प्रस्तुति - उषा रानी /
राजेंद्र प्रसाद सिन्हा
🎶 *सतगुरु का लगातार ध्यान करना ही मालिक का दर्शन करना है!!*
हम भले ही सतगुरु से दूर बसते हैं पर उन का ध्यान करने से हमारी आत्मा शब्द रूपी घोड़े पर सवार होकर अपनी इच्छा से उनके पास जा और आ सकती है जब शिष्य हर पल अंदर सतगुरु के ध्यान में लगा रहेता है तो वह मालिक उसके ह्रदय रूपी घर मे ही प्रकट हो जाता है।*
*रोज-रोज 'भजन-सिमरन' करने से, धीरे-धीरे हमारे अंदर इतनी 'सहनशीलता' आ जाती है, कि हम बिना संतुलन खोए, जीवन में आने वाले 'उतार-चढ़ाव' का सामना करने लगते हैं।
*हमें इस बात का 'ज्ञान' होने लगता है, कि जो कुछ भी हो रहा है, वह हमारे 'कर्मों' के अनुसार ही हो रहा है, और 'सतगुरु' हमेशा हमारे अंग-संग हैं।*
🙏*राधास्वामी *...
🙏 *आपका दिन शुभ हो...
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