Thursday, June 30, 2022

त्यागना ही मोक्ष हैं / कृष्ण mehtav


प्रस्तुति - रेणु दत्ता / आशा सिन्हा


एक बार ठाकुर जी की नाव भवसागर के पार जा रही थी। ठाकुर जी ने कहा:- जिस किसी को बैठना हो बैठ जाए।


अब हम बैठ तो गए, परंतु संसार साथ ले लिया, क्योंकि हम संसारिक प्राणी जो ठहरे। सौ पचास किलोमीटर का सफर तय करना हो तो भी सारी सुविधाएं चाहिएं और यहां तो भवसागर पार जाना है।


इधर ठाकुर जी सोच रहे हैं कि रख लो जो भी रखना है, छुड़वा तो मैं अपने आप दूंगा। थोड़ी देर बाद ठाकुर जी ने जानबूझकर नाव को समुद्री तूफान में फंसा दिया और कहा कि नाव में वजन बहुत ज्यादा है, कुछ कम करो तो नैया पार लगे, अन्यथा यह डूब जाएगी।


अब मरता क्या ना करता, खुद को बचाना है तो सामान फेकना ही पड़ेगा। अब हम लगे इन गोपियों की तरह मटका रूपी संसार त्यागने।


यहां एक बात विचार करने वाली है कि यदि संसार त्यागना ही था तो नाव में बैठने से पहले ही क्यों नही त्याग दिया? कम से कम इतना जो सफर तय किया, वो तो आराम से कट जाता। परंतु हमें तो यह बातें तब समझ में आती हैं जब जान पर बन आती है।


एक बात और इस नाव में केवल आप और ठाकुर जी ही सवार हैं। यदि सामान लेकर चलोगे तो बार-बार घ्यान सामान की ओर जाएगा, अर्थात; आपकी एकाग्रता भंग होगी और जो ठाकुर जी को टकटकी लगाकर देखने का सुख है, वह आप वो नहीं मिल पाएगा।


इसलिए यदि भवसागर से पार जाना है, तो संसार को त्यागना ही पड़ेगा।


हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे


           *।। जय सियाराम जी।।*

             *।। ॐ नमह शिवाय।।*

Tuesday, June 28, 2022

भंडारा 10 जुलाई 2022 क़ो

 *परम  गुरु  हुजूर  डॉ.  एम.बी  लाल  साहब जी  का  पावन  भण्डारा  10  July'  2022  को  मनाया  जाएगा।

अनुमति प्राप्त क्षेत्रों के उपदेश-प्राप्त सतसंगी भाई-बहन सोमवार, 11 जुलाई, 2022 को भेंट देंगे। भेंट की सीमा निम्नवत् रहेगी- (i) भारत की सतसंग ब्रांचों में रजिस्टर्ड उपदेश प्राप्त सतसंगी न्यूनतम 15/- रु. तथा अधिकतम 3,000/- रु. भेंट दे सकते हैं।

(ii) विदेशों की सतसंग ब्रांचों में रजिस्टर्ड उपदेश प्राप्त सतसंगी (अनुमति प्राप्त क्षेत्र) जो दयालबाग़ आयेंगे वे न्यूनतम 150/-रु. तथा अधिकतम 7,500/- रु. भेंट दे सकते हैं।।                              

(iii) अनुमति प्राप्त क्षेत्रों के सतसंगी जिन्हें पैरा 1 के अनुसार दयालबाग़ आने की अनुमति है वे कार्यक्रमानुसार भेंट दे सकते हैं। उन्हें हैल्मेट, मास्क पहनना, हाथों की सफ़ाई व सामाजिक दूरी का पालन करना आवश्यक है।     

 (iv) अनुमति प्राप्त क्षेत्रों के अन्य सतसंगी जो दयालबाग़ नहीं आ सकते हैं वे अपनी भेंट की धनराशि NEFT/ RTGS द्वारा ब्रांच के खाते में जो कि सेक्रेटरी व अन्य दो व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जाता है, ऑनलाइन जमा करेंगे। जो लोग भेंट की राशि ट्रांसफ़र करने में अक्षम हैं वे ब्रांच सेक्रेटरी को नक़द दे सकते हैं।

ब्रांच सेक्रेटरी प्रत्येक "ट्रांज़ेक्शन" की जाँच कर यह देखेंगे कि यह धनराशि निर्दिष्ट नियमानुसार की गई है अथवा नहीं।

 ब्रांच द्वारा एकत्रित की गई भेंट की कुल धनराशि NEFT/ RTGS द्वारा केवल एक transaction से सभा के खाते में जमा करें व Form 'A' सूचि प्रेषित करें, जिससे भेजी गई धनराशि का मिलान हो सके। सभा के खाते का विवरण रीजनल प्रेसीडेन्ट्स को भेज दिया गया है। इस सम्बन्ध में उनसे सम्पर्क करें। (कार्यक्रम व प्रक्रिया अलग से सूचित की जायेगी)।*

*विदेशों के रीजन्स के उपदेश प्राप्त सतसंगी भाई बहन जो भंडारे में शामिल हो सकते हैं किन्तु कोविड-19 के प्रतिबंधों के कारण दयालबाग़ नहीं आ सके हें वे अपनी भेंट की धनराशि अपने रीजनल एसोसिएशन के बैंक एकाउण्ट में ऑन लाइन भेज सकते हैं। रीजनल प्रेसिडेंट, ब्रांच सेक्रेटरी द्वारा भेजी गई भेंट की लिस्ट जाँच करने के बाद उसे अपने बैंक एकाउण्ट में रीजनल स्तर पर उपयोग के लिए स्वीकृत करेंगे।*

