Monday, April 11, 2016

चैती छठ पूजा महत्व व्रत कथा इतिहास






प्रस्तुति-  शैलेन्द्र किशोर


चैती कार्तिक छठ पूजा महत्व व्रत कथा इतिहास का विस्तार पढ़े और जाने इस त्यौहार का महत्व |
छठ पूजा के दिन माता छठी की पूजा की जाती हैं जिन्हें वेदों के अनुसार उषा (छठी मैया) कहा जाता हैं जिन्हें शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव की पत्नी कहा गया हैं इसलिए इस दिन सूर्य देवता की पूजा का महत्व पुराणों में निकलता हैं | इस पूजा के जरिये भगवान सूर्य का देव को धन्यवाद दिया जाता हैं | सूर्य देव के कारण ही धरती पर जीवन संभव हो पाया हैं एवम सूर्य देव की अर्चना करने से मनुष्य रोग मुक्त होता हैं | इन्ही सब कारणों से प्रेरित होकर यह पूजा की जाती हैं |

छठ पूजा दो बार मनाई जाती हैं :

  1. चैती छठ पूजा
  2. कार्तिक छठ पूजा
Kartik Chaiti Chhath Puja Date Mahatva Katha Vrat Vidhi History In Hindi
  • Chaiti Kartik Chhath Puja Date

कब होती हैं छठ पूजा ?

छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाई जाती हैं | यह चार दिवसीय त्यौहार होता हैं जो कि चौथ से सप्तमी तक मनाया जाता हैं | इसे कार्तिक छठ पूजा कहा जाता हैं | इसके आलावा चैत्र माह में भी यह पर्व मनाया जाता हैं जिसे चैती छठ पूजा कहा जाता हैं |
इसे खासतौर पर उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड एवम नेपाल में मनाया जाता हैं | यह दिन उत्सव की तरह हर्ष के साथ मनाया जाता हैं |
  • Chhath Puja Mahatva

कार्तिक चैती छठ पूजा महत्व :

इसका महत्व उत्तर भारत में सबसे अधिक हैं कहा जाता हैं भगवान राम जब माता सीता से स्वयंबर करके घर लौटे थे और उनका राज्य अभिषेक किया गया था | उसके बाद उन्होंने पुरे विधान के साथ कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को पुरे परिवार के साथ पूजा की थी | तब ही से इस पूजा का महत्व हैं |
महाभारत काल में जब पांडव ने भी अपना सर्वस्व गँवा दिया था | तब द्रोपदी ने इस व्रत का पालन किया वर्षो तक इसे नियमित करने पर पांडवों को उनका सर्वस्व मिला था |इस प्रकार यह व्रत पारिवारिक खुशहाली के लिए किया जाता हैं |
  • Chhath Puja Katha Itihas

छठ पूजा कथा इतिहास :

 इसका बहुत अधिक महत्व होता हैं | इस दिन छठी माता की पूजा की जाती हैं और छठी माता बच्चो की रक्षा करती हैं | इसे संतान प्राप्ति की इच्छा से किया जाता हैं | इसके पीछे के पौराणिक कथा हैं :
बहुत समय पहले एक राजा रानी हुआ करते थे | उनकी कोई सन्तान नहीं थी | राजा इससे बहुत दुखी थे | महर्षि कश्यप उनके राज्य में आये | राजा ने उनकी सेवा की महर्षि ने आशीर्वाद दिया जिसके प्रभाव से रानी गर्भवती हो गई लेकिन उनकी संतान मृत पैदा हुई जिसके कारण राजा रानी अत्यंत दुखी थे जिस कारण दोनों ने आत्महत्या का निर्णय लिया | जैसे ही वे दोनों नदी में कूदने को हुए उन्हें छठी माता ने दर्शन दिये और कहा कि आप मेरी पूजा करे जिससे आपको अवश्य संतान प्राप्ति होगी | दोनों राजा रानी ने विधि के साथ छठी की पूजा की और उन्हें स्वस्थ संतान की प्राप्ति हुई |तब ही से कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को यह पूजा की जाती हैं |
  • Chhath Puja Vrat Vidhi

छठ पूजा व्रत विधि :

यह पर्व चार दिन का होता हैं | बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता हैं |इसे उत्तर भारत में सबसे बड़ा त्यौहार मानते हैं | इसमे गंगा स्नान का महत्व सबसे अधिक होता हैं |
यह व्रत स्त्री एवम पुरुष दोनों करते हैं | यह चार दिवसीय त्यौहार हैं जिसका माहत्यम कुछ इस प्रकार हैं :
1 नहाय खाय यह पहला दिन होता हैं | यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता हैं | इस दिन सूर्य उदय के पूर्व पवित्र नदियों का स्नान किया जाता हैं इसके बाद ही भोजन लिया जाता हैं जिसमे कद्दू खाने का महत्व पुराणों में निकलता हैं |
2 लोहंडा और खरना यह दूसरा दिन होता हैं जो कार्तिक शुक्ल की पंचमी कहलाती हैं | इस दिन, दिन भर निराहार रहते हैं | रात्रि में खिरनी खाई जाती हैं और प्रशाद के रूप में सभी को दी जाती हैं | इस दिन आस पड़ौसी एवम रिश्तेदारों को न्यौता दिया जाता हैं |
3 संध्या अर्घ्य यह तीसरा दिन होता हैं जिसे कार्तिक शुक्ल की षष्ठी कहते हैं | इस दिन संध्या में सूर्य पूजा कर ढलते सूर्य को जल चढ़ाया जाता हैं जिसके लिए किसी नदी अथवा तालाब के किनारे जाकर टोकरी एवम सुपड़े में  देने की सामग्री ली जाती हैं एवम समूह में भगवान सूर्य देव को अर्ध्य दिया जाता हैं | इस समय दान का भी महत्व होता हैं | इस दिन घरों में प्रसाद बनाया जाता हैं जिसमे लड्डू का अहम् स्थान होता हैं |
4 उषा अर्घ्य यह अंतिम चौथा दिन होता हैं | यह सप्तमी का दिन होता हैं | इस दिन उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता हैं एवम प्रसाद वितरित किया जाता हैं | पूरी विधि स्वच्छता के साथ पूरी की जाती हैं |
यह चार दिवसीय व्रत बहुत कठिन साधना से किया जाता हैं | इसे हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत कहा जाता हैं जो चार दिन तक किया जाता हैं | इसके कई नियम होते हैं :

