Thursday, January 26, 2012

जानिए अपने प्रारंभिक ब्लोगरों को....


गतांक से आगे बढ़ते हुए -


साझा संवाद, साझी विरासत, साझी धरोहर, साझा मंच आप जो मान लीजिये हिंदी ब्लॉग जगत की एक कैफियत यह भी है । विगत तीन कड़ियों में आपने अवश्य ही महसूस किया होगा कि हम इस आलेख के माध्यम से यही बातें पूरी दृढ़ता के साथ आपसे साझा करते आ रहे हैं , कुछ यादों, कुछ इबारतों और कुछ तस्वीरों के मार्फ़त । स्मृतियाँ सदैव सुखद ही होती हैं , वह चाहे जैसी भी हो ।

कहते हैं इतिहास के गर्भ में हमेशा भविष्य के पाँव होते हैं । नींव के पत्थर न हो तो अट्टालिकाएं कहाँ होंगी भला ? यह बात भी हमें मथती ही है । इसी बात के मद्देनज़र हम लगातार आपके साथ गुजरे वक़्त की यादों को साझा कर रहे हैं । तो आईये अपनी साझी विरासत को साझा करने के क्रम में आपसे रूबरू कराते हैं कुछ प्रारंभिक ब्लोगरों से -



पूर्णिमा वर्मन ( वर्ष-२००२ )वेबसाईट:http://www.anubhuti-hindi.org/
पूर्णिमा वर्मन की साइट शुरू हुये ९ साल हो गये। इस लिहाज से उनकी सक्रियता २००२ से मानी जानी चाहिये http://www.nirantar.org/0505-vishesh
इसके अलावा उनका अपना ब्लॉग भी है।
परिचय: जन्म : २७ जून १९५५ शिक्षा : संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि, स्वातंत्र्योत्तर संस्कृत साहित्य पर शोध, पत्रकारिता और वेब डिज़ायनिंग में डिप्लोमा। कार्यक्षेत्र : पीलीभीत (उत्तर प्रदेश, भारत) की सुंदर घाटियों जन्मी पूर्णिमा वर्मन को प्रकृति प्रेम और कला के प्रति बचपन से अनुराग रहा। मिर्ज़ापुर और इलाहाबाद में निवास के दौरान इसमें साहित्य और संस्कृति का रंग आ मिला। पत्रकारिता जीवन का पहला लगाव था जो आजतक साथ है। खाली समय में जलरंगों, रंगमंच, संगीत और स्वाध्याय से दोस्ती। संप्रति : पिछले बीस-पचीस सालों में लेखन, संपादन, स्वतंत्र पत्रकारिता, अध्यापन, कलाकार, ग्राफ़िक डिज़ायनिंग और जाल प्रकाशन के अनेक रास्तों से गुज़रते हुए फिलहाल संयुक्त अरब इमारात के शारजाह नगर में साहित्यिक जाल पत्रिकाओं 'अभिव्यक्ति' और 'अनुभूति' के संपादन, हिन्दी विकीपीडया में योगदान देने और कलाकर्म में व्यस्त।




विनय जैन( वर्ष-२००३)
इनके प्रारंभिक ब्लॉग है :
http://hindi.blogspot.com/
परिचय:हिन्दी चिट्ठा जगत के वासी यहीं के एक और बाशिंदे, हिंदी ब्लॉग वाले विनय जैन से जरूर वाक़िफ होंगे। देखा जाए तो यह हिन्दी का पहला समूह ब्लॉग है, विनय के अलावा आलोक भी इस चिट्ठे पर अपना योगदान देते हैं। विनय हिन्दी भाषा के अखंड उपासक हैं और लो प्रोफाईल रखने में यकीन रखते हैं। विनय ने अक्टूबर 2002 में "हिंदी ब्लॉग" की शुरुआत की थी, उस समय हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में कम ही लोग जानते होंगे, विनय को याद है कि आलोक का ही पहला ऐसा चिट्ठा था जो पूर्णतः हिन्दी में लिखा जाता था। हालाँकि पहला हिन्दी चिट्ठा शायद विनय ने ही लिखा था पर नौ दो ग्यारह को ही वे हिन्दी का प्रथम सम्पूर्ण हिन्दी ब्लॉग मानते हैं। चिट्ठे के अलावा विनय गीतायन तथा मनबोल से भी संबद्ध हैं। गूगल के हिन्दी रूप के अनुवाद कार्य से भी विनय जुड़े रहे हैं।


दीना मेहता ( वर्ष-२००३)
इनके प्रारंभिक ब्लॉग है :http://www.dinamehta.com/
परिचय: दीना मुम्बई स्थित गुणात्मक शोध परामर्शदाता हैं। उन्हें 16 वर्ष का कार्यानुभव है। सामाजिक मीडीया और तकनलाजी में उनका शोध तब प्रारंभ हुआ जब 2003 में उन्होंने अपने ब्लॉग कि स्थापना की। एक शोधकर्ता और खोजी के रूप में दीना की सामाजिक तंत्र सेवाएँ, औज़ार तथा तकनीकों में विशेष रुचि है। इस से आते बदलाव कि परख के लिए वे दुनिया भर के लोगों के साथ बातचीत में मुबतला हैं। दीना वर्ल्ड चेनजिंग और द साउथ-ईस्ट एशिया अर्थक्वेक एंड त्सुनामीज़ ब्लॉग के लिए भी लिखती हैं , किन्तु हिंदी में नहीं अंग्रेजी में ! इस लिहाज से इन्हें हिंदी का ब्लोगर तो नहीं माना जा सकता मगर निरंतर आदि पत्रिकाओं में इनके हिंदी लेख प्रकाशित है इसीलिए यहाँ उल्लेख किया गया ।




देबाशीष चक्रवर्ती ( वर्ष-२००३-२००४ )


इनके प्रारंभिक ब्लॉग है :http://nuktachini.blogspot.com/
जिसे बाद में http://www.debashish.com/ पर स्थानांतरित कर दिया गया ।
परिचय: पुणे स्थित एक सॉफ्टवेयर सलाहकार देबाशीष चक्रवर्ती हिन्दी के शुरुवाती ब्लॉगरों में से एक हैं। वे इंटरनेट पर Geocities के दिनों से सक्रिय रहे हैं, उन्होंने अक्टूबर 2002 में अपना अंग्रेज़ी ब्लॉग नल प्वाइंटर और नवंबर 2003 में हिन्दी चिट्ठा नुक्ताचीनी आरंभ किया। देबाशीष DMOZ पर संपादक रहे हैं। उन्होंने हिन्दी व भारतीय भाषाओं के ब्लॉग पर एक जालस्थल चिट्ठा विश्व भी शुरु किया था, यह हिन्दी व भाषाई ब्लॉग्स का सबसे पहला एग्रीगेटर था। उन्होंने वर्डप्रेस, इंडिक जूमला तथा आई जूमला जैसे अनेक अनुप्रयोगों के हिन्दीकरण में योगदान दिया है। 2005 में उन्होंने इस पत्रिका (जिसे पूर्व में निरंतर के नाम से जाना जाता था) का प्रकाशन अन्य साथी चिट्ठाकारों के साथ आरंभ किया। देबाशीष ने इंडीब्लॉगीज नामक वार्षिक ब्लॉग पुरुस्कारों की स्थापना भी की है। उन्हें बुनो कहानी तथा अनुगूंज जैसे सामुदायिक प्रयासों को शुरु करने का भी श्रेय जाता है। संप्रति ब्लॉग लेखन के अलावा हिन्दी पॉडकास्ट पॉडभारती पर सक्रिय हैं और यदाकदा अंग्रेज़ी व हिन्दी विकिपीडिया पर योगदान देते रहते हैं।




अनूप शुक्ला (२००३-२००४ )


इनके प्रारंभिक ब्लॉग है : http://fursatiya.blogspot.com/ जिसे बाद में इनके द्वारा
http://hindini.com/fursatiya पर स्थानांतरित कर दिया गया ।
परिचय:जन्म: 16 सितंबर, 1963. शिक्षा: बी.ई़.(मेकेनिकल), एम ट़ेक (मशीन डिज़ाइन). संप्रति: भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आयुध निर्माणी में राजपत्रित अधिकारी। इंटरनेट पर नियमित लेखन। आपका हिन्दी चिट्ठा फुरसतिया खासा लोकप्रिय है। अनूप निरंतर पत्रिका के मुख्य संपादक रहे हैं और चिट्ठा चर्चा करते रहते हैं।


रविशंकर श्रीवास्तव(२००३-२००४ )
इनके प्रारंभिक ब्लॉग है :
http://raviratlami.blogspot.com/
परिचय:रविशंकर श्रीवास्तव नामचीन हिन्दी चिट्ठाकार, तकनीकी सलाहकार व तकनीकी अनुवादक हैं। आप मध्य प्रदेश शासन में टेक्नोक्रेट रह चुके हैं। आपने लिनक्स तंत्रांशों के हिन्दी अनुवादों के लिए भागीरथी प्रयास किए हैं। आपने गनोम, केडीई, एक्सएफसीई, डेबियन इंस्टालर, ओपन ऑफ़िस मदद इत्यादि सैकड़ों प्रकल्पों का हिन्दी अनुवाद स्वयंसेवी आधार पर किया है। वर्ष 2007-09 के लिए आप माइक्रोसॉफ़्ट मोस्ट वेल्यूएबल प्रोफ़ेशनल से पुरस्कृत हैं तथा केडीई हिन्दी टोली के रूप में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फॉस.इन 2008 से पुरस्कृत हैं। सराय द्वारा FLOSS फेलोशिप के तहत केडीई के छत्तीसगढ़ी स्थानीयकरण के महती कार्य के लिये, जिसके अंतर्गत उन्होंने 1 लाख से भी अधिक वाक्यांशों का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद किया, रवि को 2009 के प्रतिष्ठित मंथन पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया।


अतानु दे (वर्ष-२००४)