*राधास्वामी*

सतसंगियों से निम्बोली लाने का आग्रह

 राधास्वामी 


दयालबाग में फसल की सुरक्षा के लिए जो नीम ऑयल खरीदा जाता था उसके लिए यह हुज़ूरी हुक्म हुआ है कि इसकी जगह एग्रोइकोलॉजी विभाग को निम्बोली और नीम की पत्तियों का इस्तेमाल करना है और नीम का तेल बनाना है।


इस कार्य में ज्यादा मात्रा में निम्बोली की आवश्यकता है।


आप सभी से यह अनुरोध है कि इस भण्डारे पर आने वाले सत्संगी और दयालबाग के आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले सत्संगी अपनी सुविधानुसार अपने साथ जितनी ज्यादा मात्रा में निम्बोली दयालबाग ला सकते हैं लेकर आयें और डेयरी में एग्रोइकोलॉजी विभाग में जमा करवाने का कष्ट करें।


जनरल मैनेजर

एग्रोइकोलॉजी विभाग

राधास्वामी सत्संग सभा

नाम राधा स्व आ मी चित धरत

 *रा धा स्व आ मी!                                                                                                

 28-06-22-आज शाम सतसंग में पढ़ा जाने वाला दूसरा शब्द पाठ:-                               

 नाम रा धा स्व आ मी चित धरता।

  प्रेम की बानी नित पढ़ता॥१॥                                      

चित्त से सतसँग नित करता।

 ध्यान गुरु दरशन में धरता॥२॥                                              

बचन गुरु समझ समझ गुनता।

 शब्द धुन उमँग उमँग सुनता॥३॥                                       

करम और भरम जले अगनी।

 हार कर बैठ रही ठगनी॥४॥                                                

छोड़ मग काल रहा ठाड़ा।

 करम का डाल दिया भाड़ा॥५॥                                                

नाम रा धा स्व आ मी हिये धारा।

 दूत घर पड़ गया अब धाड़ा॥६॥                                                

सुरत और शब्द लिया मत सार।

 धुनन सँग करता नित्त बिहार॥७॥                                       

सरन गुरु हिरदे धार लई।

सुरत मन निज कर शब्द गही॥८॥                                         

 चरन गुरु गुन गाऊँ दम दम।

 अमी रस पियत रहूँ हर दम॥९॥                                             

दया गुरु क्या महिमा कहना।

सरन गह नित्त मगन रहना।।१०।।                                   

 उमँग मन गुरु आरत गाता।

चरन रा धा स्व आ मी हिये ध्याता।।११।।  

  (प्रेमबानी-1-शब्द-113- पृ.सं.433,434)*

रा धा स्व आ मी, ( धुन )

 *🌹🌹

रा धा स्व आ मी,

 रा धा स्व आ मी,

रा धा स्व आ मी,

 रा धा स्व आ मी,

रा धा स्व आ मी,

रा धा स्व आ मी,

रा धा स्व आ मी,

 रा धा स्व आ मी

🌹🌹*

Sunday, June 26, 2022

रोजाना वाक्यतब

 🙏

      राधास्वामी


हम लोगों को आलसपन छोडने के लिए सख्त कोशिश करनी चाहिए, 

सतसंगी भाई बहन अपना बहुत सा समय फिजूल बातों में जाया करने के आदी है, 

हम लोगों को चाहिए कि जब कोई काम ना हो तो सुमिरन ध्यान या पोथी का पाठ किया करें, 

और अगर इन बातों के लिए मौका न हो तो  अपनी तन्दुरुस्ती के लिए सैर ही करने चले जाय, 

गरजेकि अपने मन को  किसी मुफीद काम में लगाये रखना मुनासिब है, 

फिजूल बातें करना या सुस्त पडे रहना या बाजारों में बेमतलब घुमना निहायत मायूव

(बुरी) आदतें है,, 


परम पूज्य हुज़ूर साहब जी महाराज

रोजाना वाकियात डायरी भाग 1 - 18-12-1930

🙏राधास्वामी

Friday, June 24, 2022

परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज- सत्संग के उपदेश

परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज

 सत्संग के उपदेश- भाग -3-(18)


 अगर सत्संगी बढ़ कर सेवा करने का मौका हासिल करने की गरज से दुनिया में बड़ा दर्जा मिलने के लिए प्रार्थना व कोशिश करें तो निहायत जायज   व दुरुस्त है। लेकिन अगर इज्जत ,दौलत व हुकूमत का रस लेने की गरज से प्रार्थना व कोशिश करें तो नाजायज व नामुनासिब है।

जिस शख्स को सच्चे मालिक के दर्शन, सच्ची मुक्ती, और ऊँची से ऊँची रूहानी गति की प्राप्ति के लिए रास्ता मिल गया और जिसने इन बातों को अपनी जिंदगी का उद्देश्य करार दिया उसके लिए दुनिया का रुतबा, दौलत व हुकूमत क्या हैसियत रखते हैं ?

चूँकि हुजूर राधास्वामी दयाल ने स्वार्थ व प्रमार्थ दोनों के कमाने के लिए उपदेश फरमाया है इसलिए सत्संग में स्वार्थ के लिए गुँजाइश निकल आई है वर्ना स्वार्थ की क्या हकीकत कि सच्चे परमार्रथ से आँख मिला सके। इसलिए याद रखना चाहिए कि हरचंद सतसंगी को  स्वार्थ कमाने की इजाजत है लेकिन हर हालत में मुख्यता परमार्रथ ही की रहेगी।                            

🙏🏻 रा धा स्व आ मी🙏🏻


पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...