**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज -रोजाना वाक्यात
- 28 जनवरी 1933- शनिवार:-
दयालबाग में शू फैक्ट्री तो अर्सा से है लेकिन टैनरी नहीं है। अब टेनरी का काम शुरू करने का बंदोबस्त हो रहा है। लोगों की राय है कि एक कारखाना विस्तृत पैमाने पर भी होना चाहिये। क्योंकि छोटे-छोटे कारखाने तो बहुत से है। लेकिन चमडे की रंगाई का काम बड़ा गंदा होता है। इसलिए बस्ती से दूर फासले पर इंतजाम करना होगा । आज मिस्टर वातिल फिर आये थे । उनकी यथावत राय है कि टैनरी के लिए आगरा से ज्यादा उपयुक्त कोई दूसरा मुकाम नहीं है। और तजुर्बा भी यही बतलाता है। इस साल 1 फरवरी के आखिर तक दयालबाग फैक्ट्री से अंदाज में ₹110000 का माल तैयार होकर विक्रय है हो जायेगा । सत्संगियों को मालिक अहले हिंद की चरन सेवा देना चाहता है। हमें पसोपेश न कलनी चाहिये। अमेरिका के एक अखबार से मालूम हुआ कि कुस्तुन्तुनिया की जामामस्जिद में तुर्की जबान में कुरान मजीद को पढ कर सुनाया गया। अहालियाने कुस्तुन्तुनिया के लिए यह पहला मौका था कि अरबी के बजाय तुर्की जबान में अपनी मजहबी पुस्तक का पाठ सुनें। लिखता है की तिलावत का ऐसा जबरदस्त असर हुआ कि हजारों मर्द व औरत जोश में भर आये और चहार तरफ प्रेम लहर लहराने लगी। मुखबिर( सूचना देने वाला) यह खबर देकर नतीजा निकालता है कि इस प्रदर्शन से साफ हो जाता है कि टर्की ने इस्लाम का बदस्तूर अधिकार कायम है और तुर्क आबादी बदस्तूर अल्लाह व रसूल में ईमान रखती है। अलबत्ता पाखंडियों के पाखंड का खात्मा हो गया है। रात के सतसंग से पहले अंग्रेजी फिर हिंदी जबान में राधास्वामी मत के साधन बयान किये गये। ।. 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
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