स्वभाव हंस के जैसा नहीं होना चाहिए

नियति है वीरानगी



हमारे देश भारत के कई शहर अपने दामन में कई रहस्यमयी घटनाओ को समेटे हुए है ऐसी ही एक घटना हैं राजस्थान के जैसलमेर जिले के कुलधरा(Kuldhara) गाँव कि, यह गांव पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा हैं।कुलधरा(Kuldhara) गाँव के हज़ारों लोग एक ही रात मे इस गांव को खाली कर के चले गए थे  और जाते जाते श्राप दे गए थे कि यहाँ फिर कभी कोई नहीं बस पायेगा। तब से गाँव वीरान पड़ा हैं।
A house at haunted village Kuldhara
कुलधरा मे एक मकान 

कहा जाता है कि यह गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में हैं, कभी एक हंसता खेलता यह गांव आज एक खंडहर में तब्दील हो चुका है| टूरिस्ट प्लेस में बदल चुके कुलधरा गांव घूमने आने वालों के मुताबिक यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है। उन्हें वहां हरपल ऐसा अनुभव होता है कि कोई आसपास चल रहा है। बाजार के चहल-पहल की आवाजें आती हैं, महिलाओं के बात करने उनकी चूडिय़ों और पायलों की आवाज हमेशा ही वहां के माहौल को भयावह बनाते हैं। प्रशासन ने इस गांव की सरहद पर एक फाटक बनवा दिया है जिसके पार दिन में तो सैलानी घूमने आते रहते हैं लेकिन रात में इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता हैं।


Abandoned village Kuldhara
वीरान कुलधरा गाँव 

वैज्ञानिक तरीके से हुआ था गाँव का निर्माण 
कुलधरा(Kuldhara) जैसलमेर से लगभग अठारह किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है । पालीवाल समुदाय के इस इलाक़े में चौरासी गांव थे और यह उनमें से एक था । मेहनती और रईस पालीवाल ब्राम्हाणों की कुलधार शाखा ने सन 1291 में तकरीबन छह सौ घरों वाले इस गांव को बसाया था। कुलधरा गाँव पूर्ण रूप से वैज्ञानिक तौर पर बना था। ईट पत्थर से बने इस गांव की बनावट ऐसी थी कि यहां कभी गर्मी का अहसास नहीं होता था। कहते हैं कि इस कोण में घर बनाए गये थे कि हवाएं सीधे घर के भीतर होकर गुज़रती थीं । कुलधरा के ये घर रेगिस्ताकन में भी वातानुकूलन का अहसास देते थे । इस जगह गर्मियों में तापमान 45 डिग्री रहता हैं पर आप यदि अब भी भरी गर्मी में इन वीरान पडे मकानो में जायेंगे तो आपको शीतलता का अनुभव होगा। गांव के तमाम घर झरोखों के ज़रिए आपस में जुड़े थे इसलिए एक सिरे वाले घर से दूसरे सिरे तक अपनी बात आसानी से पहुंचाई जा सकती थी । घरों के भीतर पानी के कुंड, ताक और सीढि़यां कमाल के हैं ।
A house at abandoned village Kuldhara
कुलधरा  मे 170 साल पुराना मकान 

पालीवाल ब्राम्ह>ण होते हुए भी बहुत ही उद्यमी समुदाय था । अपनी बुद्धिमत्ताl, अपने कौशल और अटूट परिश्रम के रहते पालीवालों ने धरती पर सोना उगाया था । हैरत की बात ये है कि पाली से कुलधरा आने के बाद पालीवालों ने रेगिस्तापनी सरज़मीं के बीचोंबीच इस गांव को बसाते हुए खेती पर केंद्रित समाज की परिकल्पलना की थी । रेगिस्ता़न में खेती । पालीवालों के समृद्धि का रहस्य था । जिप्सरम की परत वाली ज़मीन को पहचानना और वहां पर बस जाना । पालीवाल अपनी वैज्ञानिक सोच, प्रयोगों और आधुनिकता की वजह से उस समय में भी इतनी तरक्की कर पाए थे ।
पालीवाल समुदाय आमतौर पर खेती और मवेशी पालने पर निर्भर रहता था । और बड़ी शान से जीता था । जिप्सआम की परत बारिश के पानी को ज़मीन में अवशोषित होने से रोकती और इसी पानी से पालीवाल खेती करते । और ऐसी वैसी नहीं बल्कि जबर्दस्तं फसल पैदा करते । पालीवालों के जल-प्रबंधन की इसी तकनीक ने थार रेगिस्तारन को इंसानों और मवेशियों की आबादी या तादाद के हिसाब से दुनिया का सबसे सघन रेगिस्ताकन बनाया । पालीवालों ने ऐसी तकनीक विकसित की थी कि बारिश का पानी रेत में गुम नहीं होता था बल्कि एक खास गहराई पर जमा हो जाता था ।
Haunted village Kuldhara
कुलधरा गाँव के खंडहर 

