*राधास्वामी!!
09-03-2020
आज सुबह के सतसंग में पढे गये पाठ
- (1) मौज से पढा गया:-गुरु मोहि दीजे अपना धाम।।टेक।।। मैं तो निकाम भर्म बस रहता। तुम दयाल लो मो को थाम।।
१।। ना जानूँ क्या पाप कमाये। गहे न सूरत नाम ।।
२।। कैसी करूँ जोर नहिं चाले। मन नहिं पावे दृढ बिसराम।
।३।। हे दयाल अब दया बिचारो। मैं दुख में रहूँ आठो जाम।।
४।। ना स्रुत चढे न मन ठहरावे। शब्द महातम नहिं पतियाम।।
५।। संत मता ऊंचा सुन पकडा। क्यों नहिं संत करें मेरी साम
।।६।। संत मते को लज्या आवे। जो मेरा नहिं पूरन काम।।
७।। अपनी मति ले करूँ पुकारा। मौज तुम्हारी मैं नहिं जाम।।
८।। बार बार मैं बिनय पुकारुँ। जस जानो तस देव निज नाम।
।९।। राधास्वामी कहें निज नामी। दरदी को चहिये आराम।
।१०।।(सारबचन-शब्द-तेरहवाँ, पृ.सं.647)
(2) सुरतिया भजन करत। हुई घट में आज निहाल।। बिघन लगाय काल उलझावत। काम क्रौध की डारत पाल।। (प्रेमबानी-2,शब्द-83,पृ.सं.201)
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻*
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