Tuesday, September 8, 2020

आज का दिन मंगलमय 09/09 हो

  प्रस्तुति -कृष्ण मेहता: *

💮आज का दिन 

*दिनांक : 09 सितम्बर 2020*


🐐🐂💏💮🐅👩

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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

आज दिन का आरंभ कुछ खास नही रहेगा लेकिन कार्यो के प्रति गंभीर अवश्य रहेंगे इसका परिणाम मध्यान बाद से देखने को मिलेगा। दिन के आरंभ में कार्य क्षेत्र पर अनुकूल वातावरण ना मिलने के बाद भी स्वयं के बल पर कार्य करेंगे पहले निराश होना पड़ेगा लेकिन धर्य रखने पर संध्या के आस पास धन लाभ के योग बनने लगेंगे। अधिकारी वर्ग से भी आर्थिक आयोजन पूर्ण करने में ज्यादा मशक्कत नही करनी पड़ेगी। घर का उदासीन वातावरण भी दोपहर बाद से बदलने लगेगा महिलाए बच्चे मन इच्छित कार्य होने से प्रसन्न रहेंगे। जोड़ो में दर्द अथवा नसों में खिंचाव जैसी समस्या हो सकती है।


वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

आज का दिन आपके लिए आनंददायक रहेगा दिन को ज्यादा खुशनुमा बनाने में परिजनों के साथ ही मित्र रिश्तेदारो का भी सहयोग मिलेगा। दिन के आरंभ में थोड़ी सुस्ती अवश्य रहेगी लेकिन इसके बाद शारीरिक रूप से चुस्त नजर आएंगे। सिन का अधिकांश समय सैर सपाटे मनोरंजन में व्यतीत होगा। व्यवसायी वर्ग भी आज अधूरे कार्य को जल्दी निपटाने का प्रयास करेंगे। आर्थिक दृष्टिकोण से आज के दिन तालमेल बना रहेगा फिर भी अनुपयोगी खर्च चाह कर भी नही रोक सकेंगे। परिजनों को कामना पूर्ति होने से घर मे उत्साह का वातावरण बनेगा।


मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

आज का दिन भी आपके लिए विपरीत फलदायक रहेगा। सेहत के विषय मे आज अधिक ध्यान रखना पड़ेगा लापरवाही करने पर आगे परिणाम गंभीर बन सकते है। शारीरिक अस्वस्थता के कारण किसी भी कार्य मे मन मुश्किल से ही लगा पाएंगे। 

हाथ पैरों में शिथिलता रहेगी पेट संबंधित अथवा जुखाम बुखार आदि से कष्ट संभव है। आज किसी भी कार्य में जोर जबरदस्ती करने का प्रयास ना करें अन्यथा परिणाम निराशाजनक ही रहेंगे। यात्रा का विचार कर रहे है तो यथा संभव टाले आकस्मिक दुर्घटना चोटादि का भय रहेगा। परिजनों के साथ अधिक समय बिताने का प्रयास करें गलतफहमियां दूर होंगी।


कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

आज का दिन मानसिक उलझनों में खराब होगा दिन के पहले भाग में लाभ की संभावनाएं बनेंगी लेकिन आलस और निर्णय लेने में देरी के कारण धन लाभ होते होते हाथ से निकलने की संभावना है। मध्यान के बाद स्थिति में थोड़ा बदलाव आने लगेगा। पूर्वार्ध की तुलना में कार्य क्षेत्र पर लाभ के अधिक अवसर तो मिलेंगे लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बढ़ने के कारण जोड़ तोड़ की नीति अपनानी पड़ेगी। धन लाभ होगा लेकिन आशा से कम ही। पारिवारिक वातावरण  किसी बहुप्रतीक्षित कार्य का टालमटोल करने पर खराब हो सकता है। सुख सुविधा मिलेगी लेकिन व्यवहारिकता की कमी भी रहेगी। मस्तिष संबंधित विकार अथवा चोटादि का भय है।


सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

आज का दिन अधिकांश कार्यो में सफलता दायक रहेगा जिनकार्यो में असफल रहेंगे उनकी वजह केवल आलस्य और असहयोग ही रहेगा। कार्य व्यवसाय आरम्भ में धीमा रहेगा लेकिन मध्यान से अकस्मात उछाल आएगा धन की आमद भी आशाजनक रहेगी। आज वैसे तो व्यवहारिक ही रहेंगे लेकिन स्वार्थ सिद्धि के लिये किसी अन्य का नुकसान करने से भी नही चूकेंगे। धर्म कर्म में केवल खाना पूर्ति करेंगे। अन्य लोगो से होड़ न करें वरना आगे आर्थिक समस्या खड़ी हो सकती है। परिजन खर्चो के खर्च परेशानी में डालेंगे। घर मे पुत्र अथवा पौत्र की सेहत खराब होगी।


कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

आज का दिन आपके लिए थोड़ा भाग दौड़ वाला रहेगा। फिर भी आज किसी मनोकामना पूर्ति ना होने से निराश हो सकते है। धार्मिक क्षेत्र की यात्रा देवदर्शन के योग बनने से मानसिक शांति मिलेगी। आज आप अपने मन की बातों को खुल कर कह सकेंगे जिससे लोगो से आपसी संबंध ज्यादा प्रगाढ़ बनेंगे। घर के साथ ही बाहर वालो का भी आपके ऊपर विश्वाश बढ़ेगा। आज आपकी किसी नादानी का फल परिजनों को भी भुगतना पड़ सकता है मान सम्मान को ध्यान में रख कर ही कोई कदम उठाएं आर्थिक आयोजन सहज पूर्ण होंगे फिर भी धन की आमद आज मध्यम से कम ही रहेगी।


तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)

आज दिन के आरंभ से ही किसी अनिष्ट की आशंका भयभीत रखेगी महिलाए विशेष कर इससे प्रभावित रहेंगी। दिन का आरंभ सामान्य रहेगा लेकिन कुछ समय बाद ही किसी पुरानी बात को लेकर परिजन में झगड़ा होने की संभावना है। संबंधों के बीच आज गलतफहमियां ना पाले अन्यथा नोकझोंक लंबी खिंच सकती है। कार्य व्यवसाय पहले की तुलना में बेहतर रहेगा धन एवं सुविधा मिलने के बाद भी मन असंतोष की भावना से ग्रस्त रहेगा। नौकरी वाले लोग आज ज्यादा बोझ लेने के पक्ष में नही रहेगे। संध्या बाद पर्यटन मनोरंजन की योजना बनेगी मानसिक बोझ भी कम होगा। सरदर्द अथवा अन्य शारीरिक अंगों में खिंचाव दर्द की शिकायत होगी।


वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

आज का दिन सामान्य से उत्तम रहेगा। दिन के आरंभ से ही व्यस्तता रहेगी। कार्य क्षेत्र के साथ रिश्तेदारी में उपस्थित होने के लिये दिनचर्या में फेरबदल करेंगे। काम-धंधा बेहतर रूप से चलेगा पूर्व में जो भी कामना अधूरी रह गयी थी आज मध्यान तक उनके पूर्ण होने की भी सम्भवना है। लेकिन आज किसी से लेन देन को लेकर विवाद भी हो सकता है। क्रोध से बचे अन्यथा व्यापारिक संबंध खराब होने पर आगे के लिये दुखदायी रहेगा। धन लाभ मध्यान के आस पास अवश्य होगा इसके बाद का समय खर्चीला ही रहेगा। सरकारी कार्य आज ना करें समय और धन व्यर्थ होगा। पारिवारिक स्थिति संतोषजनक रहेगी लेकिन आपस मे जिद बहस भी होगी। सेहत को संभाले जोड़ो में दर्द की शिकायत रहेगी।


धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)

