Friday, January 27, 2012

राजस्थानी लोक/ chandanbhati



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  • Pakistan's popular folk and Sufi singer Mohammed

    [ तस्वीर 29257211 [ फोटो ]] राजस्थानी लोक संगीत बेताज Ssfi फकीर हैं


    पाकिस्तान के लोकप्रिय लोक गायक और सूफी फकीर मोहम्मद Ssfi बाड़मेर जिले के मूल निवासी. 1965 में रहस्यवादी परिवार भारत पाकिस्तान में सिंध में ले जाया गया था. क्षेत्र संत पिता - ज्ञात लोक गायक था. है थार लोक पाकिस्तान में संगीत और गाने , वह झंडा लहराया. उसके पिता , लोक गीत - गंभीरता से लिया संत संगीत खजाने से विरासत में मिला. रहस्यवादी में लोक गीत नायाब शैली में गाते हैं. पाकिस्तान में बेहद लोकप्रिय Ssfi Shufiyana एक फकीर की तरह था. Ssfi एक संत की तरह अद्भुत क्योंकि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मंच मिला संगीत .


    धूम Antararashtyy मंचों Ssfi संत बनाया गया था. रहस्यवादी लोक गीतों की Ssfi तो रसीले और सुरीले हैं वही कर रहे हैं , संगीत भक्ति में उन्हें जवाब नहीं है. Shufiyana लगता है जब रहस्यवादी अमीर खुसरो , शाह बाबा धर्म, माधो शाह हुसैन, सुलतान बहू , ख्वाजा गुलाम फरीद की रचनाएं गाते हैं, दर्शकों को पागल हो जाना . कई रहस्यवादी Hshaoan सिंधी, मारवाड़ी , Ssiraqui , पंजाबी , उर्दू और पूर्व की तरह अपनी एक अलग गायन , जब दर्शकों को उनके संगीत के रस में डूबे हैं.
    बाड़मेर थार क्षेत्र Ssfi Maangniyar पारंपरिक लोक के जिले में 1961 में अपने पिता से संगीत संत जन्मे और Commaycha गायन सीखा. वह बाद में सारंगी वादक उस्ताद मजीद खान, जो प्रसिद्ध गायक और सारंगी खिलाड़ी पाक रेडियो के समय में लोक गीत - संगीत ब्योरा सीखा था और गायन में साधन सिद्ध हो . जबकि परिवार के साथ शाम में संगीत Shufi उस्ताद सलामत अली खान साहब की तफ़सील 84 सीखा.


    Ssfi मीरा , कबीर, तुलसीदास , अब्दुल लतीफ Hitai , मोबाइल Sarmaast शाह बाबा धर्म भक्ति रचनाओं को बहुत गंभीरता से गाते हैं. Ssfi Maangniyar बच्चों के लोक गीत - संगीत प्रशिक्षण के द्वारा पारंपरिक लोक गीत - संगीत की परंपरा पर निर्माण कर रहे हैं . रहस्यवादी अपने कार्यक्रमों के माध्यम से भारत को कई बार Shufi और भक्ति संगीत स्वर, आभा फैला है.
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    अनूठी है कौड़ी कला की हस्तशिल्प विरासत
    : चंदन भाटी
    बाड़मेर: एक जमाने में मुद्रा के रूप में उपयोग की जाने वाली कौड़ियों को वर्तमान में बहुत उपयोगी नहीं माना जाता। आज ‘कौड़ियों के भाव’ मुहावरे का अर्थ किसी चीज को बहुत सस्ते में खरीदना या बेचना माना जाता हैं। कभी मूल्यवान रहीं ये कौड़ियां धीरे-धीरे घर-परिवारों से लुप्त होती जा रही हैं, लेकिन राजस्थातन के बाड़मेर जिले के हस्तशिल्पियों ने अपनी सृजनात्मक ऊर्जा के बल पर कौड़ियों को साज-सज्जा के एक अद्भुत साधन का रूप प्रदान करने का सफल प्रयास किया है।


