Saturday, December 6, 2014

द ग्रैंड डिजाइन’ vs ब्रंह्मांड का सृजक कौन ?







प्रस्तुति-- डा.ममता शरण, कृति शरण, ,सृष्चि शरण
महान भौतिकविद् स्टीफन हॉकिंग ने हाल में कहा है कि ब्रह्मांड की संरचना में भगवान या ईश्वर का कोई हाथ नहीं, बल्कि उसका अस्तित्व भौतिकी या प्रकृति के बुनियादी नियमों के एक विशेष प्रक्रिया में काम करने के कारण हुआ था। उनका यह बयान उनकी शीघ्र प्रकाशित पुस्तक ‘द ग्रैंड डिजाइन’ के आगमन से पहले आए हैं।

जैसा कि नाम से जाहिर है, द ग्रैंड डिजाइन से आशय समूची सृष्टि या इस ब्रह्मांड की संरचना से है, उसके अस्तित्व में आने से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया से है। कहना न होगा कि हॉकिंग का यह बयान अपने आप में चौंकाऊ भी है और विवादस्पद भी क्योंकि इनसान की आस्था से जुड़े मुद्दों पर सवालिया निशान उठाने पर जवाब में विरोधी स्वर अधिकाधिक मुखर हो जाते हैं।
बिग बैंग से बना ब्रह्मांड
बिग बैंग यानी ब्रह्मांडीय महाविस्फोट वह घटना है, जिससे हमारे ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है। बिग बैंग थ्योरी ब्रह्मांड के शुरुआती विकास पर रोशनी डालती है। इस थ्योरी के मुताबिक बिग बैंग की घटना करीब 13.7 अरब वर्ष पहले हुई थी। यह अनुमान 2009 तक की गई गणनाओं के आधार पर लगाया गया है। बिग बैंग मॉडल के मुताबिक ब्रह्मांड शुरुआती अवस्था में बहुत ही गरम और घना था, जिसका तेजी से विस्तार हुआ। फैलने के बाद ठंडा होकर वह मौजूदा अवस्था में पहुंचा। आज भी यह फैल रहा है।

सत्य की पड़ताल
आज हम यहां बात करेंगे हॉकिंग की और उनके द्वारा बताए गए उन कारणों की जिनकी रोशनी में उन्होंने सृष्टि संरचना संबंधी ऐसा बयान दिया। इसमें कोई शक नहीं कि स्टीफन हॉकिंग बीसवीं सदी के महान वैज्ञानिक हैं। उनकी 1988 में प्रकाशित पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ उन्होंने समय की शाश्वत शक्ति के बारे में अति साधारण शैली में पाठकों के सामने ब्रह्मांड और उसके अनेक रहस्यों को रखा था।