आज के दिन आपका स्वभाव कुछ रूखा रहेगा। घर हो या बाहर अपनी जिद के आगे किसी की नही चलने देंगे जिससे परिजनों के साथ अन्य लोगो को भी परेशानी में डालेंगे। कार्य क्षेत्र पर भी जल्दबाजी अथवा मनमानी के कारण होने वाले लाभ में कमी आ सकती है। धन सम्बंधित कार्यो को आज ना करें तो ही बेहतर रहेगा अथवा किसी अनुभवी की सलाह के बाद ही करें। आज के दिन आप स्वयं को अन्य लोगो से श्रेष्ठ दिखाने के चक्कर मे अपमानित भी हो सकते है। घर मे सामान्यतः माहौल शांत ही रहेगा लेकिन किसी ना किसी सदस्य से मतभेद उभरने पर उग्र बहस होने की संभावना है। 


मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)

आज दिन के आधे भाग में किसी से बेवजह उलझनेसे बचे मध्यान तक मानसिक रूप से असंतुष्ट रहेंगे अपनी नाकामी का क्रोध परिजन अथवा सहकर्मी के ऊपर उतारने से वातावरण अशान्त बनेगा लेकिन मध्यान बाद से बुद्धि विवेक जाग्रत होगा अपनी गलती का मन मे पश्चाताप भी करेंगे लेकिन स्वभाव में अकड़ रहने के कारण क्षमा नही मांगेंगे। कार्य व्यवसाय मध्यान के बाद एकदम से गति पकड़ेगा फिर भी पूर्व में बिगाड़े संबंधों का नुकसान आज किसी न किसी रूप में भरना ही पड़ेगा। धन लाभ काम चलाऊ होगा घर मे पहले की अपेक्षा शांति रहेगी फिर भी वाणी पर सनयं रखना आवश्यक है। सेहत ठीक रहेगी।


कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

आज के दिन आप ना चाहते हुए भी कलह के प्रसंगों में पड़ सकते है अथवा आज किसी ना किसी के द्वारा आपकी आलोचना अवश्य की जाएगी। व्यवहार में नरमी रखना अति आवश्यक है अन्यथा लाभ के अवसरों से दूरी बनेगी। आर्थिक रूप से आज का दिन सामान्य रहेगा खर्चो पर नियंत्रण रखें तो धन संबधित परेशानी नही रहेगी अन्यथा बजट गड़बड़ायेगा। आज आप वैसे तो मितव्ययता से ही काम करेंगे फिर भी कुछ आवश्यक घरेलू खर्च करने ही पड़ेंगे। घर मे अथवा रिश्तेदारों से अशुभ समाचार मिलने की संभावना है। सेहत में धीरे धीरे सुधार आएगा।


मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

आज का दिन आपके लिए बेहद खर्चीला रहेगा लेकिन धन की आमद भी अकस्मात हो जाने से खर्च अखरेंगे नही। समाजिक कार्यो में रुचि लेने से पारिवारिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। सहकर्मियों से तालमेल की कमी के कारण व्यावसायिक गतिविधियां कुछ समय के लिए प्रभावित होंगी फिर भी संतुलन बनाने में सफल रहेंगे। आय आज कुछेक साधन से ही फिर भी उपयुक्त मात्रा में हो जाएगी। घरेलू सामानों की खरीददारी के साथ ही सुख सुविधा बढ़ाने पर खर्च होगा। घर मे रिश्तेदारों के आगमन से चहल पहल रहेगी। बुजुर्गो से आगे के लिए मार्गदर्शन मिलेगा।

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[9/9, 08:22] Morni कृष्ण मेहता: 🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞


⛅ *दिनांक 09 सितम्बर 2020*

⛅ *दिन - बुधवार*

⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*

⛅ *शक संवत - 1942*

⛅ *अयन - दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु - शरद*

⛅ *मास - अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार - भाद्रपद*

⛅ *पक्ष - कृष्ण* 

⛅ *तिथि - सप्तमी 10 सितम्बर रात्रि 02:05 तक तत्पश्चात अष्टमी*

⛅ *नक्षत्र - कृत्तिका सुबह 11:16 तक तत्पश्चात रोहिणी*

⛅ *योग - हर्षण शाम 06:18 तक तत्पश्चात वज्र*

⛅ *राहुकाल - दोपहर 12:24 से दोपहर 01:56 तक* 

⛅ *सूर्योदय - 06:25* 

⛅ *सूर्यास्त - 18:45* 

⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण - सप्तमी का श्राद्ध*

 💥 *विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है था शरीर का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

💥 *श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*

               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞


🌷 *कर दर्शन* 🌷

🙏🏻 *शास्त्रों के अनुसार सुबह उठते ही करने चाहिए 'कर दर्शन', जानिए क्यों?*

🙏 *हमारी संस्कृति हमें धर्ममय जीवन जीना सिखाती है। हमारा जीवन सुखी, समृद्ध, आनंदमय बने इसके लिए संस्कार रचे गए और दिनचर्या तय की गई। दिनचर्या का आरंभ नींद खुलने के तत्काल बाद शुरू हो जाती है। दिन की शुरुआत का पहला कदम है- कर दर्शनम् अर्थात हथेलियों को देखना। सुबह उठते ही सबसे पहले हमें हथेलियों के ही दर्शन करना चाहिए। यहां जानिए क्या होता है सुबह-सुबह हथेलियों के दर्शन करने से...*

🌞 *सुबह सुहानी हो तो दिन अच्छा गुजरता है। दिन अच्छा हो इसके लिए हम सुबह अपने अंदर और बाहर अर्थात मन में और घर में शांति और प्रसन्नता चाहते हैं। हम आंख खुलते ही कोई ऐसी चीज देखना पसंद नहीं करते जिससे हमारा दिन खराब हो। हमारा दिन हमारे लिए शुभ हो इसके लिए ऋषियों ने कर दर्शनम् का संस्कार हमें दिया है।*

🙌  *कैसे करें कर दर्शनम्*  🙌

🙏 *सुबह जब नींद से जागें तो अपनी हथेलियों को आपस मे मिलाकर पुस्तक की तरह खोल लें और यह श्लोक पढ़ते हुए हथेलियों का दर्शन करें-*

🌷 *कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।*

*कर मूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते कर दर्शनम्॥*

🙏 *अर्थात- (मेरे) हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी का, मध्य में सरस्वती का और मूल भाग में ब्रह्मा का निवास है।*

🙏 *हथेलियों के दर्शन करते समय एक और मंत्र भी बोला जाता है...*

🌷 *कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।*

*करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥*

🙏 *अर्थात- (मेरे) हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी का, मध्य में सरस्वती का और मूल भाग में भगवान विष्णु का निवास है।*

🙏 *हथेलियों के दर्शन का मूल भाव तो यही है कि हम अपने कर्म पर विश्वास करें। हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि ऐसे कर्म करें जिससे जीवन में धन, सुख और ज्ञान प्राप्त करें। हमारे हाथों से ऐसा कर्म हों जिससे दूसरों का कल्याण हो। संसार में इन हाथों से कोई बुरा कार्य न करें।*

🙏 *हथेलियों के दर्शन के समय मन में संकल्प लें कि मैं परिश्रम कर दरिद्रता और अज्ञान को दूर करूंगा और अपना व जगत का कल्याण करूंगा।*

🙌 *हाथों का ही दर्शन क्यों* 🙌

🙏 *हमारी संस्कृति हमें सदैव कर्म का संदेश देती है। जीवन के चार आधार- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को पुरुषार्थ कहा गया है। ईश्वर पुरुषार्थी मनुष्य की ही सहायता करते हैं। कर्म से हम अपने जीवन को स्वर्ग बना सकते हैं और नर्क में भी ढकेल सकते हैं। मनुष्य के हाथ शरीर के महत्वपूर्ण अंग हैं। हमारे दो हाथ पुरुषार्थ और सफलता के प्रतीक हैं।*

