Friday, October 21, 2022

सांचे तो जग नहीं, झूठे मिलें न राम।*/

 अमृत कथा / कृष्ण मेहता 


*अब "रहीम" मुश्किल पड़ी, गाढ़े दोऊ काम।*

*सांचे तो जग नहीं, झूठे मिलें न राम।*


*अर्थ:* बड़ी मुश्किल में आ पड़े ये दोनो काम बड़े कठिन है। सच्चाई से दुनियादारी हासिल नहीं होती, लोग रीझते नही है,और झूठ से राम की प्राप्ति नहीं होती है। तो अब किसे छोड़ा जाए, और किससे मिला जाए।

*चीजों का उपयोग करना, लेकिन उनके मोह में न पड़ना, सफलता का यही रहस्‍य है*

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एक बहुत ही मशहूर महात्‍मा थे। उनके पास रोज ही बड़ी संख्‍या में लोग उनसे मिलने आते थे। एक बार एक बहुत ही अमीर व्‍यापारी उनसे मिलने पहुंचा। व्‍यापारी ने सुन रखा था कि महात्‍मा बड़े ही सुफीयाना तरीके से रहते है। जब वह व्‍यापारी महात्‍मा के दरबार में पहुंचा तो उसने देखा कि कहने को तो वह महात्‍मा है, लेकिन वे जिस आसन पर बैठे है, वह तो सोने का बना है, चारों ओर सुगंध है, जरीदार पर्दे टंगे है, सेवक है जो महात्‍माजी की सेवा में लगे है और रेशमी ड़ोरियो की सजावट है।

व्‍यापारी यह देखकर भौंच्‍चका रह गया कि हर तरफ विलास और वैभव का साम्राराज्‍य है। ये कैसे महात्‍मा है? महात्‍मा उसके बारे में कुछ कहते, इसके पहले ही व्‍यापारी ने कहा, “महात्‍माजी आपकी ख्‍याती सुनकर आपके दर्शन करने आया था, लेकिन यहाँ देखता हूँ, आप तो भौतिक सपंदा के बीच मजे से रह रहे हैं लेकिन आप में साधु के कोई गुन नजर नही आ रहे है।“

महात्‍मा ने व्‍यापारी से कहा, “व्‍यापारी… तुम्‍हें ऐतराज है तो मैं इसी पल यह सब वैभव छोड़कर तुम्‍हारे साथ चल देता हूँ।“

व्‍यापारी ने कहा, “हे महात्‍मा, क्‍या आप इस विलास पूर्ण जीवन को छोड़ पाएंगे?“

महात्‍माजी कुछ न बोले और उस व्‍यापारी के साथ चल दिए और जाते-जाते अपने सेवको से कहा कि यह जो कुछ भी है सब के सब गरीबो में बाँट दें।

दोनो कुछ ही दूर चले होंगे कि अचानक व्‍यापारी रूका और पीछे मुड़ा और कुछ सोचने लगा।

महात्‍मा ने पूछा, “क्‍या हुआ रूक क्‍यों गए?“

व्‍यापारी ने कहा, “महात्‍मा जी, मैं आपके दरबार में अपना कांसे का लोटा भूल आया हूँ। मैं उसे जाकर ले आता हूँ, उसे लेना जरूरी है।”

महात्‍माजी हंसते हुए बोले, “बस यही फर्क है तुममें और मुझमें। मैं सभी भौतिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए भी उनमें बंधता नहीं, इसीलिए जब चाहुं तब उन्‍हें छोड़ सकता हूँ और तुम एक लोटे के बंधन से भी मुक्‍त नहीं हो।“

इतना कहते हुए महात्‍माजी फिर से अपने दरबार की ओर जानें लगे और वह व्‍यापारी उन्‍हें जाता हुआ देखता रहा क्‍योंकि महात्‍मा उसे जीवन का सबसे अमूल्‍य रहस्‍य बता चुके थे।

इस छोटी सी कहानी का सारांश ये है कि चीजों का उपयोग करना, लेकिन उनके मोह में न पड़ना, यही जीवन का अन्तिम उद्देश्‍य होना चाहिए क्‍योंकि मोह ही दु:खों का कारण है और जिसे चीजों का मोह नहीं, वह उनके बंधन में भी नहीं पड़ता और जो बंधन में नही पड़ता, वो हमेंशा मुक्‍त ही है।


Wednesday, October 19, 2022

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर.......