    बाड़मेर जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर स्थित देरासर गांव की रामदियों की बस्ती की हस्तशिल्पी श्रीमती भाणी, मिश्री खां व उनके साथियों ने कौड़ियों का नया संसार रच डाला है। कौड़ियों को रंग-बिरंगे धागों, झालरों को बारीक कसीदे और गोटों से खूबसूरती से गूंथकर पशुओं के श्रृंगार तथा घरेलू सौन्दर्य को बढ़ाने के लिए इस्ते माल किया जाता रहा है। लेकिन, आधुनिक जरूरतों को देखते हुए हस्तशिल्प को विस्तांर देने और उसके लिए बाजार बनाने का प्रयास हो रहा है।


    इस गांव के ज्यादातर हस्तशिल्पी मुसलमान (रामदिया) हैं तथा पशुपालन व विक्रय धंधा करते हैं। 95 घरों वाले इस गांव में पच्चीस घर रामदिया मुसलमानों के हैं, जो गुजरात और महाराष्ट्र के विभिन्न पशु मेलों में शरीक होकर पशु क्रय-विक्रय का धंधा करते हैं। ऐसे ही एक मेले में मिश्री खां अपनी पत्नी भाणी के साथ गुजरात गए, जहां ऊंट और घोड़ों के श्रृंगार को देखकर बेहद प्रभावित हुए। बैलों के श्रृंगार के लिए कौड़ियों की बनी मोर कलिया, गेठिये, घोडी के श्रृंगार के लिए मृणी लगाम, गोडिए, त्रिशाला और ऊंटो के लिए बने पऊछी गोरबन्ध मुहार, मोर आदि कौड़ी कला को देखकर आधुनिक नमूने तैयार करने के विषय में पूछताछ कर यहीं से इस दम्पति ने नई जिन्दगी की शुरूआत की।


    भाणी का पुश्तैनी कार्य कांच-कसीदाकारी का तो था ही, साथ ही भाणी ने इसी दौरान कौड़ी काम भी सीख लिया। पशु श्रृंगार की सामग्री के साथ-साथ भाणी ने गुडाल तथा अन्य झोपडों के लिए तोरण-तोरणिएं तथा अपाण के पलों पर कडों कौड़ी, खीलण कांच और भरत का कार्य करने में भी महारत हासिल कर ली। मुसलमान, मेघवाल आदि जातियों की शादियों पर कौड़ियों वाले मोर पर तो आज भी गांव वाले मोहित हैं। भाणी ने परम्परागत कौड़ी कला कार्य इण्डाणी गोरबन्ध के साथ-साथ इसी कला के थैले, पर्स बनाने आरम्भ कर दिए।


    हस्तशिल्पी बताते हैं कि कौड़ी कला युक्त इण्डाणियों की मांग शहर में बहुत हैं। शहर वाले परम्परागत इण्डानियों को देखकर मोहित हो जाते हैं। भाणी झालर वाली, बिना झालर वाली और बिना फुन्दी वाली इण्डाणी बनाती हैं। झालर वाली इण्डाणी बीस इंच लम्बी होती हैं, जिसके कारण शिल्पकार को इसे तैयार करने में तीन दिन लग जाते हैं। इस इण्डाणी में आधा किलो कौड़ी और लगभग डेढ़ सौ ग्राम ऊन लग जाता है। बिना झालर व फुन्दे वाली इण्डाणी एक ही दिन में तैयार हो जाती हैं। इसमें 100-125 ग्राम कौड़ी का उपयोग होता हैं। बिना झालर व फुन्दी वाली इण्डानी बनाने में एक दिन का समय लगता हैं।