🙏 *इस परंपरा के संबंध में वेद कहते हैं-*

🌷 *कृतं मे दक्षिणेहस्ते जयो मे सष्य आहित:।*

📖 *- अथर्ववेद 7/50/8*

🙏 *अर्थात- मेरे दाहिने हाथ में पुरुषार्थ है और बाएं हाथ में सफलता। भावार्थ यही है कि हम यदि परिश्रम करते हैं तो सफलता अवश्य मिलती है। हमे अपने कर्म में पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि-*

🌷 *अयं मे हस्तो भगवानयं मे भगवत्तर:।*

📖 *- ऋग्वेद 10/60/12*

🙏 *अर्थात- परिश्रम से हमारे हाथों में श्री और सौभाग्य होते हैं। अर्थ यह है कि हम परिश्रम करेंगे तो ही हमें धन मिलेगा। धन से हम सुख-समृद्धि का सौभाग्य पाएंगे। वेद हमें यह भी सचेत करते हैं कि हमारे हाथ से कोई बुरा काम न हो।*

🌷 *हस्तच्युतं जनयत प्रशस्तम्।*

📖 *- सामवेद -72*

🙏 *अर्थात- हमारे हाथों से सदा श्रेष्ठ का निर्माण हो। हम सदा अच्छे काम करें। किसी का बुरा न करें। किसी को दु:ख न पहुंचाएं।*

📖 *शिक्षा-*

*प्रभाते कर दर्शनम् का यही संदेश है। हम सुबह उठते ही अपनी हथेलियों के दर्शन कर अच्छे कार्य करने का संकल्प लें, ताकि दिनभर हमारे मन में कोई बुरे विचार न आएं। अच्छे कार्यां से ही हमारी अलग पहचान बनती है।*

               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🙏🌷🌹🌺🌻💐🍀🌸🍁🙏

दयालबाग़ सतसंग 08/09

 **राधास्वामी!! 08-09-2020- 


आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ

-                                    

 (1) राधास्वामी चरनन आओ रे मना। भाग अपना रे जगाय रे मना।।-(वहाँ से भी कदम बढाओ रे मना। राधास्वामी चरन समाओ रे मना।।) (प्रेमबानी-3-शब्द-20,पृ.सं.20)                                                              

(2) ऐ माबूदे आलम व मकबूले मन। खुदावन्दे नेमत व मसजूदे मन।। फरामोश करदम तुरा सर बसर। व पैवस्ता गश्तम व दुनियाँ व जर।।-( पिजीरा बुकुन राधास्वामी नईम। सदाए कबूली बिदेह ऐ रहीम।।) ( प्रेमबिलास-शब्द-49,पृ.सं.62)                                                                       

   (3) यथार्थ प्रकाश-भाग पहला-कल से आगे।                        🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**


**राधास्वामी!!                                      

 08-09- 2020- आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-

 कल से आगे -                                                 

 (103 ) विदित हो कि राधास्वामी -सत्संग उस संस्था का नाम है जिसमें इस शिक्षा में निष्ठा रखने वाले और इन सिद्धांतों पर आचरण करने वाले सज्जन मिलकर काम करते हैं और जिसमें सम्मिलित होने के लिए इस शिक्षा को अंगीकार करना और इन सिद्धांतों पर कटिबद्ध होना अनिवार्य है।               

    🙏🏻राधास्वामी 🙏🏻        

                       

  यथार्थ प्रकाश -भाग पहला-

 परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!**

Monday, September 7, 2020

आज का दिन 08/09 मंगलमय हो

 प्रस्तुति  - कृष्ण  मेहता 

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞

⛅ *दिनांक 08 सितम्बर 2020*

⛅ *दिन - मंगलवार*

⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*

⛅ *शक संवत - 1942*

⛅ *अयन - दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु - शरद*

⛅ *मास - अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार - भाद्रपद*

⛅ *पक्ष - कृष्ण* 

⛅ *तिथि - षष्ठी रात्रि 12:02 तक तत्पश्चात सप्तमी*

⛅ *नक्षत्र - भरणी सुबह 08:26 तक तत्पश्चात कृत्तिका*

⛅ *योग - व्याघात शाम 05:35 तक तत्पश्चात हर्षण*

⛅ *राहुकाल - शाम 03:29 से शाम 05:01 तक*

⛅ *सूर्योदय - 06:25* 

⛅ *सूर्यास्त - 18:46* 

⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण - षष्ठी का श्राद्ध, कृत्तिका श्राद्ध*

 💥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

💥 *श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*

               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞


🌷 *लक्ष्मी माँ की प्रसन्नता पाने हेतु* 🌷

🙏🏻 *समुद्र किनारे कभी जाएँ तो दिया जला कर दिखा दें ...समुद्र की बेटी हैं लक्ष्मी ... समुद्र से प्रगति है ...समुद्र मंथन के समय.... अगर दिया दिखा कर " ॐ वं वरुणाय नमः " जपें और थोड़ा गुरु मंत्र जपें मन में तो वरुण भगवान भी राजी होंगे और लक्ष्मी माँ भी प्रसन्न होंगी |*

         🌞 ~ *हिन्दू पंचांग* ~ 🌞


 🌷 *बृहस्पति नीति* 🌷

🙏🏻 *बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं। उन्होंने ऐसी कई बातें बताई हैं, जो हर किसी के लिए बहुत काम की साबित हो सकती हैं। बृहस्पति ने इन ऐसे नीतियों का वर्णन किया है, जो किसी भी मनुष्य को सफलता की राह पर ले जा सकती हैं।*

➡ *मुश्किल कामों में भी आसानी से पा लेंगे सफलता अगर ध्यान रखेंगे ये 3 बातें*

🙏🏻 *हर परिस्थिति में भगवान को याद रखें*

🌷 श्लोक 

*सकृदुच्चरितं येन हरिरित्यक्षरद्वयम।*

*बद्ध: परिकरस्तेन मोक्षाय गमनं प्रति।।*

🙏🏻 *अर्थात*

*मनुष्य को हर परिस्थिति में भगवान को याद करना चाहिए, क्योंकि भगवान का स्मरण ही हर सफलता की कुंजी हैं। जो मनुष्य इस बात को समझ लेता है, उसे जीवन में सभी सुख मिलते हैं और स्वर्ग पाना संभव हो जाता है।*

🙏🏻 *दुर्जनों को छोड़, सज्जनों की संगती करें*

🌷 *श्लोक*

*त्यज दुर्जनसंसर्ग भज साधुसमागम।*

*कुरु पुण्यमहोरात्रं स्मर नित्यमनित्यता।।*

🙏🏻 *अर्थात*

*मनुष्य को दुर्जन यानी बुरे विचारों और बुरे आदतों वाले लोगों की संगति छोड़कर, बुद्धिमान और सज्जन लोगों से दोस्ती करनी चाहिए। सज्जन लोगों की संगति में ही मनुष्य दिन-रात धर्म और पुण्य के काम कर सकता है।*

🙏🏻 *हर कोई मनुष्य का साथ छोड़ देता है लेकिन धर्म नहीं*

🌷 *श्लोक*

*तैस्तच्छरीरमुत्सृष्टं धर्म एकोनुग्च्छति।*

*तस्ताद्धर्म: सहायश्च सेवितव्य सदा नृभि:।।*

🙏🏻 *अर्थात*

*हर कोई कभी न कभी साथ छोड़ देता ह, लेकिन धर्म कभी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता। जब कोई भी अन्य मनुष्य या वस्तु आपका साथ नहीं देते, तब आपके द्वारा किए गए धर्म और पुण्य के काम ही आपकी मदद करते हैं और हर परेशानी में आपकी रक्षा करते हैं।*


