Wednesday, February 15, 2012

वैलेंटाइन डे की कहानी : मतलब भारतीयों को पता है?



Written by राजीव दीक्षित Category: सियासत-ताकत-राजकाज-देश-प्रदेश-दुनिया-समाज-सरोकार Published on 14 February 2012
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यूरोप (और अमेरिका) का समाज जो है वो रखैलों (Kept) में विश्वास करता है पत्नियों में नहीं, यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या महिला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परंपरा है उनके यहाँ। आपने एक शब्द सुना होगा "Live in Relationship" ये शब्द आज कल हमारे देश में भी नव-अभिजात्य वर्ग में चल रहा है, इसका मतलब होता है कि "बिना शादी के पति-पत्नी की तरह से रहना"। तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परंपरा आज भी चलती है, खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा, प्लेटो ने लिखा है कि "मेरा 20-22 स्त्रियों से सम्बन्ध रहा है" अरस्तु भी यही कहता है, देकार्ते भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि "एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता, It's Highly Impossible"। तो वहां एक पत्नीव्रत जैसा कुछ होता नहीं। और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि "स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती" "स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये"। तो बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की। उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था - वैलेंटाइन। और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानि ईशा की मृत्यु के बाद।




उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि "हमलोग (यूरोप के लोग) जो शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral  disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधों को उसके बाद ही शुरू करो" ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे, जो उनके पास आते थे, रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर। संयोग से वो चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे, तो लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आपमें कहाँ से घुस गया, ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि "आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दर्शन का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वो परफेक्ट है, और इसलिए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो", तो कुछ लोग उनकी बात को मानते थे, तो जो लोग उनकी बात को मानते थे, उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे और एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थी। जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लौड़ीयस, आप उसे चक्रवर्ती सम्राट की श्रेणी में रख सकते हैं। क्लौड़ीयस ने कहा कि "ये जो आदमी है-वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है, हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फिर रहा है, ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है, हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा है", तो क्लौड़ीयस ने आदेश दिया कि "जाओ वैलेंटाइन को पकड़ के लाओ ", तो उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ के ले आये।


क्लौड़ीयस ने वैलेंटाइन से कहा कि "ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो? तुम अधर्म फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो" तो वैलेंटाइन ने कहा कि "मुझे लगता है कि ये ठीक है", क्लौड़ीयस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी, आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी करना जुर्म था। क्लौड़ीयस ने उन सभी बच्चों को बुलाया, जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईस्वी को फाँसी दे दिया गया। पता नहीं आपमें से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईस्वी तक खुले मैदान में, सार्वजानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी। तो जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया तो उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। मतलब ये हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फिरते थे, चूंकि राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी, तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। ये था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार। 


अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है। अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है और हमारे यहाँ के लड़के-लड़कियां बिना सोचे-समझे एक दूसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं। और जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है " Would You Be My Valentine" जिसका मतलब होता है "क्या आप मुझसे शादी करेंगे"। मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को ये ही कार्ड वो दे देते हैं। और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपनियाँ लग गयी हैं जिनको ग्रीटिंग कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको मिठाइयाँ बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुंआधार प्रचार कर दिया। ये सब लिखने के पीछे का उद्देश्य यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें। उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में ??????
स्वर्गीय राजीव दीक्षित के विभिन्न व्याख्यानों का संपादित अंश.

स्त्री जननांग


मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से
मानवों में प्रजनन हेतु जननांग होते हैं, जो स्त्रियों और पुरुषों में भिन्न होते हैं। स्त्री के जननांगो में सबसे पहले बाल होते है जिसे प्यूबिक बाल कहा जाता है। ये बाल स्त्री जननागं को चारों ओर से घेरे रहते है। ऊपर की तरफ एक अंग जो उल्टे वी के आकार की होती है उसे क्लाईटोरिस कहते है। यह भाग काफी संवेदनशील होता है। क्लाइटोरिस के नीचे एक छोटा सा छेद होता है जोकि मूत्रद्वार होता है।
मूत्रद्वार के नीचे एक बड़ा छिद्र होता है जिसको जनन छिद्र कहते है। इसी के रास्ते प्रत्येक महीने महिलाओं को मासिक स्राव (माहवारी) होती है। इसी रास्ते के द्वारा ही बच्चे का जन्म भी होता है। इसकी दीवारे लचीली होती है जो बच्चे के जन्म समय फैल जाती है। इसके नीचे थोड़ी सी दूरी पर एक छिद्र होता है जिसे मलद्वार या मल निकास द्वार कहते है।