यह कुछ ऐसे सवाल थे जिनके बारे में आदिकाल से लेकर आधुनिक विज्ञान के साथ दिमागी मशक्कत करने वाला मनुष्य जूझता आया था, लेकिन इसके जवाब आज तक मनुष्य के सामने नहीं आए थे। अपनी नई पुस्तक में हॉकिंग ब्रह्मांड के अस्तित्व संबंधी कुछ इन्हीं सवालों से दो-चार होंगे।
दरअसल, ग्रैंड डिजाइन या सृष्टि संरचना की एक सर्वमान्य थ्योरी पर अल्बर्ट आइंसटीन ने भी अपने जीवन के अंतिम तीस वर्ष लगाए थे, लेकिन वह किसी पुख्ता नतीजे पर नहीं पहुंच सके थे। हॉकिंग ने इसी दिशा में कुछ प्रयास किए हैं। लिहाजा प्रश्न उठते हैं यह ब्रह्मांड कैसे बना, हम यहां क्यों हैं, क्या सृष्टि सृजन का ग्रैंड डिजाइन उस आदिसत्ता के कारण है जिसे हम ईश्वर कहते हैं या विज्ञान के पास इस संबंध में कुछ अन्य विचार हैं? सत्य क्या है?
द ग्रैंड डिजाइन में ब्रह्मांड संबंधी रहस्यों पर सबसे हालिया विमर्शो को बेहद सरल भाषा में शामिल किया गया है। इसमें मॉडल आधारित यथार्थवाद से जुड़े नए विचारों को जगह मिली है - जिसका मतलब कि सत्य का कोई एक रूप नहीं होता। इसके साथ ही इसमें ‘मल्टीवर्स’ या बहु-ब्रह्मांडों के कन्सेप्ट पर भी सामग्री है। मल्टीवर्स यानी हमारे इस ब्रह्मांड जैसे अनेक अन्य ब्रह्मांड जो सब एक साथ अस्तित्व में आए थे।
साथ ही एक अन्य विचार जिसमें कहा गया है कि ब्रह्मांड का कोई एक इतिहास नहीं, बल्कि हरेक संभावित इतिहास की शाखाएं मौजूद हैं। इसमें एम-थ्योरी पर कई बेहतरीन आकलन भी किए गए हैं और गौर किया गया है कि क्या यह वही थ्योरी है जिसकी तलाश में आइंस्टीन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा लगा दिया था।
हॉकिंग, तब और अब
स्टीफन हॉकिंग ने अपनी पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ के अंत में ईश्वर पर कुछ देर के लिए अपने विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने लिखा था कि यदि वैज्ञानिक प्रकृति के बुनियादी नियमों को तलाश लेते हैं तो ‘हमें ईश्वर के मस्तिष्क का पता चल सकता है’।
अब वैज्ञानिक जिस एम-थ्योरी की बात कर रहे हैं, वह फंडामेंटल पार्टिकल्स और ऊर्जा के बारे में विस्तृत तौर पर समझाती है और संभवत: ब्रह्मांड उत्पत्ति के बारे में भी बता सकती है। यदि यह थ्योरी अपनी घोषणाओं को प्रयोग के जरिए साबित करने में सफल रहती है तो यह उत्पत्ति के सभी धार्मिक विचारों को पलट कर रख सकती है। कहना न होगा कि हॉकिंग के असाधारण मस्तिष्क में यह काम हो चुका है।
प्रो. हॉकिंग अब अपनी नई पुस्तक में कहते हैं कि कॉम्पलेक्स थ्योरेटिकल फिजिक्स केआधार पर बनी थ्योरी जिसे एम-थ्योरी भी कहते हैं, ज्ञात ब्रह्मांड की हर चीज को एक्सप्लेन करेगी। हॉकिंग का कहना है कि मनुष्य जो कि खुद प्रकृति केमूलभूत कणों का संकलन है, हमें और हमारे ब्रह्मांड को शासित करने वाले नियमों को समझने के बहुत करीब पहुंच गया है। यह नि:संदेह एक बड़ी सफलता है।
क्या है एम-थ्योरी
अल्बर्ट आइंसटीन एम-थ्योरी को खोजने की कोशिश कर रहे थे। आखिर यह एम-थ्योरी क्या है? यदि हम गैर तकनीकी तौर पर बात करें तो यह ब्रह्मांड के मूलभूत पदार्थ के बारे में एक आइडिया को व्यक्त करती है। यह दरअसल पार्टिकल फिजिक्स की एक थ्योरी है, जिसमें एक 11 आयाम वाले ब्रह्मांड की बात की गई है, जिसमें कमजोर और मजबूत बल तथा ग्रेविटी एकीकृत हैं। एम-थ्योरी स्ट्रिंग थ्योरी का विस्तार है, जिसमें ब्रह्मांड के सारे 11 आयामों की पहचान की गई है। स्ट्रिंग थ्योरी यह कहती है कि उप-आणुविक कण एक आयाम वाले स्ट्रिंग अथवा तार की तरह हैं।

पुरानी बहस
दरअसल, विज्ञान और धर्म के मध्य तनाव तभी से शुरू हो गया था जब विज्ञान का उदय हुआ था। पिछली सदियों के बजाय अब यह तनाव फिर भी कम नजर आता है, लेकिन हॉकिंग के बयान से इस बहस को फिर बल मिल सकता है, क्योंकि इस विषय पर बयान देने वाले वैज्ञानिक अधिकांश जीव उत्पत्ति प्राणि विज्ञान और भौतिकी के ही क्षेत्र में काम करते हैं। ब्रह्मांड और जीवन की उत्पत्ति दरअसल ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें विज्ञान और धर्म के विचार कई स्थानों पर आपस में टकराते हैं। लेकिन क्या यह एक दूसरे के विकल्प हैं? या क्या दोनों के बीच कभी कोई गंभीर विमर्श हो सकता है, इसे देख जाना अभी शेष है।