          🌞 ~ *हिन्दू पंचांग* ~ 🌞

🙏🏻🌷🌻🌹🍀🌺🌸🍁💐🙏🏻

: घरों में अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाने से पहले जाने ये वास्तु नियम...            *        अक्सर हम घरों में अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाकर रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि घर के बुजुर्गों के आशीर्वाद के लिए उनके निधन के बाद भी परिवार पर बने रहते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर पर पितरों को तस्वीर को लगाने से पहले कुछ बातों की सावधानी भी रखना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर जीवन में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 2 सितंबर 2020 से पितृपक्ष शुरू हो रहे हैं, जो कि 17 सितंबर 2020 तक रहेंगे। ऐसे में यदि आप भी इस दौरान अपने पूर्वजों को याद करते हैं तो घर में उनकी तस्वीर लगाते समय इन बातों की सावधानी जरूर रखें -

कभी न लटकाए पूर्वजों की तस्वीर

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में अपने पुरखों की तस्वीर को कभी भी लटका कर नहीं रखना चाहिए। तस्वीरों को हमेशा लकड़ी के स्टैंड पर ही रखना चाहिए। फोटो को लटकाना शुभ नहीं माना जाता है।

घर में पुरखों की ज्यादा तस्वीरें न लगाएं

यह भी मान्यता है कि घर में पितरों की ज्यादा तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए। इसके अलावा ऐसी तस्वीरों को उस जगह पर न लगाएं, जहां सभी की नजर पहले पड़ती हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार मृत व्यक्ति की तस्वीरों पर बाहरी व्यक्ति की नजर पड़ने से निगेटिविटी पैदा होती है।


घर में मंदिर में न लगाएं पितरों की तस्वीर


कुछ लोग घर के मंदिर में भी पूर्वजों की लगा लेते हैं और पूजा करते हैं। शास्त्रों में पितरों का स्थान भले ही उच्च माना गया है, लेकिन पितरों और देवताओं का स्थान अलग होता है। माना जाता है कि पूजा घर में पितरों की तस्वीर लगाने से जीवन में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। घर-परिवार में अशांति छा सकती है।

वे स्थान, जहां नहीं लगानी चाहिए पितरों की तस्वीर


पितरों की तस्वीर को बेडरूम, घर के बीचों-बीच और रसोई घर में नहीं लगानी चाहिए। माना जाता है कि इससे पारिवारिक कलह के साथ सुख-शांति भंग होती है। जबकि उनकी तस्वीर हाल या मुख्य बैठक वाले कमरे में लगाना ज्यादा उचित होता है।

पितरों के फोटो के साथ जिंदा सदस्यों की फोटो न लगाएं

वास्तु शास्त्र के अनुसार, पितरों की फोटो को कभी भी घर के जीवित लोगों की तस्वीरों के साथ नहीं लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवित लोगों की आयु कम होती है और उनके जीवन पर संकट आने की आशंका बनी रहती है, इसके साथ ही व्यक्ति के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

तस्वीर लगाने की सही दिशा


वास्तु शास्त्र के अनुसार पितरों की तस्वीर को उत्तर दिशा की दीवारों में ही लगाना चाहिए। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। फोटो में पितरो की आंखें दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।

शिव पूजन लाल 'विद्यार्थी / विनोद सिंह

 साहित्य साधना के तप: पुरुष - श्री शिव पूजन लाल 'विद्यार्थी'

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विनोद सिंह


वर्षों  सत्कर्म जब पुण्य बन कर धरती पर फलता है।

साहित्य का अलख जगाने को शिवपूजन सा लाल निकलता है।।


आज जब मैं अपने अतीत का विहंगावलोकन करने बैठता हूँ तो वो दिन मेरे लिए सबसे शुभ प्रतीत होता है जिस दिन मेरी चचेरी दीदी ने मुझसे कहा कि तुम्हारे गुरु श्री शिव पूजन लाल विद्यार्थी जी रांची में  इसी बिल्डिंग के चौथे तल्ले पर अपनी बेटी के यहां आए हैं।फिर क्या था उनसे मिलने की उत्कंठा मेरे हृदय में एक ऐसा तरंग उत्पन्न कर दिया  कि अब वह उनके पवित्र चरणों को छूकर ही शांत हो सकता था।  बिना समय गंवाए मैं पहुंच गया चौथे तल्ले पर,और क्यों नहीं , 1983 के बाद अपने इस महान गुरु से मिलने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ था।मिलने की इच्छा पहले से भी थी,और वो घड़ी आखिर आ हीं गई।


जेही कर जा पर सत्य सनेहु।

वा तेही मिलही कछु ना संदेहु।।


घंटी बजाई ,दरवाजा खुला।सामने खड़ा वहीं सोम्यता  सहजता और सादगी की प्रतिमूर्ति ,गोरा चेहरा प्रशस्त ललाट ,सफेद बाल ,सादा लिवास और ओठो पर वही चिर परिचित मृदुल मुस्कान।देखते हीं स्वतः मेरे दोनों हाथ पूर्ण समर्पण और श्रद्धा से उनके दिव्य चरणों पर और उनका वरद हस्त मेरे माथे पर।ऐसा लगा कि मेरे भीतर एक दिव्य ज्योति का संचार हो रहा हो।


सच में कहा गया है।


श्री गुरु पद नख गन मनि गन जोती।

सुमिरत दिव्य दृष्टि हिय होती।।


बडे स्नेह से कमरे के भीतर ले गए।लगभग, जीवन के आठ दशकों का उतार चढ़ाव देखने वाले,ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ अनुशासन प्रिय ,हिन्दी साहित्य के अनन्य उपासक ,इसकी महिमा के पोषक और इसके विस्तार के समर्थक और हिंदी तथा भोजपुरी दोनों ही भाषाओं में अपनी रचनाओं से लोगों को  मंत्र मुग्ध कर देने वाले साहित्य के शिखर पुरुष आदरणीय शिवपूजन लाल विद्यार्थी जी से  मिलना एक दिव्य मिलन से कम नही था।

बैठते ही इधर उधर की बात न कर सीधे पूछ बैठे क्या कुछ लिखते -पढते हो या केवल विद्यालय में छात्रों को पढ़ा कर नौकरी करने का दायित्व निभाने तक हीअपने आप को सीमित रखे हो।विद्यार्थी जी शुरू से ही सीधे प्रश्न करने के आदी है और  मेरे पास इस प्रश्नं का कोई उत्तर नहीं था।उन्होने कहा कि साहित्य के शिक्षक यदि साहित्य सृजन से अपने आप को दूर रखते हैं तो यह साहित्य की सबसे बड़ी उपेक्षा है।ईश्वर ने मनुष्य को खुशहाल रखने के लिए तीन तरह के आनंदो  का विधान बनाया है- कामानन्द ,काव्यानंद और ब्रह्मानंद।साहित्य काव्यानंद की प्राप्ति का सबसे बड़ा आधार है।यह समुद्र जैसा विस्तृत और गहरा है।यह न तो कभी खाली होता और न कभी  भरता है।इसकी गहराई में जितना डुबो प्यास उतनी ही बढ़ती जाती है।ठीक उसी तरह जैसे -


