+++++++++++++++±+++++++
+++++++++++++++±+++++++
*Be an early riser and be economical, industrious, truthful, kind and considerate, a good citizen and a true bhakta of Huzur Ra dha sva aah mi Dayal.*
*If you want to eat you must sweat first. If you want* *self-government, you must learn to govern yourself first.* *If you want to deserve anything you must learn to serve others.*
*Waste nothing has been an important principle of my life. I have always advised men and women, young and old alike to see that they do not their time, energy, thought, wealth, food, clothing, in short anything they possess lest they find* *themselves in want of them at the time of need.*
*I also consider waste as nothing short of sin.*
*A community which wishes to go ahead with its work must remain united in purpose, thought and action.* *It must also conserve all its resources of men, money and materials and exercise forethought and arrange for the fulfilment of its aims in good time.* *This can be possible only if every member of the community contributes his or her best effort towards the attainment of the community's ideal.*
*Discipline, self-sacrifice and hard sustained work are not only very helpful in this endeavour but are very essential.(PARAM GURU HUZUR MEHTAJI MAHARAJ)*
*सुबह हो या शाम,खेतो का काम, करते ही रहना तुम लेकर रा धा स्व आ मी नाम।। मेहनत और लगन से धार के तन मन धन तेरे,सुबहो से तुम सुमिरन करना ,करना हर एक काम।। सुबह हो या शाम•••••• याद कभी आयेगी तुमको मेहताजी महाराज की,खिंच जायेगा अंतर में मन होंगे घट में उनके दर्शन-2, सुबहो से तुम सुमिरन करना करना हर एक काम।। सुबह हो या शाम खेतो का काम करते ही रहना तुम लेकर रा धा स्व आ मी नाम।।*
धनिया पत्ता खाने के क्या फायदे है ?
🏝🏝🏝🏝🏝🏝🏝
😊😊🌹🌹🙏🌹🌹
*अर्थ:* पिछले जन्म में किए हुए पाप के कारण ही मनुष्य को भगवान की चर्चा उसी प्रकार अच्छी नहीं लगती जिस प्रकार ज्वर (बुखार) से ग्रस्त किसी रोगी को भूख नहीं लगती।
〰️〰️🌼〰️〰️
एक सेठ बड़ा धार्मिक था संपन्न भी था। एक बार उसने अपने घर पर पूजा पाठ रखी और पूरे शहर को न्यौता दिया। पूजा पाठ के लिए बनारस से एक विद्वान शास्त्री जी को बुलाया गया और खान पान की व्यवस्था के लिए शुद्ध घी के भोजन की व्यवस्था की गई। जिसके बनाने के लिए एक महिला जो पास के गांव में रहती थी को सुपुर्द कर दिया गया।
शास्त्री जी कथा आरंभ करते हैं, गायत्री मंत्र का जाप करते हैं और उसकी महिमा बताते हैं उसके हवन पाठ इत्यादि होता है लोग बाग आने लगे और अंत में सब भोजन का आनंद लेते घर वापस हो जाते हैं। ये सिलसिला रोज़ चलता है।
भोज्य प्रसाद बनाने वाली महिला बड़ी कुशल थी वो अपना काम करके बीच बीच में कथा आदि सुन लिया करती थी।
रोज की तरह एक दिन शास्त्री जी ने गायत्री मंत्र का जाप किया और उसकी महिमा का बखान करते हुए बोले कि इस महामंत्र को पूरे मन से एकाग्रचित होकर किया जाए तो इस भव सागर से पार जाया जा सकता है। इंसान जन्म मरण के झंझटों से मुक्त हो सकता है।
खैर करते करते कथा का अंतिम दिन आ गया। वह महिला उस दिन समय से पहले आ गई और शास्त्री जी के पास पहुंची, उन्हें प्रणाम किया और बोली कि शास्त्री जी आपसे एक निवेदन है।"
शास्त्री उसे पहचानते थे उन्होंने उसे चौके में खाना बनाते हुए देखा था। वो बोले कहो क्या कहना चाहती हो ?"