अनुक्रम

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[संपादित करें] गर्भाशय

गर्भाशय 7.5 सेमी लम्बी, 5 सेमी चौड़ी तथा इसकी दीवार 2.5 सेमी मोटी होती है। इसका वजन लगभग 35 ग्राम तथा इसकी आकृति नाशपाती के आकार के जैसी होती है। जिसका चौड़ा भाग ऊपर फंडस तथा पतला भाग नीचे इस्थमस कहलाता है। महिलाओं में यह मूत्र की थैली और मलाशय के बीच में होती है तथा गर्भाशय का झुकाव आगे की ओर होने पर उसे एन्टीवर्टेड कहते है अथवा पीछे की तरफ होने पर रीट्रोवर्टेड कहते है। गर्भाशय के झुकाव से बच्चे के जन्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
गर्भाशय का ऊपरी चौड़ा भाग बाडी तथा निचला भाग तंग भाग गर्दन या इस्थमस कहलाता है। इस्थमस नीचे योनि में जाकर खुलता है। इस क्षेत्र को औस कहते है। यह 1.5 से 2.5 सेमी बड़ा तथा ठोस मांसपेशियों से बना होता है।
गर्भावस्था के विकास गर्भाशय का आकार बढ़कर स्त्री की पसलियों तक पहुंच जाता है। साथ ही गर्भाशय की दीवारे पतली हो जाती है।


[संपादित करें] गर्भाशय की मांसपेशिया

महिलाओं के गर्भाशय की मांसपेशियों को प्रकृति ने एक अद्भुत क्षमता प्रदान की है। इसका वितरण दो प्रकार से है। पहले वितरन के अनुसार लम्बी मांसपेशियां और दूसरे को घुमावदार मांसपेशियां कहते है। गर्भावस्था में गर्भाशय का विस्तरण तथा बच्चे के जन्म के समय लम्बी मांसपेशियां प्रमुख रूप से कार्य करती है। घुमावदार मांसपेशियां बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय को संकुचित तथा रक्त के बहाव को रोकने में प्रमुख भूमिका निभाती है।

[संपादित करें] डिम्बग्रंथि

महिलाओं में गर्भाशय के दोनों ओर डिम्बग्रंथियां होती है। यह देखने में बादाम के आकार की लगभग 3.5 सेमी लम्बी और 2 सेमी चौड़ी होती है। इसके ऊपर ही डिम्बनलिकाओं कि तंत्रिकाएं होती है जो अंडों को अपनी ओर आकर्षित करती है। डिम्बग्रंथियों का रंग गुलाबी होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये हल्के सफेद रंग की हो जाती है। वृद्वावस्था में यह सिकुड़कर छोटी हो जाती है। इनका प्रमुख कार्य अंडे बनाना तथा उत्तेजित द्रव और हार्मोन्स बनाना होता है। डिम्बग्रंथियों के मुख्य हार्मोन्स ईस्ट्रोजन और प्रोजैस्ट्रोन है। माहवारी (मासिक-धर्म) स्थापीत होने के पूर्व इसका कोई काम नहीं होता है। परन्तु माहवारी के बाद इसमें प्रत्येक महीने डिम्ब बनते और छोड़े जाते है, जो शुक्राणुओं के साथ मिलकर गर्भधारण करते है।


[संपादित करें] डिम्बवाहिनियां

डिम्बवाहिनियां या गर्भनली गर्भाशय के ऊपरी भाग के दोनों ओर से निकलती है तथा दोनों तरफ कूल्हे की हडिड्यों तक जाती है। इनकी लम्बाई लगभग 10 सेमी और मोटाई लगभग आधा सेमी तक लम्बी होती है। दोनों ओर इसका आकार एक कीप की तरह का होता है। इस कीप का अंतिम छोर लम्बी-लम्बी अंगुलियों की तरफ होता है जिसको तंत्रिकाएं कहते है। इनका प्रमुख कार्य डिम्बग्रंथियों से निकले अंडे को घेरकर उसे वाहिनियों मे भेजना होता है। यह नलियां मांसपेशियों से बनी,तथा इनके अंदर की दीवार एक झिल्ली की बनी होती है जिसको म्यूकस झिल्ली कहते है।
डिम्बग्रंथियों से पकड़े अंडे, वाहिनियों के आगे के भाग में जाकर रूकते है। जहां ये पुरूष के शुक्राणु के साथ मिलकर एक नये जीवन का निर्माण होता है। स्त्री जनन अंग में इस संरचना को जाइगोट कहते है। जाइगोट के चारों तरफ एक खास परत उत्पन्न होती है।