इनके प्रारंभिक ब्लॉग है :
अतानु डे का ब्लॉग दिशा २००४ की इंडीब्लॉगीज़ प्रतोयोगिता में बेस्ट इंडीब्लॉग के पुरस्कार से नवाज़ा गया है। अतानु मैकेनिकल इंजीनियर हैं और कंप्यूटर साईंस में स्नात्तकोत्तर। तकरीबन 6 साल उन्होंने सिलिकॉन वैली में ह्यूलेट पैकार्ड के लिये उत्पाद विपणन का कार्य किया। पाँच साल तक भारत, अमरीका और यूरोप की खाक छानी और फिर यह एहसास हुआ कि अर्थशास्त्र के बारे में तो कुछ जानते ही नहीं। तो उन्होंने बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी आफ कैलिफॉर्निया से अर्थशास्त्र पढ़ा और भारतीय दूरसंचार क्षेत्र पर अपना शोधप्रबंध पूरा किया। अपने खाली समय में अतानु शास्त्रीय संगीत सुनते हैं, विपासना ध्यान लगाते हैं, भौतिक विज्ञान पढ़ते हैं, बौद्ध धर्म पर व्याख्यान देते हैं और अपने ब्लॉग पर लिखते हैं। उनकी कवितायें भी प्रकाशित हो चुकी हैं,किन्तु हिंदी में नहीं अंग्रेजी में ! इस लिहाज से इन्हें हिंदी का ब्लोगर तो नहीं माना जा सकता मगर निरंतर आदि पत्रिकाओं में इनके हिंदी लेख प्रकाशित है इसीलिए यहाँ उल्लेख किया गया ।




जीतेंद्र चौधरी ( वर्ष-२००४)
इनके प्रारंभिक ब्लॉग है :http://merapanna.blogspot.com/ जिसे बाद में इनके द्वारा
http://www.jitu.info/merapanna/ पर स्थानांतरित कर दिया गया ।
परिचय:जीतेंद्र चौधरी कुवैत में रहते हैं और लोकप्रिय हिंदी ब्‍लॉगर हैं। जीतू सॉफ्टवेयर और तकनीकी मार्केटिंग से जुड़े हैं लेकिन उनके 'मेरा पन्‍ना' ब्‍लॉग पर कंप्‍यूटर की तकनीकी जानकारी से लेकर भारत के गांव तक की बातें पढ़ने को मिल जाती है। इसके अलावा जीतू हिंदी चिट्ठों के एग्रीगेटर नारद के संचालक हैं।




अतुल अरोरा (वर्ष-२००४ )
इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :http://rojnamcha.aroradirect.com/ जिसे बाद में इनके द्वारा -
http://lifeinahovlane.blogspot.com/ पर स्थानांतरित कर दिया गया ।
परिचय:जन्म: 7 मई 1970¸ कानपुर में। शिक्षा: पीपीएन कॉलेज कानपुर से बीएससी, एचबीटीआई से मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन। कार्यक्षेत्र: फिलाडेल्फिया में एक कंप्यूटर प्रोग्रामर की हैसियत से कार्यरत। सिनेमा¸ भ्रमण एवं फोटोग्राफी में रुचि। शौकिया तौर पर एक ब्लॉग रोजनामचा लिखना शुरू किया¸ जिसमें हल्के–फुल्के विषयों से लेकर राजनीति जैसे गंभीर विषयों पर निजी विचार व्यक्त कर छपास की निजी पीड़ा को बुझाया है। अमेरिका प्रवास में हुए अनुभवों में हास्यमिश्रण कर उन्हें एक छोटी पुस्तक का रूप देने की कोशिश है 'लाइफ इन ए एचओवी लेन' में। इनका हिन्दी चिट्ठा है रोजनामचा जो वर्ष 2004 में इंडीब्लॉगीज़ पुरस्कार से नवाजा़ जा चुका है।




ई-स्वामी (वर्ष-२००४ )
इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :http://eswami.blogspot.com/ जिसे बाद में इनके द्वारा -
http://hindini.com/hindini पर स्थानांतरित कर दिया गया ।
परिचय:ई-स्वामी दरअसल इनका छद्मनाम है और इनके चिट्ठे का नाम भी! इन्दौर, मध्यप्रदेश में जन्मे, पले-बढे। कुछ समय दिल्ली में रहे, फ़िर अमरीका में बस गये। सू़चना-विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त।




पंकज नरूला (वर्ष-२००४)
इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :
http://pnarula.com/
परिचय:मिर्ची सेठ पंकज नरूला की चिट्ठाकारी के प्रति प्रतिबद्धतता का उदाहरण इस बात से भी दिया जा सकता है कि उन्होंने ब्लॉगर पर अपना चिट्ठा प्रारंभ करने के पश्चात जल्दी ही अपनी निजी होस्टिंग की ओर रूख कर लिया। पंकज हिन्दी चिट्ठाजगत से कई अनूठे प्रयासों के प्रणेता रहे हैं, जिनमें चिट्ठाकारों की अपनी चौपाल अक्षरग्राम, सार्वजनिक विकि सर्वज्ञ, ब्लॉग एग्रीगेटर नारद इत्यादि। जब हिन्दी ब्लॉगज़ीन निरंतर की होस्टिंग की बात आई तो पंकज ने सहर्ष इसकी होस्टिंग अपने जालस्थल पर करने का जिम्मा उठाया था। अम्बाला में जन्मे पंकज चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से विद्युत अभियांत्रिकि में स्नातक हैं। पिछले कुछ वर्षों से वे सैन होज़े में सैप कंसलटिंग में कार्यरत हैं। ब्लॉग लेखन के ख्यात माध्यम मूवेबल टाईप एवं वर्डप्रैस का हिन्दी में स्थानीयकरण सम्पूर्ण करने के साथ साथ वे हिन्दी से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर अपनी राय और भागीदारी देते रहते हैं। पंकज अपने चिट्ठों मिर्ची सेठ औऱ बीटा थॉट्स के ज़रिए अपनी बात कहते हैं। भाषा के सौन्दर्य एवं लेखन विन्यास में रुचि रखने वाले पंकज हिन्दी में अपनी बात करने को माँ से बात करने के समान ही मानते हैं। उनके लेखन का लहज़ा हल्का फुलका और मज़ाहिया होता है और यही बात पाठकों को भाती भी है।


संजय बेंगाणी( वर्ष-२००५ )
इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :
www.tarakash.com/joglikhi
परिचय:वर्तमान में ये भारत के अहमादाबाद (कर्णावती) शहर से मीडिया कम्पनी चला रहे हैं , हिन्दी के प्रति मोह राष्ट्रवादी विचारधारा की छाया में पनपा. इन्हें जिस काम में सबसे ज्यादा आनन्द मिलता है वे है अभिकल्पना और वेब-अनुप्रयोगों का हिन्दीकरण. ये रेखाचित्र भी बना लेते हैं और थोड़ा-बहुत लिखने-पढ़ने में भी रूची है.


शशि सिंह ( वर्ष-२००५ )
इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :
http://shashisingh.in/
परिचय:शशि सिंह की लेखनी ने टेलीविजन पर मायावी दुनिया गढ़ने से लेकर, पत्रकारिता में दुनिया की हकीकत बयां करने और फिर चिट्ठाकारी तक का सफर तय किया है। पत्रकारिता की मुख्यधारा छूट चुकी है लेकिन न तो मीडिया से नाता टूटा है और न ही खुद को पत्रकार कहना छोड़ा है। अब खुद को न्यू मीडिया के खांचे में पाते हैं, संप्रति मुम्बई में एक बहुराष्ट्रीय टेलीकॉम कंपनी में प्रबंधक हैं। यहां उन पर मोबाइल पर वेल्यू एडैड सर्विसेज़ के लिए उपयोगी बॉलीवुड व क्षेत्रीय भाषाओं की सामग्री की पहचान और विकास की जिम्मेदारी है। शशि की कर्मभूमि मुम्बई भले हो लेकिन जड़े झारखंड के कोयला खदानों से होती हुई बिहार में सरयू नदी के तीर तक जाती है। भोजपुरी, नागपुरी व हिंदी के अलावा उन्हें पसंद हैं बच्चे। घर में पत्नी व पुत्र वेदांत के अलावा माता पिता व दो छोटे भाई हैं।


जगदीश भाटिया ( वर्ष-२००५ )


इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :http://aaina.jagdishbhatia.com/
परिचय:दिल्ली के जगदीश भाटिया हिन्दी के पुराने चिट्ठाकारों में शुमार हैं. अपने चिट्ठे आईना में हास्य, विचार, अर्थशास्त्र, समाज और राजनीति पर लिखते हैं.




अर्जुन स्वरूप ( वर्ष-२००५ )
इनके ब्लॉग अस्तित्व में नहीं है, किन्तु प्रोफाईल अस्तित्व में है :http://www.blogger.com/profile/4037548परिचय:अर्जुन स्वरूप रिचमंड, अमरीका स्थित बिज़नेस अनालिस्ट हैं। विविध विषयों पर इंडियन इकानॉमी ब्लॉग जैसे स्थापित मंचों पर नियमित लिखते रहते हैं।




अशोक कुमार पाण्डेय ( वर्ष-२००५ )


इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :http://khetibaari.blogspot.com/
परिचय:अशोक कुमार पाण्डेय बिहार के कैमूर जिले में एक कृषक हैं। गांव के विद्यालयों में आरंभिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा पटना व दिल्ली से पूर्ण की। पहले पत्रकारिता से जुड़े, फिर किसानी से। अपने हिन्दी चिट्ठे खेती बाड़ी में वे गांवों व किसानों से संबंधित विषयों पर लिखते हैं।


रमण कौल ( वर्ष-२००५ )
इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :
http://kaulonline.com/uninagari/
परिचय:जन्म: 14 जून 1962 को बांडीपुर, कश्मीर में। शिक्षा: कश्मीर विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक। जॉन्स हॉफ्किन्स यूनिवर्सिटी, बाल्टीमोर में स्नातकोत्तर छात्र। इंटरनेट पर हिंदी का प्रयोग बढ़ाने के प्रयत्नों में कार्यशील। हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेज़ी और मातृभाषा कश्मीरी में चिठ्ठाकारी करते हैं। अपने हिन्दी चिट्ठे 'इधर उधर की' पर विविध विषयों पर लिखते रहते हैं। हिंदी संबंधित विभिन्न चर्चा–समूहों, टीम–ब्लॉग, विकी और बुनो–कहानी जैसे प्रकल्पों में सक्रिय। 'यूनीनागरी' नामक इनके बनाये हिन्दी आनलाईन टाईपराईटर से जाल पर अनेकों ने हिन्दी लिखना सीखा है व सीख रहे हैं। संप्रति मेरीलैंड, अमरीका में रेलवे उपकरण अभिकल्प इंजीनियर।




