प्रस्तुति - विमला यादव/अजय यादव/
राधास्वामी!! 11-03-2020
आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ- (1) लागो रे चरन गुरु जीव अनाडी।।टेक।।
(प्रेमबानी-3,शब्द-8,पृ.सं.194) (2) ना जानूँ साहब कब मिलिहो रे।।टेक।।
बरन कहूँ क्या हाल जस मेरा। दर्दी बिना कोई नेक न हेरा। हे समरथ सुनो दर्दी की टेरा। घट मेरे में आय बसो रे।।
(प्रेमबिलास-शब्द-79,पृ.सं.112) (3) सतसंग के उपदेश-भाग तीसरा-कल से आगे।)
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻
*राधास्वामी!!
11-03 -2020
आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-
परसों से आगे-( 79)
जो लोग मालिक की हस्ती में विश्वास रखते हैं लेकिन परमार्थ की काफी समझ बूझ नहीं रखते, अक्सर 2 गलतियां करते हैं । एक यह कि वे ख्याल करने लगते हैं कि मालिक से मिलना या अंतरी संबंध कायम करना निहायत आसान है और दूसरे यह कि यह मानकर कि मनुष्य- शरीर रचना भर में सबसे उत्तम शरीर है वे इसी शरीर में रहना पसंद करते हैं । जैसे गर्मी के महीनों में पिघली हुई बर्फ के पानी यानी गंगा जल में गोता मारकर शीतल व प्रफुल्लित होने पर भोले भाले यात्री ख्याल करते हैं कि गंगाजी ने उनके सब पाप धो डाले, ऐसे ही ये लोग जब तब अंतर में जरा सी बिरह या तडप पैदा हो कर आँखों मे आँसू व कलेजे में ठंडक आ जाने पर विश्वास करते हैं कि उन्हे मालिक से मेल और मनुष्य शरीर का पूर्ण लाभ प्राप्त हो गया।
🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻
( सत्संग के उपदेश- भाग तीसरा)*
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