 

प्रस्तुति -  सत्यनारायण प्रसाद 


माना जाता है कि श्रीराम अवतार केसत्यनारायण प्रसाद  समय 

हनुमान जी को स्वयं भगवान श्रीरा.म ने 

अमर होने का आशीर्वाद दिया था। 

इसी कारण हनुमानजी का प्रताप चारों युगों में रहा है 

और आगे भी रहेगा, क्योंकि वे अजर-अमर हैं। 

अंजनी सुत जब तक चाहें शरीर में रहकर 

इस धरती पर मौजूद रह सकते हैं।


माना जाता है  कि पूरे ब्रह्मांड में हनुमानजी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनकी भक्ति से हर तरह के संकट तुरंत ही हल हो जाते हैं और यह एक चमत्कारिक सत्य है।@सुविचार गुप्र 


हनुमान जी की स्तुति के लिए आज के समय में सबसे सरल व सहज वंदना हनुमान चालीसा को माना गया है। हनुमान चालीसा का आधुनिक दुनिया में महत्व बहुत अधिक माना जाता है।

 

हनुमान चालीसा को महान कवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा था । हनुमान चालीसा से पहले भी हनुमानजी पर कई चालीसा लिखी गई और कई स्तुतियां भी लिखी गई थीं लेकिन हनुमान चालीसा का महत्व इसीलिए आधुनिक युग में है क्योंकि यह पढ़ने और समझने बहुत ही सरल है और यह भी कि इस चालीसा में हनुमानजी के संपूर्ण चरित्र का वर्णन हो जाता है जिससे उनकी भक्ति करने में आसानी होती है।

 

हनुमानजी की भक्ति के लिए आप को ई भी स्तुति या वंदना पढ़ें लेकिन हनुमान चालीसा सच में ही अपने आप में एक संपूर्ण रामचरि‍त मानस की तरह है। 


हनुमान चालीसा लिखने वाले तुलसीदासजी राम के बहुत बड़े भक्त थे। उनके इसी विश्वास के कारण औरेंगजेब ने उन्हे बंदी बना लिया था। माना जाता है  कि वहीं बैठकर उन्होंने हनुमान चालीसा लिखा था। अंत में ऐसे कुछ हुआ कि औरंगजेब को उन्हें छोड़ना पड़ा था। 

 

हनुमान चालीसा में 40 छंद होते हैं जिसके कारण इसको चालीसा कहा जाता है। यदि कोई भी इसका पाठ करता है तो उसे चालीसा पाठ बोला जाता है। आधुनिक युग की भागम-भाग में हनुमान चालीसा ही एक ऐसा पाठ है जिसे तुरंत ही आसानी से पढ़ा जा सकता है, लेकिन उसके लिए हनुमानजी की श्रद्धा भक्ति होना जरूरी है।@सुषमा गौड


आज के युग में सनातन धर्म में हनुमान चालीसा का बड़ा ही महत्व है।हनुमान चालीसा के प्रभाव को तो धीरे धीरे पश्चिम की जनता ने भी स्वीकार करना शुरू कर दिया है। 


कहा जाता है कि आज के युग में विश्व शक्ति माने जाने वाले राष्ट्र अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सिर पर भगवान हनुमान जी का हाथ है। जी हां, बराक ओबामा हनुमानजी के बहुत बड़ भक्त हैं। इतने बड़े भक्त कि वो उनकी एक छोटी सी मूर्ति हमेशा अपनी जेब में रखते हैं।


एक इंटरव्यू के दौरान बराक ओबामा ने बताया कि जब भी वो परेशान या थका हुआ महसूस करते हैं तो हनुमान जी से मदद मांगते हैं। उनका मानना है कि इससे उन्हें पॉजीटिव एनर्जी प्राप्त होती है। 


हनुमान  चालीसा को पढ़ते रहने से व्यक्ति के मन में साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम का संचार होता है। इसके कारण ही वह संसार पर विजय प्राप्त कर लेता है। 

 

