Friday, October 18, 2024

भगवान का रूप

 

*भगवान*


*भगवान कहाँ हैं ? कौन हैं ? किसने देखा है ?*



मैं कईं दिनों से बेरोजगार था, एक एक रूपये की कीमत जैसे करोड़ो लग रही थी, इस उठापटक में था कि कहीं नौकरी लग जाए।

आज एक इंटरव्यू था, पर दूसरे शहर और जाने के लिए जेब में सिर्फ दस रूपये थे। मुझे कम से कम पांच सौ की जरूरत थी।

अपने एकलौते इन्टरव्यू वाले कपड़े रात में धो पड़ोसी की प्रेस मांग के तैयार कर पहन अपने योग्यताओं की मोटी फाइल बगल में दबा दो बिस्कुट खा के निकलाl

लिफ्ट ले, पैदल जैसे तैसे चिलचिलाती धूप में तरबतर बस स्टेंड शायद कोई पहचान वाला मिल जाए।

काफी देर खड़े रहने के बाद भी कोई न दिखा।

मन में घबराहट और मायूसी थी, क्या करूंगा अब कैसे पहचुंगा।

पास के मंदिर पर जा पहुंचा, दर्शन कर सीढ़ियों पर बैठा था पास में ही एक फकीर बैठा था l

उसके कटोरे में मेरी जेब और बैंक एकाउंट से भी ज्यादा पैसे पड़े थेl

मेरी नजरे और हालत समझ के बोला, "कुछ मदद कर सकता हूं क्या?"

मैं मुस्कुराता बोला, "आप क्या मदद करोगे?"

"चाहो तो मेरे पूरे पैसे रख लो ।" वो मुस्कुराता बोला।

मैं चौंक गया । उसे कैसे पता मेरी जरूरत । 

मैने कहा "क्यों ...?"

"शायद आप को जरूरत है" वो गंभीरता से बोला।

"हां है तो पर तुम्हारा क्या तुम तो दिन भर मांग के कमाते हो ।" मैने उस का पक्ष रखते बोला।

वो हँसता हुआ बोला, "मैं नहीं मांगता साहब लोग डाल जाते है मेरे कटोरे में पुण्य कमानें l

मैं तो फकीर हूं मुझे इनका कोई मोह नहीं, मुझे सिर्फ भुख लगती है, वो भी एक टाईम और कुछ दवाईंया बस l

मैं तो खुद ये सारे पैसे मंदिर की पेटी में डाल देता हूं ।" वो सहज था कहते कहते।

मैनें हैरानी से पूछा, "फिर यहां बैठते क्यों हो..?"

"आप जैसो की मदद करनें ।" वो फिर मंद मंद मुस्कुरा रहा था।

मै उसका मुंह देखता रह गया, उसने पांच सौ मेरे हाथ पर रख दिए और बोला, "जब हो तो लौटा देना।"


मैं शुक्रिया जताता वहां से अपने गंतव्य तक पहुचा, मेरा इंटरव्यू हुआ, और सिलेक्शन भी ।

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मैं खुशी खुशी वापस आया सोचा उस फकीर को धन्यवाद दूं,

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मंदिर पहुचां 

बाहर सीढ़़ियों पर भीड़ थी, 

मैं घुस के अंदर पहुचा देखा 


वही फकीर मरा पड़ा था l

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मैं भौंचक्का रह गया।, मैने दूसरो से पूछा कैसे हुआ l

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पता चला, वो किसी बिमारी से परेशान था, सिर्फ दवाईयों पर जिन्दा था आज उसके पास दवाईंया नहीं थी और न उन्हैं खरीदने या अस्पताल जाने के पैसे ।

मै आवाक सा उस फकीर को देख रहा था। अपनी दवाईयों के पैसे वो मुझे दे गया था।

जिन पैसों पे उसकी जिंदगी का दारोमदार था, उन पैसों से मेरी ज़िंदगी बना दी थी....

