Friday, July 10, 2020

शाम के सतसंग में पढ़ा गया वचन




राधास्वामी!! 10-07-2020-

आज शाम के सतसंग में पढा गया बचन

-कल से आगे-(45)

लौकिक शक्तियों में एक और स्वभाव देखने में आता है कि जब किसी शक्ति की धार प्रवृत्त होती है तो उसमें तीन विभाग कायम हो जाते हैं।

जैसे दीपक के प्रज्जवलित करने पर उसमें तीन विभाग स्पष्ट रूप से दृष्टिगत होते हैं-एक विभाग वह जहाँ दीपशिखा उत्पन्न होती है अर्थात् लौ का वह सिरा जहाँ प्रकाश उज्जवल और सबसे अधिक दीप्त होता है। दूसरा वह विभाग जहाँ लौ से काला धुआँ निकलने लगता है, और तीसरा वह विभाग जो इन दोनों के मध्य में स्थित है अर्थात् उज्जवल प्रकाश के सिरे से लेकर धुएँ की उत्पत्ति-स्थान तक की लौ।

ऐसे ही चुम्बक-शक्ति को देखिये-उसके अन्तर्गत भी तीन विभाग होते है। पहला वह विभाग जहाँ से चुम्बक-शक्ति का आविर्भाव होता है, दूसरा उसके क्षेत्र की अंतिम सीमा, और तीसरा ध्रुव से वृत अर्थात् क्षेत्रसीमा तक की दूरी। संतमत की परिभाषा में इन तीनों विभागों को क्रमशः मस्तक, चरण और काया कहते है।

 यदि यह कथन यथार्थ है तो निश्चय होता है कि रचना के आरंभ में जो आदि चैतन्य धार प्रकट हुई उसमें भी तीन विभाग स्थापित करने का स्वभाव विद्यमान रहा होगा और इस स्वभाव के प्रभाव से रचना की सामग्री, जो आदिधार के अन्तर्गत थी, तीन विभागो में विस्तृत हुई होगी।

इसलिए राधास्वामीमत बतलाता है कि रचना के अन्तर्गत तीन बडे भाग है- पहला निर्मल चेतन देश, जो रचना का मस्तक है, दूसरा निर्मल निर्मल माया देश, जो रचना की काया है, और तीसरा मलिन माया देश, जो रचना का चरण है।।                                    🙏🏻राधास्वामी🙏🏻

यथार्थ प्रकाश-भाग पहला

-परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!!


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