Monday, March 16, 2020

आज 16/03 को शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन पाठ





प्रस्तुति - - विमला अजय यादव

[16/03, 14:34] +91 94162 65214: राधास्वामी!! 16-03-2020     
                
आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ:-                                                                  (1) जब से मैं देखा राधास्वामी का मुखडा।।टेक।।  मोहित हुई तन मध सुधि भूली। छोड दिया सब जग का झगडा।।।(प्रेमबानी-3,शब्द-4,पृ.सं.197)                                                                                                                           
(2) गुरु का नाम जपो प्यारी। रुप गुरु घट में संभारी।। (प्रेमबिलास-शब्द-82,पृ.सं.115)                                                                     
 (3)  सतसंग के उपदेश-भाग तीसरा-परसों से आगे।)   

 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻



राधास्वामी!!

16-03 -2020

आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-

परसों से आगे

-( 82)-

इसमें बंधन कायम करना गलत व नामुनासिब है। तीसरी बात यह सिखलाता है कि ऐ इंसान! तू संसार में आवारागर्दी के लिये नही  बल्कि खास उद्देश्य के लिए भेजा गया है और वह उद्देश्य यह है कि तू अपनी आध्यात्मिक शक्तियां स्कूल आंखों के खुलने पर मनुष्य को दर्शन होजगावे। जैसे स्थूल आँखो के खुलने पर मनुष्य को सूर्य का प्रत्यक्ष दर्शन हो जाता है।

ऐसे ही आध्यात्मिक शक्तियो के जगने पर तुझको सुरत की आँखों से तेरे परमपिता का दर्शन प्राप्त होगा और फिर तू इस काबिल हो जाएगा इस मलीन व झूठे लोगों के देश से हटकर निर्मल चेतन देश में दाखिल हो और तेरी सुरत सच्चे मालिक से मेल हासिल करें ।

तीसरी बात सुनने पर जिज्ञासुओं के दिल में स्वाभाविक तौर पर सवाल पैदा होगा कि वह अपनी आध्यात्मिक शक्तियां कैसे जगावेँ। चौथी बात जो राधास्वामी मत सिखलाता है उसमें इस सवाल का जवाब है ।

वह यह है कि ऐ इंसान ! तू किसी कामिल उस्ताद की शरण ले यानी किसी ऐसे महापुरुष की शार्गिदगी इख्तियार कर जिसे वह गति जिसका ऊपर जिक्र हुआ , पहले ही प्राप्त है। इस पर जिज्ञासु यह दरयाफ्त करेगा कि ऐसे महापुरुष को कहाँ तलाश करें ।

 इसके जवाब में राधास्वामी मत बतलाता है कि अव्वल अपने घर में तलाश कर , वहां ना मिले तो अपने शहर या कस्बे में ढूंढ, वहाँ ना मिले तो अपने सूबे में ,अपने मुल्क या जहां कहीं उनकी मौजूदगी का पता चले वहां जाकर तलाश कर।

🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻

    (सत्संग के उपदेश भाग तीसरा)



राधास्वामी
 राधास्वामी
राधास्वामी
राधास्वामी

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