इसके एक एक छंद का बहुत महत्व है जैसे-

 

1.बच्चे का पढ़ाई में मन ना लगे तो उसको इस छंद का पाठ करना चाहिए- बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।

 

2.मन में अकारण भय हो तो निम्न पंक्ति पढ़ना चाहिए- भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे।

 

3.किसी भी कार्य को सिद्ध करना हो तो यह पंक्ति पढ़ें- भीम रूप धरि असुर सँहारे, रामचन्द्र के काज सँवारे।


4.बहुत समय से यदि बीमार हैं तो यह पंक्ति पढ़ें- नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरन्तर हनुमत बीरा।

 

5.प्राणों पर यदि संकट आ गया हो तो यह पंक्ति पढ़ें- संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।

या संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै

 

6.यदि आप बुरी संगत में पड़े हैं और यह संत छुट नहीं रही है तो यह पढ़ें- महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी

 

7.यदि आप किसी भी प्रकार के बंधन में हैं तो- जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बन्दि महा सुख होई।

 

8.किसी भी प्रकार का डर है तो यह पढ़ें- सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना।

 

9.आपके मन में किसी भी प्रकार की मनोकामना है तो पढ़ें- और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै।


जय श्री राम🙏

Tuesday, October 18, 2022

महाराज साहब के बचन-

 *रा धा स्व आ मी!                                     

 परम गुरु महाराज साहब के बचन-कल से आगे:-(17)-गुरू की ताड़ और मार सह घर कर प्यार, मूरखों की अस्तुती पर खाक डार ।(प्रेमबानी भाग ३, वचन १६, ग़जल ५) फ़रमाया - मन बड़ा जबरदस्त हैं। जरा से मान अपमान में कैसे तरह तरह के गुनाबन उठाता है। जल्द ही बेमुख हो जाता है । हुक्म है कि ताड़ और मार को इस तरह प्यार से सहो कि जिस तरह एक दुखिया और रोगी इलाज वक्त चाहे कितनी तकलीफ़ चीरने फाड़ने या और किसी किस्म की सख्ती से होवे उसको बड़ी खुशी से झेलता है और शुक्रगुजार होता है। अगर एक गधा भी इसकी स्तुति कर दे तो यह फूला नहीं समाता है । जिनको अपनी भी खबर नहीं और दूसरे की भी खबर नहीं, ऐसे लोग स्तुति करने वाले निहायत दर्जे के बेवकूफ हैं और यह उन्हीं के संग रहना चाहता है । इसलिए हुक्म है कि मूर्खों की स्तुति पर खाक डाल।                                                                     

 क्रमशः🙏🏻रा धा स्व आ मी🙏🏻*


*रा धा स्व आ मी!     

                                 

  परम गुरु हुज़ूर महाराज-प्रेमपत्र-भाग-3-

 बचन-14-का भाग-कल से आगे:-(26)-



 अब समझना चाहिये कि असल में शुरूआत मज़हबों की किस तरह पर हुई और उनसे क्या मतलब और फ़ायदा मंजूर था। सो संतों के बचनों से ज़ाहिर होता है कि दुनिया में सब जीव आम तौर पर मन और इन्द्रियों के भोग और सुखों की प्राप्ति के लिये, देखा देखी और सुना सुनी के मुवाफ़िक्र जतन करने लगे और हर एक मुआमले में ज़्यादह से ज़्यादह आशा और तृष्णा बढ़ाते गये कि जिसके सबब से ज़्यादह मेहनत उनको करनी पड़ी, चाहे वह आसा पूरी हुई या नहीं और इस सबब से दुख सुख भोगते रहे और रोग सोग और तकलीफ़ वग़ैरह के दूर करने के लिये भी जो जतन कि उनको आम तौर पर जीवों की काररवाई देख कर मालूम हुये करने लगे। पर जब उनसे कुछ फ़ायदा न हुआ तब दुखी रहे और कोई उनकी मदद न कर सका और मौत के वक़्त तो क़तई किसी का जतन पेश न गया और वह भारी दुख सबको भोगना पड़ा, और आइन्दा की हालत से सबको बेख़बरी रही कि आया दुख मिलेगा या सुख।    

                                                          

  क्रमशः

🙏🏻रा धा स्व आ मी🙏🏻*


*रा धा स्व आ मी!        