[संपादित करें] शुक्राणुओं की यात्रा

गर्भाशय में शुक्राणुओं की यात्रा लगभग 23 सेमी लम्बी होती है। पुरूष के शुक्राणु लगभग चार सौ करोंड़ की मात्रा में स्त्री के गर्भाशय में प्रवेश करते है। पुरूषों के वीर्य में टेस्टीकुलर, प्रोस्टेटिक और सेमीनल वेसाइकिल नाम के तीन द्रव पाये जाते है।
पुरूषों के वीर्य में पाया जाने वाला सेमीनल वेसाइकिल द्रव ही पुरूष के शुक्राणुओं को जीवित रहने में सहायता करता है। पुरूष का वीर्य लगभग 15 मिनट में पानी में परिवर्तन हो जाता है। योनि का वातावरण अम्ल (एसिडिक) के समाने होता है। इस वातावरण में पुरूष के शुक्राणु जीवित नहीं रह पाते है और धीरे-धीरे नष्ट होने लगते है। पुरूष के कुछ शुक्राणु”सरवायकल कैनाल” में प्रवेश कर जाते है। सरवायकल कैनाल का वातावरण खारा (एल्कालिन) होता है। लगभग 8 से 10 प्रतिशत शुक्राणु इस वातावरण से होते हुए नलों को पार करके आखिरी किनारे पर आकर अंडे से मिलते है। इस प्रक्रिया में लगभग 1500 से 2000 शुक्राणु ही नलों के किनारे तक पहुंच पाते है।

[संपादित करें] शुक्राणु और अण्डाणु का मिलन

पुरूष के केवल एक शुक्राणु से ही जीवन की रचना हो सकती है। पुरूष को शिक्राणुओं के तीन भाग होते है। 1. सिर 2. गर्दन 3. दुम । पुरूषों के शुक्राणु दुम की सहारे सेमिनल वेसाईकल द्रव में तैरते हुए स्त्री के अंडाणु तक पहुंचते है। स्त्री के अण्डाणु से मिलने के बाद शुक्राणुओं का सिर स्त्री के अंडे की झिल्ली को फाड़कर उसमें प्रवेश कर जाता है तथा शुक्राणुओं का गर्दन और दुम बाहर रह जाता है। जब स्त्री-पुरूषों के अण्डाणु और शुक्राणु आपस में मिलते है तो जाइगोट का जन्म होता है। स्त्री और पुरूष के गुणों के कण आपस में मिलने के बाद बढ़ने लगता है। ये बढ़ते-बढ़ते 2 से 4, 8, 16, 32 कोश बनाते है। यह कोश इसी तरह 266 दिन तक बढ़ने के बाद एक बच्चे का आकार लिते है।


[संपादित करें] मासिक स्राव

स्त्री को जिस दिन से माहवारी आना प्रारम्भ होता है। उस दिन से वे इसकी गिनती का कार्य दूसरे लोगों पर छोड़ देते है। स्त्रियों में माहवारी पारिवारिक वातावरण,देश, मौसम आदि पर निर्भर करती है। हमारे देश में लड़कियों में माहवारी 10 वर्ष से 12 वर्ष की तुलना की उम्र में ही आ जाती है। तथा ठंडे देशों में यह माहवारी 13 या 14 साल की उम्र में आती है।
स्त्रियों मे अंडेदानी में 7-8 वर्ष की उम्र से ही उत्तेजित द्रव ‘हार्मोन्स’ निकलता प्रारम्भ हो जाते है। इस हार्मोन्स को इस्ट्रोजन हार्मोन्स कहते है। इस हार्मोन्स के निकलने के कारण स्त्रियों के स्तनों के आकार बढ़ने लगते है। तथा धीरे-धीरे इनका विकास होता रहता है। 18 वर्ष की आयु तक लड़कियों का शरीर पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है। इसके बाद स्त्रियों के शरीर में चर्बी का जमाव,शरीर का गठीला होना, बालों का विकसित होना, गर्भाशय में बच्चेदानी का पनपना और बढ़ना, जननांगों का विकास, नलियों का बढ़ना तथा प्रत्येक महीने के बाद माहवारी का आना प्रमुख पहचान बन जाती है। स्त्रियों में प्रारम्भ में माहवारी अनियमित रहती है। माहवारी के नियमित होने में कई महीने का समय लग सकता है। परन्तु माहवारी के नियमित रूप से होने के लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। धीरे-धीरे स्त्रियों में माहवारी स्वतः ही नियमित रूप से होने लगती है।