भीड़ में से कोई बोला, अच्छा हुआ मर गया ये भिखारी भी साले बोझ होते है कोई काम के नहीं।...........

मेरी आँखें डबडबा आयी।

 वो भिखारी कहां था, वो तो मेरे लिए भगवान ही था




 श्रीभूषण शर्मा * 

*सेवक :-

 गोरी गिरधर गौशाला* *(वृन्दावन )*

Thursday, July 11, 2024

रोजाना वाक्यात

 **रा धा/ध: स्व आ मी!     

                                       10-07-24- आज शाम सतसंग में पढ़ा गया बचन- कल से आगे:- (2.5.32 सोम)- मौलाना शौकत अली साहब ने शादी कर ली है। आपकी उम्र 68 अड़सठ साल बतलाई जाती है। लोग तरह तरह की नुक्ताचीनियाँ (आलोचनायें) कर रहे हैं। कोई कुछ कहता है कोई कुछ। लॉर्ड रीडिंग ने क़रीबन (लगभग) इसी उम्र में शादी की थी लेकिन एक शख्स ने भी ज़बान न खोली। क्या मौलाना साहब इस बात के लिये मुबारकबाद के मुस्तहक़ (अधिकारी) नहीं हैं कि उन्होंने दुनिया को दिखला दिया कि अब अहले-हिन्द (भारत वाले)  पहले के से कमजोर नहीं रहे हैं।                                            

 दयालबाग की साख़्ता (निर्मित) घड़ी एक हफ़्ता से मेरे कमरे में रखी है। ठीक चल रही है। साल में एक मर्तबा चाभी मांगती है। उम्मीद होती है कि तजर्बे में कामिल(पूरी) कामयाबी हासिल (प्राप्त) हुई है। 8 और घड़ियाँ बनाने के लिए इजाजत दे दी गई है। क्रमशः ....                                              

🙏🏻रा धा/ध: स्व आ मी🙏🏻 

रोजाना वाक़िआत-

 परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!**


Wednesday, July 3, 2024

ज्ञान की इमारतें / कृष्ण मेहता

 


एक तिब्बती कथा है मारपा के विषय में। उसके गुरु ने उससे घर बनाने को कहा, अकेले ही, बिना किसी की मदद के। गांव से ईंटों और पत्थरों को मठ तक लाना कठिन था। चार या पांच मील की दूरी थी। मारपा ने हर चीज अकेले ही ढोई, ऐसा करना ही था। और बनाना था तिमजला मकान, तिब्बत में उन दिनों जो बड़े से बड़ा बनाया जा सकता था। उसने दिन रात कड़ी मेहनत की। अकेले ही करनी थी उसे हर चीज। वर्षों बीत गए, घर तैयार हो गया, और मारपा लौट आया खुशी खुशी। उसने गुरु के चरणों में झुक कर प्रणाम किया और बोला, ‘घर तैयार है।’ गुरु ने कहा, ‘अब आग लगा दो उसमें।’ मारपा गया और जला दिया वह घर। सारी रात और सारे अगले दिन घर जलता रहा। सांझ तक कुछ न बचा था। मारपा गया, झुका, प्रणाम किया और बोला, ‘जैसा किं आपने आदेश दिया था, घर जला दिया गया है।’ 


गुरु ने देखा उसकी तरफ और बोला, ‘कल सुबह फिर से शुरू कर दो। एक नया घर बनाना होगा।’ और कहा जाता है कि ऐसा सात बार घटित हुआ। मारपा का हो चला, वही बात फिर फिर करते हुए ही। वह बना देता घर और वह बहुत ज्यादा कुशल हो गया धीरे  धीरे। वह ज्यादा जल्दी घर बनाने लगा, कम समय में ही। हर बार जब घर तैयार हो जाता, गुरु कह देता, जला दो उसे। जब घर सातवीं बार जल गया, तो गुरु ने कहा, ‘ अब कोई जरूरत नहीं।’