                                                         

[दीन व दुनिया-परम गुरु हुज़ूर साहबजी


 महाराज-कल से आगे:-दृश्य-8 का अंतिम भाग:- 


फ़रिश्ता- शुक्रिया। (फ़रिश्ता ग़ायब हो जाता है, दीन टहलने लगता है और गाता है।)                                       गाना:-*                                                                                           O

 *ऐ इन्सान तुझ को यह क्या हो गया ।


 फ़हम का क्या पुरज़ा तेरे खो गया ।१ ।                                     

 तू बदबख़्त सचमुच है उस फ़ाक़ेकश सा ।

 कि ख़्वाँ आगे आते ही जो सो गया । २ ।                                     

  तेरा रब मेहरबान तुझ पै है इस दम । 

मिले फिर न यह वक़्त अब जो गया । ३ ।                                      

हो बेदार अब भी बिरादर, सँभल तू ।

 जो होना था पहले हुआ हो गया ।४।*                                       

*दीन-( रुक कर ) ऐ पाक परवरदिगार के प्यारे ! ऐ दीन के दुलारे ! फ़रिश्तों के सरताज हज़रत इन्सान ! जब कि सरीहन तू बैठना उठना सीखने के लिये माँ बाप की मदद का, बोलना चालना सीखने के लिये उस्ताद की मदद का और इल्मो फ़न सीखने के लिये माहिरान की मदद का मोहताज है तो फिर दीन की राह पर चलने के लिये क्यों तुझे रहनुमा की मदद की ज़रूरत महसूस नहीं होती ? तुझे अक़्ल किस ग़रज से दी गई थी ? क्या इसलिये कि अपने से और अपने मुहिब्बों (प्रेमियों) से दुश्मनी किया करे ? ख़ैर तू अपनी सी कर, हम अपनी सी करते हैं।                                       क्रमशः

🙏🏻रा धा स्व आ मी🙏🏻*

अति महत्वपूर्ण*


सभी लोग विशेष ध्यान दें कि बार बार मैसेज भेज कर निवेदन करने के बावज़ूद भी कटाई के लिए यंगमैन और भाई साहबान बहुत कम संख्या में पहुँच रहे हैं। 


*आज ग्रेसियस हुजूर की सख्त नाराजगी हुई है कि "दयालबाग और ब्रांच के लोग ठीक से ड्यूटी नहीं कर रहे हैं। कटाई करना उनकी ड्यूटी है। सुबह व शाम 4-4 घंटे सेवा करें।"*


इसे देखते हुए आप सभी से पुनः अनुरोध है कि सुबह और शाम दोनों समय अधिक से अधिक संख्या में कटाई और लोडिंग के कार्य के लिए पहुँचें जिससे समय से कार्य पूरा हो सके।


हार्दिक रा धा स्व आ मी 🙏🙏

Wednesday, October 12, 2022

करवा चौथ

करवा चौथ अक्टूबर 13, 2022 विशेष : कृष्ण मेहता

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करवा चौथ व्रत का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्त्व है। इस दिन पति की लम्बी उम्र के पत्नियां पूर्ण श्रद्धा से निर्जला व्रत रखती  है। 


करवा चाैथ पर इस वर्ष सिद्धि योग रहेगा। यह योग मंगलदायक कार्यों में सफलता प्रदान करता है। साथ ही चंद्रमा शाम 06:40 के बाद पूरे समय रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र में चंद्रमा का पूजन करना बेहद ही शुभ माना जाता है।


वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस समय शनि, बुध और गुरु अपनी स्वराशि में स्थित हैं। सूर्य और बुध भी एक साथ विराजमान हैं। जिससे बुधादित्य योग का भी निर्माण हो रहा है। वहीं लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण भी हो रहा है। इस योग के बनने से पति-पत्नी का आपसी संबंध और विश्वास मजबूत होगा। इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे। जिससे की गई प्रार्थना शीघ्र स्वीकार होगी।


पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए इस वर्ष शुक्रास्त होने के कारण व्रत एवं पूजा पाठ ही कर सकेंगी ऐसे मे खरीददारी अथवा अन्य मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए।