राम कथा जे पढत अघाही।

रस विशेष जाना तिमी नहीं ।।


तब मुझे लगा कि आज पच्चासी वर्ष की अवस्था मे, कई किताबों को लिखने के बाद भी वो क्यों साहित्य साधना में लगे रहते हैं। शहर के छोटे या बड़े साहित्यकारों से मिलने के लिए अत्यंत आतुर रहते हैं।उनके लिखने और सीखने की प्रवृत्ति निश्चित रूप से मेरे  जैसे नवसिखुआ  साहित्यानुरागी के लिए प्रेरणा का अगाध स्रोत है।उनका सुखद सानिध्य, शब्दों की कल -कल छल -छल ,शीतल स्वच्छ  मीठा बहता हुआ प्रपात की तरह है जिसके दर्शन - मज्जन और पान से सदैव साहित्य की पिपास बुझती है। जीवन में नई स्फूर्ति, नई ऊर्जा का संचार होता है, कल्पना उर्वर हो जाती है, मौन मुखर हो जाता है और लेखनी को तो साहित्य के अनंत आकाश में उड़ने के लिए पंख मिल जाता है और वह फिर नित्य नई- नई रचनाएं करने में समर्थ हो जाता है।

विद्यार्थी जीआज जितना लोकप्रिय साहित्यकारों के बीच में है उतना ही लोकप्रिय अपने अध्यापक जीवन में अपने छात्रों के बीच में थे।छात्रों को सवारने, सुधारने ,प्रोत्साहित करने और भविष्य के लिए अच्छा नागरिक बनाने के लिए वे सतत प्रयत्नशील रहा करते थे।हो भी क्यों न-


"पारस के रंग कैसा,पलटा नहीं लोहा।

केते निज पारस नहीं, या बीच रहा बिछोहा।"


इस उक्ति को चरितार्थ करने में वह जीवनभर लगे रहे।उनका मानना है कि गुरु को छात्रों में ऐसा सामर्थ  डालना चाहिए कि वे अपने गुरु से भी ज्यादा नाम और प्रतिष्ठा हासिल करें-जैसे रामानंद के तुलसी,बल्लभाचार्य के सूरदास और और परशुराम के कार्ण।

विद्यार्थी जी के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा आकर्षण है उनका विनोदी स्वभाव यह उन्हें कभी निराश नहीं होने देता बीती बाते  उन्हें उलझा नहीं पाती, आने वाला कल उन पर हावी नहीं हो पाता गंभीर से गंभीर परिस्थितियों में भी वे हमेशा सहज बने रहते हैं।यही कारण है कि उनका विधुर जीवन उन्हें कभी निराश नहीं किया और वे चुंबक की तरह अपनी ओर लोगों को आकर्षित करते रहे।

शिक्षक की नौकरी से अवकाश प्राप्त करने के बाद वे अपना ज्यादा समय वाराणसी में ही बिताए।यह  उनके साहित्य साधना के लिए उर्वर भूमि है।कहते हैं कि जिस तरह से गंगा गंगोत्री से निकलती है ,उसी तरह से साहित्य की धारा काशी से निकल कर अन्य जगहों में बहती है।

उनका मानना है कि शिक्षक का एक वाक्य भी शिष्य के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने का सामर्थ्य रखती है।इसे लोग सही माने या न माने और हाँ मानेंगे ही क्यों आज बातें  किसी को लगती ही कहाँ है - पर उनका कहना कि साहित्य के शिक्षक और विद्यार्थी अगर साहित्य सृजन मैं अपने आप को नहीं लगाते हैं, तो उनके सामर्थ और योग्यता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाता है।और यह बात मुझे वैसी ही लगी जैसे -


आज मैंने देखी है जरा

क्या हो जाएगी एक दिन 

ऐसी ही मेरी यशोधरा?


बातें लग गई और और शाक्य वंश के राज कुमार सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बन गए और मैं भी विद्यार्थी जी की बातों से प्रभावित होकर अपना अध्यापन कार्य से बचा खुचा समय साहित्य के सामानों में लगा रहा हूँ- मैं मानता हूं कि मेरी लेखनी उतनी मर्मज्ञ, सशक्त और उर्वर नहीं है -

"भूषण अथवा कवि चंद नहीं।

बिजली भर दें वो छंद नहीं।।"


पर इतना जरूर कह सकता हूँ कि शिष्य का अपने एक सामर्थ  गुरु से पुनर्मिलन उसकी जंग लगी हुई प्रतिभा और लेखनी में फिर से नई धार ला दी।

चलते चलते वे मुझे अपनी नई पुस्तक "क्षंदों की छांव में "उपहार नहीं प्रसाद स्वरूप भेंट की,मन गदगद हो गया आँखों में कृतज्ञता के आंसू भर आए।धन्य है विद्यार्थी जी! धन्य है उनका पुत्रवत स्नेह!यदि मैं शब्दों में कृतज्ञता व्यक्त करूं तो यह एक ढिठाई होगी -और हाँ, आज मैं जो कुछ हूं उन्हीं की बदौलत -


करते तुलसी दास भी कैसे मानस नाद।

महावीर का यदि उन्हें  मिलता नही प्रसाद।।

पानी से पहले जवाब

 जवाब दो 

कालिदास बोले :- माते पानी पिला दीजिए बङा पुण्य होगा.

स्त्री बोली :- बेटा मैं तुम्हें जानती नहीं. अपना परिचय दो।

मैं अवश्य पानी पिला दूंगी।

कालीदास ने कहा :- मैं पथिक हूँ, कृपया पानी पिला दें।

स्त्री बोली :- तुम पथिक कैसे हो सकते हो, पथिक तो केवल दो ही हैं सूर्य व चन्द्रमा, जो कभी रुकते नहीं हमेशा चलते रहते। तुम इनमें से कौन हो सत्य बताओ।

कालिदास ने कहा :- मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दें।

स्त्री बोली :- तुम मेहमान कैसे हो सकते हो ? संसार में दो ही मेहमान हैं।

पहला धन और दूसरा यौवन। इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ कौन हो तुम ?

.

(अब तक के सारे तर्क से पराजित हताश तो हो ही चुके थे)

कालिदास बोले :- मैं सहनशील हूं। अब आप पानी पिला दें।

स्त्री ने कहा :- नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है। उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है, दूसरे पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच बताओ तुम कौन हो ?

(कालिदास लगभग मूर्च्छा की स्थिति में आ गए और तर्क-वितर्क से झल्लाकर बोले)

कालिदास बोले :- मैं हठी हूँ ।

.

स्त्री बोली :- फिर असत्य. हठी तो दो ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें ब्राह्मण कौन हैं आप ?

(पूरी तरह अपमानित और पराजित हो चुके थे)

कालिदास ने कहा :- फिर तो मैं मूर्ख ही हूँ ।

.

स्त्री ने कहा :- नहीं तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो।

मूर्ख दो ही हैं। पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है, और दूसरा दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए ग़लत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।

(कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे)

वृद्धा ने कहा :- उठो वत्स ! (आवाज़ सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थी, कालिदास पुनः नतमस्तक हो गए)

माता ने कहा :- शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार । तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा।

.

कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।

शिक्षा :-

विद्वत्ता पर कभी घमण्ड न करें, यही घमण्ड विद्वत्ता को नष्ट कर देता है।

दो चीजों को कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए.....