राकेश खंडेलवाल ( वर्ष-२००५ )
इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :http://geetkalash.blogspot.com/
जन्म १८ मई १९५३ को भरतपुर ( राजस्थान ) में हुआ और प्राथमिक शिक्षा भी भरतपुर में ही हुई। इन्हें घर में उपलब्ध कल्याण के सभी पुराण और विशेषांकों से पढ़ने का व्यसन प्रारंभ से ही लग गया था। भरतपुर की हिन्दी साहित्य समिति में उपलब्ध हज़ारों पुस्तकों ने दिशा निर्देशन दिया और लगभग १२-१३ वर्ष की उम्र में इन्होंने पहली कविता लिखी। भरतपुर की हिन्दी साहित्य समिति हर मास के अंतिम शनिवार को एक कवि सम्मेलन का आयोजन करती थी। वहीं से कविता लिखने का शौक बढ़ता चला गया और आज तक जारी है। इनकी "अमावस का चाँद" शीर्षक से एक पुस्तक भी प्रकाशित हुई है।


प्रत्यक्षा सिन्हा ( वर्ष-२००५ )
इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :
http://pratyaksha.blogspot.com/
परिचय:जन्म: 26 अक्तूबर 1963 को गया, भारत में। सम्प्रति: प्रबंधक वित्त, पॉवरग्रिड आफ इंडिया लिमिटेड, गुड़गांव में कार्यरत। प्रत्यक्षा ने 2006 में लेखन शुरु कया, अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में उनकी कहानियाँ प्रकाशित हुई हैं। कहानियों के एक संकलन "जंगल का जादू तिल तिल" को 2007 में भारतीय ज्ञानपीठ ने प्रकाशित किया है।


डॉ जगदीश व्योम ( वर्ष-२००५ )


इनका प्रारंभिक ब्लॉग है :http://www.jagdishvyom.blogspot.com/
परिचय:जन्म: 1 मई 1960, शंभूनगला, फर्रुखाबाद, उ.प्र. शिक्षा: एम.ए.हिंदी साहित्य में, एम.एड., पीएचडी शोधकार्य: लखनऊ विश्वविद्यालय से 'कनउजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण' पर। भारत की लगभग सभी पत्र पत्रिकाओं में शोध लेख, कहानी, बालकहानी, हाइकु, नवगीत आदि का अनवरत प्रकाशन। आकाशवाणी दिल्ली, मथुरा, सूरतगढ़, ग्वालियर, लखनऊ, भोपाल आदि केंद्रों से कविता, कहानी, वार्ताओं का प्रसारण। शोधग्रंथ 'कनउजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण' के लिए 'प्रकाशिनी हिंदी निधि,कन्नौज' द्वारा सम्मानित। 'नन्हा बलिदानी' बाल उपन्यास के लिए पांच पुरस्कार। संप्रति केंद्रीय विद्यालय एस.पी.एम, होशंगाबाद, म.प्र. में पी.जी.टी. हिंदी पद पर कार्यरत। प्रकाशित कृतियां: काव्य संग्रह:– इंद्रधनुष,भोर के स्वर। शोध ग्रंथ:– कन्नौजी लोकगाथाओं का सर्वेक्षण और विश्लेषण, कन्नौजी लाकोक्ति और मुहावरा कोश। बाल उपन्यास:– नन्हा बलिदानी, डब्बू की डिबिया बाल कहानी संग्रह:– सगुनी का सपना संपादित कहानी संग्रह:– आज़ादी के आस–पास, कहानियों का कुनबा संपादन– हाइकु दर्पण, बाल प्रतिबिंब




अफ़लातून देसाई ( वर्ष-२००६)


इनके प्रमुख ब्लॉग है :http://samatavadi.wordpress.com/
परिचय:वाराणसी निवासी अफ़लातून देसाई समाजवादी जनपरिषद की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष व लोकप्रिय हिन्दी चिट्ठाकार हैं।




उपरोक्त जिनके प्रारंभिक ब्लॉग में डोमेन का पता उल्लिखित है वे अर्थात पंकज नरूला, शशिसिंह, रमन कौल। सभी ब्लॉगरों ने अपनी शुरुआत blogspot से या wordpress से की। इसके बाद अपने डोमेन पर गये। शशि सिंह ने इंडीब्लॉगीस इनाम भी जीता। साथ ही वर्ष-२००४ में ठेलुहा ब्लॉग भी शुरु हुआ था , जिसका पता है-http://www.theluwa.blogspot.com/
.....अभी जारी है

बृहस्पतिवार, 28 अक्तूबर 2010


हिंदी ब्लोगिंग में महिलाओं की स्थिति


महिला ब्लोगरों की बात की जाए तो पूर्णिमा वर्मन, प्रत्यक्षा सिन्हा, सारिका सक्सेना ,नीलिमा, रचना बजाज, सुजाता, निधि श्रीवास्तव, दीना मेहता , रत्ना की रसॊई ,मानोषी चटर्जी , रचना जैसी कई बेहतरीन महिला ब्लॉगर शुरुआती दौर में सक्रिय थीं।इसके अलावा डा० कविता वाचक्नवी भी शुरुआती दौर से ही सक्रिय हैं हिंदी ब्लॉगिंग में । ये सभी वर्ष-२००७ से पूर्व सर्वाधिक सक्रिय महिला ब्लोगर थीं,जबकि बरिष्ठ ब्लोगर रवि रतलामी का मानना है कि "हिन्दी की पहली महिला ब्लॉगर - इन्दौर की पद्मजा थी - जिनके ब्लॉग का नाम था - कही अनकही. यह ब्लॉग अब उपलब्ध नहीं है. शायद पद्मजा ने इसे मिटा दिया है. फिर भी इसे इंटरनेट आर्काइव पर यहाँ - http://web.archive.org/web/*/http://padmaja.blogspot.com/ देख सकते हैं ।


ज्यादातर महिलायें वर्ष-२००७ या वर्ष-२००७ के बाद आयीं हैं और बड़ी सक्रियता से हर क्षेत्र की, हर विषय की बातें पुरसुकून ढंग से कह रही हैं,टिप्पणियों के माध्यम से गर्मागर्म बहसों में भी गंभीरता से हिस्सा ले रही हैं. हालांकि इनकी संख्या पुरुष ब्लॉगरों की तुलना में कम है, मगर जो भी हैं, वे सभी सार्थक ब्लॉगिंग कर रही हैं. आमतौर पर महिला ब्लॉगरों के लेखन में वेबजनित-कूड़ा-कचरा कम ही नजर आता है। ऐसा उनका मानना है ।




प्रांभिक दौर की सशक्त महिला ब्लोगर और मशहूर कवियित्री डा० कविता वाचक्नवी का कहना है कि- " याहू की बंद हो चुकी ब्लॉग सर्विस (याहू ३६० ब्लॉग सेवा ) में मैं सबसे पहले शामिल हुई । सन २००६ के उत्तर मध्य से मेरा `अथ' नाम का वहाँ ब्लॉग था. और भी बहुत लोगों के थे, पूर्णिमा वर्मन जी, प्रोफ़ेसर ऋषभदेव शर्मा जी, रामायण संदर्शन नाम से हमारे ही द्वारा संचालित एक और.... आदि ढेरों ब्लॉग थे. उन दिनों अक्षरग्राम की सेवा हुआ करती थी और सभी लोग उस पर अपनी चर्चाएँ व शंकाएँ, संसाधनों की जानकारी आदि से जुड़े मुद्दों पर संवाद आदि किया करते थे.... यह हमारे ब्लॉग उन दिनों की बात हैं. याहू ने २००७ के अंत में अपनी उस सेवा (याहू ३६० ब्लॉग सेवा ) को बंद करने की घोषणा कर दी थी, और २००८ में उसे बंद कर दिया था. तभी याहू मेष भी आया था. उस पर भी हमने अपना ब्लॉग कुछ समय संचालित किया था. पश्च्चात उस सेवा के भी बंद हो जाने के उपरांत ब्लॉग को स्पेसेज़ लाईव (माईक्रोसोफ्ट की ब्लॉग सर्विस) पर अपना ब्लॉग स्थानांतरित किया (KVACHAKNAVEE.SPACES.LIVE.COM ) पर अभी भी यह ज़िंदा है...!"
वर्ष-२००७ और उसके बाद सक्रिय महिला चिट्ठाकारों में -


हिंदी की प्रमुख महिला ब्लोगर स्वप्न मंजूषा अदा का मानना है कि -"यूँ तो महिलायें सामजिक, आर्थिक, राजनैतिक, हास्य-व्यंग इत्यादि सभी विषयों पर लिखती हैं...कहानी, कविता, ग़ज़ल, उपन्यास इत्यादि विधाओं में भी इनका योगदान ब्लॉग पर है...और ये अपनी नारीगत समस्याएं या उपलब्धिओं पर भी लिखने में कोई कोताही नहीं करतीं ...!"


अंतरजाल की लोकप्रिय कवियित्री रश्मि प्रभा का मानना है कि -"आपको हर विषय पर प्रविष्ठियां मिल जायेंगी नारियों के ब्लॉग पर ,किन्तु महिला ब्लोगरों के लेखन में साहित्यिक झुकाव ज्यादा नजर आता है और पारिवारिक, घरेलू तथा सामाजिक समस्याओं, स्त्री संबंधी समस्याओं पर हमारा लेखन ज्यादा केंद्रित होता है, राजनीतिक, व्यावसायिक मुद्दे पर कम । इसका सबसे बड़ा कारण है कि महिलायें सद्भावानात्मक और सकारात्मक चिंतन को ज्यादा महत्व देती हैं , क्योंकि यही उनकी प्रकृति का सबसे अहम् हिस्सा होता है ...!"