करवा चौथ महात्म्य

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छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। साथ ही साथ इससे लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणोश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर पूजा होती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल,उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समकक्ष किसी सुहागिन के पांव छूकर सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए।


महाभारत से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट आन पड़ते हैं। द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण से उपाय पूछती हैं। वह कहते हैं कि यदि वह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवाचौथ का व्रत करें तो इन सभी संकटों से मुक्ति मिल सकती है। द्रौपदी विधि विधान सहित करवाचौथ का व्रत रखती है जिससे उनके समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। इस प्रकार की कथाओं से करवा चौथ का महत्त्व हम सबके सामने आ जाता है।


सरगी का महत्त्व

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करवा चौथ में सरगी का काफी महत्व है। सरगी सास की तरफ से अपनी बहू को दी जाती है। इसका सेवन महिलाएं करवाचौथ के दिन सूर्य निकलने से पहले तारों की छांव में करती हैं। सरगी के रूप में सास अपनी बहू को विभिन्न खाद्य पदार्थ एवं वस्त्र इत्यादि देती हैं। सरगी, सौभाग्य और समृद्धि का रूप होती है। सरगी के रूप में खाने की वस्तुओं को जैसे फल, मीठाई आदि को व्रती महिलाएं व्रत वाले दिन सूर्योदय से पूर्व प्रात: काल में तारों की छांव में ग्रहण करती हैं। तत्पश्चात व्रत आरंभ होता है। अपने व्रत को पूर्ण करती हैं।


महत्त्व के बाद बात आती है कि करवा चौथ की पूजा विधि क्या है? किसी भी व्रत में पूजन विधि का बहुत महत्त्व होता है। अगर सही विधि पूर्वक पूजा नहीं की जाती है तो इससे पूरा फल प्राप्त नहीं हो पाता है।


चौथ की पूजन सामग्री और व्रत की विधि   

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करवा चौथ पर्व की पूजन सामग्री👇


कुंकुम, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, सिन्दूर, मेंहदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे। सम्पूर्ण सामग्री को एक दिन पहले ही एकत्रित कर लें। 


व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहन लें तथा शृंगार भी कर लें। इस अवसर पर करवा की पूजा-आराधना कर उसके साथ शिव-पार्वती की पूजा का  विधान है क्योंकि माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके शिवजी को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था इसलिए शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का धार्मिक और ज्योतिष दोनों ही दृष्टि से महत्व है। व्रत के दिन प्रात: स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोल कर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें।


करवा चौथ पूजन विधि

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प्रात: काल में नित्यकर्म से निवृ्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें।

व्रत के दिन निर्जला रहे यानि जलपान ना करें।

व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें-

प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ किया जाता है- 


'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।'


अथवा👇

ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 

'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 

'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 

'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन करें।


शाम के समय, माँ पार्वती की प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान कर उन्हें बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी अथवा लकड़ी के आसार पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें।

भगवान शिव और माँ पार्वती की आराधना करें और कोरे करवे में पानी भरकर पूजा करें। एक लोटा, एक वस्त्र व एक विशेष करवा दक्षिणा के रूप में अर्पित करें।

सौभाग्यवती स्त्रियां पूरे दिन का व्रत कर व्रत की कथा का श्रवण करें। चंद्रोदय के बाद चाँद को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से जल एवं मिष्ठान खा कर व्रत खोले।


करवा चौथ प्रथम कथा 

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बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।

शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।

सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो।

इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है।


वह पहला टुकड़ा मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।


उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।


एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियाँ करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियाँ उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।


इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह के वह चली जाती है।

सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है।


अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।


करवाचौथ द्वितीय कथा 

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इस कथा का सार यह है कि शाकप्रस्थपुर वेदधर्मा ब्राह्मण की विवाहिता पुत्री वीरवती ने करवा चौथ का व्रत किया था। नियमानुसार उसे चंद्रोदय के बाद भोजन करना था, परंतु उससे भूख नहीं सही गई और वह व्याकुल हो उठी। उसके भाइयों से अपनी बहन की व्याकुलता देखी नहीं गई और उन्होंने पीपल की आड़ में आतिशबाजी का सुंदर प्रकाश फैलाकर चंद्रोदय दिखा दिया और वीरवती को भोजन करा दिया।


