Thursday, March 5, 2020

आज 0503-2020 को सत्संग में पढ़ा गया बचन






प्रस्तुति - आशा सिन्हा / रीना शरण

*राधास्वामी!!

 05- 03- 2020

 आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन

- कल से आगे -(75 )

 इंसान मोम या मिट्टी का पूरे कद का आदमी आसानी से तैयार कर सकता है लेकिन असली आदमी बच्चे ही की शक्ल में पैदा होता है और वह भी माता के सख्त तकलीफ उठाने के बाद । ऐसे ही जो जमाअते असली बच्चा पैदा करने

का काम अपने जिम्में लेती है उन्हें सख्त तकलीफें उठानी पड़ती है और जो बच्चा वह तैयार करती है वह शुरू में निहायत नाजुक और पस्तकद होता है और बमुकाबले उन लोगों के जो मोम या मिट्टी का आदमी बनाते हैं वह एक अरसा तक घाटे में रहती हैं। लेकिन मोम या मिट्टी का आदमी किस काम का? वह सिवाय इसके कि अपने गिर्द तमाशा देखने वालों की एक भीड़ जमा कर ले और क्या कर सकता है। बर्खिलाफ इसके असली बच्चा हरचंद सख्त तकलीफ के बाद पैदा होता है और अरसे तक नुकसान देता है लेकिन जवान होने पर सैकड़ों काम करता है।

 चुनांचे सत्संग के जिम्में यही यानी असली बच्चा पैदा करने की सेवा सुपुर्द हुई है इसलिए सत्संग की तरक्की आहिस्ता आहिस्ता ही होगी और हमें अनेक तकलीफें उठानी पड़ेगी और मोम का आदमी तैयार करने वाली जमाअतों के मुकाबले हम एक अर्से तक हेच रहेंगे लेकिन हमारा काम जिंदा व असली होगा और उससे संसार का उपकार होगा ।

🙏🏻राधास्वामी 🙏🏻

(सत्संग के उपदेश- भाग तीसरा)*





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