इस विषय पर हिंदी की प्रखर महिला ब्लोगर रश्मि रविजा का मानना है, कि "ब्लोगिंग में महिलाओं को कोई परेशानी का सामना तो नहीं करना पड़ता...पर उन्हें उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता...जगह बनाने में जरा समय लगता है.परज्यादा दिन उनका लिखा लोग नज़रंदाज़ नहीं कर पाते महिलायें आजकल हर विषय पर लिख रही हैं समसामयिक विषयों पर बड़ी गंभीरता से लिख रही हैं...कोई भी विषय अछूता नहीं है...!

वहीं एक और चर्चित महिला ब्लोगर आकांक्षा यादव का मानना है कि- "ब्लॉगिंग के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति बड़ी मजबूत है, वे तमाम विषयों पर अपनी रूचि के हिसाब से लिख रही हैं. तमाम महिला ब्लागर्स तो इससे परे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में भी सक्रिय हैं. पर ब्लाग का एक सबसे बड़ा फायदा है कि यहाँ कोई सेंसर नहीं है, ऐसे में आपको जो चीज अपील करे उस पर स्वतंत्रता से विचार प्रकट सकती हैं. इस क्षेत्र में महिलाओं का भविष्य उज्जवल है, क्योंकि यहाँ कोई रूढिगत बाधाएं नहीं हैं....!"



वहीं हिंदी सशक्त लेखिका और ब्लोगर निर्मला कपिला मानती हैं कि -"यह सही है कि साधन और सूचना की न्यूनता के कारण ब्लोगिंग के प्रारंभिक चरण में महिलायें ज्यादा सक्रिय नहीं थी , किन्तु आज के दौर में महिलायें हिंदी ब्लोगिंग को नयी दिशा देने की ओर उन्मुख है और यह हमारे लिए कम संतोष की बात नहीं है !"





वहीं संगीता पुरी का अपने बारे में कहना है कि- "'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष'की खोज के बाद ज्‍योतिष के रूप में ग्रहों के प्रभाव को दर्शाने की पुरानी विधा के वैज्ञानिक स्‍वरूप से लोगों का परिचय कराने के लिए ब्‍लॉगिंग कर रही हूं .. मैं बालेन्दु दधिची जी के कादंबनी में प्रकाशित आलेख से प्रभावित होकर वर्ष -२००७ के उत्तराद्ध में वार्ड प्रेस पर आई और आजतक पूरी दृढ़ता के साथ सक्रिय हूँ ...!" उल्लेखनीय है कि कादंबनी में प्रकाशित बालेन्दु दधिची के आलेख 'ब्लॉग बने तो बात बने' से प्रेरित होकर ही शशि सिंघल ने भी अपना ब्लॉग बनाया था । एक और प्रमुख महिला चिट्ठाकारा रचना मई २००७ से ब्लॉग पर लिख रही हैं और २००८ से नारी ब्लॉग जो पहला ब्लॉग समूह हैं जहां नारियां अपनी बात कहती हैं को सक्रिय रूप से चला रही हैं ।


किरण राजपुरोहित नितिला का मानना है कि -"महिलाओ के हर विषय में ब्लॉग मोजूद है. उनकी विविधतता में भी रोज बढ़ोतरी हो रही है...!" लखनऊ की रिचा कहती हैं कि -"वैसे आजतक तो कभी किसी का ब्लॉग ये सोच के नहीं पढ़ा की ब्लॉगर महिला है या पुरुष... जो भी अच्छा लगा बस पढ़ लिया...!"


वर्तमान समय में घुघूती बासूती, प्रत्यक्षा , नीलिमा, बेजी, संगीता पुरी, लवली, पल्लवी त्रिवेदी, अदा, सीमा गुप्ता, निशामधुलिका, लावण्या, कविता वाचक्नवी, अनीता कुमार, pratibhaa, mamta, रंजना [रंजू भाटिया ], Geetika gupta, वर्षा, डॉ मंजुलता सिंह, डा.मीना अग्रवाल,Richa,neelima sukhija arora, फ़िरदौस ख़ान, Padma Srivastava, neelima garg, Manvinder, MAYA, रेखा श्रीवास्तव, स्वप्नदर्शी, KAVITA RAWAT, सुनीता शानू , शायदा, Gyaana-Alka Madhusoodan Patel, rashmi ravija, अनुजा, अराधना चतुर्वेदी मुक्ति ,तृप्ति इन्द्रनील , सुमन मीत , साधना वैद , सुमन जिंदल, Akanksha Yadav ~ आकांक्षा यादव, उन्मुक्ति, मीनाक्षी, आर. अनुराधा, रश्मि प्रभा, संगीता स्वरुप, सुशीला पुरी, मीनू खरे,नीलम प्रभा , शमा कश्यप, अलका सर्वत मिश्र, मनीषा, रजिया राज, शेफाली पाण्डेय, शीखा वार्ष्णेय, अनामिका, अपनत्व, रानी विशाल, निर्मला कपिला, प्रिया,संध्या गुप्ता, वन्दना गुप्ता , रानी नायर मल्होत्रा, सारिका सक्सेना, पूनम अग्रवाल , उत्तमा, Meenakshi Kandwal, वन्दना अवस्थी दुबे, Deepa, रचना, Dr. Smt. ajit gupta, रंजना, गरिमा, मोनिका गुप्ता, दीपिका कुमारी, शोभना चौरे, अल्पना वर्मा, निर्मला कपिला, वाणीगीत, विनीता यशश्वी, भारती मयंक, महक, उर्मी चक्रवर्ती बबली , सेहर, शेफ़ाली पांडे, प्रेमलता पांडे, पूजा उपाध्याय,कंचन सिंह चौहान, संध्या गुप्ता , सोनल रस्तोगी, हरकीरत हीर, कविता किरण , अर्चना चाव , जेन्नी शबनम , ZEAL, वन्दना , mala , ρяєєтι , Asha , Neelima , डॉ. नूतन - नीति , सुधा भार्गव, Vandana ! ! ! , Dorothy , पारुल , किरण राजपुरोहित नितिला , नीलम , ज्योत्स्ना पाण्डेय जैसी महिला ब्लागर्स नितांत सक्रिय हैं और अपने अपने क्षेत्र मे बहुत अच्छा लिख रही हैं ।


चिट्ठाचर्चा पर चर्चा करने वाली ब्लॉग जगत की प्रमुख महिला चर्चाकारों में सुश्री नीलिमा, सुजाता, डा0 कविता वाचकनवी और संगीता स्वरुप गीत हैं जिनके द्वारा निरंतरता के साथ विगत २-३-४ वर्षों से पूरी तन्मयता के साथ चिट्ठा चर्चा की जा रही है । इसके अलावा एक और महिला चर्चाकार हैं वन्दना जिनके द्वारा चर्चा मंच पर लगातार अच्छे -अच्छे चिट्ठों से परिचय कराया जा रहा है । इन सभी महिलाओं ने हिंदी ब्लोगिंग में उल्लेखनीय योगदान दिया है ।

.......अभी जारी है

मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010


हिंदी ब्लोगिंग का शैशव काल

जैसा पिछले पोस्ट में मैंने बताया कि हिंदी ब्लोगिंग की शुरुआत ०२ मार्च २००३ को हुई थी और हिंदी का पहला अधिकृत ब्लॉग होने का सौभाग्य प्राप्त है नौ दो ग्यारह को । वर्ष-२००३-२००४ हिंदी ब्लोगिंग का पूर्वार्द्ध काल है । इन दोनों वर्षों में हिंदी ब्लोगिंग का बहुत ज्यादा विकास नहीं हो पाया, यह क्रम कमोवेश वर्ष-२००७ तक चला । वर्ष-२००८ में हिंदी ब्लॉग निर्माण में अप्रत्याशित ढंग से वृद्धि हुई और वर्ष-२००९ आते- आते वृद्धि दर एक सम्मानजनक सोपान पर पहुँचने में सफल रही ।


ऐसे में वर्ष-२००३ से वर्ष-२००७ का काल हिंदी ब्लोगिंग के लिए शैशव काल रहा । इस दौरान साधन और सूचना की सर्वाधिक न्यूनता रही , किन्तु कुछ समर्पित ब्लोगरों ने मिलकर व्यापक प्रयास किये ताकि हिंदी में ब्लोगिंग की ताकत का अंदाजा हो सके । अलग-अलग देशों में रहने वाले ब्लोगरों के कुछ समूह ने हिंदी ब्लोगिंग को संस्थागत रूप देने और नए ब्लोगरों को प्रोत्साहित करने में अहम् भूमिका निभायी । उन्होंने तकनीकी गुत्थियां सुलझाने , नए ब्लोगरों को तकनीकी मदद देने, हिंदी टाईपिंग और ब्लोगिंग के लिए सोफ्टवेयरों का विकास करने तथा ब्लोगिंग को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने के लिए ब्लॉग एग्रीगेटरों का निर्माण करने आदि की दिशा में व्यापक पहल की गुंजाईश बनाए रखा ।



हिंदी के प्रारंभिक चिट्ठाकारों में से एक श्री अनूप शुक्ल का कहना है कि -"विनय जैन सबसे शुरुआती ब्लॉगरों में हैं। इसके अलावा अतुल अरोरा, तरुण, आशीष श्रीवास्तव, प्रेम पीयूष ,ई-स्वामी ,रचना बजाज, रत्ना की रसोई आदि कई सक्रिय शुरुआती दौर के सशक्त ब्लोगर रहे हैं । मेरे समझ से वर्ष-२००६ महत्वपूर्ण सामग्री परोसने के लिहाज से बहुत उपयोगी रहा। आप अक्षरग्राम की कडियां देखें तो पायेंगे जैसे लेख अनुगूंज के माध्यम से उन दिनों लिखे गये वैसे अब नहीं लिखे जाते। मेरी समझ में हिंदी ब्लॉगजगत मे अब तक के सबसे बेहतरीन लेखों में से कुछ लेख अनूगूंज में मिलेंगे। इसी क्रम में बुनो कहानी, निरंतर, ब्लॉगनाद, पॉडभारती जैसे प्रयास हुये । बालेन्दु दधीच के लेख से पहले हिंदी ब्लॉगिंग पर एक लेख वागर्थ में छपा था जिसे अनूप सेठी जी ने लिखा था जिसका शीर्षक था- http://web.archive.org/web/20051211230314/http://vagarth.com/feb05/internet/index.htm हिंदी का नया चैप्टर- ब्लॉग!
इस लेख की भाषा हिंदी ब्लॉगिंग के बारे में देखिये-यहां गद्य गतिमान है। गैर लेखकों का गद्य। यह हिन्दी के लिए कम गर्व की बात नहीं है। जहां साहित्य के पाठक काफूर की तरह हो गए हैं, लेखक ही लेखक को और संपादक ही संपादक की फिरकी लेने में लगा है, वहां इन पढ़े-लिखे नौजवानों का गद्य लिखने में हाथ आजमाना कम आह्लादकारी नहीं है। वह भी मस्त मौला, निर्बंध लेकिन अपनी जड़ों की तलाश करता मुस्कुराता, हंसता, खिलखिलाता जीवन से सराबोर गद्य। देशज और अंतर्राष्ट्रीय। लोकल और ग्लोबल। यह गद्य खुद ही खुद का विकास कर रहा है, प्रौद्योगिकी को भी संवार रहा है। यह हिन्दी का नया चैप्टर है।