परिणाम यह हुआ कि उसका पति तत्काल अदृश्य हो गया। अधीर वीरवती ने बारह महीने तक प्रत्येक चतुर्थी को व्रत रखा और करवा चौथ के दिन उसकी तपस्या से उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।


करवा चौथ तृतीय कथा 

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एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गाँव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया। स्नान करते समय वहाँ एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा।


उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी चली आई और आकर मगर को कच्चे धागे से बाँध दिया। मगर को बाँधकर यमराज के यहाँ पहुँची और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से नरक में ले जाओ।

यमराज बोले- अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली, अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूँगी। सुनकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी। हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना।


करवाचौथ चौथी कथा 

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एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर गए। इधर द्रोपदी बहुत परेशान थीं। उनकी कोई खबर न मिलने पर उन्होंने कृष्ण भगवान का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की। कृष्ण भगवान ने कहा- बहना, इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था।


पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर फिर भोजन ग्रहण किया जाता है। सोने, चाँदी या मिट्टी के करवे का आपस में आदान-प्रदान किया जाता है, जो आपसी प्रेम-भाव को बढ़ाता है। पूजन करने के बाद महिलाएँ अपने सास-ससुर एवं बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेती हैं।

तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया। इस व्रत को करने से स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से वैसे ही कर सकती हैं जैसे एक ब्राह्मण ने की थी। प्राचीनकाल में एक ब्राह्मण था। उसके चार लड़के एवं एक गुणवती लड़की थी।


एक बार लड़की मायके में थी, तब करवा चौथ का व्रत पड़ा। उसने व्रत को विधिपूर्वक किया। पूरे दिन निर्जला रही। कुछ खाया-पीया नहीं, पर उसके चारों भाई परेशान थे कि बहन को प्यास लगी होगी, भूख लगी होगी, पर बहन चंद्रोदय के बाद ही जल ग्रहण करेगी।

भाइयों से न रहा गया, उन्होंने शाम होते ही बहन को बनावटी चंद्रोदय दिखा दिया। एक भाई पीपल की पेड़ पर छलनी लेकर चढ़ गया और दीपक जलाकर छलनी से रोशनी उत्पन्न कर दी। तभी दूसरे भाई ने नीचे से बहन को आवाज दी- देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है, पूजन कर भोजन ग्रहण करो। बहन ने भोजन ग्रहण किया।

भोजन ग्रहण करते ही उसके पति की मृत्यु हो गई। अब वह दुःखी हो विलाप करने लगी, तभी वहाँ से रानी इंद्राणी निकल रही थीं। उनसे उसका दुःख न देखा गया। ब्राह्मण कन्या ने उनके पैर पकड़ लिए और अपने दुःख का कारण पूछा, तब इंद्राणी ने बताया- तूने बिना चंद्र दर्शन किए करवा चौथ का व्रत तोड़ दिया इसलिए यह कष्ट मिला। अब तू वर्ष भर की चौथ का व्रत नियमपूर्वक करना तो तेरा पति जीवित हो जाएगा। उसने इंद्राणी के कहे अनुसार चौथ व्रत किया तो पुनः सौभाग्यवती हो गई। इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए। द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए। तभी से हिन्दू महिलाएँ अपने अखंड सुहाग के लिए करवा चौथ व्रत करती हैं। सायं काल में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही पति द्वारा अन्न एवं जल ग्रहण करें। पति, सास-ससुर सब का आशीर्वाद लेकर व्रत को समाप्त करें।


पूजा एवं चन्द्र को अर्घ्य देने का मुहूर्त

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कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (करवाचौथ) 13 अक्टूबर को करवा चौथ पूजा मुहूर्त- सायं 05:47 से 07:01 बजे तक।


चंद्रोदय- 20:02 मिनट पर।


चतुर्थी तिथि आरंभ 12 अक्टूबर रात्रि 01:59 पर।


चतुर्थी तिथि समाप्त 13 अक्टूबर रात्रि 03:08 पर।


13 घंटे 44 मिनट का समय व्रत के लिए है। ऐसे में महिलाओं को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से शाम 08 बजकर 02 मिनट तक करवा चौथ का व्रत रखना होगा।


