Thursday, January 8, 2015

क्षत विक्षत हो रहा है ऐतिहासिक उमगा का सूर्य मंदिर, पढ़े


धवस्त होने के कगार पर है


जिला प्प्रशासन एवं पर्यटक विभाग के लापरवाही का भेट चढ़ सकता है यह मंदिर

खे तस्वीरों में कैसे धवस्त होने के कगार पर पहुँच गया है मंदिर का गुम्बद
धीरज पाण्डेय

औरंगाबाद के ऐतिहासिक , पौराणिक एवं धार्मिक द्रिस्टीकोण से अति महत्वपूर्ण एवं मदनपुर प्रखंड के उमगा पहाड़ी पर अवस्थित सूर्य मंदिर इन दिनों धीरे धीरे ध्वस्त होने के कगार पर है , बताते चले की इस सूर्य मंदिर के पत्थरो पर यूँ कहे तो पूरे मंदिर पर ही छोटे छोटे पौधे उग आये है और मंदिर के गुम्बद के पास की पत्थर धीरे धीरे अपनी जगह को छोड़कर हट रही है जिससे मंदिर के गुम्बद गिरने की सम्भावना बढ़ गई है , जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार द्वारा इसके विकास एवं इसकी सौंदर्यीकरण के लिए कई बार घोषनाये की है मगर आज तक उसको अमली जाम नहीं पहनाया गया है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है की पुरातत्व विभाग , पर्यटन बिभाग एवं जिला प्रशासन ने इसकी कभी लेनी की कोशिस भी नहीं की जिसके कारण उमगा मंदिर का अस्तित्व खतरे में पड़ा हुआ है , बताते चले की पिछले दिनों देव सूर्य मंदिर के पिछले हिस्से से पत्थर का एक टुकड़ा टूट जाने से जिला पप्रशासन एवं न्यास समिति की नींद उड़ गई थी , लेकिन यहाँ तो मंदिर के गुमबद ध्वस्त होने के कगार पर पहुँच चूका है। अब सवाल यह उठता है की आखिर इस मंदिर का काया कल्प होगा भी या धीरे धीरे यह अपने अस्तित्व को खो देगा।
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Tuesday, January 6, 2015

उमगा का सूर्य मंदिर / गर्भ गृह में भगवान विष्णु लक्ष्मी मां और गणेश





ऐतिहासिक है उमगा का सूर्य मंदिर - पार्ट -२
गर्भ गृह में भगवान विष्णु , माता लक्ष्मी श्री गणेश के साथ है विराजमान , करे आप भी दर्शन
धीरज पाण्डेय
ऐतिहासिक , धार्मिक , पौराणिक द्रिस्टीकोण से अति महत्वपूर्ण उमगा की पहाड़ी जहाँ कण कण में बसते है भगवान , क्योकि जैसे ही आप पर्वत पर जायेंगे तो मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही ठीक सामने भगवान विष्णु जो अष्टदल कमल पर विराजमान है साथ ही उनकी बाई ओर माता लक्ष्मी एवं दाई ओर प्रथम पुजय्नीय भगवान श्री गणेश की प्रतिमा विराजमान है। गर्भ गृह के बाहर अर्थात मंदिर के अंदर ही भगवान भोलेनाथ स्वयं नटराज के रूप में विराजमान है एवं मंदिर के कोने कोने में भगवान श्री राम माता जानकी एवं भाई लक्ष्मण के साथ विराजमान है , साथ की भगवान गणेश एवं विष्णु सहित कई देवी देवताओ की मूर्तियां विराजमान है ,
आगे पढ़े , जहाँ कण कण में है भगवान -
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उमगा का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर


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 धीरज पाण्डेय
ऐतिहासिक , धार्मिक , पौराणिक द्रिस्टीकोण से अति महत्वपूर्ण उमगा का सूर्य मंदिर अपनी भव्यता , कलात्मकता एवं महता के कारण औरंगाबाद ही नहीं बल्कि बिहार के कोने कोने में इसकी प्रसिद्धि व्यापत है। दंतकथा के अनुसार देवशिल्पी भगवान विष्वकर्मा ने एक रात्रि में तीन मंदिरो का निर्माण किया था , जिसमे देव का सूर्य मंदिर , देवकुंड का मंदिर एवं उमगा का सूर्य मंदिर है। यह मंदिर पहाड़ के उचाईयो पर होने के कारण इसकी आकर्षकता एवं भव्यता बढ़ जाती है ,यह मंदिर अपने आप में इतिहास को समेटे हुई है।
इस मंदिर से जुडी खबर क्रमबद्ध जारी रहेगी -
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Sunday, December 14, 2014