[संपादित करें] हडिड्यों की बनावट

महिलाओं के शरीर की हडिड्यों की रचना प्रकृति ने विशेष रूप से की है जिससे महिलाएं बच्चे का आसानीपूर्वक जन्म दे सकती है। स्त्रियों के कूल्हे की हड्डी पुरूष के कूल्हे की हड्डी की तुलना में अधिक स्थान रखती है। स्त्रियों की कूल्हे की हडिड्यों का आकार सेब की तरह का तथा पुरूषों के कूल्हे हडिड्यां दिल के आकार की होती है। कूल्हे की हडिड्यां मुख्य रूप से तीन प्रकार की हडिड्यों से बना होता है।पीछे की तरफ की हड्डी को सेक्रम, दोनों तरफ की हडिड्यों को ईलियास तथा सामने की ओर हड्डी को प्युबिस कहते है। सेक्रम के नीचे पूंछ के आकार की नुकीली हड्डी होती है जिसको कोसिक्स कहते है। कूल्हे की हडिड्यों का प्रमुख कार्य कूल्हे की मांसपेशियों,अंगों तथा बच्चे को जन्म के लिए पर्याप्त जगह देना होता है। जब स्त्रियां प्रसव के समय बच्चे को जन्म देती है। उस समय अधिक स्थान देने के लिए प्रत्येक जोड़ कुछ खुलता और ढीला होता है ताकि स्त्रियों बच्चे को आसानी से जन्म दे सके।
बच्चे के जन्म का रास्ता पीछे की ओर चौड़ा तथा आगे की ओर छोटा होता है। प्रसव होने के समय बच्चा कूल्हे की हडिड्यों में पहले सीधा नीचे की ओर आता है। फिर 90 अंश के कोण पर घूमने के बाद बच्चे का जन्म होता है।

[संपादित करें] बच्चे के जन्म का रास्ता

बच्चे के जन्म का रास्ता कूल्हे के हडिड्यों के ऊपर की सतह से नीचे की सतह तक होता है। यह मार्ग पीछे की ओर चौड़ा तथा आगे की तरफ छोटा होता है। बच्चे को पैदा होने के लिए कूल्हे की हडिड्यों में पहले सीधा नीचे की ओर उतरना पड़ता है। फिर 90 अंश के कोण पर घूमने के बाद बच्चे का जन्म होता है। महिलाओं में प्रकृति ने यह कोण प्रदान कर बच्चे के जन्म में आसानी की है नहीं तो बच्चा जन्म लेते ही सीधे नीचे की ओर गिर सकता है। बच्चे के जन्म के रास्ते की मांसपेशियां सामने की ओर अधिक मजबूत होती है। ये मांसपेशियां बच्चे के जन्म में सहायता होती है तथा पीछे और नीचे की मांसपेशियां सामने की मांसपेशियों के तुलना में कमजोर होती है।

[संपादित करें] कूल्हे के नीचे का भाग

कूल्हे के नीचे का हिस्सा मांसपेशियों और तंतुओं से मिलकर बना होता है। कूल्हे का निचला भाग सैक्रम हड्डी से प्यूबिक सिम्फाईसिस तक होता है। इसमें मल द्वारा,मूत्र द्वार व जनन द्वार जाकर खुलते है। यह पेट के सभी अंगों को नियंत्रण में रखता है तथा खांसी और छींक आने पर मांसपेशियां पेट के अंगों को नीचे की ओर आने से रोकती है। महिलाओं में कब्ज होने के समय मलद्वार को यहीं मांसपेशियां रोकती है। इन मांसपेशियों को लिवेटर एनाई कहते है। महिलाओं के योनि की मांसपेशियां बच्चे के समय एक विशेष प्रकार का रूप धारण कर लेती है। मांसपेशियों की तंतुएं एक-दूसरे से मिलकर एक सरल रास्ता बनाती है जिससे जन्म के समय बच्चे को अधिक स्थान सरलतापूर्वक मिल जाता है।
बच्चे के जन्म के समय बच्चे के सिर की हडिड्यों की विशेष भूमिका होती है। सिर की हडिड्यां के बीच में थोड़ा सा स्थान होता है। बच्चे के जन्म के समय सिर की हडिड्यां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाती है जिससे बच्चे का जन्म सरलता और आसानी से हो जाता है।बच्चे के जन्म का रास्ता लगभग 10 सेंटीमीटर चौड़ा होता है जबकि बच्चे का सिर मात्र 9.5 सेंटीमीटर का होता है। इस कारण प्रसव आसानी से हो जाता है। यदि बच्चे के सिर और बच्चे का आकार अधिक हो या कूल्हे का आकार छोटा हो तो ऐसी अवस्था में बच्चे के जन्म के लिए आपरेशन करना पड़ सकता है।