यह एक कथा है। शायद ऐसा न भी हुआ हो, लेकिन यही तो मैं कर रहा हूं तुम्हारे साथ। जिस क्षण तुम सुनते हो मुझे तो तुम भीतर एक ‘घर’ बनाना शुरू कर देते हो सिद्धातों का ढांचा, एक सुसंगत जोड़, जीने का एक दर्शन, अनुसरण करने का एक सिद्धांत, एक नक्शा जिस क्षण मैं देखता हूं कि घर तैयार है तो मैं गिराने लगता हूं उसे। और ऐसा मैं करूंगा सात बार, और यदि जरूरत हुई, तो सत्तर बार। मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं उस क्षण की जब तुम सुनोगे और तुम इकट्ठा न करोगे शब्दों को। तुम सुनोगे, पर तुम सुनोगे मुझे, उसे नहीं जो कि मैं कहता हूं। तुम सुनोगे सार  तत्व को, उसे धारण करने वाले पात्र को नहीं; शब्दों को नहीं बल्कि शब्दविहीन संदेश को। धीरे  धीरे ऐसा होगा ही। कितनी देर तक तुम मकान बनाए जा सकते हो, यह खूब जानते हुए कि उसे गिराना ही होगा? यही अर्थ है मेरी सारी विरोधी बातों का।


कृष्णमूर्ति ने भी, जो कि कहते हैं किसी सिद्धांत की जरूरत नहीं, लोगों में एक सिद्धांत निर्मित कर दिया है, क्योंकि वे विरोधात्मक नहीं हैं। उन्होंने लोगों में उतार दिया है बड़े गहरे में सिद्धांत। मैंने बहुत तरह के लोग देखे हैं, लेकिन कृष्णमूर्ति के अनुयायियों जैसे नहीं देखे। वे चिपक जाते हैं, बिलकुल चिपक ही गए हैं वे, क्योंकि वह आदमी बड़ा अविरोधी है। चालीस वर्षों से वह कह रहा है वही बात, बार बार कह रहा है। अनुयायियों ने बना ली हैं गगनचुंबी इमारतें। चालीस वर्ष में निरंतर इसी में बढ़ते, उनकी इमारत बढ़ती ही जाती है, और और आगे ही आगे बढ़ती जाती है। 


मैं तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगा। मैं चाहता हूं, तुम शब्दों से संपूर्णतया खाली हो जाओ। मेरा सारा प्रयोजन ही यही है तुमसे बात करने का। एक दिन तुम जान जाओगे कि मैं बोल रहा हूं और तुम ढांचा नहीं बना रहे हो। यह भली भांति जानते हुए कि मैं खंडन कर दूंगा उसका जो कुछ भी मैं कह रहा हूं तुम चिपकते नहीं हो फिर। यदि तुम नहीं चिपकते, यदि तुम शून्य ही हुए रहते हो, तो तुम मुझे सुन पाओगे, न कि उसे जो कि मैं कहता हूं। और संपूर्णतया अलग ही बात है उस सत्ता को सुनना जो कि मैं हूं उस अस्तित्व को सुनना जो कि बिलकुल अभी घट रहा है, इसी क्षण घट रहा है।


मैं तो केवल एक झरोखा हूं तुम देख सकते हो मुझसे और उस पार का कुछ खुल जाता है। झरोखे की ओर मत देखो, उसमें से देखो। मत देखना झरोखे की चौखट की ओर। मेरे सारे शब्द झरोखे की चौखट हैं उनमें से उनके पार देखना। भूल जाना शब्दों को और चौखट के ढांचे को और शब्दातीत, कालातीत कुछ मौजूद होता है, आकाश मौजूद होता है। यदि तुम चिपक जाते हो चौखट से, तो कैसे, कैसे पाओगे तुम पंख? इसीलिए मैं शब्दों को गिराता जाता हूं ताकि तुम चिपको नहीं ढांचे से। तुम्हें पंख पाने ही हैं। तुम्हें गुजरना होगा मुझसे, लेकिन तुम्हें जाना होगा मुझसे दूर। तुम्हें गुजरना होगा मुझमें से, लेकिन तुम्हें भूल जाना होगा मुझे पूरी तरह से। तुम्हें गुजर जाना है मुझमें से, लेकिन पीछे देखने की कोई जरूरत नहीं। एक विशाल आकाश मौजूद है। जब मैं विपरीत बात करता हूं तो मैं तुम्हें दे देता हूं एक स्वाद उस विशालता का।