अन्न के कण को

"और" आनंद के क्षण को

जय श्रीकृष्ण ।

जय श्री राम  ||

दयालबाग़ सतसंग

 **राधास्वामी!! 07- 09-2020

- आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ:-    

                        

 (1) पूरन भक्ति देव गुरु दाता। सुरत रहे तुम चरनन साथा।। गुरु बल जाउँ महासुन पारा। सुनूँ गुफा धुन सोहँग सारा।।-(बडे भाग पाई राधास्वामी सरना। भौसागर से सहजहि तरना।।) (प्रेमबानी-3-शब्द-19,पृ.सं.363)                                                  

(2) ऐ माबूदे आलम व मकबूले मन। खुदावन्दे नेमत व मसजूदे मन।।-( गुनाहाँ बिकरदम हजाराँ हजार। बदामे हविस गश्ता लैलो निहार।।) (प्रेमबिलास-शब्द-49,पृ.सं.61)                                                        

 (3) यथार्थ प्रकाश-भाग पहला-

कल से आगे।               

🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**

 

आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-


 कल से आगे -(102) 

वह परमार्थ की सच्ची कदर और परमार्थी शिक्षा की सच्ची समझ आ जाने से प्रत्येक धार्मिक आचार्य और उसकी शिक्षा का हार्दिक सम्मान करना करता है ।

 और प्रत्येक परमार्थी व्यक्ति,  चाहे वह किसी संप्रदाय का अनुयायी हो , अपने भगवंत का प्रेमी प्रतीत होने से उसे जान से प्यारा लगता है । वह, यह जानता हुआ  कि बिना विशेष संस्कारों या विशेष कोटि की चेतनता के जगे कोई मनुष्य न सच्चा प्रमार्थ समज सकता है न उसका आदर कर सकता है, साधारण लोगों के साथ वादअनुवाद में नहीं उलझता ; और यह समझता हुआ कि सभी जीव कुलमालिक के बच्चे हैं और सभी का कल्याण कुलमालिक को अभीष्ट है प्रत्येक व्यक्ति को उसकी परिस्थिति पर छोड़ देता है। हाँ , यदि कोई मनुष्य उससे जिज्ञासु बनकर कोई बात पूछता है तो वह प्रसन्नतापूर्वक उसका उत्तर देता है , और जो कुछ मालूम है उसे समझाने की चेष्टा करता है ।।                                                         

🙏🏻राधास्वामी 🙏🏻            

                      

यथार्थ प्रकाश -भाग पहला- परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!**

आज का दिन 08/09 मंगलमय हो

       प्रस्तुति -कृष्ण मेहता


: ✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦ ..........

  *_••••••प्रस्तुति👣✦•••••पं0कृषण मेहता ✤•••••

         आज का पंचाग 🧾

            *_सोमवार  07 सितम्बर 2020_*


*_रुद्र गायत्री मंत्र : ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥_*


         *_।। आज का दिन मंगलमय हो ।।_*


🌌 *_दिन (वार) - सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है ।_*

*_सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।_*

*_सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।_*

*_जीवनीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है ।_*

🌐 *_विक्रम संवत् – 2077.संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – प्रमादी._*

☸️ *_शक संवत - 1942_*

☣️ *_अयन - दक्षिणायण_*

⛈️ *_ऋतु - सौर शरद ऋतु_*

🌤️ *_मास - आश्विन माह_*

🌖 *_पक्ष - कृष्ण पक्ष_*

📆 *_तिथि-पञ्चमी – 21:48 तक तत्पश्चात षष्ठी_*

📝 *_तिथि का स्वामी – पञ्चमी तिथि के स्वामी कामदेव जी है तथा षष्ठी तिथि के स्वामी कार्तिकेय जी है ।_*

💫 *_नक्षत्र - भरणी – पूर्ण रात्रि तक_*

🪐 *_नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- श्रवण नक्षत्र के देवता गोविन्द ( विष्णु ) जी है एवं धनिष्ठा नक्षत्र के देवता वसु (आठ प्रकार के वसु ) जी है । नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- श्रवण नक्षत्र के देवता अन्तक(यमराज ) जी है एवं कृतिका नक्षत्र के देवता अग्निजी है ।_*

🔊 *_योग –ध्रुव  13:23 A.M. तक_*

⚡ *_प्रथम करण : – तैतिल   – 08:48 तक_*

✨ *_द्वितीय करण : –गर 21:10 तक_*

🔥 *_गुलिक काल : – दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।_*

⚜️ *_दिशाशूल -सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।_*

🤖 *_राहुकाल -सुबह -7:30 से 9:00 तक।_*

🌞 *_सूर्योदय – प्रातः 05:52_*

🌅 *_सूर्यास्त – सायं 19:00_*

🐂 *_गोधूलि मुहूर्त - 06:23 PM to 06:47 PM तक_*

⚛️ *_पर्व व त्यौहार :- : उमा महेश्वर व्रत, भरणी श्राद्ध, पंचमी श्राद्ध_*

✍🏼 *_विशेष – पंचमी को बिल्व  का सेवन नही करना चाहिए ।_*


            🏚️ *_वास्तु शास्त्र_* 🏘️


*_वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस प्रकार उत्तर दिशा में अधिक भारी सामान रखना, पूर्व दिशा में अंधेरा रखना ठीक नहीं माना जाता, उसी प्रकार दक्षिण दिशा में तिजोरी रखना अच्छा नहीं माना जाता। यह वास्तु की दृष्टि से बिल्कुल भी ठीक नहीं है। दरअसल धन की दिशा उत्तर है, जबकि दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी गयी है। अतः दक्षिण दिशा में अगर आप धन या धन से संबंधी कोई भी चीज़ जैसे पैसों की तिजोरी आदि रखेंगे तो आपको नुकसान ही होगा। दक्षिण दिशा में तिजोरी रखने से आपको आर्थिक से परेशानी हो सकती है। साथ ही यह आपके स्वास्थ्य के लिये भी ठीक नहीं है। अतः आपको घर या ऑफिस की दक्षिण दिशा में पैसों की तिजोरी रखने से बचना चाहिए। इसके बजाय आपको उत्तर दिशा में तिजोरी रखनी चाहिए। इससे आपके पैसों की आवक बढ़ेगी और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।_*


           ♻️ *_जीवनोपयोगी कुंजियां_* ⚜️


     *_व्यर्थ का सुनना : व्यर्थ का सुनने कि आदत होती है | टी.वी. में व्यर्थ का देखते हैं, व्यर्थ का सुनते हैं, जिससे गडबड संस्कार पड़ जाते हैं | इसकी अपेक्षा भगवान को देखो और भगवत्कथा सत्संग सुनो |_*

     *_व्यर्थ का घूमना : इधर गये, उधर गयें.... इससे तो फिर सत्संग में जाओ और सेवा के लिए घूमो तो व्यर्थ का घूमना बंद हो जायेगा | तो व्यर्थ का सोचना, बोलना, देखना, सुनना और घूमना – इनमें शक्ति का ह्रास होता है इसलिए उन्हें सार्थक में ले आओ |_*


             🍷 *_आरोग्य कुंजियां_* 🍯


*_हल्दी होंठ के ऊपर निकलते बालों को जड़ से खत्म करने में हल्दी सबसे बेहतरीन उपाय है। इसके लिए बस आप एक बड़ा चम्मच हल्दी का लीजिए और उसमें आधा चम्मच पानी मिलाएं। अब इसे अच्छे से मिलाएं और इस गाढ़े पेस्ट को होंठों के ऊपर वाले हिस्से पर लगाएं। इस पेस्ट को करीब आधा घंटा तक लगा रहने दें। आधे घंटे बाद उंगली से धीरे-धीरे उस जगह पर रगड़े। ऐसा करने से बाल निकल जाएंगे। इस लेप को महीने में करीब 4 से 5 बार लगाएं। होंठे के ऊपर निकलने वाले बालों की ग्रोथ कम हो जाएगी।_*


             🕯️ *_गुरु भक्ति योग_*  🙏🏼


*_'किसी भी मनुष्य की वर्तमान स्थिति को देखकर उसके भविष्य का उपहास मत उड़ाओ, क्योंकि काल में इतनी शक्ति है कि वो एक मामूली से कोयले के टुकड़े को भी हीरे में बदल सकता है।'_*