    झालर वाली इण्डाणी में मूंजवाली रस्सी को गोलकर कपड़े से सिलाई कर दी जाती है और कौड़ी में बंद करके उसे कपड़े पर सील दिया जाता है। कौड़ी कला के कद्रदान आज कम बचे हैं। सरकारी स्तर पर इन हस्तशिल्पियों को सरंक्षण नहीं मिलने के कारण ये फाकाकशी में दिन गुजार रहे हैं। कौड़ी कला के हस्तशिल्पी देश भर में कम ही बचे हैं। मिश्री खान को दाद तो खूब मिलती है, मगर दो जून की रोटी का जुगाड़ करने में कोई मदद नहीं करता।
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    राजस्थालन: सरहद पर दो बूंद पानी के लिए तरसते दलित
    बाडमेर: भारत-पाकिस्तान सरहद पर बसे परंपरागत रूप से अभावग्रस्त राजस्थारन के बाड़मेर जिले में भीषण गर्मी के साथ-साथ पेयजल संकट से आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है। अभावों के आदी होने के बावजूद थारवासी इस बार के पेयजल संकट और भीषण गर्मी को सहन नहीं कर पा रहे हैं। सरहदी क्षेत्रों में पेयजल संकट किसी सजा से कम नहीं है। विशेषकर, दलित वर्ग के लोगों के लिए।


    बाड़मेर जिले के समस्त 2285 गांव अभावग्रस्त घोषित हैं, मगर राज्य सरकार ने अभावग्रस्त जनता को राहत देने के लिए किसी प्रकार के ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिसके चलते दलित परिवारों के सामने जीवन का संकट पैदा हो गया है। दलितों की जिंदगी दो बूंद पानी की तलाश तक सिमट कर रह गई है। पूरा दिन एक घड़ा पानी की तलाश में निकल जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में दलित परिवारों के लिए पेयजल की अलग से व्यवस्था परंपरागत रूप से है। आज भी सवर्ण जातियां दलित वर्ग के लोगों को अपने साव, तालाबों और टांकों से पानी भरने नहीं देती। अभिशप्त दलित वर्ग दो बूंद पानी के लिये संर्घष कर रहा है।


    जाति के आधार पर बंटे इन पेयजल स्रोतों का निर्माण सरकार ने भले ही सार्वजनिक तौर पर कराया हो, मगर जमीनी हकीकत यही है कि दलित को सार्वजनिक कुओं से पानी भरने की इजाजत तथाकथित सभ्य समाज नहीं देता। कहने को जिला प्रशासन द्वारा सभी आठों तहसीलों में पानी के टैंकरों की व्यवस्था कर रखी है, मगर ये पानी के टैंकर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने से पहले गांवों के प्रभावशाली लोगों के हत्थे चढ जाते हैं। सार्वजनिक टांकों में पानी भरे जाने के बजाय प्रभावशाली सवर्ण जाति के निजी टांकों में भरे जाने के कारण दलितों के पेयजल स्रोत खाली ही रहते हैं। ऐसे में दलित परिवार की महिलाओं को आसपास के गांवों में पानी की तलाश में निकलना पडता है।


    गांव के सार्वजनिक टांकों पर दलितों को पानी भरने की इजाजत नहीं


    गांव-गांव में यही कहानी दोहराई जाने के कारण आज दलितों के पानी के टांके खाली पड़े हैं। जाति के आधार पर बंटे पानी के कारण दलित वर्ग के लोग पलायन को मजबूर हैं। गांवों में बाकायदा सवर्ण जातियों के लिए अलग से टांके बने हैं, तो दलित वर्ग के लिए ‘मेधवालों की बेरी’, ‘भीलों की बेरी’, ‘सांसियों का तला’, ‘मिरासीयों का पार’ नाम से पानी के स्रोत अलग से गांव की सरहदों पर बने हुए हैं। जिले में लगभग 70-80 सरपंच, जिला परिषद सदस्य तथा पंचायत समिति सदस्य और एक विधायक दलित समाज से होने के बावजूद ग्रामीण अंचलों में दलितों का सरेआम शोषण हो रहा है। दो बूंद पानी के लिए दलित वर्ग को बार-बार अपमानित होना पड रहा है।