करवा चौथ के दिन चन्द्र को अर्घ्य देने का समय रात्रि 8:11 बजे से 8:55 तक है।


करवाचौथ के दिन भारत के कुछ प्रमुख नगरों का चंद्रोदय समय 

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दिल्ली- 08 बजकर 09 मिनट पर


नोएडा- 08 बजकर 08 मिनट पर


मुंबई- 08 बजकर 48 मिनट पर


जयपुर- 08 बजकर 18 मिनट पर


देहरादून- 08 बजकर 02 मिनट पर


लखनऊ- 07 बजकर 59 मिनट पर


शिमला- 08 बजकर 03 मिनट पर


गांधीनगर- 08 बजकर 51 मिनट पर


अहमदाबाद- 08 बजकर 41 मिनट पर


कोलकाता- 07 बजकर 37 मिनट पर


पटना- 07 बजकर 44 मिनट पर


प्रयागराज- 07 बजकर 57 मिनट पर


कानपुर- 08 बजकर 02 मिनट पर


चंडीगढ़- 08 बजकर 06 मिनट पर


लुधियाना- 08 बजकर 10 मिनट पर


जम्मू- 08 बजकर 08 मिनट पर


बंगलूरू- 08 बजकर 40 मिनट पर


गुरुग्राम- 08 बजकर 21 मिनट पर


असम - 07 बजकर 11 मिनट पर


 इन शहरों के लगभग 200 किलोमीटर के आसपास तक चंद्रोदय के समय मे 1 से 3 मिनट का अंतर आ सकता है।


प्राचीन मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन शाम के समय चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। 


चंद्रदेव को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जप अवश्य  करना चाहिए। अर्घ्य देते समय इस मंत्र के जप करने से घर में सुख व शांति आती है।


"गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते।

गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥"


इसका अर्थ है कि सागर समान आकाश के माणिक्य, दक्षकन्या रोहिणी के प्रिय व श्री गणेश के प्रतिरूप चंद्रदेव मेरा अर्घ्य स्वीकार करें।


सुख सौभाग्य के लिये राशि अनुसार उपाय

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मेष राशि👉  मेष राशि की महिलाएं करवा चौथ की पूजा अगर लाल और गोल्डन रंग के कपड़े पहनकर करती हैं तो आने वाला समय बेहद शुभ रहेगा।  


वृषभ राशि👉 वृषभ राशि की महिलाओं को इस करवा चौथ सिल्वर और लाल रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। इस रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से आने वाले समय में पति-पत्नी के बीच प्यार में कभी कमी नहीं आएगी। 


मिथुन राशि👉 इस राशि की महिलाओं के लिए हरा रंग इस करवा चौथ बेहद शुभ रहने वाला है। इस राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन हरे रंग की साड़ी के साथ हरी और लाल रंग की चूड़ियां पहनकर चांद की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आपके पति की आयु निश्चित लंबी होगी।  


कर्क राशि👉 कर्क राशि की महिलाओं को करवा चौथ की पूजा विशेषकर लाल-सफेद रंग के कॉम्बिनेशन वाली साड़ी के साथ रंग-बिरंगी चूडि़यां पहनकर पूजा करनी चाहिए। याद रखें इस राशि की महिलाओं को व्रत खोलते समय चांद को सफेद बर्फी का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से आपके पति का प्यार आपके लिए कभी कम नहीं होगा। 


सिंह राशि👉 करवा चौथ की साड़ी चुनने के लिए इस राशि की महिलाओं के पास कई विकल्प मौजूद हैं। इस राशि की महिलाएं लाल, संतरी, गुलाबी और गोल्डन रंग चुन सकती है। इस रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से शादीशुदा जोड़े के वैवाहिक जीवन में हमेशा प्यार बना रहता है। 


कन्या राशि👉 कन्या राशि वाली महिलाओं को इस करवा चौथ लाल-हरी या फिर गोल्डन कलर की साड़ी पहनकर पूजा करने से लाभ मिलेगा। ऐसा करने से दोनों के वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ जाएगी।