सुरत शब्द योग





प्रस्तुति-- राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा

सुरत शब्द योग एक आंतरिक साधन या अभ्यास है जो संत मत और अन्य संबंधित आध्यात्मिक परंपराओं में अपनाई जाने वाली योग पद्धति है। संस्कृत में 'सुरत' का अर्थ आत्मा, 'शब्द' का अर्थ ध्वनि और 'योग' का अर्थ जुड़ना है। इसी शब्द को 'ध्वनि की धारा' या 'श्रव्य जीवन धारा' कहते हैं।[1]. शरीर में शारीरिक, मानसिक और आत्मिक बोध-भान होते हैं। इनसे अलग एक और तत्त्व है जो इन सब का साक्षी है जिसे सुरत, चेतन तत्त्व चेतना, या चेतनता कहा गया है। सृष्टिक्रम में वही सुरत क्रमश: शब्द, प्रकाश (आत्मा), मन और शरीर में आ जाती है। सुरत का सहज और स्वाभाविक तरीके से इसी मार्ग से लौट जाना सुरत शब्द योग का विषय और प्रयोजन है।[2] सुरत को परम तत्त्व भी कहा गया है। जीवन के रचना क्रम में हिलोर पैदा होने पर सुरत और शब्द दो हस्तियाँ बन जाती हैं और जीवन का खेल प्रारंभ होता है। सुरत में शब्द (ध्वनि) की ओर आकर्षित होने का स्वाभाविक गुण है। यह सुरत शब्द योग का आधार सिद्धांत है।[3].

यह भी देखें

संदर्भ

  1. Singh, K., Naam or Word. Blaine, WA: Ruhani Satsang Books. ISBN 0-942735-94-3, 1999; BOOK TWO: SHABD, The Sound Principle.
  2. {{cite book |title=संत मत और आत्मानुभूति |author= दयाल फकीर चंद |editor=डॉ॰आई. सी. शर्मा |publisher=मानवता मंदिर होशियारपुर |year=1988 |page=177 and 178 |language=Hindi
  3. भगत मुंशीराम (2008) (हिंदी में). संत मत (दयाल फकीर मत की व्याख्या). कश्यप पब्लिकेशन. प॰ 49. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788190550147.