    जाति आधारित बंटवारा महज पानी में ही हो, ऐसा नहीं हैं। हर योजना का बंटवारा जाति आधारित हो रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित पेयजल राहत टैंकर चलाने वाले किशनाराम ने बताया, ‘‘हम गरीबों तक पानी पहुंचाना चाहते हैं, मगर गांव के प्रभावशाली लोग हमें गांव में घुसने पर ‘देख लेने’ की धमकिया देते हैं, जोर-जबरदस्ती कर पानी के टैंकर अपने घरों के टांकों में खाली कराते हैं। हमें गांवों में बार-बार जाना होता है। किस-किस से दुश्मुनी मोल लें।’’


    रूघाराम मेघवाल कहते हैं, ‘राहत के पेयजल टैंकर गरीब और दलितों तक पहुंचने ही नहीं दिए जाते। गांवों में दलितों के टांकों में पानी रीत (रिक्तं) चुका हैं। पानी खरीदने की हमारी हैसियत नही है। बीस-बीस किलोमीटर परिवार की महिलाएं और बच्चे पैदल चल कर पानी की तलाश में भटकते रहते हैं। दिन भर की तलाश के बाद एक घड़ा ला पाते हैं। ऐसी स्थिति कब तक चलेगी? जिला प्रशासन को बार-बार सूचित किया, मगर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।
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    इंडियन आइडल-5’ में दिल जीता बाड़मेर के स्वरूप खान ने
    बाड़मेर के बईया के रहने वाले स्वरूप खान की संगीत के प्रति दीवानगी देखने लायक है। बचपन से ही अपने परिजनों के साथ लोक संगीत में अपने आप को पारंगत करने में जुटा स्वरूप खान आज ‘इंडियन आइडल-5’ के अंतिम 10 प्रतिभागियों में सलेक्ट हो गया है। स्वरूप खान के चयन पर बाड़मेरवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।


    स्थानीय लोक कलाकार पूर्व में भी देश-विदेश में अपनी गायकी का लोहा मनवा चुके हैं। बॉलीवुड व हॉलीवुड में परफॉर्मेंस देने के बाद अब इंडियन आइडल भी लोक कलाकारों की गायकी से अछूता नहीं रहा और स्वरूप खान को अंतिम 16 में जगह मिल गई। अहमदाबाद में ऑडिशन देने के बाद स्वरूप का चयन मुम्बई के लिए हुआ। वहां सात दिन के रिहर्सल के बाद 150 में उसने जगह बनाई। उसके बाद 70 प्रतिभागियों में से सलेक्ट कर उसे अंतिम 40 में लिया गया। स्वरूप ने 40 प्रतिभागियों के ऑडिशन में भी अपनी छाप छोड़ी और 25 प्रतिभागियों में सलेक्ट हुआ। आखिर में उसने अंतिम ऑडिशन में निर्णायकों का दिल जीत कर अंतिम 10 में जगह बनाई।


    बईया निवासी नियाज खां के 19 वर्षीय पुत्र स्वरूप खान को शुरू से ही गायकी का शौक था। उसने अपने चाचा अनवर खां से यह हुनर सीखा। अनवर खां के साथ स्वरूप खान ने विदेशों में कई प्रोग्राम किए और ख्याति अर्जित की। जैसलमेर के लोक कलाकारों में स्वरूप खान सूफी गायन के जादूगर माने जाते हैं। उनकी गायकी ने निर्णायक अनु मलिक, सुनिधि चौहान व सलीम मर्चेंट को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वरूप खान इससे पूर्व अंग्रेजी फिल्म ‘मिल्क एंड ओपियम’ में मुख्य किरदार निभा चुका है।