Wednesday, April 24, 2024

सूर्य को जल चढ़ाने का अर्थ

 

प्रस्तुति - रामरूप यादव 


सूर्य को सभी ग्रहों में श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि सभी ग्रह सूर्य के ही चक्कर लगाते है इसलिए सभी ग्रहो में सूर्य को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। हिन्दू धर्म में सूर्य का बहुत महत्त्व बताया गया है, शताब्दियों से हमारी परम्परा में नहाने के बाद सूर्य को अर्ध्य देने अर्थात जल चढाने का नियम है।


सूर्य को जल चढाने का धार्मिक महत्त्व 


सूर्य को सभी ग्रहों में विशेष माना जाता है, सूर्य की उत्पत्ति स्वयं नारायण से हुयी थी। हिन्दू धर्म में सूर्य की पूजा की जाती है और सूर्य को अर्ध दिया जाता है, ऐसा माना जाता है कि अगर सूर्य देवता आपसे प्रसन्न है तो बाकी ग्रह का असर नहीं पड़ता है, इसलिए सूर्य की पूजा और उपासना को शुभ फलदाई माना गया है, रविवार को सूर्य देव का दिन माना गया है और इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से जीवन सफल होता है, भगवान राम भी सूर्य को जल चढाते थे इसलिए सूर्य को जल चढाने की परम्परा सहस्त्र वर्षों से चली आ रही है, तो अगर आपके मन में भी कोई इस तरह का प्रश्न उठता है जो जवाब यहाँ से जान सकते है कि सूर्य को जल क्यों चढ़ाएं।


 जल चढाने का वैज्ञानिक महत्त्व


सूर्य को जल चढाने का धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक महत्त्व भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब कोई व्यक्ति सुबह के समय सूर्य को जल चढ़ाता है तो सूर्य से निकलने वाली किरणें उस व्यक्ति को कई स्वास्थ्य लाभ देती है, सुबह के समय सूरज की जो किरणें निकलती है वे हमारे शरीर में होने वाले रंगों के असंतुलन को सही करती है, सूरज की किरणों में इन्द्रधनुष के सात रंगों का समावेश होता है और यह रंग रंगों के विज्ञान पर काम करता है, विज्ञान के अनुसार सुबह के समय सूर्य को जल चढाते समय इन किरणों के प्रभाव से ये रंग संतुलित हो जाते है जिससे शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ जाती है, इसके अलावा दूसरा वैज्ञानिक कारण है सुबह के समय सूर्य से निकलने वाली विटामिन डी. सूर्य की रोशनी से शरीर में विटामिन डी की कमी नहीं होती है, इसके अलावा सूर्य की सुबह की रोशनी सुंदरता बढ़ाने का काम करती है और इससे आँखों को भी स्वास्थ्य लाभ मिलता है।


 जल चढाने का ज्योतिष महत्त्व 


ज्योतिष विज्ञान में सूर्य को जल चढाने के कई महत्त्व बताये गए है, यदि कोई व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में नहाकर साफ़ कपडे पहनकर सूर्य को जल चढ़ाए तो उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, जब सूर्य उदय होता है तब लालिमा युक्त सूर्य को जल चढाने से ज्यादा लाभ मिलता है, इसके अलावा रोगों से मुक्ति पाने के लिए भी सुबह-सुबह सूर्य को जल चढ़ाना लाभकारी होता है।