तुला राशि👉 इस राशि की महिलाओं को पूजा करते समय लाल- सिल्वर रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इस रंग के कपड़े पहनने पर पति का साथ और प्यार दोनों हमेशा बना रहेगा। 


वृश्चिक राशि👉 इस राशि की महिलाएं लाल, मैरून या गोल्डन रंग की साड़ी पहनकर पूजा करें तो पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ जाएगा। 


धनु राशि👉 इस राशि की महिलाएं पीले या आसमानी रंग के कपड़े पहनकर पति की लंबी उम्र की कामना करें।  


मकर राशि👉 मकर राशि की महिलाएं इलेक्ट्रिक ब्लू रंग करवा चौथ पर पहनने के लिए चुनें। ऐसा करने से आपके मन की हर इच्छा जल्द पूरी होगी। 


कुंभ राशि👉 ऐसी महिलाओं को नेवी ब्लू या सिल्वर कलर के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से गृहस्थ जीवन में सुख शांति बनी रहेगी। 


मीन राशि👉 इस राशि की महिलाओं को करवा चौथ पर लाल या गोल्डन रंग के कपड़े पहनना शुभ होगा।

जाको राखे साईं.......

 जाको राखे  साईं....... 


प्रस्तुति - नवल किशोर प्रसाद 

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये।


वहां पहुँचते ही उसे प्रसव पीडा शुरू हो गयी।

उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कडकने लगी।


उसने दाये देखा, तो एक शिकारी तीर का निशाना, उस की तरफ साध रहा था। घबराकर वह दाहिने मुडी, तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास आग पकड चुकी थी और पीछे मुडी, तो नदी में जल बहुत था।


मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीडा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ? 


क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ?क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ?

वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ?


हिरनी अपने आप को शून्य में छोड, अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का कारिष्मा देखिये। बिजली चमकी और तीर छोडते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयी। उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते, शेर की आँख में जा लगा,शेर दहाडता हुआ इधर उधर भागने लगा।और शिकारी, शेर को घायल ज़ानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। हिरनी ने शावक को जन्म दिया।


हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, जब हम पूर्ण पुरुषार्थ के बावजूद चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते। तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।अन्तत: यश, अपयश ,हार ,जीत, जीवन,मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है।हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

Tuesday, October 11, 2022

समय फिर ऐसा नहिं पावो,


 🙏🍁RADHASOAMI 


राधास्वामी  🍁🙏

हुए परसन गुरू दीनदयाल,

 लिया मोहि अपनी गोद बिठाल, 

भाग मेरा जागा आज अपार, 

मिले राधास्वामी निज दिलदार


 🙏🍁

RADHASOAMI 

राधास्वामी  🍁🙏



🙏🍁RADHASOAMI 🍁🙏


समय फिर ऐसा नहिं पावो, 

खोवो मत नहिं फिर पछतावो;

 सरन से गुरू की काज बन आय,

 मेहर कर राधास्वामी कहें समझाय 


🙏RADHASOAMI 🍁



 माटी चुन चुन महल बनाया,

 लोग कहें घर मेरा, ना घर तेरा, ना

 घर मेरा, चिड़िया रैन बसेरा!

 कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी, 

जोड़ भरेला थैला, 

कहत कबीर सुनो भाई साधो,

 संग चले ना धेला!!

 उड़ जाएगा हंस अकेला!!!

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻



 🙏🌹 राधास्वामी🌹🙏



मैं अपराधी जनम का , 

नख शिख भरा विकार।

तुम दाता दुखभंजना,

 मेरी करो सम्हार ।।


🙏🌹राधास्वामी 🙏🌹


 🙏🍁RADHASOAMI 🍁🙏


गुरू अब कहते हेला मारी, 

शब्द बिन कोई न करे उपकारी


🙏🍁RADHASOAMI 🍁🙏




🙏🍁RADHASOAMI 🍁🙏


घर तुम्हारे कुछ कमी न होई,

 चित्त मेरा ठैराय, 

 जस तस दान देव यह प्यारे,  

जस तस लेव अपनाय


🙏🍁RADHASOAMI 🍁🙏



पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...