वो थोड़ा सकुचाते हुए बोली शास्त्री जी मैं एक गरीब महिला हूँ और पड़ोस के गांव में रहती हूँ। मेरी इच्छा है कि आज का भोजन आप मेरी झोपड़ी में करें।
सेठ जी भी वहीं थे, वो थोड़ा क्रोधित हुए लेकिन शास्त्री जी ने बीच में उन्हें रोकते हुए उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया और बोले आप तो अन्नपूर्णा हैं। आप ने इतने दिनों तक स्वादिष्ट भोजन करवाया, मैं आपके साथ कथा के बाद चलूंगा।"
वो महिला प्रसन्न हो गई और काम में व्यस्त हो गई। कथा खत्म हुई और वो शास्त्री जी के समक्ष पहुंच गई, वायदे के अनुसार वो चल पड़े गांव की सीमा पर पहुंच गए देखा तो सामने नदी है।
शास्त्री जी ठिठक कर रुक गए बारिश का मौसम होने के कारण नदी उफान पर थी कहीं कोई नाव भी नहीं दिख रही थी। शास्त्री जी को रुकता देख महिला ने अपने वस्त्रों को ठीक से अपने शरीर पर लपेट लिया व इससे पहले की शास्त्रीजी कुछ समझते उसने शास्त्री जी का हाथ थाम कर नदी में छलांग लगा दी और जोर जोर से ऊँ भूर्भुवः स्वः ..... ऊँ भूर्भुवः स्वः बोलने लगी और एक हाथ से तैरते हुए कुछ ही क्षणों में उफनती नदी की तेज़ धारा को पार कर दूसरे किनारे पहुंच गई।
शास्त्री जी पूरे भीग गए और क्रोध में बोले मूर्ख औरत ये क्या पागलपन था अगर डूब जाते तो...?"
महिला बड़े आत्मविश्वास से बोली शास्त्री जी डूब कैसे जाते ? आप का बताया मंत्र जो साथ था। मैं तो पिछले दस दिनों से इसी तरह नदी पार करके आती और जाती हूँ।
महिला बोली की आप ही ने तो कहा था कि इस मंत्र से भव सागर पार किया जा सकता है। लेकिन इसके कठिन शब्द मुझसे याद नहीं हुए बस मुझे ऊँ भूर्भुवः स्वः याद रह गया तो मैंने सोचा "भव सागर" तो निश्चय ही बहुत विशाल होगा जिसे इस मंत्र से पार किया जा सकता है तो क्या आधा मंत्र से छोटी सी नदी पार नहीं होगी और मैंने पूरी एकाग्रता से इसका जाप करते हुए नदी सही सलामत पार कर ली। बस फिर क्या था मैंने रोज के 20 पैसे इसी तरह बचाए और आपके लिए अपने घर आज की रसोई तैयार की।"
शास्त्री जी का क्रोध व झुंझलाहट अब तक समाप्त हो चुकी थी। किंकर्तव्यविमूढ़ उसकी बात सुन कर उनकी आँखों में आंसू आ गए और बोले माँ मैंने अनगिनत बार इस मंत्र का जाप किया, पाठ किया और इसकी महिमा बतलाई पर तेरे विश्वास के आगे सब बेसबब रहा।"
"इस मंत्र का जाप जितनी श्रद्धा से तूने किया उसके आगे मैं नतमस्तक हूं। तू धन्य है कह कर उन्होंने उस महिला के चरण स्पर्श किए। उस महिला को कुछ समझ नहीं आ रहा था वो खड़ी की खड़ी रह गई। शास्त्री भाव विभोर से आगे बढ़ गए वो पीछे मुड़ कर बोले मां चलो भोजन नहीं कराओगी बहुत भूख लगी है।"
*🌹
*" घर में है घरेलू दवाघर "*
हल्दी
सोंठ
दालचीनी
लोंग
सोंफ
अजवाइन
काली मिर्च
हल्दी, सोंठ, दालचीनी, लोंग, कालिमिर्च काढ़ा बनाकर ले
हल्दी, सोंठ, दालचीनी, लोंग, कालिमिर्च का काढ़ा बनाकर ले
अजवाइन, सोंफ, सोंठ का पाउडर सोडा मिलाकर ले
अजवाइन सोंफ को उबालकर निम्बू डॉलेकर ले
सोंफ, सोंठ को खांड से ले
अजवाइन, काली मिर्च, सोंफ को काला नमक से ले
सभी को मिलाकर तेल में गर्म करके मालिश करें
अजवाइन सोंठ को काढ़ा बनाकर पिये
H
सोंफ लोंग को काढ़ा बनाकर खांड से ले
सोंफ मिश्री का काढ़ा ले
सोंठ गुड़ का काढ़ा ले
हल्दी सरसो को गर्म कर लेप करें
हल्दी काली मिर्च सिंधी नमक के गरारे करें एव पिये
सोंठ गुड़ चूसे
सोंठ दालचीनी काली मिर्च का काढ़ा दिन में 3 बार
लांग का कुल्ला करें एव पेस्ट लगाए
लोंग कालिमिर्च हल्दी सोंठ काढ़ा बनाकर प्रत्येक 1 घण्टे में दें
*हल्दी+काली मिर्च का पेस्ट लगाए*
समस्या के अनुसार इनका प्रयोग जल्दी जल्दी भी किया जाता है
इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे तो दूसरों को भी शेयर करना मत भूलना , हो सकता है की आपके इस आर्टिकल से किसी की जिंदगी बच भी सकती है और बदल भी सकती
कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...