[संपादित करें] मूलाधार

महिलाओं के दोनों टांगों के बीच के त्रिकोण भाग को मूलाधार या पैरानियम भी कहते है। पैरानियम बाडी मलद्वार के आगे तथा जननद्वार के पीछे होती है। इसमें कूल्हे के निचले भग की सभी मांसपेशियां आपस में मिलती है। यह प्रत्येक व्यक्तियों में अलग-अलग होती है। किसी में यह कमजोर और किसी में यह अधिक शक्तिशाली होती है।इस प्रकार से पैरानियम जननद्वार के पीछे तथा नीचे की दीवार को सहारा दिये रहती है। संभोग क्रिया के समय पैरानियम जननद्वार को पीछे की ओर से साधे रहती है। बढ़ती आयु के साथ-साथ यह कमजोर हो जाती है। कूल्हे के चरों ओर की मांसपेशियों के यहां एकत्र होने के कारण यहां का रोग या पस चारों ओर फैल सकता है। बच्चे के जन्म के पहले जननद्वार को यहीं से काटकर चौड़ा बनाया जाता है। ताकि बच्चे के जन्म के समय अधिक से अधिक स्थान प्राप्त हो सके तथा बच्चे के जन्म के लिए अधिक चीड़-फाड़ न करना पड़े । प्रसव के बाद टांके इन्हीं मांसपेशियों में लगाये जाते है जिसको ऐपिजियोटोमी कहते है
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Monday, February 13, 2012

मीडिया मीमांसा: वेब पत्रकारिता : चुनौतियां और संभावनाएं

मीडिया मीमांसा: वेब पत्रकारिता : चुनौतियां और संभावनाएं

सेक्स करो और नंबर पाओ!



द्वारा: rajawat     लेखक : saroj rajawat
जबलपुर का किस्मत के बदले अस्मत मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि मुंबई के एक नामी कॉलेज में अच्छे नंबर के बदले सेक्स का ऑफर जैसा मामला सामने आया है। नंबर के बदले सेक्स की मांग करने वाला कोई और नहीं कॉलेज का प्रोफेसर है जो इस पद की मर्यादा को गिरा रहा है।
‘तुम्हें पता नहीं है कि सेक्स कैसे किया जाता है? एक लड़की जिसने मेरे साथ सेक्स किया..क्योंकि उसे मेरा पढ़ाने का स्टाइल पसंद था.. और मैंने उसे इंजिनियरिंग फस्र्ट ईयर में टॉपर बना दिया।’ यह मुंबई के गोरेगांव के एक जाने-माने कॉलेज के प्रोफेसर के अपनी स्टूडेंट को भेजा गया एसएमएस हैं। वह अपनी इस स्टूडेंट से नंबर के बदले सेक्स की डिमांड कर रहा था। जब युवती ने प्रोफेसर की पोल खोली, तो वह अब कह रहा है कि दरअसल वह लड़की का कैरक्टर जांच रहा था। पुलिस ने अभी तक प्रोफेसर पर मामला दर्ज नहीं किया है। गोरेगांव के एलएस पाटकर कॉलेज ऑफ आर्ट्स के 24 वर्षीय राहुल सरांगले कंप्यूटर हार्डवेयर पढ़ाता है। युवती ने बताया कि मैंने राहुल सर को एसएमएस किया कि मेरे काफी कम नंबर आए हैं। सर ने एसएमएस का जो जवाब दिया मैं सन्न रह गई। युवती ने बताया कि सर ने कई एसएमएस किए जिसमें उन्होंने पूछा कि क्या उसने कभी सेक्स किया है? एक एसएमएस में उसने मुङो दूसरे स्टूडेंट्स के साथ सोने के बारे में बताया, जिन्हें बाद उसे अच्छे नंबर मिले।
जबलपुर मेडिकल सेक्स स्कैंडलःफर्जी प्रोफेसरों ने किया पुनर्मूल्यांकन! जबलपुर मेडिकल कालेज सैक्स स्कैंडल के तार भोपाल से जुड़ रहे हैं। इस पूरे मामले को उजागर करने वाली छात्रा संधु आर्या सहित तीन छात्राओं की एमबीबीएस परीक्षा की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने राजधानी में कराया था।
यह काम पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के दो कथित प्रोफेसर डॉ.आरती कपूर और डॉ.मनोज शाक्य ने किया।
मामले की जांच कर रहे जबलपुर क्राइम ब्रांच के अधिकारी जब इन दोनों प्रोफेसरों के बयान लेने भोपाल आए तो पता चला कि इन नामों के कोई प्रोफेसर पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में है ही नहीं। कॉलेज के डीन डॉ. व्हीके पंड्या ने पुलिस को लिखित में यह जानकारी दी है।
इसी तरह एक अन्य छात्र की कॉपी का पुनर्मूल्यांकन भी पीपुल्स डेंटल कॉलेज की डॉ. मंजू श्रीवास्तव ने किया, जबकि इस नाम की प्रोफेसर भी कॉलेज में नहीं है। क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एके शुक्ला ने बताया कि पीपुल्स कॉलेज को नोटिस देकर तीनों प्रोफेसरों के बयान दर्ज कराने कहा था,लेकिन कॉलेज की तरफ से लिखित जवाब में बताया गया कि ये प्रोफेसर कॉलेज में कभी कार्यरत नहीं रहे। उन्होंने बताया कि अब रानी दुर्गावती विवि को नोटिस देकर तीनों छात्राओं की परीक्षा कॉपी मांगी गई है।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की
रानी दुर्गावती विवि में धारा 52 लगाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने विवि में तोडफ़ोड़ भी की। दूसरी तरफ पुलिस ने विवि के परीक्षा विभाग से जुड़े जयदीप पांडे व प्रदीप शुक्ला को बुधवार को न्यायालय में पेश किया। जहां से उन्हें 27 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
प्रदेश सरकार ने जानबूझकर एबीवीपी को बेलगाम कर रखा है। ये कार्यकर्ता सरकार के इशारे पर ही तोडफ़ोड़ करते हैं। ""
जेपी धनोपिया,प्रवक्ता प्रदेश कांग्रेस
जेल भेजे गए तीनों अधिकारियों को विवि ने निलंबित नहीं किया है। इस मांग को लेकर कार्यकर्ता कुलपति के पास गए थे। लेकिन उन्होंने कोई तोडफ़ोड़ नहीं की है।""


