**परम गुरु हुजूर महाराज-
प्रेम पत्र -भाग 1-
कल से आगे- (4)
इस लोक की हद इस सूरज मंडल के ताल्लुक है, यानी यह सूरज मंडल जहां तक कि है वहां तक इस दर्जे की रचना की हद है। मगर वह रचनाn जो नीचे तरफ है वह इस लोक की घटना से ही कम दर्जे की है और इसी तरह नीचे के दर्जात में और ज्यादा कमी ताकत की होती गई है। और सबसे नीचे रचना नही है, वहाँ इस कदर मोटे खोल चैतन्य पर चढे हुए हैं कि मोटे से मोटे रचना भी वहाँ नहीं हो सकती।
वह जगह बतौर खाली मैदान के पड़ी हुई है, वहाँ रचना किसी वक्त में भी नहीं होगी। मगर तादाद उसके फासले में और विस्तार की कुछ नहीं कही जा सकती, क्योंकि अगर महाशंख को एक अलग तजवीज करके शुमार किया जावे तो भी हिसाब नहीं लग सकता। वहाँ बिनती का शुमार नहीं हो सकता है और न इस तादाद के जानने की कुछ जरुरत है। मनुष्य को अपने उद्धार यानी ऊपर को चढने की फिक्र करनी चाहिए और रचना के हिसाब में, जोकि बेशुमार है , ज्यादा पडना भी बेफायदा है , सिर्फ खास कायदे को जान लेना चाहिए।
और जोकि कानून कुदरत का सब जगह यकसाँ है, उसको समझ कर सब जगह की चाल का अनुमान करके, अपने मन को तसल्ली देकर, अपने खास काम को, जो अपने जीवन का कल्याण है, शुरू करना चाहिए
क्रमशः
🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**
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