छठ व्रत के नियम :

  1. इसे घर की महिलायें एवम पुरुष दोनों करते हैं |
  2. इसमें स्वच्छ एवम नए कपड़े पहने जाते हैं जिसमे सिलाई ना हो जैसे महिलायें साड़ी एवम पुरुष धोती पहन सकते हैं |
  3. इन चार दिनों में व्रत करने वाला धरती पर सोता हैं जिसके लिए कम्बल अथवा चटाई का प्रयोग कर सकता हैं |
  4. इन दिनों घर में प्याज लहसन एवम माँस का प्रयोग निषेध माना जाता हैं |
इस त्यौहार पर नदी एवम तालाब  के तट पर मैला लगता हैं | इसमें छठ पूजा के गीत गाये जाते हैं | जहाँ प्रसाद वितरित किया जाता हैं | इस त्यौहार में सूर्य देव को पूजा जाता हैं | इसके आलावा सूर्य पूजा का महत्व इतना अधिक किसी पूजा में नहीं मिलता | इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी हैं , कहते हैं छठी के समय पर धरती पर सूर्य की हानिकारक विकिरण आती हैं | इससे मनुष्य जाति को कोई प्रभाव न पड़े इसलिए नियमो में बाँधकर इस व्रत को संपन्न किया जाता हैं | इससे मनुष्य स्वस्थ रहता हैं |
कार्तिक छठ की तरह ही चैती अथवा चैत्री छठ मनाया जाता हैं | बस तिथी में अन्तर होता हैं | दोनों ही पूजा में सूर्य देव की पूजा की जाती हैं | Kartik Chaiti Chhath Puja Date Mahatva Katha Vrat Vidhi Itihas आपको यह कैसा लगा कमेंट जरुर करें |
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चैती छठ 13 अप्रैल को होगा समापन


 

लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 10 अप्रैल से, 13 को होगा समापन




प्रस्तुति-  शैलेन्द्र किशोर



लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 10 अप्रैल से, 13 को होगा समापन
फाइल फोटो
लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 10 अप्रैल रविवार से शुरू होकर 13 अप्रैल बुधवार तक मनाया जाएगा.
यह सत्य ही कहा जाता है कि भारत पर्वों, व्रतों, परम्पराओं और रीति-रिवाजों का देश है. भारत के अधिकाधिक पर्व अपने साथ किसी न किसी व्रत अथवा पूजा का संयोजन किए हुए हैं. ऐसे ही त्योहारों की कड़ी में पूर्वी भारत में सुप्रसिद्ध छठ पूजा का नाम भी प्रमुख रूप से आता है. लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 10 अप्रैल रविवार से शुरू होकर 13 अप्रैल बुधवार तक मनाया जाएगा. जिसकी तैयारी घरों में शुरू हो चुकी है.

इस पर्व के नाम पर विचार करें तो ज्ञात होता है कि इस पर्व के तिथिसूचक के अपभ्रंश रूप को ही इस पर्व की संज्ञा के रूप में अपनाया गया है. जैसे कि इस पर्व को मुख्य रूप से इसकी षष्ठी तिथि को होने वाली सूर्यदेव की पूजा व अर्घ्य के लिए जाना जाता है. इस प्रकार षष्ठी तिथि के विशेष महत्व के कारण उसका अपभ्रंश छठ के रूप में हमारे सामने आता है.

यूं तो इस पर्व में देवता के रूप में सूर्यदेव की ही प्रतिष्ठा है, पर तिथि के कारण ये छठ नाम से प्रसिद्ध हो गया है. छठ पर्व वर्ष में दो बार चैत्र और कार्तिक मास में मनाया जाता है. पर इनमें तुलनात्मक रूप से अधिक प्रसिद्धि कार्तिक मास के छठ की ही है.चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ कहते हैं, जिसे महिला व पुरुष दोनों अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए मनाते हैं.


चार दिवसीय छठ पर्व के पहले दिन 10 अप्रैल को नहाय खाय है. वहीं, दूसरे दिन 11 अप्रैल को खरना है. इस दिन व्रती दिनभर उपवास कर शाम में सूर्यास्त के बाद भगवान को रोटी-खीर सहित अन्य चीजें अर्पित करेंगी. 12 अप्रैल को व्रती द्वारा अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. वहीं, 13 अप्रैल को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन होगा.

यह पर्व सूर्य देव का है, जिसे लोग पूरी निष्ठा से मनाते हैं और पूजा के दौरान सभी नियमों का पालन करते हैं.
छठ पूजा का शुभ मुहूर्त
10 अप्रैल : नहाय खाय : सुबह 9.41 बजे के बाद
11 अप्रैल : खरना : शाम 5.40 से 7.58 बजे तक
12 अप्रैल : पहला अर्घ्य : शाम 5.40 बजे
13 अप्रैल : दूसरा अर्घ्य : सुबह 5.15 बजे

चैती छठ के बारे में बहुत कुछ











प्रस्तुति-  शैलेन्द्र किशोर

 

 

दैनिक जागरण की चैती छठ के लिए कहानी चित्र

नहाय-खाय के साथ चैती छठ शुरू, मंगलवार को सूर्य को ...

दैनिक जागरण-8 घंटे पहले
पटना। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ नहाय-खाय के साथ रविवार से प्रारंभ हो गया। सोमवार को खरना होगा। मंगलवार को व्रती भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य प्रदान करेंगे। बुधवार को दूसरा अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व समाप्त हो जाएगा।

फोटो - 21 ::: चैती छठ को ले पोखरा में भरा जा रहा पानी

दैनिक जागरण-3 घंटे पहले
हुसैनाबाद, पलामू : हुसैनाबाद शहर के पुराना छठ पोखरा में नगर पंचायत की ओर से चैती छठ को लेकर सभी तैयारी पूरी कर ली गई है। सोमवार को देवरी स्थित सोन नदी से पानी की विशेष आपूर्ति कर छठ पोखरा में पानी भरने का कार्य किया जा रहा है ...