अब आप समझ ही गए होंगे कि सूर्य को जल चढाने के सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं है बल्कि कई वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व भी है, तो क्यों ना आप भी आज से सूर्य को जल चढ़ाये और अपनी जिंदगी में चमत्कार होते देखे।


🙏🏽❤️🙏🏽

Tuesday, April 16, 2024

अनेक नामों वाली पार्वती 🙏🏽

 देवीपार्वती के 108 नाम और इनका अर्थ

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देवी पार्वती विभिन्न नामों से जानी जाता है और उनमें से हर एक नाम का एक निश्चित अर्थ और महत्व है। देवी पार्वती से 108 नाम जुड़े हुए है । भक्त बालिकाओं के नाम के लिए इस नाम का उपयोग करते है। 


1 . आद्य - इस नाम का मतलब प्रारंभिक वास्तविकता है।

2 . आर्या - यह देवी का नाम है

3 . अभव्या - यह भय का प्रतीक है।

4 . अएंदरी - भगवान इंद्र की शक्ति।

5 . अग्निज्वाला - यह आग का प्रतीक है।

6 . अहंकारा - यह गौरव का प्रतिक है ।

7 . अमेया - नाम उपाय से परे का प्रतीक है।

8 . अनंता - यह अनंत का एक प्रतीक है।

9 . अनंता - अनंत

10 अनेकशस्त्रहस्ता - इसका मतलब है कई हतियारो को रखने वाला ।

11 . अनेकास्त्रधारिणी - इसका मतलब है कई हतियारो को रखने वाला ।

12 . अनेकावारना - कई रंगों का व्यक्ति ।

13 . अपर्णा – एक व्यक्ति जो उपवास के दौरान कुछ नहि कहता है यह उसका प्रतिक है ।

14 . अप्रौधा – जो व्यक्ति उम्र नहि करता यह उसका प्रतिक है ।

15 . बहुला - विभिन्न रूपों ।

16 . बहुलप्रेमा - हर किसी से प्यार ।

17 . बलप्रदा - यह ताकत का दाता का प्रतीक है ।

18 . भाविनी - खूबसूरत औरत ।

19 . भव्य – भविष्य ।

20 . भद्राकाली - काली देवी के रूपों में से एक ।

21 . भवानी - यह ब्रह्मांड की निवासी है ।

22 . भवमोचनी - ब्रह्मांड की समीक्षक ।

23 . भवप्रीता - ब्रह्मांड में हर किसी से प्यार पाने वाली ।

24 . भव्य - यह भव्यता का प्रति है ।

25 . ब्राह्मी - भगवान ब्रह्मा की शक्ति ।

26 . ब्रह्मवादिनी – हर जगह उपस्तित ।

27 . बुद्धि - ज्ञानी

28 . बुध्हिदा - ज्ञान की दातरि ।

29 . चामुंडा - राक्षसों चंदा और मुंडा की हत्या करने वलि देवि ।

30 . चंद्रघंटा - ताकतवर घंटी

31 . चंदामुन्दा विनाशिनी - देवी जिसने चंदा और मुंडा की हत्या की ।

32 . चिन्ता - तनाव ।

33 . चिता - मृत्यु - बिस्तर ।

34 . चिति - सोच मन ।

35 . चित्रा - सुरम्य ।

36 . चित्तरूपा - सोच या विचारशील राज्य ।

37 . दक्शाकन्या - यह दक्षा की बेटी का नाम है ।

38 . दक्शायाज्नाविनाशिनी - दक्षा के बलिदान को टोकनेवाला ।

39 . देवमाता - देवी माँ ।

40 . दुर्गा - अपराजेय ।

41 . एककन्या - बालिका ।

42 . घोररूपा - भयंकर रूप ।

43 . ज्ञाना - ज्ञान ।

44 . जलोदरी - ब्रह्मांड मेइन वास करने वाली ।

45 . जया - विजयी

46 कालरात्रि - देवी जो कालि है और रात के समान है ।