'चिट्ठाकारों की चपल चौपाल' के नाम से चर्चित 'अक्षर ग्राम' नेटवोर्क ऐसा ही एक समूह था , जिसके सदस्यों में पंकज नरूला (अमेरिका) , जीतेन्द्र चौधरी (कुबैत) , ई स्वामी, संजय बेंगाणी, अमित गुप्ता, पंकज वेंगाणी, निशांत वर्मा, विनोद मिश्रा, अनूप शुक्ल और देवाशीष चक्रवर्ती शामिल थे । अक्षरग्राम नेटवर्क से जुड़ने वाले अन्तिम सदस्य थे श्रीश शर्मा ।देबाशीष चक्रवर्ती और अनूप शुक्ल समूह की ऍडवाइजरी में थे।


ई पंडित के अनुसार शुरु के चिट्ठाकारों में निम्न लोग थे - "पंकज नरूला,प्रत्यक्षा सिन्हा,रमण कौल, रविशंकर श्रीवास्तव, ई-स्वामी, जीतेंद्र चौधरी, अनुनाद सिंह, विनय जैन, प्रतीक पाण्डे, जगदीश भाटिया, मसिजीवी, उन्मुक्त, शशि सिंह, अतुल अरोरा, सृजन शिल्पी, सुनील दीपक, नीरज दीवान, श्रीश शर्मा, पूर्णिमा वर्मन, डॉ जगदीश व्योम आदि तथा बाद के चिट्ठाकारों में निम्न लोग थे- हरिराम, अफ़लातून देसाई, शास्त्री जे सी फिलिप, आलोक पुराणिक,ज्ञान दत्त पाण्डेय, काकेश, घुघूती बासूती, अभय तिवारी, नीलिमा, आभा, बोधिसत्व, अविनाश दास, गौरव सोलंकी, अर्जुन स्वरूप, अशोक कुमार पाण्डेय ,अतानु दे, अविजित मुकुल किशोर, बिज़ स्टोन, चंद्रचूदन गोपालाकृष्णन, चारुकेसी रामदुरई, हुसैन ,दिलीप डिसूजा, दीनामेहता ,मार्क ग्लेसर, नितिन पई, वरुण अग्रवाल, जय प्रकाश मानस, अनूप भार्गव, रबिश कुमार, अनाम दास, मनीष कुमार आदि ।"


इसप्रकार हिंदी ब्लोगिंग के शैशव काल ( वर्ष -२००३ से २००७ के मध्य ) के दौरान जगदीश भाटिया, मसिजीवी, आभा, , बोधिसत्व, अविनाश दास, अनुनाद सिंह, शशि सिंह,गौरव सोलंकी, पूर्णिमा वर्मन, अफ़लातून देसाई, अर्जुन स्वरूप, अतुल अरोरा, अशोक कुमार पाण्डेय ,अतानु दे, अविजित मुकुल किशोर, बिज़ स्टोन, चंद्रचूदन गोपालाकृष्णन, चारुकेसी रामदुरई, हुसैन , दिलीप डिसूजा, दीनामेहता ,डॉ जगदीश व्योम , ई-स्वामी, जीतेंद्र चौधरी,मार्क ग्लेसर, नितिन पई, पंकज नरूला,प्रत्यक्षा सिन्हा,रमण कौल, रविशंकर श्रीवास्तव, शशि सिंह,विनय जैन, वरुण अग्रवाल, सृजन शिल्पी, सुनील दीपक, नीरज दीवान, श्रीश शर्मा, जय प्रकाश मानस, अनूप भार्गव, शास्त्री जे सी फिलिप , हरिराम, आलोक पुराणिक,ज्ञान दत्त पाण्डेय , रबिश कुमार, अभय तिवारी, नीलिमा, अनाम दास, काकेश, मनीष कुमार,घुघूती बासूती , उन्मुक्त जैसे उत्साही ब्लोगर हिंदी ब्लोगिंग की सेवा में सर्वाधिक सक्रिय रहे ।




इसी दौरान 'तरकश समूह' ने भी ब्लॉग पोर्टल के रूप में एक अच्छी शुरुआत की । इसी दौरान सर्वाधिक चर्चित एग्रीगेटर 'नारद' के कुछ प्रतिद्वंदी एग्रीगेटर भी सामने आये , जिनमें ब्लोगवाणी, चिट्ठाजगत और हिंदी ब्लोग्स. कॉम प्रमुख है । हलांकि हिन्दीब्लॉग्स.कॉम नारद के कुछ समय बाद से शुरु हो गया था और ब्लॉगवाणी, चिट्ठाजगत आदि से बहुत पहले आ चुका था। वर्ष -२००६ और उसके बाद अपनी सक्रियता और सकारात्मक टिप्पणी के माध्यम से व्यापक प्रभामंडल विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया कनाडाई भारतीय समीर लाल समीर ने ।




वर्ष-२००७ के अक्तूबर माह में प्रभा साक्षी. कौम (पोर्टल) के संचालक बालेन्दु दधिची का एक आलेख 'ब्लॉग बने तो बात बने' कादंबनी में प्रकाशित हुआ । इस आलेख से प्रभावित होकर कई ब्लोगरने हिंदी ब्लोगिंग में अचानक अवतरित हुए और आज भी पूरी दृढ़ता के साथ सक्रिय हैं । इसी समय अविनाश वाचस्पति ने भी बगीची के माध्यम से अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराई और जाकिर अली रजनीश विषय परक ब्लॉग तस्लीम लेकर आये । शैशव काल के उत्तरार्द्ध में डा. अरविन्द मिश्र ने भी साई ब्लॉग के माध्यम से अपनी प्रतिभा को नयी धार देने की जबरदस्त कोशिश की । इन दोनों विषयपरक ब्लोग्स ने तो विज्ञान विषयक प्रस्तुति कर नयी क्रान्ति की प्रस्तावना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।ज्ञान-विज्ञान नाम से सामूहिक ब्लॉग की शुरुआत आशीष गर्ग ने की शायद साई और तस्लीम के पहले।


कादंबनी में प्रकाशित बालेन्दु दधिची के आलेख 'ब्लॉग बने तो बात बने' से प्रेरित होकर ही शशि सिंघल, संगीता पुरी आदि कुछ महिला चिट्ठाकारों ने भी वर्ड प्रेस पर अपना ब्लॉग बनाया था । एक और प्रमुख महिला चिट्ठाकारा रचना मई २००७ से ब्लॉग पर लिख रही हैं और २००८ से नारी ब्लॉग जो पहला ब्लॉग समूह हैं जहां नारियां अपनी बात कहती हैं को सक्रियाए रूप से चला रही हैं ।


बालेन्दु का ऐसा मानना है कि " ब्लोगिंग की दुनिया पूरी तरह स्वतंत्र, आत्म निर्भर और मनमौजी किस्म की रचनात्मक दुनिया है, इसलिए इसकी व्यापकता और विस्तृत प्रभामंडल का सहज आभास होता है । " उनके अनुसार -" समूचे ब्लॉग मंडल का आकार हर छ: महीने में दोगुना हो जाता है । "


हिंदी के बहुचर्चित ब्लोगर रवि रतलामी का मानना है कि " ब्लॉग वेब-लॉग का संक्षिप्त रूप है, जो अमरीका में '1997' के दौरान इंटरनेट में प्रचलन में आया। प्रारंभ में कुछ ऑनलाइन जर्नल्स के लॉग प्रकाशित किए गए थे, जिसमें जालघर के भिन्न क्षेत्रों में प्रकाशित समाचार, जानकारी इत्यादि लिंक होते थे, तथा लॉग लिखने वालों की संक्षिप्त टिप्पणियाँ भी उनमें होती थीं। इन्हें ही ब्लॉग कहा जाने लगा। ब्लॉग लिखने वाले, ज़ाहिर है, ब्लॉगर कहलाने लगे। प्राय: एक ही विषय से संबंधित आँकड़ों और सूचनाओं का यह संकलन ब्लॉग तेज़ी से लोकप्रिय होता गया। हिन्दी ब्लॉगिंग शैशवा-वस्था से आगे निकल कर किशोरावस्था को पहुँच रही है। अलबत्ता इसे मैच्योर होने में बरसों लगेंगे. अंग्रेज़ी के गुणवत्ता पूर्ण (हालांकि वहाँ भी अधिकांश - 80 प्रतिशत से अधिक कचरा और रीसायकल सामग्री है,), समर्पित ब्लॉगों की तुलना में हिन्दी ब्लॉगिंग पासंग में भी नहीं ठहरता. मुझे लगता है कि तकनीक के मामले में हिन्दी कंगाल ही रहेगी. बाकी साहित्य-संस्कृति से यह उत्तरोत्तर समृद्ध होती जाएगी ...!"


