𖡼•┄•𖣥𖣔𖣥•┄•प्रस्तुति┄•𖣥𖣔🙏🏻 पं0 कृषण मेहता 🙏🏻
_ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि आपके एवं आपके पूरे परिवार के लिए हर दिन शुभ एवं मंगलमय हों।_*
👉🏼 *_10 जुलाई 2020 श्रावण कृष्ण पक्ष की उदया तिथि पंचमी और शुक्रवार का दिन है। पंचमी तिथि दोपहर पहले 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। रात 8 बजकर 17 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। सौभाग्य योग सदा मंगल करने वाला होता है। साथ ही पूरा दिन पूरी रात कुमार योग रहेगा। इसके साथ ही पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रहेगा। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र 11 जुलाई की सुबह 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, पूर्वभाद्रपद नक्षत्र का संबंध आम के पेड़ से बताया गया है। पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोगों को आम के फल का सेवन नहीं करना चाहिए। आपको आम या आम से बनी चीजों जैसे आमरस, आम्बी का पन्ना, आम का आचार या फिर आम पापड़, इन सब चीजों का सेवन अवॉयड करना चाहिए। जानिए राशिनुसार कैसा रहेगा आपका दिन।_*
🐑 *_मेष राशि आपका दिन अच्छा रहने वाला है। मित्रों के साथ रिश्ते पहले से बेहतर बनेंगे। संतान पक्ष से कोई बड़ी खुशखबरी सुनने को मिलेगी। विद्यार्थियों को करियर से सम्बंधित कोई बड़ी सफलता मिलाने के योग बने हुये है। पहले की गयी मेहनत का अब लाभ मिलेगा। जिससे आपका मन प्रसन्न होगा। अगर आप नई नौकरी की तलाश में हैं, तो किसी दोस्त की मदद से आपको नौकरी मिल सकती है।_*
🐂 *_वृष राशि दिन फेबरेबल रहेगा। सरकारी नौकरी कर रहे लोगों को किसी काम के लिये प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही आपकी पदोन्नति भी होग।आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। आप अपना काम समय से पूरा करने में सफल होंगे। छात्र की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने का मन बनाएंगे। दाम्पत्य जीवन में नयी-नयी खुशियां आएंगी। आपका स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा!_*
👨❤️👨 *_मिथुन राशि आपका दिन अच्छा रहेगा। किसी दोस्त से बात-बात में ही आपको कोई अच्छा काम मिल सकता है। इससे आपकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी। जीवनसाथी के साथ रिश्तों में और मजबूती आयेगी। कामकाजी महिलाओं के लिए दिन बेहतरीन रहेगा। किसी की मदद से आपकी योजनाएं सफल हो सकती हैं। आपका रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है।_*
🦀 *_कर्क राशि आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। आपको उचित समय की पहचान करनी होगी। सही समय पर किया कार्य आपको सफलता दिला सकता है। परिवार में भी स्थिति ठीक बनी रहेगी। बच्चों की किसी जरूरत को पूरा करने के लिये आपको अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। प्राइवेट नौकरी कर रहे लोगों को आज अपने सीनियर से बात करते समय संयम रखना चाहिए। लवमेटस के लिए दिन बेहतरीन रहने वाला है।_*
🦁 *_सिंह राशि आपका दिन मिला-जुला रहेगा। आपको अपने हर काम को तय समय में बांटकर काम करने की जरूरत है। अन्यथा आपके बहुत से काम अधूरे रह सकते हैं। समय सीमा को ध्यान में रखकर काम करने से चीजें अच्छे से पूरी होगी और आप खुद पर भी ध्यान दे पायेंगे। घर का माहौल ठीक बना रहेगा। विद्यार्थी अपने करियर को और बेहतर बनाने के लिए किसी से सलाह लेंगे।_*