कुलधरा के वीरान होने कि कहानी (Story of Kuldhara)
जो गाँव इतना विकसित था तो फिर क्या वजह रही कि वो गाँव रातों रात वीरान हो गया। इसकी वजह था गाँव   का अय्याश दीवान सालम सिंह जिसकी गन्दी नज़र गाँव कि एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गयी थी। दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि बस किसी तरह से उसे पा लेना चाहता था। उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि यदि अगले पूर्णमासी तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके लड़की को उठा ले जाएगा। गांववालों के लिए यह मुश्किल की घड़ी थी। उन्हें या तो गांव बचाना था या फिर अपनी बेटी। इस विषय पर निर्णय लेने के लिए सभी 84 गांव वाले एक मंदिर पर इकट्ठा हो गए और पंचायतों ने फैसला किया कि कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस दीवान को नहीं देंगे।
फिर क्या था, गांव वालों ने गांव खाली करने का निर्णय कर लिया और रातोंरात सभी 84 गांव आंखों से ओझल हो गए। जाते-जाते उन्होंने श्राप दिया कि आज के बाद इन घरों में कोई नहीं बस पाएगा। आज भी वहां की हालत वैसी ही है जैसी उस रात थी जब लोग इसे छोड़ कर गए थे।
Kuldhara village - Jaisalmer

आज भी है श्राप का असर:
पालीवाल ब्राह्मणों के श्राप का असर यहां आज भी देखा जा सकता है। जैसलमेर के स्थानीय निवासियों की मानें तो कुछ परिवारों ने इस जगह पर बसने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। स्थानिय लोगों का तो यहां तक कहना है कि कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो वहां गए जरूर लेकिन लौटकर नहीं आए। उनका क्या हुआ, वे कहां गए कोई नहीं जानता।
Kuldhara gaanv ke khandhar
कुलधरा गाँव  (जैसलमेर) के अवशेष 

यहां के धरती में दबा है सोना इसलिए आते हैं पर्यटक: 
पर्यटक यहां इस चाह में आते हैं कि उन्हें यहां दबा हुआ सोना मिल जाए। इतिहासकारों के मुताबिक पालीवाल ब्राह्मणों ने अपनी संपत्ति जिसमें भारी मात्रा में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात थे, उसे जमीन के अंदर दबा रखा था। यही वजह है कि जो कोई भी यहां आता है वह जगह-जगह खुदाई करने लग जाता है। इस उम्मीद से कि शायद वह सोना उनके हाथ लग जाए। यह गांव आज भी जगह-जगह से खुदा हुआ मिलता है।
Temple at Kuldhara village - Jaisalmer
कुलधरा गाँव मे एक प्राचीन मंदिर के अवशेष 
पेरानार्मल सोसायटी की टीम ने कि कुलधरा में पड़ताल :-
मई 2013 मे दिल्ली से आई भूत प्रेत व आत्माओं पर रिसर्च करने वाली पेरानार्मल सोसायटी की टीम ने कुलधरा(Kuldhara) गांव में बिताई रात। टीम ने माना कि यहां कुछ न कुछ असामान्य जरूर है। टीम के एक सदस्य ने बताया कि विजिट के दौरान रात में कई बार मैंने महसूस किया कि किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा, जब मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था। पेरानॉर्मल सोसायटी के उपाध्यक्ष अंशुल शर्मा ने बताया था कि हमारे पास एक डिवाइस है जिसका नाम गोस्ट बॉक्स है। इसके माध्यम से हम ऐसी जगहों पर रहने वाली आत्माओं से सवाल पूछते हैं। कुलधरा में भी ऐसा ही किया जहां कुछ आवाजें आई तो कहीं असामान्य रूप से आत्माओं ने अपने नाम भी बताए। शनिवार चार मई की रात्रि में जो टीम कुलधरा गई थी उनकी गाडिय़ों पर बच्चों के हाथ के निशान मिले। टीम के सदस्य जब कुलधरा गांव में घूमकर वापस लौटे तो उनकी गाडिय़ों के कांच पर बच्चों के पंजे के निशान दिखाई दिए। (जैसा कि कुलधरा(Kuldhara) गई टीम के सदस्यों ने मीडिया को बताया )