अविनाश वाचस्पति का मानना है कि - "हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की दशा समाज से बेहतर को निकाल कर और अपने साथ लेकर बेहतरीन की ओर अग्रसर है जिससे समाज और ब्‍लॉगिंग की दिशा अपनेपन के प्रचार प्रसार में मुख्‍य भूमिका निभा रही है। इसका एक अहसास आप रोजाना कहीं-न-कहीं आयोजित हो रहे ब्‍लॉगर मिलन के संबंध में जारी की गई पोस्‍टो में महसूस कर सकते हैं और इसका सकारात्‍मक और स्‍वस्‍थ असर आप शीघ्र ही समाज पर महसूस करेंगे।" वहीँ हिंदी के प्रमुख अनाम ब्लोगर उन्मुक्त मानते हैं कि -"मैंने सबसे पहले चिट्ठी 'अभिनेता तथा गायक' नाम से २७ फरवरी २००६ नाम से लिखी। उस समय कम लोग लिखते थे। आजकल अक्सर हो जाने वाले व्यक्तिगत विवाद भी कम थे। अब यह संख्या भी बढ़ गयी है और विवाद भी।"


एक प्रश्न के उत्तर में समीर लाल समीर ने स्वीकार किया है कि -"शुरूआती दौर में मैं हिन्दी में कुछ कविताएँ लिखने का प्रयास किया करता था और याहू पर ईकविता ग्रुप से २००५ में जुड़ा. वहाँ हिन्दी कविता वालों का जमावड़ा था और वहीं से हिन्दी ब्लॉग के बारे में जाना.जब मार्च २००६ में अपना ब्लॉग बनाया, तब तक मैं ईकविता ग्रुप में एक पहचान तो बना ही चुका था लेकिन निश्चित ही ब्लॉगजगत में आकर इतना स्नेह और लोकप्रियता हासिल होगी, यह कभी नहीं सोचा था.इसी माध्यम से जुड़ाव के बाद अनूप शुक्ला ’फुरसतिया’ जी ने मुझे गद्य लेखन के लिए उकसाया और बस तब से गद्य पद्य दोनों ही क्षेत्रों में हल्के फुल्के प्रयास जारी हैं. लोग पसंद कर लेते हैं, हौसला मिलता है और निरंतरता बनी हुई है ...!


"वर्ष-२००७ के शुरूआती क्षणों में अपनी सार्थक उपस्थिति से सभी अचंभित करने वाले ज्ञान दत्त पाण्डेय कहते हैं कि - " जब शुरू किया था (हिन्दी ब्लॉग की पहली पोस्ट २३ फरवरी २००७ की है), तो भाषा अटपटी थी। अब भी है। वाक्य यूं बनते थे, और हैं, मानो अंग्रेजी के अनुवाद से निकल रहे हों। फिर भी काम चल गया। लोग हिन्दी का ब्लॉगर मानने लगे।


शायद लिखने कहने का मसाला था। शायद हिन्दी-अंग्रेजी समग्र में जो पढ़ा था वह बेतरतीब जमा हो गया था व्यक्तित्व में। शायद भाषा की कमी कहने की तलब को हरा न पा रही थी। शायद लिख्खाड़ों का अभिजात्य और उनकी ठीक लिखने की नसीहत चुभ रही थी। लेखन/पत्रकारिता के क्षेत्र में छद्म इण्टेलेक्चुयेलिटी बहुत देख रखी थी, और वही लोग आपको नसीहत दें कि कैसे लिखना है, तो मन जिद पकड़ रहा था। अर्थात काफी बहाना था अप्रतिहत लिखते चले जाने का।"




पहली बार परिकल्पना पर ब्लॉग विश्लेषण वर्ष-२००७ में प्रस्तुत किया गया । इसी वर्ष विज्ञान, साहित्य, संस्कृति और मीडिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण ब्लॉग अस्तित्व में आये जो आगे चलकर व्यापक प्रभामंडल विकसित करने में सफलता पायी । उन्मुक्त और रवि रतलामी तकनी जानकारी देने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ लोकप्रिय हुए । पंकज सुबीर, नीरज गोस्वामी आदि ने अपनी साहित्यिक छवि को संवारने का महत्वपूर्ण कार्य किया वहीँ दिनेश राय द्विवेदी कानूनी सलाहकार के रूप में प्रख्यात हुए । इसी काल क्रम में सुप्रसिद्ध हास्य कवि अशोक चक्रधर ने भी हिंदी ब्लोगिंग को समृद्ध करने के उद्देश्य से ब्लॉग जगत में सक्रिय हुए और प्रमोद सिंह ने अजदक के माध्यम से हिंदी के नए शिल्प और बिंव से हिंदी पाठकों को रूबरू कराया ।


इस दौर के एक और ब्लोगर ने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हिंदी ब्लोगिंग को सींचने का कार्य किया वे हैं अमर कुमार , जिनका कहना है कि- "हिन्दी ब्लॉगिंग के इतिहास को एक समेटने का आपका प्रयास कितना श्रमसाध्य है, यह सोच कर ही झुरझुरी होती है, क्योंकि मैंनें वर्ष २००९ के उत्तरार्ध में इसकी योजना बनायी थी, किन्तु इसके सर्वेक्षण में ही मेरा दम निकल गया.. और फिर मुझे अपने यूँ ही निट्ठल्ला का मान रखना था, अतः मैं चुप हो बैठ गया । अपने सपने को यूँ साकार होते देख मुझे क्या लग रहा है, यह न बता पाऊँगा.. कुछ अच्छा या बहुत अच्छा जैसे शब्द गौण हैं यहाँ ।"
अभी जारी है .......

शनिवार, 23 अक्तूबर 2010


आओ बच्चो तुम्हें दिखाएँ झांकी ब्लोगिस्तान की ...


हिंदी ब्लोगिंग की शुरुआत ०२ मार्च २००३ को हुई थी जब आलोक कुमार ने नौ दो ग्यारह नामक ब्लॉग का प्रकाशन किया ।ब्लाग के लिये चिट्ठा शब्द भी उन्होंने ही सुझाया। हिंदी के इस पहले ब्लोगर का कहना है कि htttp://directory.google.com/world/hindi के बारे में मुझे पता चला और मैं भी इसका स्वयंसेवी संपादक बन गया, रोज हिंदी के स्थलों की खोज होती थी । संपादन करते हुए एहसास हुआ कि हिंदी में कुछ सामग्री ही नहीं है । इससे कम बोलने वाले होते हुए भी यूनानी, कोरोयाई, जापानी, अरबी के अधिक स्थल है । बहुत दुःख हुआ फिर लगा कि यह काम तो हिंदी बोलने-लिखने वालों को ही करना है । जाल से इतनी चीजें मुफ्त में मिलती है तो हमारा भी कुछ फ़र्ज़ है वापस देने का , फिर सोचा कि क्यों न रोज कुछ न कुछ हिंदी में लिखूं ? कुल तीन लेखों के बाद यह बंद हो गया । फरबरी २००३ में गूगल ने ब्लोगर की कंपनी को खरीदा तो मुझे पता चला कि इस काम को स्वचालित तरीके से किया जा सकता है फिर शुरू कर दिया अपना ब्लॉग नौ दो ग्यारह ... !


वर्ष-२००३-२००४ को हिंदी ब्लोगिंग का पूर्वाध काल कहा जा सकता है । इन दोनों वर्षों में हिंदी ब्लोगिंग का बहुत ज्यादा विकास नहीं हो पाया , किन्तु वर्ष २००४ के उत्तरार्ध में रवि रतलामी का एक आलेख अभिव्यक्ति में प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था : अभिव्यक्ति का नया माध्यम : ब्लॉग । इस आलेख के आने के पूर्व तक अधिकाँश लोग जियोसिटीज डोट कोंम पर ही पी डी एफ फाईल संलग्न कर ब्लोगिंग का आनंद ले रहे थे । इस आलेख के प्रकाशन के पश्चात लोगों को ब्लॉग के मायने समझ में आने लगे और इस दिशा में लोगों का रुझान बढ़ता गया !


इस दौर के प्रमुख ब्लॉग हैं - इंदौर के देबाशीश का ब्लॉग नुक्ता चीनी, रवि रतलामी का हिंदी ब्लॉग ,पंकज नोरुल्ला, शजर बोलता है, अक्षर ग्राम कुछ बतकही, फ़ुरसतिया , मेरी कविताएँ,सिन्धियत, मेरा पन्ना, ठलुआ , शब्द साधना, गुरु गोविन्द, कटिंग चाय, समथिंग टू से, कुछ तो है जो कि और हाँ कबाजी आदि । आगे चलकर अमर कुमार जी के ब्लॉग कुछ तो है जो कि का सदस्य मैं भी बना । वर्ष -२००५ में जब हिंदी चिट्ठों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई तब उस समय चिट्ठा चर्चा की शुरुआत हुई ।
वर्ष-२००५ के उत्तरार्ध में हिंदी ब्लॉग की संख्या एन केन प्राकेण १०० हुई । हिंदी के प्रमुख ब्लॉग और उनकी ताज़ा पोस्टिंग के बारे में देबाशीश ने माइजावासर्वर पर हिंदी का पृष्ठ चिठ्ठा विश्व बनाया , जहाँ हिंदी ब्लॉगर्स के परिचयों के साथ ही ताज़ा ब्लॉग्स के सारांश (पूरे ब्लॉग के लिंक सहित) देखे जा सकते थे . इसी प्रकार वेबरिंग पर भी हिंदी चिठ्ठाकारों की जालमुद्रिका बनी थी इसी दौरान !हलांकि वर्ष-२००५ में मनीष कुमार का Ek Shaam Mere Naam अस्तित्व में आ गया था , किन्तु यह रोमन में लिखा जा रहा था , वर्ष-२००६ में मनीष कुमार एक शाम मेरे नाम से दूसरा ब्लॉग वर्ष-२००६ में पुन: लेकर आये जिसमें उन्हीनें देवनागरी लिपि में सुन्दर संस्मरण प्रस्तुत किया । सकारात्मक ब्लोगिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन्हें वर्ष -२००९ में संवाद सम्मान से सम्मानित भी किया जा चुका है ।