👰🏻 *_कन्या राशि आपका दिन बहुत ही उत्तम रहेगा। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को आज किसी बड़ी कंपनी से इंटरव्यू के लिये कॉल आ सकता है। अपनी बात सबको समझाने में सफल होंगे। जो लोग राजनीति के क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें आज सफलता मिलेगी। साथ ही आपको खूब मान-सम्मान भी मिलेगा। नये लोग आपसे जुड़ने की कोशिश करेंगे। कुल मिलाकर दिन आपके लिए अच्छा रहने वाला है।_*
⚖️ *_तुला राशि आप कार्यक्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाश करने की कोशिश करेंगे। किसी काम के लिये कई दिनों से की जा रही मेहनत का फल आपको मिलेगा। संगीत से जुड़े लोगों को किसी अच्छे प्लेटफॉर्म पर जाने का अवसर मिल सकता है। आपको कोई भी मौका हाथ से नहीं गंवाना चाहिए। जीवनसाथी को सफलता मिलाने से आपका मन पूरे दिन प्रसन्न रहेगा।_*
🦂 *_वृश्चिक राशि आपका दिन उत्तम रहेगा। जीवनसाथी के सहयोग से आपको जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता मिल सकता है। आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगे। किसी काम की नये सिरे से शुरुआत कर सकते हैं। आपके मन में नये-नये विचार आयेंगे। ऑफिस में सहयोगियों के साथ आपके रिश्ते मजबूत होंगे। बॉस आपके कामों की प्रशंसा कर सकते हैं। लवमेटस के रिश्तों में मजबूती आएगी।_*
🏹 *_धनु राशि आपका दिन शानदार रहेगा। कोई पुरानी बिजनेस डील आपको अचानक से लाभ दिलवा सकती है। आपका मन काफी प्रसन्न रहेगा। आपको समाज के कुछ अच्छे लोगों से जुड़ने का मौका मिलेगा। आप किसी सरकारी संस्था के काम में अपना सहयोग दे सकते हैं। सब लोग आपकी बातों से सहमत भी रहेंगे। नौकरी के क्षेत्र में भी आपके साथ सब कुछ अच्छा रहेगा।_*
🐊 *_मकर राशि आपका दिन सामान्य बना रहेगा। अगर आप कोई बड़ी बिजनेस डील करने जा रहे हैं, तो आपको बहुत ही सोच-समझकर फैसले करने की जरुरत है। आपको किसी अनुभवी व्यक्ति की मदद जरूर लेनी चाहिए। आपको किसी सरकारी काम को पूरा करने में परेशानी आ सकती है। जो छात्र उच्च शिक्षा में दाखिला लेने के लिये परीक्षाएं दे रहे हैं, उन्हें मन-मुताबिक परिणाम के लिये आज थोड़ी सी मेहनत करनी चाहिए।_*
⚱️ *_कुंभ राशि आप जो भी काम शुरु करेंगे, उसमें सफल जरूर रहेंगे। जो छात्र विज्ञान में रुचि रखते हैं, उनको आज नयी-नयी चीजें सीखने को मिलेगा ।हर तरह से स्थिति आपके पक्ष में रहेगी। अचानक धन लाभ होने के योग बन रहे है। घर पर नन्हें मेहमान के आने से परिवार में उत्सव का माहौल बनेगा। लवमेटस अगर आज अपने घर पर शादी की बात करें तो बात बन सकती है।_*
🐬 *_मीन राशि आपको जीवन में कुछ खास मौके मिलेंगे। आपको किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका मिल सकता है, जो आगे चलकर आपको किसी काम में आपकी मदद कर सकता है। आपकी आर्थिक स्थिति में और मजबूती आयेगी। आपकी कोई व्यवसायिक परियोजना पूरी हो सकती है। आप खुद को स्वस्थ महसूस करेंगे। जो लोग लोहे के व्यापार से जुड़े हैं, उनका काम अच्छा रहेगा।
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गोल्ड पहनने वाले लोगों को पता होनी चाहिए ये जरूरी बातें
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सोने की अंगूठी को तर्जनी उंगली में पहनना चाहिए