    लोकसंगीतकापरचम


    स्थानीय मांगणियार कलाकारों ने लोक संस्कृति को संगीत के माध्यम से जीवित रखा है। वे निरंतर लोक संगीत को विख्यात करने में लगे हुए हैं। और तो और, अब यह संगीत इस जाति के लोगों की आजीविका का साधन बन चुका है। नन्हें कलाकारों से लेकर बुजुर्ग कलाकार आज भी शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को भावविभोर कर रहे हैं।


    स्वरूपकीआवाजमेंद- है


    ‘गुणसार लोक कला संस्थान’ के अध्यक्ष बक्श खां ने बताया कि स्वरूप की आवाज में दम है और उसकी संगीत के प्रति दीवानगी उसको आगे तक ले जाएगी। वह लोक संगीत के साथ-साथ फिल्मी गीत भी सधे हुए सुरों में गा सकता है। बक्श खां ने बताया कि स्वरूप खां की हौसला अफजाई के लिए संस्थान उसे वोट करने की अपील करेगा
    बाड़मेर: पुलिसकर्मी ने पत्नी की हत्या की
    बाड़मेर: राजस्था्न के मरूस्थकली जिले बाड़मेर के मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन के सरकारी आवास में एक पुलिसकर्मी ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस लाइन में घटित इस हत्याकांड से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
    बाड़मेर पुलिस अधीक्षक (एसपी) संतोष चालके ने बताया कि पुलिस विभाग में कार्यरत सिपाही राणाराम ने गुरुवार प्रातः अपने सरकारी आवास में सो रही पत्नी के सिर पर गैस की टंकी से वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। पत्नी की हत्या कर राणाराम ने स्वयं घर से बाहर आकर पड़ोसियों को पत्नी की हत्या के बारे में बताया। इसके बाद पड़ोसियों ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी।
    सूचना मिलने के बाद पुलिस दल ने घटनास्थल पर पहुंच कर आरोपी पुलिसकर्मी को हिरासत में ले लिया। पुलिस के आला अधिकारियों ने घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का मौका मुआयना किया। पुलिस ने मृतका के शव का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया। इस संबंध में पुलिस थाना कोतवाली में हत्या का मामला दर्ज कर जांच आरम्भ कर दी गई है।
    जयपुर हाइवे जाम किया
    बाड़मेर राजसमंद जिले के ईसरमंड के जंगलों में कथित तौर पुलिस मुठभेड़ में मारे गए बिलाड़ा निवासी तस्कर छोटूराम जाट का शव गुरुवार को यहां पहुंचा।
    छोटूराम के शव को उसके समर्थकों ने कापरड़ा के मुख्य बस स्टैंड पर ही रोक लिया और करीब डेढ़ घंटे तक जोधपुर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 112 को जाम कर दिया। आक्रोशित ग्रामीण बाड़मेर जिले के अंतर्गत कल्याणपुर थाना प्रभारी के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कर उसे बर्खास्त करने की मांग को लेकर नारे लगाते रहे। बाद में पुलिस व स्थानीय राजनेताओं की समझाइश और आश्वासन से वे रास्ता खोलने पर राजी हो गए।
    गौरतलब है कि पुलिस ने छोटूराम जाट के मंगलवार को ईसरमंड के जंगलों में मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही थी। उसका शव पोस्टमार्टम के लिए अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल में ले जाया गया। वहां उसके परिजनों ने यह कहते हुए पोस्टमार्टम करवाने और शव उठाने से मना कर दिया कि छोटूराम के सरेंडर करने के बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी। बुधवार देर रात तक वे हॉस्पिटल के बाहर धरना देकर बैठे रहे। बाद में राजसमंद एसपी के मुकदमा दर्ज किए जाने की बात कहने पर वे पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव छोटूराम के पैतृक गांव भेज दिया गया।
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    बाड़मेर: जातीय पंचायत का मौत के बदले मौत का फरमान