चैती छठ में दूध वितरण करेगा अभाविप

दैनिक जागरण-2 घंटे पहले
चैती छठ पूजा के मौके पर इस वर्ष भी अरगाघाट में दूध वितरण करने का निर्णय लिया गया। इसे सफल बनाने के लिए एक टीम का गठन किया गया। 14 अप्रैल को शहर में दो स्थान पर बाबासाहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाने का निर्णय लिया गया।
दैनिक जागरण की चैती छठ के लिए कहानी चित्र

पटना हुआ पावन : वासंतिक नवरात्र कल से,10 को चैती छठ ...

दैनिक जागरण-06/04/2016
पंद्रह अप्रैल को श्रीरामनवमी मनाई जाएगी। वासंतिक नवरात्र के साथ ही हिंदुओं का नववर्ष यानी विक्रम संवंत 2073 प्रारंभ हो जाएगा। 10 अप्रैल को नहाय-खाय के साथ चैती छठ शुरू हो जाएगा। छठ का पहला अर्घ्य 12 अप्रैल को दिया जाएगा।

चैती छठ से पहले गंगा घाटों पर पुख्ता इंतजाम की मांग

दैनिक भास्कर-06/04/2016
पटना सिटी| क्षेत्रके अधिकांश गंगा घाट खतरनाक हो चुके हैं। पानी में उतरते ही गड‌्ढे मिलते हैं। घाट को जानेवाले रास्ते में भी समुचित सफाई और प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। विभिन्न संगठनों ने चैती छठ से पहले रास्तों की सफाई और ...

चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान 10 से 13 अप्रैल तक

प्रभात खबर-27/03/2016
लखीसराय : बिहार सहित पूरे देश में चैती छठ की पूजा 10 से 13 अप्रैल तक पूरे विधि-विधान से होगी. मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है. यह पर्व वर्ष में दो बार पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में मनाया जाता है.

लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 10 अप्रैल से

दैनिक भास्कर-30/03/2016
लोकआस्था का महापर्व चैती छठ 10 से 13 अप्रैल तक मनाया जाएगा, जिसकी तैयारी घरों में शुरू हो चुकी है। छठ पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है, पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक मास में। चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले ...
दैनिक जागरण की चैती छठ के लिए कहानी चित्र

चैती नवरात्र : मां चन्द्रघंटा व कुष्मांडा की हुई ...

दैनिक जागरण-10/04/2016
प्राय: छठ व्रती चैती छठ की उपासना स्थानीय नदी,तालाबों के घाटों पर जाकर करते हैं। इसकी तैयारी भी पूर्ण विधि-विधान के साथ करते है। इस बार 12 अप्रैल को चैती छठ का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए शहर का कोसी घाट, बालू पोखर समेत ...
दैनिक जागरण की चैती छठ के लिए कहानी चित्र

छठ व्रतियों के पग में नहीं पड़ेंगे छाले

दैनिक जागरण-12 मिनट पहले
लोग कहते हैं कि कार्तिक मास की छठ से कठिन चैती छठ होता है। इसके पीछे जो कारण माना जाता है। वो है चैत महीने की तपन। चैत महीने में लोक आस्था का पर्व करने वाले छठ व्रतियों के समक्ष जो बड़ी तपस्या मानी जाती है। वो है सूर्य का तेज ...

नवरात्र व छठ को लेकर फल बाजार गरम

दैनिक जागरण-2 घंटे पहले
नगर समेत जिले सभी प्रखंड मुख्यालय बाजारों व कस्बों में छठ को फलों की बिक्री की जा रही है लेकिन खरीदारी से पहले उसके दाम सुनकर लोगों को पसीने आ रहे ... छठ के कारण चढ़ा केले का दाम- चैती छठ के कारण केला काफी महंगा हो गया है।