47 . किशोरी - किशोर

48 . कलामंजिराराजिनी - संगीत पायल ।

49 . कराली - हिंसक

50 . कात्यायनी - बाबा कत्यानन इस नाम को पूजते है ।

51 . कौमारी - किशोर ।

52 . कोमारी - सुंदर किशोर ।

53 . क्रिया - लड़ाई ।

54 . क्र्रूना - क्रूर ।

55 . लक्ष्मी - धन की देवी ।

56 . महेश्वारी - भगवान शिव की शक्ति ।

57 . मातंगी - मतंगा की देवी ।

58 . मधुकैताभाहंत्री - देवी जिसने राक्षसों मधु और कैताभा को आर दिया ।

59 . महाबला - शक्ति ।

60 . महातपा - तपस्या ।

61 . महोदरी - एक विशाल पेट में ब्रह्मांड में रखते हुए ।

62 . मनः - मन ।

63 . मतंगामुनिपुजिता - बाबा मतंगा द्वारा पूजी जाती है ।

64 . मुक्ताकेशा - खुले बाल ।

65 . नारायणी - भगवान नारायण विनाशकारी विशेषताएँ ।

66 . निशुम्भाशुम्भाहनानी - देवी जिसने भाइयो शुम्भा निशुम्भा को मारा ।

67 . महिषासुर मर्दिनी - महिषासुर राक्षस को मार डाला जो देवी ने ।

68 नित्या - अनन्त ।

69 . पाताला - रंग लाल ।

70 . पातालावती - लाल और सफ़द पहेने वाली ।

71 . परमेश्वरी - अंतिम देवी ।

72 . पत्ताम्बरापरिधान्ना - चमड़े से बना हुआ कपडा ।

73 . पिनाकधारिणी - शिव का त्रिशूल ।

74 . प्रत्यक्ष – असली ।

75 . प्रौढ़ा - पुराना ।

76 . पुरुषाकृति - आदमी का रूप लेने वाला ।

77 . रत्नप्रिया - सजी

78 . रौद्रमुखी - विनाशक रुद्र की तरह भयंकर चेहरा ।

79 . साध्वी - आशावादी ।

80 . सदगति - मोक्ष कन्यादान ।

81 . सर्वास्त्रधारिणी - मिसाइल हथियारों के स्वामी ।

82 . सर्वदाना वाघातिनी - सभी राक्षसों को मारने के लिए योग्यता है जिसमें ।

83 . सर्वमंत्रमयी - सोच के उपकरण ।

84 . सर्वशास्त्रमयी - चतुर सभी सिद्धांतों में ।

85 . सर्ववाहना - सभी वाहनों की सवारी ।

86 . सर्वविद्या - जानकार ।

87 . सती - जो महिला जिसने अपने पति के अपमान पर अपने आप को जला दिया ।

89 . सत्ता - सब से ऊपर ।

90 . सत्य - सत्य ।

91 . सत्यानादास वरुपिनी - शाश्वत आनंद ।

92 . सावित्री - सूर्य भगवान सवित्र की बेटी ।

93 . शाम्भवी - शंभू की पत्नी ।

94 . शिवदूती - भगवान शिव के राजदूत ।

95 . शूलधारिणी – व्यक्ति जो त्र्सिहुल धारण करता है ।

96 . सुंदरी - भव्य ।

97 . सुरसुन्दरी - बहुत सुंदर ।

98 . तपस्विनी - तपस्या में लगी हुई ।

99 . त्रिनेत्र - तीन आँखों का व्यक्ति ।

100 . वाराही – जो व्यक्ति वाराह पर सवारी करता हियो ।

101 . वैष्णवी - अपराजेय ।

102 . वनदुर्गा - जंगलों की देवी ।

103 . विक्रम - हिंसक ।

104 . विमलौत्त्त्कार्शिनी - प्रदान करना खुशी ।

105 . विष्णुमाया - भगवान विष्णु का मंत्र ।

106 . वृधामत्ता - पुराना है , जो माँ ।

107 . यति - दुनिया त्याग जो व्यक्ति एक ।

108 . युवती - औरत ।

देवी पार्वती यह सभी नाम पूजा करने के लिए और उनके आशीर्वाद पाने के लिए , लिए जाते है।