विज्ञान अपनी ही पुरानी थ्योरियों की मरम्मत कर के प्रगति की सीढ़ियां चढ़ता है। शर्त यही है कि थ्योरी चाहे कितनी भी मौलिक हो, प्रयोग के दौरान उसमें कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। किसी भी अन्य मानवीय गतिविधि की तरह विज्ञान की अपनी कमियां भी हैं, लेकिन सृष्टि को समझने में उसकी महत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता।
न्यूटन को चुनौती
प्रो. हॉकिंग ने 9 सितंबर को प्रकाशित हो रही अपनी पुस्तक में फिजिक्स के जनक माने जाने वाले सर आइजक न्यूटन की इस धारणा को चुनौती दी है कि ब्रह्मांड का सृजन अवश्य ही भगवान ने किया होगा क्योंकि इसकी उत्पत्ति अराजकता के बीच नहीं हो सकती। अपनी नवीनतम पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि 1992 में हमारे सौरमंडल से बाहर एक सूर्य जैसे तारे के इर्दगिर्द चक्कर लगाने वाले ग्रह की खोज से उन्हें न्यूटन के उक्त विचार को खारिज करने में मदद मिली है।
द ग्रैंड डिजाइन, जिसके सहलेखक अमेरिकी फिजिसिस्ट लेओनार्ड म्लॉडीनॉव हैं, लगभग एक दशक बाद हॉकिंग की पहली पुस्तक है। इस पुस्तक में आधुनिक भौतिकी (क्वैंटम मैकेनिक्स, जनरल रिलेटिविटी, मॉडर्न कॉसमोलॉजी) के विकास के चित्रण के अलावा इसमें बहु-ब्रह्मांडों (मल्टीवर्स) के बारे में भी अटकलें लगाई गई हैं।
(इनपुट मु. व्या.)
एलियंस के अस्तित्व को माना
प्रो. हॉकिंग, जो कंप्यूटर जनरेटेड वायस सिंथेसाइजर के जरिए बात करते हैं, न्यूरो मस्कुलर डिस्ट्राफी से पीड़ित हैं, जिसकी वजह से वे पूरी तरह से पैरालाइज्ड हो चुके हैं। लेकिन शारीरिक विकलांगता के बावजूद वे ब्रह्मांड ब्रह्मांड और भौतिकी पर विचारोत्तेजक और बेबाक टिप्पणियां करते रहे हैं।
पिछले अप्रैल में एक डाक्युमेंटरी सेरीज में उन्होंने एलियंस के अस्तित्व स्वीकार करके पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था। उन्होंने कहा था कि यह सोचना एकदम तर्कसंगत है कि ब्रह्मांड में कहीं बुद्धिमान जीवन मौजूद है। हॉकिंग ने इससे भी आगे बढ़कर यह टिप्पणी कर डाली कि परग्रही जीव खानाबदोश बनकर विशाल अंतरिक्षों से धरती पर आ सकते हैं और हमारे ग्रह को उपनिवेश बनाकर हमारे संसाधन लूट सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि हमें एलियंस से संपर्क करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना एक बहुत बड़ा जोखिम होगा।
प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग के बयान में यों कुछ नया नहीं है। भगवान में आस्था में भी कुछ गलत नहीं क्योंकि इससे आपसी सौहार्द मजबूत होता है, जो कि किसी भी समाज में होना भी चाहिए। हॉकिंग ने मूलत: सृष्टि के नियमों के बारे में बात की है और उसे तोड़-मरोड़ कर पेश करना ठीक नहीं होगा। हमें इसके असली मतलब को समझने की कोशिश करनी चाहिए। वैसे ब्रह्मांड संरचना के बारे में अभी ज्यादा कुछ नहीं जाना जा सका है, खोज अभी जारी है। लिहाजा, हॉकिंग के बयान मूल तात्पर्य को समझना जरूरी है।
प्रोफेसर यशपाल, वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद्

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