    बाड़मेर: भारत-पाकिस्ताकन अंतरराष्ट्री य सीमा पर स्थित राजस्थान के बाड़मेर जिले के शिव तहसील के जालेला गांव में जातीय पंचायत ने एक परिवार का हुक्का -पानी बंद करने और मौत के बदले मौत का फरमान सुनाया है। पीडि़त पक्ष ने पुलिस अधीक्षक के सामने पेश हो न्याय की गुहार लगाई है।


    बाड़मेर जिले के शिव थाना क्षेत्र के जालेला गांव निवासी सवाई सिंह ने पुलिस अधीक्षक संतोष चालके को बताया कि लगभग तीन साल पुर्व उनके बच्चे और नखतसिंह के बच्चेि आपस में खेल रहे थे। खेल-खेल में नखत सिंह के बच्चे शिशुपाल सिंह की मृत्यु हो गई थी। इस पर नखतसिंह का परिवार इस मामले को लेकर जातीय पंचायत में चला गया।


    बकौल सवाई सिंह, ‘जातीय पंचों ने मेरे परिवार का आजीवन हुक्का-पानी बन्द करने के साथ गांव से दरबदर का फरमान जारी किया था। साथ ही, मौत के बदले मौत का फरमान जारी किया था। जातीय पंचायत के बाद भय और आंतक की वजह से हमारे परिवार ने तीन साल पहले ही गांव छोड़ दिया था। समाज से भी मुझे बहिष्कृत किया गया था। परिवार में शादी की वजह से मैं अपने परिवार के साथ 14 मई को गांव आया। गांव में पहुंचते ही जातीय पंचों ने धमकियां देना शुरू कर दिया। इसी रात मैं अपने सगे-संबंधियों के साथ देर रात शादी की योजना पर बातचीत कर रहा था। इसी दौरान वहां कानसिंह, भूरसिंह, नरपतसिंह सहित 11 लोग आए और उन्होंने हमारे आशियानों में आग लगा दी। सभी आरोपी झोपडों को चारो और से घेर के खडे थे ताकि हमारा परिवार बाहर नहीं आ सके। कुछ लोगों ने हमारी मदद कर हमें आग से बाहर निकाला। आज जैसे-तैसे आरोपियो से नजरें बचा कर आपसे मिलने (एस.पी.) बाड़मेर आया हूं। मुझे न्याय दिलाएं तथा आरोपियों को गिरफ्तार करें। आरोपी बदले की भावना में मुझे और मेरे परिवार को मौत के घाट उतारना चाहते हैं।’


    पुलिस अधीक्षक संतोष चालके ने बताया कि फरियादी का मामला शिव थाने में दर्ज कर उसे पूरी सुरक्षा दे दी गई है। मामले के अनुसंधान का कार्य थानाधिकारी भंवरदान को दिया गया है और आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया गया है। आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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    शटअप! यू शटअप!


