Saturday, January 28, 2012

फिर से बस्तर / yayawae




9 comments:

jaiswalvirendra 20 जनवरी 2012 5:27 पूर्वाह्न
fare and square blog.
shikha varshney 20 जनवरी 2012 6:31 पूर्वाह्न
बस्तर पर अच्छी जानकारी युक्त पोस्ट.
DUSK-DRIZZLE 21 जनवरी 2012 9:22 अपराह्न
YOUR POST EXPOSED THE NECKED TRUTH OF THE INHABITANTS OF THE BASTAR. UNDER THE DEMOCRATIC SYSTEM EVERYBODY HAS OWN BASTAR BUT THE WORST CONDITION OF BASTAR SHOWS THE REAL FACE OF THE GOVERNMENT. AFTER ALL IT IS TOWERING ISSUE- WHO SHOULD BE GOVERN AND WHO WILL WORK IN THE FORM OF GOVERNMENT OR WHO SHOULD BE ACCOUNTABLE FOR THAT POSITION AS YOU WROTE?
देवेश तिवारी (Devesh Tiwari) 22 जनवरी 2012 12:08 अपराह्न
सुन्दर विश्लेषण .. जानकारी के लिए धन्यवाद ........
sangita 23 जनवरी 2012 10:41 पूर्वाह्न
behad sargarbhit post hae aapki. bastar ke prati aaj tak jo udaasinta dekhi jati rhi vo ab nahimn hona chahiye,par kya kiya jaye in safed poshon ka jo sirf or sirf rajniti hi karna chahte haen ve chahte hi nahin ki vhan sthiti samanya ho,nahin to vhan avaedh khanan kaese hoga,mining market down ho jayega.
thanx aapkne mere blog par sadsytali sda hi svagat hae.
Shanti Garg 24 जनवरी 2012 9:00 पूर्वाह्न
बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
डॉ.मीनाक्षी स्वामी 24 जनवरी 2012 9:26 पूर्वाह्न
बस्तर की मैना फिर से चहके, इसके लिये शुभकामनाएं।
आजादी के इतने सालों बाद भी हालात सुधरे नहीं बल्कि बिगडे अधिक हैं। छोटे स्वार्थों के लिये देश का बडा अहित करने में परहेज नहीं है।
संवेदना जगानेवाली पोस्ट।
surendrahanspal 25 जनवरी 2012 9:12 पूर्वाह्न
भाई रमेश जी , बस्तर के सुकमा पर आप कि कलम की धार गजब ईमान्दारी से चली बधाई . डर गया हु इस नन्गे सच को पड कर अकबर को आप ने याद किया राजधानी मे बैट कर शासक मजे करते है. सच अभि भारत आजाद नही हुआ है .
ब्लॉ.ललित शर्मा 27 जनवरी 2012 7:15 पूर्वाह्न
नए जिलों के बनने से प्रशासन नागरिकों की पहुंच के भीतर होता। अगर यही कार्य पहले की सरकारों ने किए होते तो आज यह हालात देखने नहीं पड़ते।


डॉ रमन सिंह को ढेर सारी शुभकामनाएं


अच्छी पोस्ट

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