राधास्वामी के गुरू की संत वाणी


प्रस्तुति-- राजेन्द्र प्रसाद, उषा रानी 

आगरा। वृंदावन की कुंज गलियों से निकले राधा-कृष्ण के बोल तो सबको निहाल करते हैं। परंतु आगरा की ऐसी गली के बारे में कुछ ही लोगों ने सुना है। यह है प्राचीन पन्नी गली। सबसे पहले यहीं से झंकृत हुई थी राधास्वामी मत की ध्वनि, जो आज पूरे विश्व में गुंजायमान है। देश-विदेश में इसके कई करोड़ अनुयायी सत्संगी हैं।
कश्मीरी बाजार की इस गली में प्रवेश करने के बाद कुछ दूरी पर दायीं ओर यह सत्संग भवन है। इसके ऊपरी कक्ष में राधास्वामी मत के संस्थापक कुल मालिक परम पुरुष पूरन धनी स्वामीजी महाराज [शिवदयालजी महाराज] का जन्म 24 अगस्त 1818 को हुआ। बचपन से ही उनका मन सुरत साधना योग में लगने लगा। वह इस भवन में सत्संग करने लगे। इस सत्संग को उन्होंने राधास्वामी नाम दिया। इसी दौरान उनके कुछ शिष्य बन गए। इनमें से उनके चयनित शिष्य यहां नियमित आते। उन्हें प्रेम, शांति और सद्भावना का संदेश दिया जाता।
धीरे-धीरे इस मत के अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी। आखिर इस मत के द्वितीय गुरु परम पुरुष पूरन धनी हजूर महाराज [राय बहादुर सालिगराम महाराज] की विशेष प्रार्थना पर स्वामीजी महाराज ने इसी भवन के आंगन में 15 फरवरी 1861 में इस मत को आम जनता के लिए शुरू किया। बाद में स्वामीजी महाराज ने इसी भवन में सन् 1878 ई. में अपना चोला छोड़ दिया। इनकी समाधि स्वामी बाग में है, जहां भव्य स्मारक निर्माणाधीन है। जबकि हुजूर महाराज की पवित्र समाधि पीपलमंडी के हुजूरी भवन में है। वहां वर्तमान गुरु दादाजी महाराज [डॉ.अगम प्रसाद माथुर] द्वारा जगत कल्याण के लिए नियमित प्रवचन दिए जाते हैं।
प्रतिदिन होता है सत्संग
पन्नी गली के इस सत्संग भवन के सेवादार नत्थी प्रसाद और लाल बहादुर ने बताया कि यहां प्रतिदिन प्रात: सत्संग होता है। इसके अलावा प्रत्येक गुरुवार को बड़ा सत्संग होता है। स्वामीजी महाराज के जन्म दिवस जन्माष्टमी पर भव्य एवं विशाल सत्संग यहां किया जाता है, जिसमें देश-विदेश से सत्संगी आते हैं।
प्राचीनता की झलक
जिस कक्ष में स्वामीजी महाराज का जन्म हुआ था, वहां उनका चित्र रखा हुआ है। ऊपरी मंजिल पर सत्संग भवन है, वहां स्वामीजी महाराज की चरण पादुकाएं रखी हुई हैं। जहां नियमित सत्संग होता है। भवन की देखरेख अचल सरन सेठ और प्रीतम बाबू के निर्देशन में होती है। इस भवन में व्यवस्था दुरुस्त है, लेकिन इसकी प्राचीनता को ज्यों का त्यों रखा गया है।
तीव्र गति से बढ़ा मत
स्थापना के बाद इस मत का तेजी से विस्तार हुआ। इसकी शाखाएं बढ़ती गईं। सबसे अधिक मजबूत और विस्तृत है राधास्वामी व्यास शाखा, जिसके 500 से अधिक सत्संग केंद्र हैं। इसके 50 लाख से ज्यादा अनुयायी देश-विदेश में हैं। आदि केंद्र हजूरी भवन, पीपलमंडी के लाखों अनुयाई देश-विदेश में हैं। स्वामी बाग में प्रतिदिन सत्संग होता है, इनके भी बेशुमार अनुयायी हैं। राधास्वामी सत्संग सभा, दयालबाग का अपना अलग अस्तित्व है। इसके गुरु, प्रो. पीएस सत्संगी शैक्षिक और आध्यात्मिक संदेश देते हैं। इसके अलावा अन्य शाखाएं भी हो गयी हैं। जितनी भी शाखाएं इस मत की हैं, सभी का केंद्र बिंदु पन्नी गली का यह सत्संग और हजूरी भवन है।
क्या है मत का आधार
इस मत का मुख्य आधार सुरत शब्द योग है, जो एक आंतरिक साधना या अभ्यास है। यह संत मत और आध्यात्मिक परंपरा में अपनाई जाने वाली योग पद्धति है। संस्कृत में सुरत का अर्थ आत्मा, शब्द का अर्थ ध्वनि और योग का अर्थ जुड़ना है। इसी शब्द को ध्वनि की धारा या श्रव्य जीवन धारा कहते हैं। इसके आधार पर सत्संगियों को सुरत शब्द का संदेश दिया जाता है।

सूर्य मंदिर में माँ काली में क्या है विशेषताएं



 
 
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जानिये सूर्य मंदिर में कहाँ है माँ काली और क्या है विशेषताएं
 देखे तस्वीरों में माँ महाकाली
क्या आप जानते है , की देव सूर्य मंदिर में कहाँ है माँ काली का स्थान अगर नहीं तो मै आपको बताता हूँ की देव सूर्य मंदिर में प्रवेश द्वार के बाद गर्भ गृह में जाने वाली मुख्य द्वार के दाहिनी ओर दीवाल पर है माँ काली के दिव्य स्वरुप की मूर्तियां , माँ काली के इस दिव्य स्वरुप का भक्तो को होता है सबसे पहले मुख्य द्वार पर दर्शन। भगवान सूर्य के एग्यारहवे रूप त्रिमूर्ति के दर्शन से पहले अर्थात गर्भ गृह में प्रवेश करने से पहले माँ काली के दर्शन करने से होता है शत्रुओ का नाश।

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Saturday, December 6, 2014

द ग्रैंड डिजाइन’ vs ब्रंह्मांड का सृजक कौन ?