    बाडमेर। सांसद हरीश चौधरी और बायतु विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी मंगलवार को कांग्रेस कार्यालय में एक-दूसरे से उलझ गए। दोनों बीच तू-तडाक हुई और एक ने शटअप कहा तो दूसरे ने जवाब में यू शटअप। बाद में जिले के प्रभारी एवं बीकानेर के जिला प्रमुख रामेश्वर डूडी व अन्य विधायकों ने दोनों को शांत किया।
    संगठन चुनाव को लेकर हुई बैठक में सोनाराम ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में पोकरण-फलसूण्ड-हीरे- की ढाणी जलप्रदाय योजना के लिए मुख्यमंत्री को अवगत कराया था, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया और बजट में कोई घोषणा नहीं की। इस पर हरीश चौधरी ने कहा कि जिले में 198 करोड रूपए योजनाओं के लिए दिए गए हैं। यह तथ्य गलत निकले तो इस्तीफा देने को तैयार हूं। इस पर सोना राम दुबारा खडे हो गए और कहा कि वे सही कह रहे हैं, भेदभाव किया गया है।
    इस पर सांसद ने कुछ बोलना चाहा तो विधायक ने कहा शट अप...। जवाब में सांसद ने कहा कि यू शट अप। इसके बाद दोनों में नोंक-झोंक शुरू हो गई। सोनाराम कहने लगे कि आप दिल्ली की पंचायती करो, राज्य की नहीं। मैं भी तीन बार सांसद रहा हूं सब जानता हूं। हरीश ने भी जवाब में कहा कि सही बात की पैरवी की जानी चाहिए। गलत जानकारी देने की जरूरत नहीं है। इसके बाद दोनों तू-तडाके पर उतर आए। विधायक मेवाराम जैन, मदन प्रजापत, पदमाराम मेघवाल, रामेश्वर डूडी सहित कांग्रेस के अन्य लोगों ने दोनों को शांत किया।
    चापलूसी करते हैं
    कुछ लोग यूं ही चापलूसी कर रहे हैं। मैंने गलत नहीं कहा है। बजट भाषण की कॉपी देख लें। विधानसभा में भी मैंने यह बात कही थी। पेयजल योजना के लिए पैसा नहीं दिया है तो चुप क्यों रहूंगाक् -कर्नल सोनाराम चौधरी, विधायक, बायतु
    योजना को लेकर बात हुई
    जलप्रदाय योजना को लेकर बात हुई है। उन्होंने कहा कि बजट नहीं दिया है तो मैंने जानकारी दी कि बजट दिया गया है।
    -हरीश चौधरी, सांसद