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जय हो रावण





प्रस्तुति- सृष्टि शरण 


 रावण की पूजा
भारत के कई स्थान ऐेसे भी है जहां रावण दहन नहीं किया जाता है, बल्कि उसकी पूजा अर्चना की जाती है। इनमें से कुछ जगहें तो ऐसी हैं जहां के निवासी रावण को अपना रिश्तेदार भी मानते हैं और इसलिए वे रावण का दहन नहीं बल्कि पूजा करते हैं। कुछ जगहों पर रावण के पांडित्य के कारण भी उसे पूजा जाता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में जहां रावण की पूजा होती है तथा जानते है रावण का रिश्ता वहां से जुड़े होने की किवदंतियां।

 Ravana Worship Tradition in India
1. उत्तरप्रदेश में गौतमबुद्ध नगर जिले के बिसरख गांव में भी रावण का मंदिर निर्माणाधीन है। मान्यता है कि गाजियाबाद शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव बिसरख रावण का ननिहाल था। नोएडा के शासकीय गजट में रावण के पैतृक गांव बिसरख के साक्ष्य मौजूद नजर आते हैं। इस गांव का नाम पहले विश्वेशरा था, जो रावण के पिता विश्रवा के नाम पर पड़ा। कालांतर में इसे बिसरख कहा जाने लगा।

2. जोधपुर शहर में भी लंकाधिपति रावण का मंदिर है। यहां के दवे, गोधा और श्रीमाली समाज के लोग रावण की पूजा-अर्चना करते हैं। ये लोग मानते हैं कि जोधपुर रावण का ससुराल था तो कुछ मानते हैं कि रावण के वध के बाद रावण के वंशज यहां आकर बस गए थे। ये लोग खुद को रावण का वंशज मानते हैं।



3. मध्यप्रदेश के मंदसौर में भी रावण की पूजा की जाती है। मंदसौर नगर के खानपुरा क्षेत्र में रूण्डी नामक स्थान पर रावण की विशालकाय मूर्ति है। किवदंती है कि रावण दशपुर (मंदसौर) का दामाद था। रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी मंदसौर की निवासी थीं। मंदोदरी के कारण ही दशपुर का नाम मंदसौर माना जाता है। इसके अलावा छिंदवाड़ा में भी रावण की पूजा की जाती है।

4. उज्जैन जिले के चिखली ग्राम में ऐसी मान्यता है कि यदि रावण को पूजा नहीं गया तो पूरा गांव जलकर भस्म हो जाएगा। इसीलिए इस गांव में भी रावण का दहन नहीं किया जाता, बल्कि दशहरे पर रावण की पूजा होती है। गांव में ही रावण की विशालकाय मूर्ति स्थापित है।

Ravan Temple in India
5. कर्नाटक के कोलार जिले में भी लोग फसल महोत्सव के दौरान रावण की पूजा करते हैं। ये लोग रावण की पूजा इसलिए करते हैं, क्योंकि वह भगवान शिव का भक्त था। लंकेश्वर महोत्सव में भगवान शिव के साथ रावण की प्रतिमा भी जुलूस की शोभा बढ़ाती है। इसी राज्य के मंडया जिले के मालवल्ली तालुका में रावण को समर्पित एक मंदिर भी है।