Thursday, March 17, 2016

होली ले होली ../ .. भीम सिंह मीणा










भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भले ही विविध प्रकार से होली का उत्सव मनाया जाता हो अलग-अलग रस्मों से मनाया जाता हो परंतु सबका उद्देश्य एवं भावना एक ही है-भक्ति, सच्चाई के प्रति आस्था और मनोरंजन।
होली के दिन सुबह में पूजा समारोह की रस्म होती है। होली की प्रात: सुबह लोग उत्साह से रंगो से खेलते हैं। लोग पानी और रंगो में सारोबार होकर होली का त्यौहार मनाते हैं। कुछ लोग होली के अवसर पर गुब्बारों और स्प्रे का प्रयोग करके होली मनाते हैं। होली के अवसर पर लोग स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं जिसमे से गुजिया और पुआ एक प्रमुख व्यंजन हैं। लोग नाचते गाते हैं। कई स्थानों पर जुलूस निकले देखे जा सकते हैं होली के अवसर पर मथुरा के वृंदावन में अद्वितीय मटका समारोह का आयोजन किया जाता हैं। इस समारोह में पहले ब्रज क्षेत्र के विशेष महत्व था। समारोह में दूध और मक्खन से भरा एक मिट्टी का बर्तन उचाई पर बांधा जाता हैं और समाज के लड़के मटके तक पहुचने के लिए जी तोड़ कोशिश करते हैं जिनमे से कुछ तो असफल हो जाते हैं। इस आयोजन को जीतने वाले को इनाम से सम्मानित किया जाता हैं।
रंगों का त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते है। दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं, और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयां खिलाते हैं। इस दिन कई तरह के पकवान बनते हैं जिसमें गुझिया, मालपुआ, दहीबड़े खास तौर पर अवश्य बनते हैं। त्यौहार के शुरू होने के पहले दिन लोग विभिन्न अनुष्ठानों की तैयारियां शुरू कर देते हैं। दो सड़कों चौराहे पर लकडि़यां रखना, स्वादिष्ट व्यंजनो की तैयारी शुरू करना होली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। होली की पूर्व संध्या पर होलिका दहन की रस्म का पालन किया जाता है।
होलिका दहन-
होली की पूर्व संध्या पर होलिका दहन करते हैं। होलिका की अग्नि इकट्ठी की जाती है। होली से काफी दिन पहले से ही यह सब तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पर्व का पहला दिन होलिका दहन का दिन कहलाता है। इस दिन चौराहों पर व जहां कहीं अग्नि के लिए लकड़ी एकत्र की गई होती है, वहां होली जलाई जाती है। इसमें लकडि़याँ और उपले प्रमुख रूप से होते हैं। कई स्थलों पर होलिका में भरभोलिए जलाने की भी परंपरा है। भरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं जिनके बीच में छेद होता है। इस छेद में मूँज की रस्सी डाल कर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं। होली में आग लगाने से पहले इस माला को भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर फेंक दिया जाता है। रात को होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है। इसका यह आशय है कि होली के साथ भाइयों पर लगी बुरी नजर भी जल जाए। लकडि़यों व उपलों से बनी इस होली का दोपहर से ही विधिवत पूजन आरंभ हो जाता है। घरों में बने पकवानों का यहाँ भोग लगाया जाता है। दिन ढलने पर ज्योतिषियों द्वारा निकाले मुहूर्त पर होली का दहन किया जाता है। इस आग में नई फसल की गेहूँ की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है। होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है। यह बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का सूचक है। गाँवों में लोग देर रात तक होली के गीत गाते हैं तथा नाचते हैं।
इसके अतिरिक्त अनेक देश ऐसे हैं जहां या तो होली से मिलता-जुलता कोई पर्व मनाया जाता है या किसी अन्य अवसर पर रंग या सादे पानी से खेलने की परंपरा है।
विदेशों में होली-
सामूहिक होली धूलिवंदन
भारत ही नहीं विश्व के अन्य अनेक देशों में भी होली अथवा होली से मिलते-जुलते त्योहार मनाने की परंपराएं हैं। नेपाल में होली के अवसर पर काठमांडू में एक सप्ताह के लिए प्राचीन दरबार और नारायणहिटी दरबार में बांस का स्तम्भ गाड़ कर आधिकारिक रूप से होली के आगमन की सूचना दी जाती है। पाकिस्तान, बंगलादेश, श्री लंका और मरिशस में भारतीय परंपरा के अनुरूप ही होली मनाई जाती है। प्रवासी भारतीय जहां-जहां जाकर बसे हैं वहां- वहां होली की परंपरा पाई जाती है। कैरिबियाई देशों में बड़े धूमधाम और मौज-मस्ती के साथ होली का त्यौहार मनाया जाता है। यहां होली को फगुआ के नाम से जाना जाता है और लोग परंपरागत तरीके से इसे मनाते हैं। 19वीं सदी के आखिरी और 20वीं सदी के शुरू में भारतीय लोग मजदूरी करने के लिए कैरिबियाई देश गए थे। इस दरम्यान गुआना और सुरिनाम तथा ट्रिनीडाड जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय जा बसे। भारतीय लोगों के साथ उनके त्यौहार और रस्मों-रिवाज भी इन देशों में पहुंचे। धीरे-धीरे फगुआ गुआना और सूरीनाम के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में एक हो गया। गुआना में होली के दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है। इस देश की कुल आबादी में हिंदुओं का प्रतिशत लगभग 33 हैं। यहाँ की लड़कियों और लड़कों को रंगीन पाउडर और पानी के साथ खेलते हुए बड़े आराम से देखा जा सकता है। गुआना के गाँवों में इस अवसर पर विशेष तरह के समारोहों का आयोजन किया जाता है। कैरिबियाई देशों में कई सारे हिंदू संगठन और सांस्कृतिक संगठन सक्रिय हैं। ये संगठन नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक उत्सवों के जरिये फगुआ मनाते हैं। ट्रिनीडाड एंड टोबैगो में होली को काफी कुछ उसी तरह से मनाया जाता है, जैसे भारत में मनाया जाता है। हाल के वषरें में इसकी रौनक में वृद्धि हुई है। विदेशी विश्वविद्यालयों में भी होली का आयोजन होता रहा है।
भारत की विभिन्न होलियां-