🙏🏽🙏🏽❤️🙏🏽🌹

Tuesday, March 26, 2024

_होली खेल है जाने सांवरिया_*.......

 *🌹रा धा स्व आ मी🌹*


*_होली खेल है जाने सांवरिया_*

*_सतगुरु से सर्व–रंग मिलाई_*


फागुन मास रँगीला आया। 

घर घर बाजे गाजे लाया।। 

यह नरदेही फागुन मास। 

सुरत सखी आई करन बिलास।। 

तुझ को फिर कर फागुन आया। 

सम्हल खेलियो हम समझाया।।


होली के पावन अवसर पर समस्त सतसंग जगत  प्राणी मात्र को अनेकानेक बधाई। 


हुजूर रा धा स्व आ मी दयाल समस्त जीवों को स्वार्थ व परमार्थ की तरक्की की दात बख्शे। यहीc प्रार्थना उन दयाल के चरन कमलों में हम सब तुच्छ जीव पेश करते है। 


रा धा स्व आ मी दयाल की दया रा धा स्व आ मी सहाय!


*🙏🏻रा धा स्व आ मी🙏🏻*🌹

Sunday, February 25, 2024

बैकुंठ धाम पर भंडारे / डॉ.स्वामी प्यारी कौड़ा के दिन*

 *🙏🙏🙏🙏🙏



तेरे सजदे में सर झुका रहे,

 यह आरज़ू अब दिल में है।

 हर हुक्म की तामील करें,

 बस यह तमन्ना अब मन में है।।


तेरी आन बान शान निराली है ,

यह नज़ारा हमने देख लिया।

बैकुंठ धाम पर यमुना तीरे,

 तेरा जलवा हमने देख लिया।।


रूहानियत का आलम था,

रौनकों का अजब शोर था।

हंसते खिलखिलाते प्रेमियों से,

 मजमा सराबोर था।


दाता जी की तशरीफ़ आवरी से,

कण-कण में चेतनता छा गई।

यमुना की लहरें मचलने लगीं,

 हर गुल पर रौनक आ गई।।


संगीत की स्वर लहरियों पर,

थिरकती सुपरमैनों की टोलियां।

 दाता दयाल की दया दृष्टि पा

 भर रहीं थीं प्रेम की झोलियां।।


दया और मेहर का अजब नज़ारा,

 यमुना के तट पर था।

 सैकड़ो प्रेमियों का प्रेम  रंग,

 थिरक रहा यमुना जल पर था।।


शहंशाहों के शहंशाह यमुना तट पर विराजमान थे।

 प्रेमियों के झुंड के झुंड उनके चरणों पर कुर्बान थे।।


बैकुंठ धाम का अनुपम नज़ारा हम ने यहां देख लिया।

 सोते जगते हर वक्त ऊष्मा पा, निज धाम हमने पा लिया।।


स्याही रंग छुड़ाकर दाता ने, रंग दिया मजीठे रंग में।

कल करम से हमें बचा, प्रेम सरन दे बिठा लिया गोद में।।


सर पर धरा हाथ दया का, चिंता अब किस बात की।

 प्रेम रंग में जब रंग डाला ,अब फिक्र नहीं दिन-रात की।।



 *डॉक्टर स्वामी प्यारी कौड़ा* 

 4/64 विद्युत नगर

दयालबाग,आगरा 

 *25 फरवरी 2024

पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...