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सोना पहनना बहुत लाभकारी होता है। लेकिन सोना किन परिस्थिति में धारण करना लाभकारी होता है यह जानना बहुत महत्वपूर्ण होता है। जिन लोगों को कई साल से संतान नहीं हो रही है तो उनको अनामिका ऊंगली में सोने की अंगूठी पहननी चाहिए। वहीं एकाग्रता बढ़ाने के लिए तर्जनी अंगूठी में सोने की अंगूठी पहनना लाभकारी माना जाता है। सोना पहनने से व्यक्ति को सम्मान और सहयोग प्राप्त होता है। दाम्पत्य जीवन के लिए सोना धारण करना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। सोना आभूषण ही नहीं है बल्कि ज्योतिष शास्त्र में इसे सौभाग्य बढ़ाने वाला बताया गया है।
1. सोना का सम्बन्ध बृहस्पति ग्रह से होता है। सोने के आभूषण धारण करने से कुण्डली मे गुरु दोष खत्म हो जाते हैं तथा गुरु का अच्छा प्रभाव मिलना शुरू हो जाता है।
2. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सोने की अंगूठी को तर्जनी उंगली में पहनना चाहिए। इस उंगली में पहनने से गुरु ग्रह संबंधी परेशानी जल्दी खत्म हो जाती है।
3. जो लोग सोने की अंगूठी पहनते हैं उन्हें नशा करने से बचना चाहिए। जो लोग सोने की अंगूठी पहनकर नशा करते हैं उनकी कुंडली में गुरु ग्रह अशुभ फल देता है।
4. इंडेक्स फिंगर में सोने की अंगूठी के पुखराज धारण करना शुभ होता है। लेकिन यह किसी ज्योतिषी की सलाह पर ही धारण करना चाहिए।
5. जो लोग मोटापे से परेशान होते हैं उनको सोना पहनने से बचना चाहिए। कहा जाता है गुरु ग्रह के प्रभाव से यह समस्या और अधिक बढ़ सकती है।
6. सोने की अंगूठी बाएं हाथ में नहीं पहननी चाहिए। दाएं हाथ में अंगूठी पहनना शुभ माना जाता है।
7. सोने की अंगूठी को खो जाना किसी अशुभ होना का संकेत होता है। इसलिए इसे लेकर हमेशा सावधान रहना चाहिए।
8. जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ दशा में है तो उन लोगों को सोना धारण करने से बचना चाहिए। ऐसा करने से किसी बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
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जानिए! कैसे नवग्रह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर डालते हैं प्रतिकूल प्रभाव
नवग्रहों का व्यक्ति की जिंदगी में बहुत महत्व होता है। व्यक्ति की कुंडली में अगर नवग्रहों की स्थिति खराब हो तो उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं नवग्रह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। हम आपको यहां नवग्रहों और उनके प्रभाव से व्यक्ति को होने वाले रोगों के बारे में बता रहे हैं .......
सूर्य :-
सूर्य नवग्रहों में सबसे पहला ग्रह है। अगर किसी व्यक्ति की राशि में सूर्य की स्थिति सही नहीं हो, तो माना जाता है कि उसकी कुंडली में सूर्य की खराब दशा चल रही है। सूर्य यदि खराब हो, तो वह करियर, धन और सेहत से जुड़ी समस्याएं (दिल से जुड़ी समस्याएं, ब्लड प्रेशर, ब्लड सर्कुलेशन) पैदा कर सकता है।
चंद्र :-
चंद्र आपकी छाती, आंखें, खून, पानी, जेनेरेटिव सिस्टम, पानी का मालिक होता है। अगर चंद्र ठीक न हो तो यूरिनरी प्रॉब्लम, ड्रॉप्सी, कोलाइटिस, ब्रोंकाइटिस, वैरिकोज और ऐब्डोमन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।
मंगल :-
मंगल इंसान के शरीर का मसक्युलर सिस्टम कंट्रोल करता है। अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति बेहद खराब हो, तो यह ब्लड क्लॉट, ब्रेन फीवर, लंग्स प्रॉब्लम्स, टाइफॉइड और ब्लड से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है।
बुध :-