6. कथाओं के अनुसार रावण ने आंध्र प्रदेश के काकिनाड में एक शिवलिंग की स्थापना की थी। वहां इसी शिवलिंग के निकट रावण की भी प्रतिमा स्थापित है। यहां शिव और रावण दोनों की पूजा मछुआरा समुदाय करता है। रावण को लंका का राजा माना जाता है और श्रीलंका में कहा जाता है कि राजा वलगम्बा ने इला घाटी में रावण के नाम पर गुफा मंदिर का निर्माण कराया था।

7. महाराष्ट्र के अमरावती और गढ़चिरौली जिले में कोरकू और गोंड आदिवासी रावण और उसके पुत्र मेघनाद को अपना देवता मानते हैं। अपने एक खास पर्व फागुन के अवसर पर वे इसकी विशेष पूजा करते हैं। इसके अलावा, दक्षिण भारत के कई शहरों और गांवों में भी रावण की पूजा होती है।

8. उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की जसवंतनगर में दशहरा मनाने का अंदाज जरा निराला है। यहां दशहरे वाले दिन रावण की पूरे शहर में आरती उतार कर पूजा की जाती है। उसे जलाने की बजाय रावण को मार-मारकर उसके टुकड़े कर दिए जाते हैं। फिर वहां मौजूद लोग रावण के उन टुकड़ों को उठाकर घर ले जाते हैं। जसवंतनगर के रावण की मौत के तेरहवें दिन रावण की तेरहवीं भी की जाती है।

Ravan Temple
9. जसवंतनगर के रामलीला मैदान में लगभग 15 फुट ऊंचा रावण का पुतला नवरात्र के सप्तमी को लग जाता है। दशहरा पर जब रावण अपनी सेना के साथ युद्ध करने को निकलता है। तब यहां उसकी धूप-कपूर से आरती होती है और जय-जयकार भी होती है। यहां कि यह परंपरा दक्षिण भारत से प्रभावित है। दरअसल रावण बहुत ज्ञानी था और यहां रावण के पांडित्य और ज्ञान रुपी स्वरुप को तो पूजा जाता है, जबकि उसके राक्षसत्व के कारण उसका वध किया जाता है।

10. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शिवनगरी के नाम से मशहूर बैजनाथ कस्बा है। यहां के लोग कहते हैं कि रावण का पुतला जलाना तो दूर सोचना भी महापाप है। यदि इस क्षेत्र में रावण का पुतला जलाया गया तो उसकी मौत निश्चित है। मान्यता के अनुसार रावण ने कुछ वर्ष बैजनाथ में भगवान शिव की तपस्या कर मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था। शिव के सामने उनके परमभक्त के पुतले को जलाना उचित नहीं था और ऐसा करने पर दंड तत्काल मिलता था, लिहाजा रावणदहन यहां नहीं होता।

11. बैजनाथ में बिनवा पुल के पास रावण का मंदिर है जिसमें शिवलिंग व उसी के पास, एक बड़े पैर का निशान है। ऐसा माना जाता है कि रावण ने इसी स्थान पर एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की थी। इसके बाद शिव मंदिर के पूर्वी द्वार में खुदाई के दौरान एक हवन कुंड भी निकला था। इस कुंड के समक्ष रावण ने हवन कर अपने नौ सिरों की आहुति दी थी।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े -   भारत के अदभुत मंदिर
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भारत के मंदिर


 

 

Temples of India (भारत के मंदिर)

Shiv Temple  (शिव मंदिर)

असीरगढ़ का किला - श्रीकृष्ण के श्राप के कारण यहां आज भी भटकते हैं अश्वत्थामा, किले के शिवमंदिर में प्रतिदिन करते है पूजा

काठगढ़ महादेव - यहां है आधा शिव आधा पार्वती रूप शिवलिंग (अर्धनारीश्वर शिवलिंग)

स्तंभेश्वर महादेव - शिव पुत्र कार्तिकेय ने करी थी स्थापना, दिन में दो बार नज़रों से ओझल होता है यह मंदिर