वर्ष-२००६ में हिंदी चिट्ठों का व्यापक बिकास हुआ और उस दौरान उड़न तश्तरी ,इन्द्रधनुष, अखंड,आलोक,पुष्टिमार्ग, प्रणव शर्मा,प्रशांत,भास्कर,विनीत,श्रवन,संतोष,IIFMights का चिट्ठा , थोड़ा और , श्रीश , ई पंडित , नारद, परिचर्चा, हमारा बेंजी, माझी दुनिया , निशिकांत वर्ल्ड, दीपांजलि , निरंतर , तरकश के साथ-साथ अनेक महत्वपूर्ण ब्लॉग अवतरित हुए । वर्ष-२००६ हिंदी चिट्ठों के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण अवश्य रहा किन्तु महत्वपूर्ण सामग्री परोसने के लिहाज से बहुत उपयोगी नहीं रहा । हिंदी चिट्ठों का व्यापक बिकास हुआ वर्ष-२००७ में और इस दौरान चिट्ठों की संख्या दो हजार को पार कर गयी । ``




वर्ष -२००७ में हिंदी चिट्ठों की संख्या ज्यादा नहीं थी, लगभग तीन हजार के आसपास थी , इसीलिए ब्लॉग विश्लेषण के अंतर्गत परिकल्पना पर केवल साठ महत्वपूर्ण ब्लोग्स की हीं चर्चा की जा सकी थी , इनमें प्रमुख है -"ज्ञानदत्त पाण्डेय का मानसिक हलचल " , "सारथी" ,"उड़न तश्तरी " , "अलोक" ,"काकेश " , " अमर कुमार "!!, "महावीर " , "अनिता" , "साध्वी '' , "मीनाक्षी" , " दीपक भारतदीप " , "रवि रतलामी " ,"परमजीत" , "दिव्याभ"!! ," ठहाका " , रेडियो ,ई-मिरची , "बाल किशन" का ब्लोग, "शब्द लेख सारथी,"संजय" "अंकुर गुप्ता""हिन्दी पन्ना" , "ठुमरी""श्रीश" , "हसगुल्ले" , "संजय" , " आशीष महर्षि" ,
"उन्मुक्त " ! "चक्रव्यूह " "सचिन लुधियानवी" " कंचन सिंह चौहान" " सुखन साज़ " " इरफान " !!
"मीत" , "अन्तरध्वनि " , " महक "वाचस्पति अविनाश " अनुगुन्जन ", " इयता " , " नोटपैड " " कबाड़ " , " विनीत कुमार " , " जोशिम " , "पुनीत ओमर " , " अर्बूदा " , "अनिल " , "नारद" "परिकल्पना" , "चकल्लस " , "वाटिका " , "घुघूती बासूती", " कथाकार" , " आलोक पुराणिक " , " नीरज ", अरमान", "मंगलम ", " भदेस" , " अनूप शुक्ल " की फुरसतिया, तेताला, बगीची , मेरी भावनाएं और रबीश कुमार का कस्बा आदि ।


वर्ष-२००८ आते आते ब्लोग्स की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ और यह संख्या दस हजार के आसपास पहुँच गयी । वर्ष -2००८ में हिन्दी चिट्ठा जगत के लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि इस दौरान अनेक सार्थक और विषयपरक ब्लॉग की शाब्दिक ताकत का अंदाजा हुआ । अनेक ब्लोगर ऐसे थे जिन्होनें अपने चंदीली मीनार से बाहर निकलकर जीवन के कर्कश उद्घोष को महत्व दिया लेखन के दौरान , तो कुछ ने भावनाओं के प्रवाह को । कुछ ब्लोगर की स्थिति तो भावना के उस झूलते बट बृक्ष के समान रही जिसकी जड़ें ठोस जमीन में होने के बजाय अतिशय भावुकता के धरातल पर टिकी हुयी नजर आयी ।


उसी वर्ष हुआ था मुंबई पर आतंकी हमला । इस हमला ने पूरे विश्व बिरादरी को झकझोर कर रख दिया एकवारगी । भला हमारे ब्लोगर भाई इससे अछूते कैसे रह सकते थे । कई चिट्ठाकारों के द्वारा जहाँ इस बीभत्स घटना की घोर निंदा की गयी , वहीं पाकिस्तान को इसके लिए खरी-खोटी भी सुनाई गयी । कनाडा के भारतीय ब्लोगर समीर लाल ने उड़न तस्तरी में अपने कविताई अंदाज़ में जहाँ कुछ इस तरह वयां किया था " समझ नहीं पा रहा हूँ कि इस वक्त मैं शोक व्यक्त करुँ या शहीदों को सलाम करुँ या खुद पर ही इल्जाम धरुँ....!" वहीं अनंत शब्दयोग के एक पोस्ट में दीपक भारत दीप पाकिस्तान की पोल खोलते हुए कहा था , कि-"पाकिस्तान का पूरा प्रशासन तंत्र अपराधियों के सहारे पर टिका है। वहां की सेना और खुफिया अधिकारियों के साथ वहां के अमीरों को दुनियां भर के आतंकियों से आर्थिक फायदे होते हैं। एक तरह से वह उनके माईबाप हैं। यही कारण है कि भारत ने तो 20 आतंकी सौंपने के लिये सात दिन का समय दिया था पर उन्होंने एक दिन में ही कह दिया कि वह उनको नहीं सौंपेंगे। "सारथी पर अपने पोस्ट के माध्यम से जे सी फ्लिप शास्त्री ने कहा , कि- "आज राष्ट्रीय स्तर पर शोक मनाने की जरूरत है।



बम्बई में जो कुछ हुआ वह भारतमां के हर बच्चे के लिये व्यथा की बात है!राष्ट्रद्रोहियों को चुन चुन कर खतम करने का समय आ गया है!!शायद एक बार और कुछ क्रांतिकारियों को जन्म लेना पडेगा !!!"
वहीं ज्ञान दत्त पाण्डेय का मानसिक हलचल में श्रीमती रीता पाण्डेय का कहना था कि "टेलीवीजन के सामने बैठी थी। चैनल वाले बता रहे थे कि लोगों की भीड़ सड़कों पर उमड़ आई है। लोग गुस्से में हैं। लोग मोमबत्तियां जला रहे हैं। चैनल वाले उनसे कुछ न कुछ पूछ रहे थे। उनसे एक सवाल मुझे भी पूछने का मन हुआ – भैया तुम लोगों में से कितने लोग घर से निकल कर घायलों का हालचाल पूछने को गये थे? "




कविताई अंदाज़ में अपनी भावनाओं को कुछ कठोर शब्दों में वयां किया था उस वर्ष कवि योगेन्द्र मौदगिल ने कि "बच्चा -बच्चा आज जगह ले अपने स्वाभिमान को , उठो हिंद के बियर सपूतों , पहचानो पहचान को,हिंसा से ही ध्वस्त करो , हिंसा की इस दूकान को , रणचंडी की भेंट चढ़ा दो पापी पाकिस्तान को ...!" वहीं निनाद गाथा में अभिनव का कहना था , कि "किसको बुरा कहें हम आख़िर किसको भला कहेंगे,जितनी भी पीड़ा दोगे तुम सब चुपचाप सहेंगे,डर जायेंगे दो दिन को बस दो दिन घबरायेंगे,अपना केवल यही ठिकाना हम तो यहीं रहेंगे,तुम कश्मीर चाहते हो तो ले लो मेरे भाई,नाम राम का तुम्हें अवध में देगा नहीं दिखाई....!"हिन्दी ब्लोगिंग की देन में एक पोस्ट के दौरान रचना का कहना था कि-"हर मरने वालाकिसी न किसी करकुछ न कुछ जरुर थाइस देश कर था या उस देश का थापर आम इंसान थाशीश उसके लिये भी झुकाओयाद उसको भी करोहादसा और घटनामत उसकी मौत को बनाओ...!"विचार-मंथन—एक नये युग का शंखनाद में सौरभ ने कहा था , कि-"कुरुक्षेत्र की रणभूमि के बीच खड़े होकर तो सिर्फ अर्जुन ने शोक किया था, पर आज देश के करोड़ों लोगों की तरह मैं भी मैदान के बीचो-बीच अकेला खड़ा हुआ हूँ—नितांत अकेला, शोकाकुल और ग़ुस्से से भरपूर। मेरे परिवार के 130 से ज्यादा सदस्य आज नहीं रहे. जी हाँ, ठीक सुना आपने, मेरे परिवार के सदस्य नहीं रहे. मौत हुई है मेरे घर में और मेरे परिवार को मारने वाले मेरे घर के सामने है, हँसते हुए, ठहाके लगाते हुए और अपनी कामयाबी का जश्न बनाते हुए. और मैं.... !" एक आम आदमी यानी ऐ कॉमन मन ने बहुत ही सुंदर प्रश्न को उठाया था , कि "कोई न कोई तो सांठ-गाँठ है इन मुस्लिम नेताओं, धार्मिक गुरुओं तथा धर्मनिरपेक्षियों (सूडो) के बीच....!"मेरी ख़बर में ओम प्रकाश अगरवाल ने कहा था , कि "हमारे पढ़े-लिखे वोटर पप्पुओं के कारण फटीचर किस्म के नेता चुने जा रहे हैं .....!"
कुछ अनकही में श्रुति ने तीखे स्वर में कहा , कि - "कहाँ है राज ठाकरे । मुंबई जल रही है , जाहिर है नेताओं की कमीज पर अब दाग काफी गहरे हो चुके हैं । " वहीं इयता पर कुछ अलग स्वर देखने को मिला था उस दौरान , मगर सन्दर्भ है मुंबई का हमला हीं, कहते हैं कि "इस दौरान शराब की बिक्री में ७० फीसदी की कमी आयी । मयखाने खाली पड़े थे और शराबी डर के भाग लिए थे । नरीमन पॉइंट पर दफ्तर बंद है । किनारे पर टकराती सागर की लहरों के पास प्रेमी जोड़े नही हैं । सागर का किनारा वीरान हो गया है । बेस्ट की बसों में कोई भीड़ नही है ...!"