बुध जहां मनुष्य की जीभा, नाड़ी, सांस, सेल्स और नर्वस सिस्टम को कंट्रोल करता है, वहीं यह हवा को भी अपने नियंत्रण में रखता है। इस ग्रह के कमजोर होने से नाक से जुड़ी समस्या, हकलाने की समस्या, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, पैरालिसिस, नर्वस डिसऑर्डर आदि बीमारियां हो सकती हैं।
गुरु :-
थाई, मांस, फैट, किडनी, लिवर और आर्टेरियल सिस्टम का मालिक ग्रह है गुरु। अगर किसी की कुंडली में बुरी तरह प्रभावित हो, तो यह गठिया, डायबीटीज, पाइल्स, ट्यूमर, ब्लड कैंसर और लिवर मालफंक्शन जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है।
शुक्र :-
शुक्र त्वचा, चेहरा, आंखें, जेनेरेटिव सिस्टम, सीमेन औक डाइजेस्टिव सिस्टम को नियंत्रित करता है। जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह के दोषी होने पर व्यक्ति को आंखों, त्वचा से जुड़ी बीमारी, वेनेरियल प्रॉब्लम, इनडाइजेस्शन, भूख कम लगना, यहां तक कि नपुंसकता तक हो सकती है।
शनि :-
पांव, घुटनों, दिमाग, एसिड्स, बोन मैरो, सीक्रेटिव सिस्टम, रिब्स, बाल, नाखून, इन सभी का मालिक होता है शनि। यह जन्म से ही व्यक्ति की कुंडली में जुड़ जाता है। शनि ग्रह यदि खराब हो, तो यह अर्थराइटिस, रयूमैटिज्म, गठिया, बोन टीबी, अस्थमा, कोल्ड, नाखूनों में फंगस, बालों का झड़ना और नपुंसकता जैसी समस्या भी दे सकता है।
राहु और केतु :-
राहु और केतु मनुष्य को समस्याएं देने, उन्हें तबाह करने, उन्हें किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाने के लिए ही होते हैं।
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अनोखे ऋषि जरत्कारु की कथा, महाभारत कथा
महर्षि जरत्कारु की कथा का वर्णन महाभारत के आदिपर्व मे किया गया है जोकि बहुत ही रोचक है जिसमे बताया गया है कैसे जरत्कारु अपने उलटे लटके पितृगण से मिले कैसे उनका उद्धार किया तथा जन्मेजय के सर्पयज्ञ से सभी सर्पों का विनाश होने से बचाया,
कथानुसार:-
जरत्कारु शब्द बना है जरा और कारू शब्द से, जरा का मतलब होता है " क्षय " और कारू का मतलब होता है " दारुण अर्थात विशाल, मतलब महर्षि का शरीर बड़ा ही भयानक और हष्ट पुष्ट था लेकिन कठोर तप के कारण जीर्ण शीर्ण बना लिया तभी से इनका नाम जरत्कारु पड़ा, जरत्कारु मुनि ने बहुत दिनों तक ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए तपस्या की मुनि का नियम था की जहाँ शाम हो जाती थीं वहीं ठहर जाते थे, वे पवित्र तीर्थों मे स्नान करते और ऐसे कठोर नियमो का पालन करते थे जिनका पालन करना जन सामान्य के असंभव था, वें केवल वायु पीकर जीवित रहते थे जिसके कारण उनका शरीर सूख सा गया था,
एक दिन यात्रा के दौरान मुनि ने देखा की कुछ पितृगण नीचे की ओर मुँह किये लटक रहें है, वें केवल एक घास के सहारे लटक रहें थे और उस घास को भी एक चूहा धीरे धीरे कुतर रहा था, वे पितृगण निराहार दुर्बल और दुखी थे, यह देखकर मुनि जरत्कारु उनके पास गये और पूछा की आप लोग कौन है. आप लोग जिस घास का सहारा लेकर लटक रहें हैं उस घास को एक चूहा कट रहा है ज़ब जद कट जाएगी तो आप लोग नीचे मुँह किये गड्ढे मे गिर जायेंगे, अतः आप लोगो को देखकर मुझे बड़ा दुःख हो रहा है, बतलाइये मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ, मैं अपनी सारी तपस्या का फल देकर भी आपको बचाना चाहता हूँ, आप बस आज्ञा कीजिये,