    पुलिस मुठभेड में एक तस्कर ढेर
    ।बाडमेर देवगढ थाना क्षेत्र से मंगलवार शाम नाकाबंदी तोडकर भागे तस्करों व पुलिस के बीच लसानी के जंगलों में हुई मुठभेड के दौरान फायरिंग में एक तस्कर की मौत हो गई जबकि एक को देवगढ व बाडमेर पुलिस ने धर दबोचा।बाडमेर थाना पुलिस वहां बलदेवनगर में तीन दिन पूर्व हैड कांस्टेबल सहित दो जनों पर हुए गोलीकांड में आरोपियों की तलाश के लिए शाम को ही देवगढ पहुंची थी। आरोपियों के देवगढ की तरफ आने की सूचना मिलने पर देवगढ पुलिस के सहयोग से नाकाबंदी की गई। इस दौरान शाम को तेज गति से आती एक स्कॉर्पियो को पुलिस ने हाथ देकर रोका तो तस्करों ने गाडी में से ही फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने इधर-उधर होकर अपनी जान बचाई व बाद में तस्करों के पीछे लग गई। तस्कर कुछ आगे जाने के बाद लसानी के जंगलों में भाग निकले। पुलिस को पीछे आता देख उन्होंने फिर फायर कर दिए। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायर किए जिसमें बिलाडा (जोधपुर) निवासी छोटूराम पुत्र दयाराम को गोली लगी। पुलिस की एक टीम ने उसे संभाला जबकि दूसरी टीम ने घेराबंदी कर राशमी (चित्तौडगढ) निवासी शंकर पुत्र छोगालाल अहीर को गिरफ्तार कर लिया। घायल छोटूराम को लेकर पुलिस भीम चिकित्सालय पहुंची जहां से उसे ब्यावर व वहां से अजमेर रेफर कर दिया। अजमेर चिकित्सालय ले जाते रास्ते में उसने दम तोड दिया। आरोपी शंकर के पास से पिस्टल, कारतूस व खाली खोल बरामद किया। घटना की सूचना मिलने पर एसपी नितीनदीप ब्लग्गन व एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। एसएसएल ने घटनास्थल व गाडी में आवश्यक साक्ष्य लिए।
    शातिर हैं दोनों आरोपी
    एसपी ब्लग्गन ने बताया कि मृतक छोटूराम के खिलाफ हत्या का प्रयास व डकैती का जोधपुर के लूणी, फिरौती का डांगियावास व मारपीट का महामंदिर में मुकदमा दर्ज है जबकि गिरफ्तार शंकर शातिर तस्कर है जिसके खिलाफ राजनगर थाने में डकैती की योजना व आम्र्स एक्ट का मुकदमा दर्ज है। मादक पदार्थ तस्करी के मामले में वह कपासन (चित्तौडगढ) में वांछित चल रहा है।
    लूट व कातिलाना हमले के आरोपियों पर ईनाम घोषित
    बाड़मेर & शहर में माल गोदाम रोड़ पर कृष्णकांत पालीवाल के साथ हुई लूट व बलदेव नगर निवासी आरोपियों के बारे में सही जानकारी देने पर संबंधित व्यक्तिा को दो हजार रुपए नकद ईनाम की घोषणा की है। जिला पुलिस अधीक्षक संतोष चालके ने बताया कि शहर में बीती 14 मई को माल गोदाम रोड़ पर कृष्णकांत पालीवाल सपत्नीक बाइक पर घर जा रहे थे। इसबीच दो अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने डेढ़ लाख रुपए से भरा बैग छीन भाग गए। इस संबंध में आरोपियों के बारे में सही जानकारी जिला पुलिस को देने पर संबंधित व्यक्ति को दो हजार रुपए का नकद ईनाम देने की घोषणा और इसी तरह 14 मई को बलदेव नगर में पुलिस हैड कानिस्टेबल सोनाराम व गंगाराम पर आरोपी दिनीया उर्फ दिनेश पुत्र डूंगराराम जाति जाट निवासी भुरटिया हाल बलदेव नगर व उसके सह अपराधी द्वारा देशी कट्टे से घायल कर भागने वालों की सूचना देने वाले को ईनाम दिया जाएगा।
    बोलेरो-पिकअप भिड़ंत में दो मरे ग्यारह घायल
    बाड़मेर.
    शिव थाना क्षेत्र के भियाड़ गांव में फलसंूड सड़क मार्ग पर एक बोलेरो व पिक अप गाड़ी की आमने -सामने हुई भिडं़त में दो जनों की मौत हो गई, वहीं ग्यारह जने घायल हो गए। जिन्हें उपचार के लिए राजकीय चिकित्सालय बाड़मेर लाया गया। जहां पर गंभीर रुप से घायल चार जनों को जोधपुर रैफर कर दिया गया।
    पुलिस थाना शिव के एएसआई हरिसिंह ने बताया कि भियाड़ गांव के बस स्टैंड पर भियाड़ से गोडागड़ा की तरफ जा रही बोलेरो को फलसंूड रोड़ पर सामने से आ रही पिकअप के चालक कायम खां पुत्र हकीम खां निवासी उण्डू ने टक्कर मार दी। जिससे बोलेरो गाड़ी का संतुलन बिगडऩे से वह पलटी खा गई। इस हादसे में बोलेरो के चालक डूंगराराम (30) पुत्र कानाराम निवासी भियाड़ की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं कबूल खां (60)पुत्र उमर खां निवासी उण्डू ने कुछ ही देर बाद दम तोड़ दिया। बोलेरो में सवार गेरों देवी पत्नी रतनाराम जाट निवासी भियाड़, जेठी देवी पत्नी पोकरराम भियाड़, गीता देवी पुत्री गोरधनराम भियाड़, पारु पत्नी हड़मानराम जाट निवासी सवाऊ पदमसिंह, मूली पत्नी गंगाराम निवासी भियाड़, हेमी पत्नी मेगाराम भियाड़ एवं पिकअप में सवार ईसाक खां पुत्र आयश खां निवासी उण्डू, गुलाम पुत्र अली खां, सुमार खां पुत्र तालब खां, हुसैन पुत्र कबूल खां, दिलबर खां पुत्र अब्दुल खां निवासी उण्डू घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए बाड़मेर लाया गया। जहां पर चार गंभीर रुप से घायलों को जोधपुर रैफर कर दिया गया।

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