इस सब से कुछ अलग हटकर दिल एक पुराना सा म्यूज़ियम है पर मुंबई धमाकों में शहीद हुए जवानों की तसवीरें पेश की गयी , जो अपने आप में अनूठा था । वहीं हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर ताज होटल का विडियो लगाया गया , जहाँ ताज की पुरानी तसवीरें देखी जा सकती है ।
यहाँ तक कि मुंबई हमलों से संवंधित पोस्ट के माध्यम से वर्ष के आखरी चरणों में एक महिला ब्लोगर माला के द्वारा विषय परक ब्लॉग लाया गया , जिसका नाम है मेरा भारत महान जसके पहले पोस्ट में माला ने कहा कि -"हमारी व्यापक प्रगति का आधार स्तम्भ है हमारी मुंबई । हमेशा से ही हमारी प्रगतिहमारे पड़ोसियों के लिए ईर्ष्या का विषय रहा है । उन्होंने सोचा क्यों न इनकी आर्थिक स्थिति को कमजोड कर दिया जाए , मगर पूरे विश्व में हमारी ताकत की एक अलग पहचान है , क्योंकि हमारा भारत महान है । "


इन हिंदी ब्लोग्स के अतिरिक्त वर्ष-२००८ में जो ब्लोग्स अपनी उपस्थिति से हिंदी ब्लॉगजगत का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहे उनमें प्रमुख है - लोकरंग , कुछ अलग सा , शब्दों का सफर , - ठुमरी , खेत खलियान , खलियान , ओडीसा और कंधमाल के आंसू , मेरी प्रतिक्रया , बिदेसिया , दालान , सांई ब्लॉग ,सुखनसाज़ , महक , अर्श , युगविमर्श , अरूणाकाश, महाकाव्य , मीत , "कुछ मेरी कलम से " , -"पारुल…चाँद पुखराज का" , "डॉ. चन्द्रकुमार जैन " , -"क्षणिकाएं " , मीत , "दिशाएँ " , -"प्रहार " , "दिल की बात '' , "दिल की बात '' , हिंद युग्म , परिकल्पना , “ रचनाकार “ , “ अभिव्यक्ति “ , “साहित्यकुंज” , “वाटिका “ , "गवाक्ष ", “ सृजनगाथा “ ," महावीर" " नीरज " "विचारों की जमीं" "सफर " " इक शायर अंजाना सा…" "भावनायें... " , "ठहाका " , हिंदी जोक्स , तीखी नज़र , बामुलाहिजा , चिट्ठे सम्बंधित कार्टून , चक्रधर का चकल्लस , अज़ब अनोखी दुनिया के ,अविनाश वाचस्पति , यूँ ही निट्ठल्ला..... , डूबेजी , दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान- पत्रिका , निरंतर , अनुभूति कलश , हास्य कवि दरबार , “समतावादी जन परिषद् “ , “ इंडियन बाईस्कोप डॉट कॉम “ , मनोज बाजपेयी , -“ कबाड़खाना “ , रवीश कुमार , “ प्राइमरी का मास्टर “ , “एक हिंदुस्तानी की डायरी“ , “अदालत “ , “ अखाडे का उदास मुगदर “ , स्वास्थ्य चर्चा , गत्यात्मक ज्योतिष , सच्चा शरणम , स्वप्न लोक , "Raviratlami Ka Hindi Blog ", उन्मुक्त , छुट-पुट , "॥दस्तक॥ , सुनो भाई साधो........... , अंकुर गुप्ता का हिन्दी ब्लाग , हिन्दी ब्लॉग टिप्स , Control Panel कंट्रोल पैनल , e-मदद , नौ दो ग्यारह , समोसा बर्गर , तकनीकी दस्तक , मानसिक हलचल...... /सारथी... /hindiblogosphere .../टेक पत्रिका.../ Blogs Pundit... /हि.मस्टडाउनलोड्स डॉटकॉम... /Vyakhaya... /दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!... /घोस्ट बस्टर का ब्लॉग... /ज्ञान दर्पण... /Cool Links वैब जुगाड़... /अक्षरग्राम... /लिंकित मन... /मेरी शेखावाटी..., - तस्लीम ,तीसरा खम्बा., भडास , भड़ास ब्लॉग, मुहल्ला , भोजपुर नगरिया , मिथिला मिहिर , भड़ास ४ मीडिया , लोकसंघर्ष , नुक्कड़ ,मनीष कुमार का मुसाफिर हूँ यारों आदि ।


समग्र विश्लेषण के क्रम में यह पाया गया कि वर्ष-२००८ में शब्दावली में अग्रणी रहे अजित वाडनेकर, सकारात्मक टिपण्णी में अग्रणी रहे अनूप शुक्ल , साफ़गोई में अग्रणी रहे डॉ अमर कुमार, विज्ञान में अग्रणी रहे डा.अरविन्द मिश्रा , व्यंग्य में अग्रणी रहे अविनाश वाचस्पति, हास्य में अग्रणी रहे अशोक चक्रधर, तकनीकी पोस्ट में अग्रणी रहे उन्मुक्त, सामुदायिक गतिविधियों में अग्रणी रहे जाकिर अली रजनीश, कानूनी सलाह में अग्रणी रहे दिनेश राय द्विवेदी, सिनेमा संवंधित फीचर में अग्रणीरहे दिनेश श्रीनेत, चिंतन में अग्रणी रहे दीपक भारतदीप, विनम्र शैली में अग्रणी रहे नीरज गोस्वामी , क्षेत्रीय भाषा भोजपुरी में अग्रणी रहे प्रभाकर पांडे, सकारात्मक प्रतिक्रया में अग्रणी रहे पंकज अवधिया, सकारात्मक सोच में अग्रणी रहे महेंद्र मिश्रा, तकनीकी सृजन में अग्रणी रहे रवि रतलामी, शिक्षा- दीक्षा में अग्रणी रहे शास्त्री जे सी फिलिप, ज्योतिष में अग्रणी रही श्रीमती संगीता पुरी, प्रशंसा -प्रसिद्धि में अग्रणीरहे समीर लाल, गीतात्मकता में अग्रणी रहे राकेश खंडेलवाल और सामयिक सोच -विचार में अग्रणी रहे ज्ञान दत्त पांडे आदि !


अभी जारी है ........

शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010


बडे ढोल में बड़ी पोल...

परिकल्पना के पहले ब्लॉग विश्लेषण में ज्यादा ब्लोग्स की चर्चा नहीं की जा सकी थी, क्योंकि तब सक्रिय ब्लोग्स की संख्या बहुत कम थी और कुछ गिने-चुने ब्लोगर ही लगातार अपनी सक्रियता को बनाए हुए थे ....ऐसे में आईये पहले ब्लॉग विश्लेषण की तीसरी और आखिरी कड़ी पर नज़र डालते हैं -


बडे ढोल म पोल बड़ी , यही मुकद्दस बात !
जिसका दिल जितना बड़ा , वही "चकल्लस " गात !!
नीरव की यह "वाटिका " देती है सन्देश !
अनवरत साहित्य बढे , प्रगति करे यह देश !!
"घुघूती बासूती" को, " कथाकार" की राय !
उत्तरोत्तर सोपान पे , नया साल ले जा य !!




" आलोक पुराणिक " बोले, " नीरज " जी को छोड़ !
चिट्ठा- चिट्ठा घूम के , लगा रहे हो होड़ !!





कुछ विनोद भी सुस्त है , निकल गया "अरमान"
"मंगलम " कहते रहे, सबको दो सम्मान !!




" अनूप शुक्ल " श्रधेय हैं, करते नहीं" भदेस" !


सबको देते स्नेह से , शांति- सुख- सन्देश !!




अपना चिंतन बांचिये , देकर सबको प्यार !
सदीच्छा से भरा रहे, यह सुन्दर संसार !!




कुछ चिट्ठे नाराज हैं, अंकित नही है नाम !
खास-खास को छोड़ के , जोड़े हो क्यूं आम ? ?




भाई मेरे यह सोचो, कुछ तो हुआ कमाल !
पढा है जिसको मैंने , पूछा उसका हाल !!




बस इतनी सी बात है , ना समझे तो ठीक!
समझदार तो सबहीं हैं,समझ गए तो ठीक
() रवीन्द्र प्रभात

बृहस्पतिवार, 21 अक्तूबर 2010


स्मृतियों के आईने में ब्लॉग विश्लेषण


कल मैंने ब्लॉग परिक्रमा की शुरुआत वर्ष २००७ के विश्लेषण से किया था, प्रस्तुत है उस विश्लेषण की दूसरी कड़ी -
गूँज रहा है "रेडियो" "ई-मिरची" के संग !
"बाल किशन" का ब्लोग भी , खूब दिखाया रंग !!




"शब्द लेख" यह सारथी, और "संजय" उवाच !
"अंकुर गुप्ता" ढूंढ रहे, "हिन्दी पन्ना" आज !!




"ठुमरी" गाकर मस्त है, खूब निपोरे खीश !
विमल बेचारे सोचे , कहाँ गए हैं "श्रीश" !!




लाये विनोद "हसगुल्ले" "संजय" देखें जोग !
" आशीष महर्षि" बोले, बनाबा दो अब योग !!




दूर खड़े ही सोचते, रह-रहकर "उन्मुक्त " !
"चक्रव्यूह " के व्यूह से, कब होंगे हम मुक्त !!







कोलकत्ते में "मीत" क्यों , खोज रहे हैं मीत !
गजल हुयी है बेवफा , खंडित हो गए गीत !!





"अन्तरध्वनि " में नीरज जी, " महक " बिखेरें आज !
छंद की गरिमा ढूंढें, " वाचस्पति अविनाश " !!




" अनुगुन्जन " और " इयता " सुन्दर सा है ब्लोग !


संकृत्यायन कह रहे , मेरा है यह शौक !!




" नोटपैड " पर लिखिये , जो जी में आ जाये !
या " कबाड़ " में फेंकिये , उल्टी- सीधी राय !!




" विनीत कुमार " की गाहे, और बगाहे बात !
" जोशिम " के संग गाईये , ग़ज़ल अगर हो याद !!




"पुनीत ओमर " " अर्बूदा " , "अनिल " कलम के साथ !
लिखें क्या अब ब्लोग में, पीट रहे हैं माथ !!




"नारद" घूमे ब्लोग पे, चाहे जागे सोय !
नर हो या नारायण हो, चर्चा सबकी होय!!




मतलब वाली बतकही, करती है दिन-रात !
अपनी भी "परिकल्पना" हो गयी है कुख्यात !!
यह क्रम अभी जारी है ..........

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