Wednesday, October 29, 2014

शिल्प कला में अद्वितीय है देव सूर्य मंदिर




 

 

 

प्रस्तुति--  धीरज पांडेय /  ज्ञानेश कुमार पांडेय

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शिल्प कला में अद्वितीय है देव सूर्य मंदिर
 
गंगा भास्कर, देव (औरंगाबाद)। सदियों से श्रद्धा एवं विश्वास का प्रतीक देव सूर्य मंदिर अपनी अनूठी वास्तु एवं शिल्प कला में अद्वितीय है। मंदिर के स्थापत्य में प्रभावशाली अलंकरण उसके अनुपातिक सौम्यता के साथ विद्यमान है। मंदिर के शिल्प एवं स्थापत्य कला से यह जानकारी मिलती है कि मंदिर के निर्माण में उत्तर भारतीय नागर शैली का प्रयोग किया गया है। शिल्प कला में नागर एवं द्रवीड़ शैली के मिश्रित प्रभाव वाली वेसर शैली का समन्वय नजर आता है। मंदिर प्रांगण में कई ऐसी प्रतिमाएं है जिनका शिल्प दर्शनीय एवं अद्भुत है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख से ज्ञात होता है कि त्रेतायुग के राजा एल ने इस मंदिर का निर्माण कराया है। पुरातत्व विभाग मंदिर के शिल्प कला को सोलंकी शैली मानती है।
मंदिर के निर्माण में विद्यमान शिल्प कला से स्पष्टXiuml; होता है कि मंदिर का निर्माण 600 से 1200 ई. के बीच हुआ है। नक्काशीदार पत्थरों को जोड़कर बनाया गया सूर्य मंदिर दो भागों में है। पहला गर्भ गृह जिसके ऊपर कमलनुमा शिखर बना है। दूसरा भाग सामने का मुखमंडप है जिसके ऊपर पीरामिडनुमा छत है। ऐसा नियोजन नागर शैली की प्रमुख विशिष्टXiuml;ता है। उडीसा के मंदिरों में अधिकांश शिल्प कला इसी प्रकार का है। हालांकि उडि़सा के मंदिरों की तरह गर्भगृह की बाहरी भीत रथिकाओं का नियोजन देव सूर्य मंदिर में नहीं दिखता है। देव मंदिर के मुख्य मंडप के दोनो पार्श्Xzwj;वों में बने छज्जेदार गवाह जो आंतरिक एवं ब्राह्यXiuml; भाग को संतुलन स्थापित करता है। ऐसा विकसित कोटि के मंदिरों में देखा जाता है। देव मंदिर के निर्माण में प्रयोग किए गए शिल्प कला उड़ीसा के भुवनेश्वर मंदिर, मुक्तेश्वर मंदिर में नजर आता है। देव मंदिर में जाने के लिए सामान्य ऊंचाई की सीढिय़ां तय कर मुख मंडप में प्रवेश किया जाता है। मुख मंडप आयताकार है जिसकी पीरामिडनुमा छत को सहारा देने के लिए विशालकाय पत्थरों को तराशकर बनाया गया स्तंभ है। गर्भ गृह के अंदर तीन रूपी भगवान सूर्य की प्रतिमा है। ये प्रतिमाएं शिल्प की दृष्टिXiuml;कोण से काफी पुराना प्रतीत होते हैं। मंदिर के सर्वाधिक आकर्षक भाग गर्भ गृह के ऊपर बना कमलनुमा शिखर है जिस पर चढ़ पाना असंभव है। नि:संदेह यह मंदिर इस राज्य की धरोहर व अनूठी विरासत की गौरव गाथा है।

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