बीडी शर्मा,क्षेत्रीय संगठन मंत्री एबीवीपी(दैनिक भास्कर,भोपाल,19.5.11)
शासन ने राजभवन को सौंपी रिपोर्ट जबलपुर मेडिकल कॉलेज सेक्स स्कैंडल मामले की रिपोर्ट सरकार ने राजभवन को सौंप दी है। मुख्य सचिव और विभाग के प्रमुख सचिव ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति रामेश्वर ठाकुर को घटनाक्रम और शासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में बता दिया है। उधर, जबलपुर विवि के पूर्व कुलसचिव विजय शर्मा की गिरफ्तारी से निलंबन तय हो गया है। विवि को भी निर्देश दिए गए हैं कि जांच में दोषी ठहराए गए अधिकारी-कर्मचारियों पर सीधी कार्रवाई की जाए।
जानकारी के मुताबिक एडीएन वाजपेयी की अध्यक्षता वाली हाईपॉवर कमेटी का प्रतिवेदन मुख्यमंत्री को सौंपे जाने के बाद विचार-विमर्श कर रिपोर्ट राजभवन को सौंप दी गई। इसमें पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा है। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में जिन अफसर-कर्मचारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है उनमें से अधिकांश विवि सेवा के हैं। राजभवन के सीधे नियंत्रण में होने की वजह से इन पर कार्रवाई के लिए शासन सीधे विवि को निर्देश नहीं दे सकता है। इसलिए राजभवन को पूरा स्थिति साफ कर दी गई है। बताया जा रहा है कि राजभवन की ओर से भी इस मामले में सख्त रूख अख्तिायर किया गया है। विवि को निर्देश दिए गए हैं कि जांच में पहली नजर में दोषी ठहराए गए कर्मियों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाए।
उधर शासन स्तर से तीन मोर्चों पर काम चल रहा है। पुलिस महकमे को कार्रवाई की खुली छूट देने के साथ लोक निर्माण विभाग से कहा जा रहा है कि राजू खान का ठेकेदारी लाइसेंस निरस्त किया जाए। वहीं उच्च शिक्षा महकमा विवि के प्रशासनिक नियंत्रण की स्थिति की समीक्षा कर रहा है। यदि स्थितियां बेकाबू पाई जाती हैं तो "आपातकाल" धारा ५२ के इस्तेमाल पर विचार किया जाएगा। वैसे सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से सेक्स स्कैंडल का खुलासा हुआ और इसमें विवि कर्मियों के शामिल होने के प्रमाण मिले हैं वह जाहिर करते हैं कि प्रशासनिक नियंत्रण में खामियां तो थीं
(नई दुनिया,दिल्ली,19.5.2011 में जबलपुर की रिपोर्ट)।

Saturday, February 11, 2012

मैथिली सिनेमा का नया अवतार – “मुखिया जी”

माला लेकर रिश्वत देने अंचल कार्यालय पहुंचा पीड़ित
कुमारखंड के अंचलाधिकारी पर मुकदमा
दिल्ली के मंच पर मधेपुरा की गूंज