टूटी झरना मंदिर- रामगढ़(झारखंड) - यहाँ स्वयं माँ गंगा करती है शिवजी का जलाभिषेक

बिजली महादेव- कुल्लू -हर बारह साल में शिवलिंग पर गिरती है बिजली

लिंगाई माता मंदिर - स्त्री रूप में होती है शिवलिंग की पूजा

अचलेश्वर महादेव - अचलगढ़ - एक मात्र मंदिर जहां होती है शिव के अंगूठे की पूजा

ममलेश्वर महादेव मंदिर - यहां है 200 ग्राम वजनी गेहूं का दाना - पांडवों से है संबंध

नागचंद्रेश्वर मंदिर - साल में मात्र एक दिन खुलता है मंदिर

चमत्कारिक भूतेश्वर नाथ शिवलिंग - हर साल बढ़ती है इसकी लम्बाई

अनोखा शिवलिंग - महमूद गजनवी ने इस पर खुदवाया था कलमा

महादेवशाल धाम - जहाँ होती है खंडित शिवलिंग की पूजा - गई थी एक ब्रिटिश इंजीनियर की जान

निष्कलंक महादेव - गुजरात - अरब सागर में स्तिथ शिव मंदिर - यहां मिली थी पांडवों को पाप से मुक्ती

परशुराम महादेव गुफा मंदिर - मेवाड़ का अमरनाथ - स्वंय परशुराम ने फरसे से चट्टान को काटकर किया था निर्माण

कमलनाथ महादेव मंदिर - झाडौल - यहां भगवान शिव से पहले की जाती है रावण की पूजा

कामेश्वर धाम कारो - बलिया - यहाँ भगवान शिव ने कामदेव को किया था भस्म

अचलेश्वर महादेव - धौलपुर(राजस्थान) - यहाँ पर है दिन मे तीन बार रंग बदलने वाला शिवलिंग

लक्ष्मणेश्वर महादेव - खरौद - यहाँ पर है लाख छिद्रों वाला शिवलिंग (लक्षलिंग)

भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) - भोपाल - यहाँ है एक ही पत्थर से निर्मित विशव का सबसे बड़ा शिवलिंग (World's tallest shivlinga made by one rock)
जंगमवाड़ी मठ - वाराणसी : जहा अपनों की मृत्यु पर शिवलिंग किये जाते हे दान

एक हथिया देवाल- मात्र एक हाथ से और एक रात में बने इस प्राचीन शिव मंदिर के शिवलिंग की नहीं होती है पूजा, आखिर क्यों? 

Mata Temple  (माता के मंदिर)

ज्वालामुखी देवी - यहाँ अकबर ने भी मानी थी हार - होती है नौ चमत्कारिक ज्वाला की पूजा

दंतेश्वmरी मंदिर - दन्तेवाड़ा - एक शक्ति पीठ - यहाँ गिरा था सती का दांत

51 Shakti Peeth (51 शक्ति पीठ)

करणी माता मंदिर, देशनोक (Karni Mata Temple , Deshnok) - इस मंदिर में रहते है 20,000 चूहे, चूहों का झूठा प्रसाद मिलता है भक्तों को
कामाख्या मंदिर - सबसे पुराना शक्तिपीठ - यहाँ होती हैं योनि कि पूजा, लगता है तांत्रिकों व अघोरियों का मेला

तरकुलहा देवी (Tarkulha Devi) - गोरखपुर - जहाँ चढ़ाई गयी थी कई अंग्रेज सैनिकों कि बलि

तनोट माता मंदिर (जैसलमेर) - जहा पाकिस्तान के गिराए 3000 बम हुए थे बेअसर

दैवीय चमत्कार- 50 लाख लीटर पानी से भी नहीं भरा शीतला माता के मंदिर में स्तिथ ये छोटा सा घडा़

जीजी बाई का मंदिर- एक अनोखा मंदिर जहाँ मन्नत पूरी होने पर मां दुर्गा को चढ़ती है चप्पल और सैंडिल

जीण माता मंदिर- औरंगजेब भी नहीं कर पाया था इस मंदिर को खंडित, मधुमक्खियों ने की थी रक्षा

सिमसा माता मंदिर- जहां फर्श पर सोने से होती है नि:संतान महिलाओं को संतान की प्राप्ति

मां बम्लेश्वरी मंदिर- ऊंचे पहाड़ पर स्थित माता के इस मंदिर से जुड़ी है एक प्रसिद्ध प्रेम कहानी