प्रस्तुति-- डा.ममता शरण, कृति शरण, ,सृष्चि शरण
महान भौतिकविद् स्टीफन हॉकिंग ने हाल में कहा है कि ब्रह्मांड की संरचना में भगवान या ईश्वर का कोई हाथ नहीं, बल्कि उसका अस्तित्व भौतिकी या प्रकृति के बुनियादी नियमों के एक विशेष प्रक्रिया में काम करने के कारण हुआ था। उनका यह बयान उनकी शीघ्र प्रकाशित पुस्तक ‘द ग्रैंड डिजाइन’ के आगमन से पहले आए हैं।

जैसा कि नाम से जाहिर है, द ग्रैंड डिजाइन से आशय समूची सृष्टि या इस ब्रह्मांड की संरचना से है, उसके अस्तित्व में आने से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया से है। कहना न होगा कि हॉकिंग का यह बयान अपने आप में चौंकाऊ भी है और विवादस्पद भी क्योंकि इनसान की आस्था से जुड़े मुद्दों पर सवालिया निशान उठाने पर जवाब में विरोधी स्वर अधिकाधिक मुखर हो जाते हैं।
बिग बैंग से बना ब्रह्मांड
बिग बैंग यानी ब्रह्मांडीय महाविस्फोट वह घटना है, जिससे हमारे ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है। बिग बैंग थ्योरी ब्रह्मांड के शुरुआती विकास पर रोशनी डालती है। इस थ्योरी के मुताबिक बिग बैंग की घटना करीब 13.7 अरब वर्ष पहले हुई थी। यह अनुमान 2009 तक की गई गणनाओं के आधार पर लगाया गया है। बिग बैंग मॉडल के मुताबिक ब्रह्मांड शुरुआती अवस्था में बहुत ही गरम और घना था, जिसका तेजी से विस्तार हुआ। फैलने के बाद ठंडा होकर वह मौजूदा अवस्था में पहुंचा। आज भी यह फैल रहा है।

सत्य की पड़ताल
आज हम यहां बात करेंगे हॉकिंग की और उनके द्वारा बताए गए उन कारणों की जिनकी रोशनी में उन्होंने सृष्टि संरचना संबंधी ऐसा बयान दिया। इसमें कोई शक नहीं कि स्टीफन हॉकिंग बीसवीं सदी के महान वैज्ञानिक हैं। उनकी 1988 में प्रकाशित पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ उन्होंने समय की शाश्वत शक्ति के बारे में अति साधारण शैली में पाठकों के सामने ब्रह्मांड और उसके अनेक रहस्यों को रखा था।