मिथिलांचल के इतिहास में एक अभूतपूर्व तथ्य बनने जा रहा हैमैथिली फ़ीचर फ़िल्ममुखिया जी. जी हाँ मिथिलावासियों, संसाधनों का रोना छोड़, सपनों का दामन थाम मिथिला के पुत्रों ने एक ऎसा महान सामाजिक, पारिवारिक, हास्य-व्यंग्य प्रधान फ़िल्म का निर्माण किया है जिसमें आप सिनेमा के सभी रंगों एवं स्वादों का आनंद चट्खारे के साथ तो ले ही सकते हैं, साथ ही घर कुछ ऎसी यादें एवं मैसेज लेकर जा सकते हैं जो आपके समाज एवं परिवार को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.           निर्माण मोशन पिक्चर्स प्रा० लि० जो मिथिलांचल में शुरू की गयी एक फ़िल्म निर्माण कंपनी है, और जिसके तहत यह फ़िल्म बनी है - के निदेशक हैंराजेश मिश्रा, जो स्नातक हैं व्यवसाय प्रबंधन में. रूपेश मिश्रा जो फ़िल्म के निर्माता हैं, उनका सपना भी मिथिलांचल में रोचक एवं सामाजिक फ़िल्म बनाना है. फ़िल्म के निर्देशक हैंफ़िल्म स्नातक बहुमुखी प्रतिभा के धनीविकास झा.         कसी हुई पटकथा, प्रभावी संवाद, उच्चतम कोटि की एडवांस प्राविधिक से बनी एक उच्चतम दर्जे की फ़िल्म हैमुखिया जी. फ़िल्म को केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड(censor board) ने सभी वर्ग एवं उम्र के लोगों के लिये उप्युक्त मानते हुए (U) यूनिवर्सल सार्टिफ़िकेट से नवाजा है साथ हीसामाजिक(social)” फ़िल्म का दर्जा प्रदान किया है.
      हास्य व्यंग्य के साथ समाज में व्याप्त कुरीति, भ्रष्टाचार, घूसखोरी, प्रौढ़ शिक्षा, साफ़सफ़ाई, स्वास्थ्य, प्रतियोगी भावना, ऎतिहासिक दृष्टिकोण, औद्योगीकरण, सामाजिक विकास एवं अन्य भावनात्मक संदेश इस फ़िल्म के जरिये प्रेषित किया गया है.
  पहली बार 350 कलाकारों का चयन बिहार एवं नेपाल के विभिन्न इलाकों में औडिशन के द्वारा विभिन्न चरणॊं के जरिये किया गया.