       *_इस कथन का मतलब है कि समय में बहुत ताकत होती है। समय इतना बलवान होता है कि रंक को राजा और राजा को रंक बनाने की ताकत रखता है। इस का कहना है कि किसी भी मनुष्य की आर्थिक स्थिति को देखकर उसका मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। ऐसा करने से ना केवल आप अपनी छोटी सोच का परिचय देते हैं बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि आपके लिए सिर्फ और सिर्फ पैसा ही मायने रखता है।_*

      *_अक्सर आपने अपने आसपास ऐसे लोगों को देखा होगा जो आर्थिक रूप से बहुत मजबूत होते हैं। ऐसे में अगर उनके सामने कोई पैसे वाला व्यक्ति आ जाए तो वो उन पर कमेंट करते हैं। यहां तक कि पैसों का शो ऑफ भी करते हैं। कुछ लोगों की ये आदत होती है तो कुछ दूसरों को नीचा दिखाने के लिए ऐसा करते हैं। अगर आप भी ऐसा ही कुछ करते हैं तो बिल्कुल ना करें। क्योंकि समय सबसे ज्यादा बलवान होता है। समय में इतनी ताकत होती है कि वो किसी के भी दिन अच्छे और बुरा लाने में सक्षम है।_*

       *_कई बार कोयले को कोयला समझकर हम लोग बेकार समझते हैं। लेकिन यही कोयला सर्दियों में अंगीठी जलाने के काम आता है। इसके साथ ही आपको सर्दी से बचाता है। उस वक्त उस कोयले की कीमत एक हीरे से भी ज्यादा होती है। क्योंकि अंगीठी हीरे से नहीं बल्कि कोयले से ही जलाई जा सकती है। इसलिए कभी भी किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। समय चुटकियों में बदल भी सकता है।_*



⚜️ *_पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन नाग देव की पूजा करने से भय तथा कालसर्प दोष दूर होता है। पंचमी को नाग देवता का पूजन करने से घर में किसी की भी सांप काटने से मृत्यु नहीं होती है और  अगर सांप काटने से किसी की मृत्यु हो भी गयी हो तो उसे मुक्ति मिलती है, जातक को निर्भयता प्राप्त होती है । पंचमी तिथि को पूर्णा भी कहते है। इस तिथि में कोई भी नया कार्य शुरू करने से उसमे सफलता मिलने की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है वह कार्य बहुत लम्बे समय तक चलते है । लेकिन पौष माह की पंचमी को कोई भी नया कार्य नहीं करना चाहिए  । शास्त्रों में पंचमी तिथि को कटहल, बिल्ब, और खटाई खाने को मना किया गया है ।

[9/7, 07:27] Morni कृष्ण मेहता: 🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞

⛅ *दिनांक 07 सितम्बर 2020*

⛅ *दिन - सोमवार*

⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)*

⛅ *शक संवत - 1942*

⛅ *अयन - दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु - शरद*

⛅ *मास - अश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार - भाद्रपद*

⛅ *पक्ष - कृष्ण* 

⛅ *तिथि - पंचमी रात्रि 09:38 तक तत्पश्चात षष्ठी*

⛅ *नक्षत्र - भरणी पूर्ण रात्रि तक*

⛅ *योग - ध्रुव शाम 04:38 तक तत्पश्चात व्याघात*

⛅ *राहुकाल - सुबह 07:47 से सुबह 09:20 तक* 

⛅ *सूर्योदय - 06:24* 

⛅ *सूर्यास्त - 18:47* 

⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण - पंचमी का श्राद्ध भरणी श्राद्ध*

 💥 *विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

💥 *श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*

               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞


🌷 *इससे आपका मन लगने लगेगा* 🌷

➡ *यदि दुकान अथवा व्यवसाय-स्थल पर आपका मन नहीं लगता है तो इसके लिए आप जिस स्थान पर बैठते हैं वहाँ थोडा-सा कपूर जलायें, अपनी पसंद के पुष्प रखें और स्वस्तिक या ॐकार को अपलक नेत्रों से देखते हुए कम-से-कम ५ – ७ बार ॐकार का दीर्घ उच्चारण करें |*

➡ *अपने पीछे दीवार पर ऊपर ऐसा चित्र लगायें जिसमें प्राकृतिक सौंदर्य हो, ऊँचे –ऊँचे पहाड़ हों परंतु वे नुकीले न हों और न ही उस चित्र में जल हो अथवा यथायोग्य किसी स्थान पर आत्मज्ञानी महापुरुषों, देवी-देवताओं के चित्र लगायें | इससे आपका मन लगने लगेगा |*


           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞


🌷 *पितृ पक्ष* 🌷

🙏🏻 *अभी पितृ पक्ष चल रहा है |  अपने घर के लोग जो गुजर गये हैं | उनकी आत्मा को शांति देने के लिए इतना जरूर करें कि अब सर्व पितृ अमावस्या आयेगी, (17 सितम्बर 2020 गुरुवार को ) उस दिन गीता का 7 अध्याय पाठ करें, सूर्य भगवान के सामने जल और अन्न ले जाकर प्रार्थना करें कि: "हे सूर्यदेव, यमराज आप के पुत्र हैं, हमारे घर के जो भी गुजर गये उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें, आज के गीता के पाठ का पुण्य उनके लिए दीजीये" पितृ गण राजी होंगे, घर में अच्छी संतान जन्म लेगी यह सर्व पितृ अमावस्या के दिन जरूर करें।*


           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🙏🏻🌷🌸🌼💐☘🌹🌻🌺🙏

[9/7, 07:50] Morni कृष्ण मेहता: 💥🍂 *डैंड्रफ*  🍂💥


 *इन चीजों में छिपा है डेंड्रफ का घरेलू इलाज, छूमंतर हो जाएगी रूसी*


सिर में रूसी यानी डेंड्रफ होना आम बात है। गर्मी का मौसम हो, बरसात का या सर्दियों का, बालों में रूसी के समस्या बहुत परेशान करती है। इतना ही नहीं गलत खानपान, फंगल इन्फेक्शन के चलते ज्यादातर लोग रूसी की समस्या से परेशान रहते हैं।

*आइए जानते हैं रूसी हटाने के कुछ घरेलू उपाय* जिनसे आपका सिर से डेंड्रफ छूमंतर हो जाएगा।


💁🏻चार चम्मच खसखस दूध में  लगाएं। आधे घंटे बाद सिर धोएं। धोने में शैम्पू का इस्तेमाल करें। सप्ताह में दो बार इस तरह बाल धो लें।


*💁🏻चार बड़े चम्मच बेसन* एक बड़े गिलास पानी में घोलकर बालों पर मलें और सिर धो लें। डैंड्रफ खत्म हो जाएगा।


*💁🏻रात को छिलके सहित अरहर की दाल* पानी में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर सिर में लगा लें। आधे घंटे बाद सिर धोएं। फिर गीले बालों में ही कंघी करें।


*💁🏻सप्ताह में दो बार दही से* बालों को धोने से डैंड्रफ मिट जाती है।


*💁🏻पांच चम्मच पिसे आंवले को* रात को आधा कप पानी में भिगो दें, सुबह इस पानी से सिर धो लें।


*💁🏻चुकंदर के पत्तों को पानी में* उबालकर सिर धोने से डैंड्रफ दूर हो जाती है।


*💁🏻रीठे से सिर धोने पर भी डैंड्रफ से छुटकारा मिल जाता है।*


*💁🏻नारियल के तेल में कपूर मिलाएं* और यह तेल अच्छी तरह बालों में तथा सिर पर लगाएं।


*💁🏻 नींबू के रस को बालों में लगाएं। कुछ समय बाद सिर धो लें।*


*💁🏻बालों में तेल लगाने के बाद* अच्छे से शैंपू करें और उसके बाद किसी भी अच्छे माउथवॉश को स्केल्प पर लगाएं। 5-10 मिनट लगाए रखने के बाद इसे पानी से धो लें।