यह कुछ ऐसे सवाल थे जिनके बारे में आदिकाल से लेकर आधुनिक विज्ञान के साथ दिमागी मशक्कत करने वाला मनुष्य जूझता आया था, लेकिन इसके जवाब आज तक मनुष्य के सामने नहीं आए थे। अपनी नई पुस्तक में हॉकिंग ब्रह्मांड के अस्तित्व संबंधी कुछ इन्हीं सवालों से दो-चार होंगे।
दरअसल, ग्रैंड डिजाइन या सृष्टि संरचना की एक सर्वमान्य थ्योरी पर अल्बर्ट आइंसटीन ने भी अपने जीवन के अंतिम तीस वर्ष लगाए थे, लेकिन वह किसी पुख्ता नतीजे पर नहीं पहुंच सके थे। हॉकिंग ने इसी दिशा में कुछ प्रयास किए हैं। लिहाजा प्रश्न उठते हैं यह ब्रह्मांड कैसे बना, हम यहां क्यों हैं, क्या सृष्टि सृजन का ग्रैंड डिजाइन उस आदिसत्ता के कारण है जिसे हम ईश्वर कहते हैं या विज्ञान के पास इस संबंध में कुछ अन्य विचार हैं? सत्य क्या है?
द ग्रैंड डिजाइन में ब्रह्मांड संबंधी रहस्यों पर सबसे हालिया विमर्शो को बेहद सरल भाषा में शामिल किया गया है। इसमें मॉडल आधारित यथार्थवाद से जुड़े नए विचारों को जगह मिली है - जिसका मतलब कि सत्य का कोई एक रूप नहीं होता। इसके साथ ही इसमें ‘मल्टीवर्स’ या बहु-ब्रह्मांडों के कन्सेप्ट पर भी सामग्री है। मल्टीवर्स यानी हमारे इस ब्रह्मांड जैसे अनेक अन्य ब्रह्मांड जो सब एक साथ अस्तित्व में आए थे।
साथ ही एक अन्य विचार जिसमें कहा गया है कि ब्रह्मांड का कोई एक इतिहास नहीं, बल्कि हरेक संभावित इतिहास की शाखाएं मौजूद हैं। इसमें एम-थ्योरी पर कई बेहतरीन आकलन भी किए गए हैं और गौर किया गया है कि क्या यह वही थ्योरी है जिसकी तलाश में आइंस्टीन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा लगा दिया था।
हॉकिंग, तब और अब
स्टीफन हॉकिंग ने अपनी पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ के अंत में ईश्वर पर कुछ देर के लिए अपने विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने लिखा था कि यदि वैज्ञानिक प्रकृति के बुनियादी नियमों को तलाश लेते हैं तो ‘हमें ईश्वर के मस्तिष्क का पता चल सकता है’।
अब वैज्ञानिक जिस एम-थ्योरी की बात कर रहे हैं, वह फंडामेंटल पार्टिकल्स और ऊर्जा के बारे में विस्तृत तौर पर समझाती है और संभवत: ब्रह्मांड उत्पत्ति के बारे में भी बता सकती है। यदि यह थ्योरी अपनी घोषणाओं को प्रयोग के जरिए साबित करने में सफल रहती है तो यह उत्पत्ति के सभी धार्मिक विचारों को पलट कर रख सकती है। कहना न होगा कि हॉकिंग के असाधारण मस्तिष्क में यह काम हो चुका है।
प्रो. हॉकिंग अब अपनी नई पुस्तक में कहते हैं कि कॉम्पलेक्स थ्योरेटिकल फिजिक्स केआधार पर बनी थ्योरी जिसे एम-थ्योरी भी कहते हैं, ज्ञात ब्रह्मांड की हर चीज को एक्सप्लेन करेगी। हॉकिंग का कहना है कि मनुष्य जो कि खुद प्रकृति केमूलभूत कणों का संकलन है, हमें और हमारे ब्रह्मांड को शासित करने वाले नियमों को समझने के बहुत करीब पहुंच गया है। यह नि:संदेह एक बड़ी सफलता है।
क्या है एम-थ्योरी
अल्बर्ट आइंसटीन एम-थ्योरी को खोजने की कोशिश कर रहे थे। आखिर यह एम-थ्योरी क्या है? यदि हम गैर तकनीकी तौर पर बात करें तो यह ब्रह्मांड के मूलभूत पदार्थ के बारे में एक आइडिया को व्यक्त करती है। यह दरअसल पार्टिकल फिजिक्स की एक थ्योरी है, जिसमें एक 11 आयाम वाले ब्रह्मांड की बात की गई है, जिसमें कमजोर और मजबूत बल तथा ग्रेविटी एकीकृत हैं। एम-थ्योरी स्ट्रिंग थ्योरी का विस्तार है, जिसमें ब्रह्मांड के सारे 11 आयामों की पहचान की गई है। स्ट्रिंग थ्योरी यह कहती है कि उप-आणुविक कण एक आयाम वाले स्ट्रिंग अथवा तार की तरह हैं।

पुरानी बहस
दरअसल, विज्ञान और धर्म के मध्य तनाव तभी से शुरू हो गया था जब विज्ञान का उदय हुआ था। पिछली सदियों के बजाय अब यह तनाव फिर भी कम नजर आता है, लेकिन हॉकिंग के बयान से इस बहस को फिर बल मिल सकता है, क्योंकि इस विषय पर बयान देने वाले वैज्ञानिक अधिकांश जीव उत्पत्ति प्राणि विज्ञान और भौतिकी के ही क्षेत्र में काम करते हैं। ब्रह्मांड और जीवन की उत्पत्ति दरअसल ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें विज्ञान और धर्म के विचार कई स्थानों पर आपस में टकराते हैं। लेकिन क्या यह एक दूसरे के विकल्प हैं? या क्या दोनों के बीच कभी कोई गंभीर विमर्श हो सकता है, इसे देख जाना अभी शेष है।