चौसठ योगिनी मंदिर, मुरैना- यह मंदिर कहलाता था तांत्रिक विश्वविद्यालय, होते थे तांत्रिक अनुष्ठान

Hanuman Temple (हनुमान मंदिर)

भारत के प्रसिद्ध 16 हनुमान मंदिर

गिरजाबंध हनुमान मंदिर - रतनपुर - एक अति प्राचीन मंदिर जहाँ स्त्री रूप में होती है हनुमान कि पूजा

तेलंगाना में है हनुमान जी और उनकी पत्नी सुवर्चला का मंदिर

कष्टभंजन हनुमान मंदिर- जहाँ हनुमान जी के पैरों में स्त्री रूप में बैठे है शनि देव

भारत में दो जगह है हनुमान पुत्र मकरध्वज के मंदिर


Other Temple (अन्य मंदिर)

भारत के 10 प्रसिद्ध सूर्य मंदिर

पाकिस्तान स्तिथ हिन्दुओं के 20 प्राचीन, पौराणिक और ऐतिहासिक मंदिर

भारत के 10 सबसे अमीर मंदिर

अद्भुत हैंगिंग लेपाक्षी टेम्पल

अदभुत गणेश प्रतिमा - दंतेवाड़ा में 3000 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थापित 10 वि सदी की गणेश प्रतिमा

अष्टविनायक - गणेश जी के आठ अति प्राचीन मंदिर, जहाँ है स्वयंभू गणेश जी

चमत्कारिक कनिपक्कम गणपति मंदिर (आंध्रप्रदेश) - लगातार बढ़ा रहा है मूर्ति का आकार

भारत के प्रमुख तीर्थ - 51 शक्ति पीठ, 12 ज्योतिर्लिंग, 7 सप्तपुरी और 4 धाम

पहाड़ी मंदिर - रांची - भारत का एक मात्र मंदिर जहाँ राष्ट्रीय पर्वो पर फहराया जाता है तिरंगा

बाबा हरभजन सिंह मंदिर - सिक्किम - इस मृत सैनिक की आत्मा आज भी करती है देश की रक्षा

बुलेट बाबा का मंदिर - जहाँ कि जाती हैं बुलेट बाइक कि पूजा, माँगी जाती हैं सकुशल यात्रा कि मन्नत

महात्मा गांधी जी का मंदिर - उड़ीसा

जानिये भारत में स्तिथ यमराज (धर्मराज) के चार प्राचीन मंदिरों के बारे में

गंधेश्वर शिवलिंग - खुदाई में मिला 2000 साल पुराना शिवलिंग - आती है तुलसी की सुगंध

क्यों है ब्रह्मा जी का पुरे भारत में एक मंदिर ?

लादा महादेव टंगरा - यहां चट्टान पर हाथ फेरने से रिसता है पानी, दिखते हैं सीता-राम के पद-चिन्ह

रहस्यमयी और चमत्कारिक काल भैरव मंदिर - जहां भगवान काल भैरव करते है मदिरा पान

12 ज्योतिर्लिंग (12 Jyotirlinga)

7 धार्मिक स्थल जहाँ महिलाओं के प्रवेश पर है पाबंदी

लोहार्गल - यहां पानी में गल गए थे पांडवों के अस्त्र-शस्त्र, मिली थी परिजनों की हत्या के पाप से मुक्ति

टाइगर टेंपल- थाईलैंड- जहाँ सैकड़ों टाइगर रहते है बौद्ध भिक्षुओं के साथ

मलूटी- झारखंड - इसे कहते है मंदिरों का गाँव और गुप्त काशी

आदि केशव पेरुमल मंदिर - श्री पेरंबदूर - शिवजी के भूत गणों ने किया था इसका निर्माण

भारत के इन 10 मंदिरों में मिलता है अजब गजब प्रसाद

शृंग ऋषि और भगवान राम की बहन 'शांता' का मंदिर

आंजन धाम- मान्यता है की यही माँ अंजनी ने दिया था हनुमान को जन्म

कहानी भारत के 5 रहस्यमयी मंदिरों की

भगवान श्रीराम के 10 प्रमुख मंदिर

ये है भारत में वो स्थान जहाँ होती है रावण की पूजा

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