*💁🏻नींबू में हल्का-सा बेसन और दही मिलाकर स्केल्प पर लगाएं।* इसके अलावा, नींबू में लहसुन का पेस्ट मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।


*💁🏻दो टेबल स्पून बेकिंग सोडा में उतना ही पानी मिलाएं* जिससे वो जैल की तरह दिखने लगे। इस जैल को सिर में लगाकर 15. मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद सिर को अच्छी तरह धो लें।


*💁🏻पानी में सिरका मिलाकर सिर को अच्छी तरह धोएं।* इस उपाय को सप्ताह में दो बार जरूर करें।


*💁🏻चार से पांच चम्मच नींबू का रस लें* औऱ इसमें उतनी ही मात्रा में नारियल तेल मिला लें। इससे स्कल्प पर अच्छी तरह से मालिश करें और सिर पर गीला तौलिया लपेट लें। आधे घंटे बाद सिर धो लें।


*💁🏻 मेथी के कुछ दाने लेकर* रात भर के लिए भिगो दें। सुबह इनको पीसकर इनका लेप सिर की त्वचा पर लगाएं।


*💁🏻मुल्तानी मिट्टी को रात भर पानी में भिगोकर रख दें।* सुबह इसका लेप बनाकर उसमें नींबू का रस मिलाएं और बालों पर 20 मिनट के लिए लगाएं। फिर सिर धो दें।


*💁🏻 सरसों के तेल से रात को सिर की अच्छी तरह मालिश करें।* रात को गर्म पानी में भिगोया हुआ तौलियां सिर पर कुछ देर के लिए लपेटें औऱ सो जाएं। अगले दिन सिर को धो लें।


*💁🏻एलोवेरा का जैल* बाजार में मिलता है। इस जैल से सिर की अच्छी तरह मालिश करें और घंटे भर बाद सिर धो लें।


*💁🏻नीम्बू और नारियल तेल की मसाज –* नीम्बू में citric होता जो dandruff दूर करने के लिए बहुत उपयुक्त होता है| इसके लिए आप 2 tbsp नारियल तेल को हल्का गर्म कर लें फिर इसमें 2 tbsp नीम्बू का रस मिला लें| अब इस मिक्सचर से अपनी बालों की जड़ों पर हल्के हाथ से मसाज करें| मसाज करने के बाद इसे 20 के लिए छोड़ दे फिर शैम्पू कर लें| इसे हफ्ते में 2-3 बार करें और कुछ ही हफ़्तों में आपको बेहतर परिणाम मिलेगा|


*💁🏻बेकिंग सोडा –* बेकिंग सोडा हर घर की रसोई में होता है| यह सामान्य सा सोडा dandruff से लड़ने के लिए बहुत कम आता है| आप 1 चम्मच सोडा लें और इसे अपने सूखे बालों में जड़ों में लगायें| 2-3 min के लिए छोड़ दे फिर शैम्पू कर लें| इसे आप हफ्ते में 3 बार करें| 2-3 हफ्ते में आप dandruff से निजत पा जायेंगे|


*💁🏻दही –* दही dandruff का सबसे बड़ा दुश्मन होता है| दही से बहुत जल्द dandruff दूर हो जाते है| ¾ कप खट्टा दही ले और इसे अपने बालों की जड़ और बालों में एक मास्क की तरह लगा लें| 1 घंटे इसे छोड़ दें फिर शैम्पू से बाल धो लें| दही से dandruff तो दूर होता ही है यह बालों को कंडीशनर भी करता है और बल सॉफ्ट सिल्की होते है|


*💁🏻मेथी पैक –* 1 मुट्ठी मेथी को पानी में रात भर के लिए भिगो दें| दुसरे दिन सुबह मेथी को पीस ले और पेस्ट बना लें| इस पेस्ट को जड़ों और बालों में लगायें और 1 घंटे के लिए छोड़ दें| इस प्रक्रिया को हफ्ते में 2-3 बार करें और बेहतर रिजल्ट पायें| मेथी बालों में होने वाली खुजली भी दूर करती है|


*💁🏻मेहँदी –* मेहँदी का उपयोग सदियों से होते आ रहा है, यह एक नेचुरल कंडीशनर है जो बालों को सॉफ्ट सिल्की बनता है| एक बर्तन में मेंहदी , चाय का पानी , दही और नीम्बू का रस मिलाएं| इसे रात भर के लिए रख दे, अब इसे अपने बालों में अच्छे से लगायें और 1-2 घंटे छोड़ दे| बालों को शैम्पू से धो लें| हफ्ते में 1 बार इसे करने से बालों की हर समस्या से निदान मिलता है|


*💁🏻विनेगर –* 2 tbsp विनेगर में 2 tbsp पानी डालें| बालों को गीला कर लें, अब विनेगर मिक्सचर को बालों में मसाज करते हुए लगायें| फिर 15 min बाद शैम्पू कर लें| हफ्ते में 2 बार करने से ददृफ्फ़ से पूरी तरीके से निदान मिलेगा|


*💁🏻Tea Tree तेल –* थोडा सा तेल लेकर अपने बालों की जड़ों में मसाज करें फिर 5 min के लिए छोड़ दें और शैम्पू कर लें| हफ्ते में 2-3 बार करें|


*💁🏻मुल्तानी मिट्टी पैक –* मुल्तानी मिटटी चेहरे के लिए तो बहुत अच्छा होता है ये सबको पता है, पर आपको बता दें यह बालों के लिए भी बहुत अच्छा होता है| अपने बालों के हिसाब से मुल्तानी मिटटी ले लें, और पानी मिलाकर पेस्ट बना लें अब इसमें नीम्बू का रस मिला लें, पुरे बालों में इसे अच्छे से लगाकर 20 min छोड़ लें फिर शैम्पू से धो लें| 2-3 बार उपयोग करने पर ही आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे|


*💁🏻नीम का रस –* नीम को एक दवाई के रूप में उपयोग किया जाता है, नीम बहित अच्छी antiseptic होती है| नीम को पीस कर एक पेस्ट बना लें, इसे 10 min छोड़ दे फिर शैम्पू से धो लें| नीम की पत्तियों को उबालकर उसके पानी को बाल धोने में इस्तेमाल ला सकते है|


*💁🏻संतरे का पैक –* संतरे में citric एसिड और विटामिन c होता है, जिसका उपयोग हम धुप में होने वाली टैनिंग को दूर करने में करते है| संतरे के छिलके हमारे बालों के लिए बहुत अच्छे होते है| छिलकों में मौजूद एसिड हमारे बालों से एक्स्ट्रा तेल निकलता है और बालों को कंडीशनर भी करता है| संतरों के छिलकों और नीम्बू का रस जार में लेकर मिक्स्क्सी में पीस लें और पेस्ट बना लें| पेस्ट बालों और जड़ों में लगायें और ½ घंटे के लिए छोड़ दे, फिर शैम्पू कर लें| हफ्ते में 1-2 बार यह प्रक्रिया दुहरायें|


इन उपायों के बल पर आपके सिर से रूसी छूमंतर हो जाएगी और आपके बाल भी मुलायम और रेशमी बने रहेंगे। ये सभी उपाय बालों को लंबे समय तक मजबूती भी प्रदान करते हैं।

Dandruff की समस्या तो सबके पास है लेकिन इसका निदान अब आपके पास है वो भी आपके सामने , आपके ही किचन में| तो बस इंतजार किस बात का आज ही से इस dandruff की समस्या को दूर करने में जुट जाइये| आप खुद भी इसे उपयोग करें और अपने दोस्तों रिश्तेदारों को भी बताएं

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पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...