विज्ञान अपनी ही पुरानी थ्योरियों की मरम्मत कर के प्रगति की सीढ़ियां चढ़ता है। शर्त यही है कि थ्योरी चाहे कितनी भी मौलिक हो, प्रयोग के दौरान उसमें कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। किसी भी अन्य मानवीय गतिविधि की तरह विज्ञान की अपनी कमियां भी हैं, लेकिन सृष्टि को समझने में उसकी महत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता।
न्यूटन को चुनौती
प्रो. हॉकिंग ने 9 सितंबर को प्रकाशित हो रही अपनी पुस्तक में फिजिक्स के जनक माने जाने वाले सर आइजक न्यूटन की इस धारणा को चुनौती दी है कि ब्रह्मांड का सृजन अवश्य ही भगवान ने किया होगा क्योंकि इसकी उत्पत्ति अराजकता के बीच नहीं हो सकती। अपनी नवीनतम पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि 1992 में हमारे सौरमंडल से बाहर एक सूर्य जैसे तारे के इर्दगिर्द चक्कर लगाने वाले ग्रह की खोज से उन्हें न्यूटन के उक्त विचार को खारिज करने में मदद मिली है।
द ग्रैंड डिजाइन, जिसके सहलेखक अमेरिकी फिजिसिस्ट लेओनार्ड म्लॉडीनॉव हैं, लगभग एक दशक बाद हॉकिंग की पहली पुस्तक है। इस पुस्तक में आधुनिक भौतिकी (क्वैंटम मैकेनिक्स, जनरल रिलेटिविटी, मॉडर्न कॉसमोलॉजी) के विकास के चित्रण के अलावा इसमें बहु-ब्रह्मांडों (मल्टीवर्स) के बारे में भी अटकलें लगाई गई हैं।
(इनपुट मु. व्या.)
एलियंस के अस्तित्व को माना
प्रो. हॉकिंग, जो कंप्यूटर जनरेटेड वायस सिंथेसाइजर के जरिए बात करते हैं, न्यूरो मस्कुलर डिस्ट्राफी से पीड़ित हैं, जिसकी वजह से वे पूरी तरह से पैरालाइज्ड हो चुके हैं। लेकिन शारीरिक विकलांगता के बावजूद वे ब्रह्मांड ब्रह्मांड और भौतिकी पर विचारोत्तेजक और बेबाक टिप्पणियां करते रहे हैं।
पिछले अप्रैल में एक डाक्युमेंटरी सेरीज में उन्होंने एलियंस के अस्तित्व स्वीकार करके पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था। उन्होंने कहा था कि यह सोचना एकदम तर्कसंगत है कि ब्रह्मांड में कहीं बुद्धिमान जीवन मौजूद है। हॉकिंग ने इससे भी आगे बढ़कर यह टिप्पणी कर डाली कि परग्रही जीव खानाबदोश बनकर विशाल अंतरिक्षों से धरती पर आ सकते हैं और हमारे ग्रह को उपनिवेश बनाकर हमारे संसाधन लूट सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि हमें एलियंस से संपर्क करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना एक बहुत बड़ा जोखिम होगा।
प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग के बयान में यों कुछ नया नहीं है। भगवान में आस्था में भी कुछ गलत नहीं क्योंकि इससे आपसी सौहार्द मजबूत होता है, जो कि किसी भी समाज में होना भी चाहिए। हॉकिंग ने मूलत: सृष्टि के नियमों के बारे में बात की है और उसे तोड़-मरोड़ कर पेश करना ठीक नहीं होगा। हमें इसके असली मतलब को समझने की कोशिश करनी चाहिए। वैसे ब्रह्मांड संरचना के बारे में अभी ज्यादा कुछ नहीं जाना जा सका है, खोज अभी जारी है। लिहाजा, हॉकिंग के बयान मूल तात्पर्य को समझना जरूरी है।
प्रोफेसर यशपाल, वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद्

पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...