बरसाने की लठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है बरसाने। की लठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। इस दिन नंद गाँव के ग्वाल बाल होली खेलने के लिए राधा रानी के गाँव बरसाने जाते हैं और जम कर बरसती लाठियों के साए में होली खेली जाती है। इस होली को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग बरसाना आते हैं। मथुरा से 54 किलोमीटर दूर कोसी शेरगढ़ मार्ग पर फालैन गाँव है जहाँ एक अनूठी होली होती है। गाँव का एक पंडा मात्र एक अंगोछा शरीर पर धारण करके 20-25 फुट घेरे वाली विशाल होली की धधकती आग में से निकल कर अथवा उसे फलांग कर दर्शकों में रोमांच पैदा करते हुए प्रह्लाद की याद को ताज़ा कर देता है। मालवा में होली के दिन लोग एक दूसरे पर अंगारे फेंकते हैं। उनका विश्वास है कि इससे होलिका नामक राक्षसी का अंत हो जाता है। राजस्थान में होली के अवसर पर तमाशे की परंपरा है। इसमें किसी नुक्कड़ नाटक की शैली में मंच सच्जा के साथ कलाकार आते हैं और अपने पारंपरिक हुनर का नृत्य और अभिनय से परिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं। तमाशा की विषय वस्तु पौराणिक कहानियों और चरित्रों के इर्दगिर्द घूमती हुई इन चरित्रों के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर भी व्यंग्य करती है। मध्य प्रदेश के भील होली को भगौरिया कहते हैं। भील युवकों के लिए होली अपने लिए प्रेमिका को चुनकर भगा ले जाने का त्योहार है। होली से पूर्व हाट के अवसर पर हाथों में गुलाल लिए भील युवक मांदल की थाप पर सामूहिक नृत्य करते हैं। नृत्य करते-करते जब युवक किसी युवती के मुँह पर गुलाल लगाता है और वह भी बदले में गुलाल लगा देती है तो मान लिया जाता है कि दोनों विवाह सूत्र में बंधने के लिए सहमत हैं। युवती द्वारा प्रत्युत्तर न देने पर युवक दूसरी लड़की की तलाश में जुट जाता है।
बिहार की कुर्ता फाड़ होली-
होली खेलते समय सामान्य रूप से पुराने कपड़े पहने जाते हैं। मिथिला प्रदेश में होली खेलते समय लड़कों के झुंड में एक दूसरे का कुर्ता फाड़ देने की परंपरा है। होली का समापन रंग पंचमी के दिन मालवा और गोवा की शिमगो के साथ होता है जिस दिन धूम-धाम से वसंत पंचमी से शुरू होने वाला वसंतोत्सव पूरा हो जाता है।
होली से मिलते जुलते विदेशी त्योहार-
तेरह अप्रैल को ही थाईलैंड में नव वर्ष सौंगक्रान प्रारंभ होता है इसमें वृद्धजनों के हाथों इत्र मिश्रित जल डलवाकर आशीर्वाद लिया जाता है। लाओस में यह पर्व नववर्ष की खुशी के रूप में मनाया जाता है। लोग एक दूसरे पर पानी डालते हैं। म्यांमर में इसे जल पर्व के नाम से जाना जाता है। जर्मनी में ईस्टर के दिन घास का पुतला बनाकर जलाया जाता है। लोग एक दूसरे पर रंग डालते हैं। हंगरी का ईस्टर होली के अनुरूप ही है। अफ्रीका में ओमेना वोंगा मनाया जाता है। इस अन्यायी राजा को लोगों ने जिंदा जला डाला था। अब उसका पुतला जलाकर नाच गाने से अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। अफ्रीका के कुछ देशों में सोलह मार्च को सूर्य का जन्म दिन मनाया जाता है। लोगों का विश्वास है कि सूर्य को रंग-बिरंगे रंग दिखाने से उसकी सतरंगी किरणों की आयु बढ़ती है। पोलैंड में आर्सिना पर लोग एक दूसरे पर रंग और गुलाल मलते हैं। यह रंग फूलों से निर्मित होने के कारण काफी सुगंधित होता है। लोग परस्पर गले मिलते हैं। अमरीका में मेडफो नामक पर्व मनाने के लिए लोग नदी के किनारे एकत्र होते हैं और गोबर तथा कीचड़ से बने गोलों से एक दूसरे पर आक्रमण करते हैं। 31 अक्तूबर को अमरीका में सूर्य पूजा की जाती है। इसे होबो कहते हैं। इसे होली की तरह मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग फूहड वेशभूषा धारण करते हैं। चेक और स्लोवाक क्षेत्र में बोलिया कोनेन्से त्योहार पर युवा लड़के-लड़कियाँ एक दूसरे पर पानी एवं इत्र डालते हैं। हालैंड का कार्निवल होली सी मस्ती का पर्व है। बेल्जियम की होली भारत सरीखी होती है और लोग इसे मूर्ख दिवस के रूप में मनाते हैं। यहाँ पुराने जूतों की होली जलाई जाती है। इटली में रेडिका त्योहार फरवरी के महीने में एक सप्ताह तक हर्षोल्लास से मनाया जाता है। लकडि़यों के ढेर चौराहों पर जलाए जाते हैं। लोग अग्नि की परिक्रमा करके आतिशबाजी करते हैं। एक दूसरे को गुलाल भी लगाते हैं। रोम में इसे सेंटरनेविया कहते हैं तो यूनान में मेपोल। ग्रीस का लव ऐपल होली भी प्रसिद्ध है। स्पेन में भी लाखों टन टमाटर एक दूसरे को मार कर होली खेली जाती है। जापान में 16 अगस्त रात्रि को टेमोंजी ओकुरिबी नामक पर्व पर कई स्थानों पर तेज आग जला कर यह त्योहार मनाया जाता है। चीन में होली की शैली का त्योहार वेजे कहलाता है। यह पंद्रह दिन तक मनाया जाता है। लोग आग से खेलते हैं और अच्छे परिधानों में सज-धज कर परस्पर गले मिलते हैं। साईबेरिया में घास फूस और लकड़ी से होलिका दहन जैसी परिपाटी देखने में आती है। नार्वे और स्वीडन में सेंट जान का पवित्र दिन होली की तरह से मनाया जाता है। शाम को किसी पहाड़ी पर होलिका दहन की भांति लकड़ी जलाई जाती है और लोग आग के चारों ओर नाचते गाते।
भारत में होली पर लोकगीत गाए जाते है। उत्तर भारत का एक लोकप्रिय लोकगीत है। इसमें होली खेलने का वर्णन होता है। यह हिंदी के अतिरिक्त राजस्थानी, पहाड़ी, बिहारी, बंगाली आदि अनेक प्रदेशों की अनेक बोलियों में गाया जाता है। इसमें देवी-देवताओं के होली खेलने से अलग- अलग शहरों में लोगों के होली खेलने का वर्णन होता है। देवी देवताओं में राधा-कृष्ण, राम-सीता और शिव के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं। इसके अतिरिक्त होली की विभिन्न रस्मों की वर्णन भी होली में मिलता है। इस लोकगीत को शास्त्रीय या उप-शास्त्रीय संगीत में ध्रुपद, धमार, ठुमरी या चैती के रूप में भी गाया जाता है।
कंजर समाज की अलग हैं रस्में और रिवाज-
शंकरपुरा कंजर बस्ती के बाशिंदे पूर्वजों की खुशी के लिए त्यौहार पर अलग-अलग पकवान परोसते हैं। बस्तीवासी होली, दीपावली, राखी, दशहरे के दिन गोत्रवार तय दिन मृतक की मूर्ति के प्रतीक पत्थर के स्थान पर जाते हैं। होली पर प्रतीक पत्थर के ऊपर गुलाल व पुष्प बिखेर कर गुड़ या मिठाई रखते हैं।
राखी पर पके चावलों में घी शक्कर मिलाकर चढ़ाते हैं। राखी बांधकर सुख समृद्वि की कामना करते हैं। दीपावली के दिन गेहूं के आटे का बड़ा रोठ अच्छी तरह सेक कर घी गुड या शक्कर मिलाकर उसका चूरमा बनाकर भोग लगाते हैं। दशहरे के दिन बस्तीवासी अपनी पंसद के पकवान बनाकर चढ़ाते हैं। मृतक की मूर्ति के सामने रखे भोग सामग्री को गोत्र के महिला-पुरुष प्रसाद मानकर आपस में बांट लेते हैं। बस्तीवासियों का कहना है कि यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
पांच गौत्र पांच स्थान-
बस्ती में गुदड़ावत, तेली झांझावत, कमवित, धनावत पांच गोत्र के परिवार है। इनके अलग-अलग स्थान तय है। जहां मृतक की मूर्ति का प्रतीक पत्थर रोपा जाता है। मृतक की मूर्ति के नीचे गड्ढ़े में मृतक की अस्थियां मिट्टी में दबाकर रखते हैं। पत्थर को प्रतिमा मानकर रोप देते हैं। संपन्न लोग छतरी अथवा चबूतरा बना देते हैं। बस्तीवासियों का मानना है कि ऐसा करने से पूर्वजो की आत्मा धरती पर आ जाती है। उनकी खुशी के लिए सज-धज कर गाजे बाजे से निर्धारित स्थान पर जाकर याद करते है।
होली मस्ती का पर्व है अलग-अलग प्रांत के लोग अलग-अलग रस्मों-रिवाज पर ध्येय सबका प्यार ही बांटना है।