    फ़िल्म में मुखिया जी एक चारित्रिक पात्र है, जो राजनीति से कोई वास्ता ना होते हुए भी राजनीतिक वातावरण का निर्माण गाँव के अंदर ही कर नाम को काम का आयाम देते हुए पात्र को वास्तविकता प्रदान करते हैं. मुखिया जी फ़िल्म में इसके पात्र काम से अलग तो हैं ही इनके नाम भी अलग हैंजैसे गर्मी कक्का, फ़िरन, घंटी कक्का, चानन मिसर, चनरौटा मिसर, हवा बौस, सेनुर दाई, टिकली, अगत्ती नारायण, बाबा बिशुन बिलैर, इत्यादी प्रभावी चरित्र नाम के अनुरूप काम भी करते हैं और संवाद भी बोलते हैं. फ़िल्म के नायक सुभाष चन्द्र मिश्रा जहाँ अभिनय में भारत के प्रसिद्ध फ़िल्म स्कूल से प्रशिक्षित हैं. वहीं दिल्ली के रंगमंच पर एक से एक प्रस्तुति करते आये हैं. इससे पहले वे 40 से अधिक लघु फ़िल्मों में बेहतरीन अभिनय के लिये पहचान बनाये हुए हैं. ज्ञात है कि इनकीऔडिशन्स, “डबल-ट्रबल, “अभिवृति, “रूममेट्सजैसी फ़िल्में जयपुर अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव, एवं ग्लासगो फ़िल्म नाईट्स में प्रदर्शित एवं सराही गयी है. उन्होंने फ़िल्म मुखिया जी में भी सशक्त अभिनय का प्रदर्शन किया है. इसके अतिरिक्त मैथिली रंगमंच की दुनिया के प्रसिद्ध कलाकार रामनारायण ठाकुर, विष्णुकांत मिश्रा, परमेश झा, घनश्याम मिश्र, बी० एन० पटेल, ज्ञानी राउत, रोशनी झा, विक्की चौधरी, रामसेवक ठाकुर,
अमृता शर्मा, रंजु झा इत्यादि ने सशक्त अभिनय का प्रदर्शन किया है. इनमें से अधिकांश कलाकार भारत, बांग्लादेश, दोहा-कतार के मैथिली एवं नेपाली रंगमंच एवं फ़िल्मों में सक्रिय एवं प्रसिद्ध हैं.
कुछ रोचक तथ्य:-
1.   इस फ़िल्म का निर्माण राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में नामांकण को भी ध्यान में रखकर किया गया है.
2.         मैथिली फ़िल्म के 6 करोड़ दर्शकों के लिये चरणबद्ध तरीके से तैयार किये गये इस फ़िल्म का गुणस्तर, बाजार व्यवस्थापन एवं प्रचार-प्रसार, दर्शकों के अनुरूप प्राथमिकता देकर किया गया है.
3.         फ़ुल एच० डी० में शूट, फ़िल्म बेहतर दॄश्य प्रदान करती है.
4.         फ़िल्म की शूटिंग मिथिलांचल के वास्तविक मनोरम जगहों पर की गयी है जो पर्दे पर भी वास्तविक दॄश्य का अहसास कराती है.
5.         ग्रामीण परिदृश्य में शूटिंग के बावजूद बिहार के आधुनिक पहचान एवं मिथिलांचल के परिवर्तित परिवेश को बखूबी प्रदर्शित किया गया है.
6.         पहली बार किसी मैथिली फ़िल्म को को 5.1 सराउंड साउंड के साथ देखा जा सकता है.
7.         फ़िल्म में सात गाने हैं. संगीत निर्देशक हैं सुनील-प्रवेश. दिल्ली विश्वविद्यालय से शास्त्रीय संगीत विशारद, प्रवेश मल्लिक प्रसिद्ध जीमा अवार्ड चयनित हैं.
8.         गानों में प्रचलित परंपराओं एवं पदार्थों के व्यवसायीकरण से संबंधित पान की मह्त्ता एवं गुणगाण का गाना, मोबाईल पूजा का गाना एवं आरती, कृष्णाष्टमी का भजन, प्रेम प्रसंग का गाना, मुखिया जी के कारनामों का गाना, जीवन में प्रतियोगिता के महत्व का गाना एवं एक विशेष चटपटा गाना संलग्न है.
9.         गीतकार डौक्टर राजेन्द्र विमल नेपाल के प्रतिष्ठितजगदम्बा पुरस्कारसे सम्मानित हैं. अन्य उभरते गीतकार हैंअनिरूद्ध शोम, कन्हैया राय, कमलेश किशोर झा, दिगम्बर झादिनमनि, सुभाष चंद्र मिश्रा, प्रवेश मल्लिक.
10.       गायक दिल्ली के प्रसिद्धसानिध्यबैंड के विभिन्न देशों के बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं जिनमें प्रवेश मल्लिक, नेहा प्रियदर्शनी, ललित कामत, अमरेश मल्लिक, संतोष, मो० फ़हीम, अनिरूद्ध शोम, रमेश मल्लिक, निशांत मल्लिकनिशु, संजय झा हैं.
11.       फ़िल्म का संगीत(vcd cassate) मैथिली की नं० 1 म्यूजिक कंपनी -गंगा कैसेट्स- के द्वारा रिलीज किया गया है.
12.       फ़िल्म में ध्वनि प्रभाव और दृश्य प्रभाव का भरपूर इस्तेमाल किया गया है. ध्वनि संपादन किया हैदीप तुलाधर- ने जबकि हैरतअंगेज दृश्य प्रभाव  को अंजाम दिया है आशीष मिश्रा ने.
13.       पार्श्व संगीत में, पारम्परिक गीतों का अत्याधुनिक धुनों के साथ समागम एक अलग मंजर प्रदान करता है.
14.       फ़िल्म का संकलन किया है मुकुल मिश्र ने जो कि मल्टीमीडिया स्नातक हैं और दिल्ली के प्रसिद्ध प्रोडक्शन हाउसेस के साथ कार्य कर रहे हैं.
15.       फ़िल्म के कुछ प्रसिद्ध संवाद हैं
a.   चुनावक बाद लिहं चिन्नी
b.         बाप काटे घास बेटा कालीदास
c.         और किछ नै भेटल आंदोलने करू
d.         आंदोलन सब करै मं बड्ड दोलन कर परै छैमतलब बड्ड खर्च-वर्च,
e.         बेटा पोखरी कात बाप सिमरिया कात
f.          झैड़ झाड़ा फ़िरै आनंदे किछ अलग ऐछ, ओहो अनका खेत मं बैस आहा हा...... इत्यादि.
Some useful links on internet for film info:

IBN LIVE news link about the film- http://ibnlive.in.com/news/mukhiya-jee-first-digital-film-in-maithili/189858-8-74.html 
Mukhiya Ji-Maithili Film
(मधेपुरा टाइम्स ब्यूरो)