Friday, February 19, 2016

मोरारी बापू 786 कथा उत्सव और मुस्लिम देश



 

 

786वीं कथा' मु्स्लिम देश में करना चाहते हैं मोरारी बापू

रविवार, 7 फ़रवरी 2016
नई दिल्ली। देश के प्रसिद्ध कथाकार मोरारी बापू को किसी पहचान की जरूरत नहीं है...। अपनी 'मानस रामकथा' के जरिए वे पूरी दुनिया में विख्यात हैं। नई दिल्ली में मोरारी बापू की महात्मा गांधी की समाधि 'राजघाट' पर 9 दिवसीय रामकथा का रविवार की दोपहर में समापन हुआ। कथा के दौरान उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि यदि मेरी '786वीं रामकथा' किसी मुस्लिम राष्ट्र में होगी तो मुझे ज्यादा खुशी होगी। मेरा मन तो कई सालों से में कथा करने का है। यदि मुझे पाकिस्तान में कथा करने का मौका मिला तो मैं नंगे पैर जाऊंगा, यह मेरा वादा है। 
आमतौर पर 'राजघाट' पर कोई सार्वजनिक आयोजन की अनुमति नहीं है लेकिन मोरारी बापू की कथा के आयोजनकर्ताओं को अनुमति मिल गई। बापू ने 30 जनवरी से 7 फरवरी तक आयोजित इस कथा का नाम दिया 'मानस कथा'। अहिंसा के पुजारी गांधीजी के समाधि स्थल पर रामकथा का पारायण करके खुद बापू भी अभिभूत हो गए। 9 दिवसीय कथा के दौरान कई प्रसंगों पर भावुक होकर उनकी आंखें भी छलछला उठीं।
कथा के दौरान हुए इंडो-पाक मुशायरे का जिक्र छेड़ते हुए मोरारी बापू ने कहा कि दोनों मुल्कों के लोगों को करीब लाने के लिए बहुत हो गई सियासत और अन्य चीजें लेकिन दिलों में अभी भी दूरियां बाकी हैं। यदि सरकार की अनुमति मिलती है और पाकिस्तान के लोग रामकथा करना चाहते हैं तो मैं नंगे पैर वहां जाकर मानस रामकथा के जरिए अपने राम को वहां ले जाना चाहता हूं।
मोरारी बापू ने कहा कि मेरी अब तक कितनी कथा हो चुकी है, इसका मैं हिसाब नहीं रखता... फिर उन्होंने अपने साथियों से संख्या पूछी... उन्हें बताया गया कि 780 से ज्यादा हो चुकी हैं कथा, तब बापू ने कहा कि 786 का अंक मुस्लिमों के लिए बहुत पवित्र माना जाता है और यदि मेरी 786वीं मानस रामकथा किसी में होती है तो मुझे ज्यादा खुशी होगी। 
बापू ने यह भी बताया कि उनके गृह नगर में एक बार मुस्लिमों ने एक तकरीर रखी और मुझे भी न्योता दिया। वहां पर एक मौलवी थे जिन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आप हमारे मुस्लिम भाइयों को राम मंदिर में जाकर नमाज पढ़ने की अनुमति देंगे? 
रात का वक्त था और 11 बजे से ज्यादा का समय हो गया था। मैंने कहा यूं तो हमारे मंदिरों में शयन आरती के बाद भगवान को सुलाने की परंपरा है और ऐसा मंदिर वाले कर भी चुके होंगे लेकिन यदि आप कहते हैं तो मेरी एक आवाज पर मंदिर दोबारा खोल दिए जाएंगे और वहां नमाज अदा करने की अनुमति भी मिल जाएगी। आपको इबादत करने में कोई बाधा नहीं आएगी लेकिन मेरी भी एक बात माननी होगी कि कल सुबह मेरे रामभक्त ढोल-धमाकों के साथ आपकी मस्जिद में आएंगे तो आप उन्हें भी वहां पूजा करने देंगे। 
मेरी बात सुनकर मौलवी सोच में पड़ गए और बोले मैं सोचकर इसका जवाब दूंगा। महीनों हो गए लेकिन मौलवी साहब का जवाब आज तक नहीं आया है। बापू ने इस तकरीर में यह भी कहा कि मेरा राम तो मुस्लिमों को भी स्वीकार कर लेगा लेकिन पहले यह सोच लीजिए कि क्या आपकी मस्जिद मेरे राम को स्वीकार करेगी? (वेबदुनिया न्यूज)

Thursday, January 7, 2016

Sant Mat Radhasoami Books





प्रस्तुति- उषा रानी सिन्हा/ राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा






RADHASOAMI BOOKS

Online E Books Relating to the Radhasoami Faith

Web Page Dedicated to Swami Ji Maharaj, the Great Saint of Agra: The Teachings of Soami Ji: Sar Bachan Radhasoami Poetry, Part’s One and Two (Sar Bachan Radhasoami Nazm yaani Chhand bandh), Sar Bachan Radhasoami Prose (Sar Bachan Radhasoami Bartik), Soami Ji Maharaj’s Letters to Huzur Maharaj, Swami Ji’s Commentary on the Jap Ji of Guru Nanak, and, Last Words of Soami Ji Maharaj: http://www.spiritualawakeningradio.com/radhasoami.html
Radhasoami E Library: Spiritual Classics of Agra: Sar Bachan Radhasoami Poetry and Prose, Prem Patra Volumes, Prem Bani Volumes, Radhasoami Mat Prakash — Teachings of Soami Ji Maharaj, Huzur Maharaj, Maharaj Saheb, Buaji Saheba, Babuji Maharaj, and Others — Soami Bagh — S. D. Maheshwari: http://RadhaSoamiFaith.org/EnglishBooks
Radhasoami E Library: Spiritual Classics of Agra: Sar Bachan Radhasoami Poetry and Prose, Prem Patra Volumes, Prem Bani Volumes, Radhasoami Mat Prakash — Teachings of Soami Ji Maharaj, Huzur Maharaj, Maharaj Saheb, Buaji Saheba, Babuji Maharaj, and Others — RS Bhakti @ Scribd: http://www.scribd.com/Radha_Soami/documents
A Spiritual Seekers Guide: Dayalpuri Radhasoami Prem Prabhakar Magazine, English Section, and Satsang Discourses: https://www.scribd.com/doc/265128013/A-Spiritual-Seekers-Guide-Dayalpuri-Radhasoami-Prem-Prabhakar-Magazine-English-Section-and-Satsang-Discourses
THE GLOSSARY of the Radhasoami Faith — When studying the Radhasoami texts you’re encounter many unfamiliar mystical terms. The Glossary is our friend. Consulting with this Glossary will be extremely helpful — PDF File: http://www.scribd.com/doc/118302722/Glossary-of-the-Radhasoami-Faith
The Hidayatnama (Esoteric Instructions) of Swami Ji Maharaj: HTML Version at the Radhasoami Library: http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/Sar_Bachan_Radhasoami_Poetry_Part_1/Sar_Bachan_Radhasoami_Poetry_Part_1.html#_Toc281806891
Sar Bachan Radhasoami Poetry, Volume One, by Swami Ji Maharaj: E Book and Audio/Talking Book at Archive.org — (Note: The audio book option might work best using Firefox or IE): http://www.archive.org/stream/SarBachan/Sar_Bachan_Poetry_Part-1#page/n25/mode/1up
Sar Bachan Radhasoami Poetry, Volume One, by Swami Ji Maharaj: HTML Version at the Radhasoami Library: http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/Sar_Bachan_Radhasoami_Poetry_Part_1/Sar_Bachan_Radhasoami_Poetry_Part_1.html
Sar Bachan Radhasoami Poetry, Volume One, by Swami Ji Maharaj: at Scribd: http://www.scribd.com/doc/118290685/Sar-Bachan-Radhasoami-Poetry-Volume-One
Sar Bachan Radhasoami Poetry, Volume Two, by Swami Ji Maharaj: at Scribd: http://www.scribd.com/doc/110546432/Sar-Bachan-Radhasoami-Poetry-Volume-Two
Sar Bachan Radhasoami Prose (Prose Part One is an abstract of the teachings of Sant Radhasoami Sahib/Swami Ji Maharaj by Huzur Maharaj; Prose Part Two is a collection of sayings of Swami Ji Maharaj delivered in satsang): HTML Version at the Radhasoami Library: http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/SarBachanRadhasoamiProse/SarBachanRadhasoamiProse.html
Sar Bachan Radhasoami Prose (Prose Part One is an abstract of the teachings of Sant Radhasoami Sahib/Swami Ji Maharaj by Huzur Maharaj; Prose Part Two is a collection of sayings of Swami Ji Maharaj delivered in satsang): at Scribd: http://www.scribd.com/doc/118291426/Sar-Bachan-Radhasoami-Prose-Books-One-and-Two
Book Review of Sar Bachan Radhasoami Poetry and Prose Volumes — the M.G. Gupta Translation: http://www.spiritualawakeningradio.com/brsarbachan.html
Elucidation of the Jap Ji — Commentary on Guru Nanak’s Morning Prayer or Jap Ji by Soami Ji Maharaj of the Radhasoami Faith — at Scribd.com: http://www.scribd.com/doc/99733663/Elucidation-of-the-Jap-Ji-by-Swamiji-Maharaj
Artiyan  — Selections from Sar Bachan Radhasoami Poetry and Prem Bani — Hymns sung during Bhandara Arti Satsangs and other special occasions: http://www.scribd.com/doc/118336723/Artiyan
Niyamawali — Shabds (Hymns) from the Sar Bachan Radhasoami Poetry and Prem Bani that are to be recited daily or frequently: http://www.scribd.com/doc/118337334/Niyamawali
Prem Bani Radhasoami, Volume One — Mystical Hymns of Huzur Maharaj (Rai Saligram): http://www.scribd.com/doc/118343050/Prem-Bani-Radhasoami-Volume-One
Prem Bani Radhasoami, Volume Two — Mystical Hymns of Huzur Maharaj (Rai Saligram): http://www.scribd.com/doc/120765619/Prem-Bani-Radhasoami-Volume-Two
Prem Bani Radhasoami, Volume Three — Mystical Hymns of Huzur Maharaj (Rai Saligram): http://www.scribd.com/doc/120766048/Prem-Bani-Radhasoami-Volume-Three
Prem Bani Radhasoami, Volume Four — Mystical Hymns of Huzur Maharaj (Rai Saligram): http://www.scribd.com/doc/120766383/Prem-Bani-Radhasoami-Volume-Four
Radhasoami Mat Sandesh, The Lord of the Soul’s Message to Humanity, by Huzur Maharaj (Rai Saligram): http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/Prem_Patra_Radhasoami_Part_2/Prem_Patra_Radhasoami_Part_2.html#_Toc294504640
Prem Updesh Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram): http://www.scribd.com/doc/118338267/Prem-Updesh-Radhasoami
Radhasoami Mat Prakash, by Huzur Maharaj (the very first Sant Mat book that appeared in the English language near the beginning of the 20th Century): E Book and Audio/Talking Book: http://www.archive.org/stream/radhasoamimatpr00unkngoog#page/n6/mode/2up
Radhasoami Mat Prakash, by Huzur Maharaj (the very first Sant Mat book that appeared in the English language near the beginning of the 20th Century): HTML Version at the Radhasoami Library: http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/RSMatPrakash/RSMatPrakash.html
Radhasoami Mat Prakash, by Huzur Maharaj (the very first Sant Mat book that appeared in the English language near the beginning of the 20th Century): PDF File: http://spiritualawakeningradio.com/radhasoamimatprakash.pdf
Radhasoami Mat Prakash, by Huzur Maharaj (the very first Sant Mat book that appeared in the English language near the beginning of the 20th Century): HTML Version at RadhasoamiSatsang.org: http://www.angelfire.com/linux/radhasoami/rsmatpra/rsmatprakash_1.htm
Radhasoami Mat Prakash, by Huzur Maharaj (the very first Sant Mat book that appeared in the English language near the beginning of the 20th Century): at Scribd: http://www.scribd.com/doc/120766666/Radhasoami-Mat-Prakash
Prem Patra Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram), Volume One: Radhasoami Dayal ki Daya Radhasoami Sahai (“Grant Merciful Radhasoami Thy Grace and Protection”): HTML Version at the Radhasoami Library: http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/Prem_Patra_Radhasoami_Part_1/Prem_Patra_Radhasoami_Part_1.html
Prem Patra Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram), Volume One: Radhasoami Dayal ki Daya Radhasoami Sahai (“Grant Merciful Radhasoami Thy Grace and Protection”): at Scribd: http://www.scribd.com/doc/120762480/Prem-Patra-Radhasoami-Volume-One
Prem Patra Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram), Volume Two: HTML Version at the Radhasoami Library: http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/Prem_Patra_Radhasoami_Part_2/Prem_Patra_Radhasoami_Part_2.html
Prem Patra Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram), Volume Two: at Scribd: http://www.scribd.com/doc/120763001/Prem-Patra-Radhasoami-Volume-Two
Prem Patra Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram), Volume Three: http://www.scribd.com/doc/120763441/Prem-Patra-Radhasoami-Volume-Three
Prem Patra Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram), Volume Four: http://www.scribd.com/doc/120763836/Prem-Patra-Radhasoami-Volume-Four
Prem Patra Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram), Volume Five: http://www.scribd.com/doc/120764201/Prem-Patra-Radhasoami-Volume-Five
Prem Patra Radhasoami, by Huzur Maharaj (Rai Saligram), Volume Six: http://www.scribd.com/doc/120765263/Prem-Patra-Radhasoami-Volume-Six
Discourses of Maharaj Sahab (Pandit Brahm Shankar Misra): HTML Version at the Radhasoami Library: http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/Discourses_of_Maharaj_Saheb/Discourses_of_Maharaj_Saheb.html
Discourses on Radhasoami Faith, by Maharaj Sahab (Pandit Brahm Shankar Misra): http://archive.org/stream/discoursesonradh00misruoft#page/n9/mode/1up
Phelps Notes — Notes of Discourses on the Radhasoami Faith delivered by Babuji Maharaj, in 1913-14, as taken by Myron H. Phelps: HTML Version at the Radhasoami Library: http://192734808.r.cdn77.net/CDN/Books/EnglishBooks/PhelpsNotes/PhelpsNotes.html
Phelps Notes — Notes of Discourses on the Radhasoami Faith delivered by Babuji Maharaj, in 1913-14, as taken by Myron H. Phelps: at Scribd: http://www.scribd.com/doc/126663034/Phelps-Notes
Radhasoami Faith, A Historical Study, by Agam Prasad Mathur (Dadaji) — English Translation: http://www.angelfire.com/linux/radhasoami/rsfaith/radhasoamifaith.htm
Radhasoami Faith, A Historical Study, by Agam Prasad Mathur (Dadaji) — Russian Translation: http://www.scribd.com/doc/153316278/Radhasoami-Faith-A-Historical-Study-Russian-Translation
Quantum Consciousness: A Scientific Theological Perspective of Sant Mat (Religion of Saints: Radhasoami Faith): http://spiritualawakeningradio.com/QuantumConsciousness.pdf
Guru — Dispeller of Darkness — Spiritual Discourses by Sant Baba Kehar Singh Ji of the Radhaswami Satsang Tarn Taran: http://www.aors-dbbs.org/enter/books/pdf/guru-dispeller-of-darkness.pdf
Satyanusaran (The Pursuit of Truth), by Sree Sree Thakur Anukulchandra: http://spiritualawakeningradio.com/Satyanusaran.pdf
Messages of Sree Sree Mentu Maharaj — Audio/Talking Book and Several E Book Options: http://archive.org/stream/MessagesOfSreeSreeMentuMaharaj/MessagesLargeSize#page/n5/mode/2up
The Way Out Is IN, a Radhasoami classic by Swami Ram Behari Lal: http://www.scribd.com/doc/118325161/The-Way-Out-is-IN
The Enchanted Land, A Journey with the Saints of India, by David C. Lane: at Scribd: http://www.scribd.com/doc/151013915/Enchanted-Land
The Enchanted Land, A Journey with the Saints of India, by David C. Lane: HTML Version: http://www.integralworld.net/lane41.html
Light On Ananda Yoga, by Shiv Brat Lal (Data Dayal): http://www.scribd.com/doc/99737428/LightOnAnandaYoga
Baba Faqir Chand E Library at Manavta Mandirhsp.com: http://www.manavtamandirhsp.com/BooksInEnglish.html
Sufi/Sant Mat: The Secret of Realization, by Dr. H.N. Saksena (from a Sufi-Sant Mat path): http://www.scribd.com/doc/16038890/Secret-of-realisation-by-Dr-H-N-saxena
Sufi/Sant Mat: The Science and Philosophy of Spirituality, by R. K. Gupta (from a Sufi-Sant Mat path): http://www.sufisaints.net/content/pub_docs/sciencephilofspirituality.pdf
For Books of the Radha Soami Satsang Beas, the R.S. Book Department, Hazur Baba Sawan Singh, Path of the Masters, etc… See the Science of the Soul Research Centre Website, a great collection of books available in many languages, including the Mystics of the East Series: Tulsi Sahib, Dariya Sahib, Kabir, Guru Nanak, Dadu Dayal, Tukaram, Ravidas, Mira Bai, Tulsi Das, Bullah Shah, Shams-e Tabrizi, Sultan BaHU, Sant Paltu, Namdev, and many more, a very impressive li








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    SantMat

    This Living School of Spirituality called Sant Mat is also known as: The Path of the Masters, Surat Shabd Yoga: Meditation on the Inner Light and Sound of God.
  • पूज्य हुज़ूर का निर्देश

      कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...