तब पितरों ने कहा की आप बूढ़े ब्रम्हचारी है परन्तु हमारी समस्या तपस्या के बल पर से नहीं तालाब सकती, तपस्या का फल तो हमारे पास भी है, लेकिन वंश परंपरा के नाश के कारण हम इस घोर नरक मे गिरे जा रहें है, हम लोग यायावर नामक ऋषि हैं, हमारे वंश मे एक ही व्यक्ति रह गया है वह भी नहीं के बराबर है, वह वेद वेदान्तों का ज्ञाता तो है ही साथ मे संयमी, उदर और व्रतशील भी है, उसने तपस्या के लोभ मे हमें संकट मे डाल दिया है, उसके सन्तान न होने के कारण हम लोग इस गड्ढे मे लटक रहें है, यदि वह कहीं मिले तो उसे यह सारा वृतांत सुनना और कहना की वह जल्द विवाह करके सन्तान उत्पन्न करें, अब वहीँ हमारे वंश का आश्रय होगा, यह जो आप घास की जड़ देख रहें है, वहीँ हमारे वंश का सहारा है, हमारी वंश परंपरा के जो लोग नष्ट हो चुके है वहीँ लोग इसकी कटी हुई जड़ें है, और यह अधकटी जड़ ही जरत्कारु है, और यह जड़ कुतरने वाला चूहा महाबली काल है, यह एक दिन जरत्कारु को भी नष्ट कर देगा, जरत्कारु के नाश होते ही हम लोग भी इस नरक रूपी गढ्ढे मे गिर जायेंगे, मेरे पुत्र का नाम जरत्कारु है आपने जो कुछ भी देखा उसे जरूर बताइयेगा
आपने पितरों की बात सुनकर जरत्कारु को बहुत दुःख हुआ और रोते हुए पितरों से बोला की " आप लोग मेरे ही पितामह है मैं ही आप लोंगो का अपराधी पुत्र जरत्कारु हूँ, मुझे दण्ड दीजिये और मेरे करने योग्य कार्य बताइये, तब पितरों ने कहा की बड़े सौभाग्य की बात है की तुम यहाँ तक आ गये, आखिर अब तक तुमने अपना विवाह क्यों नहीं किया, यह सुनकर जरत्कारु बोला की पितामह मैं सोचता था की अखंड ब्रम्हचर्य का पालन करके मैं स्वर्ग को प्राप्ति करूँ, लेकिन आप लोंगो को उल्टा लटकते देख अब मैं निसंदेह विवाह करूँगा, आप लोग चिंता मत कीजिये आपके कल्याण के लिए मैं पुत्र अवश्य उत्पन्न करूँगा, आप लोग परलोक मे सुख से रहोगे,
पितरों से इस प्रकार कहकर जरत्कारु आपने लिए कन्या ढूंढने लगे, लेकिन उनकी शर्त और अवस्था देखकर कोई कन्या देने को राजी ही नहीं हुआ, तब वें निराश होकर वन मे चले गये, और पितरो के हित के लिए तीन बार धीरे धीरे बोले की " मैं कन्या की याचना करता हूँ, यहाँ जो भी चर अचर गुप्त या अदृश्य प्राणी हैं, मैं पितरों के हित के लिए उनसे कन्या की भींख मांगता हूँ, जिस कन्या का नाम जरत्कारु हो, जो भिक्षा के रूप मे दी जाएं, जिसके भरण पोषण का भार मुझ पे न रहें, ऐसी कन्या मुझे प्रदान करें, तभी यह बात वासुकि सर्प ने सुनी, वह तत्काल अपनी बहन के पास गया जिसका नाम भी जरत्कारु था, और अपनी बहन के साथ वासुकि मुनि जरत्कारु के पास आया और सारी शर्त मानकर, अपनी बहन का विवाह मुनि के साथ करवा दिया,
अब ऋषि अपनी पत्नी के साथ वासुकि के सुन्दर भवन मे रहने लगे, और अपनी पत्नी को भी अपनी शर्त की बात भी बता दी कि " यदि तूने मेरी रूचि के विरूद्ध कोई कार्य किया या बोला तो मैं तुम्हारा त्याग कर दूंगा, शर्त मानकर अब मुनि कि पत्नी भी मुनि की सावधानी पूर्वक सेवा करने लगीं, उसी दौरान उसे गर्भ ठहर गया और समय के साथ धीरे -2 बढ़ने लगा, समय भी धीरे -2 बीत रहा था, एक दिन की बात है ऋषि अपनी पत्नी के गोद मे सिर रखकर सोये हुए थे की तभी सूर्यास्त का समय हो गया, अब मुनि की पत्नी ने सोचा की पति को जगाना धर्म के अनुकूल होगा या नहीं, क्योंकि ये बड़े कष्ट उठाकर धर्म का पालन करते है,
कहीं जगाने या न जगाने से मैं अपराधिनी न हो जाऊ, जगाने पर इनके क्रोध का भय,और न जगाने पर धर्मलोप का भय, अंत मे निश्चय किया की वे भले ही क्रोध करें, लेकिन धर्मलोप से बचाना ही मेरा कर्तव्य है, अतः बोली की हे महाभाग उठिये सूर्यास्त हो रहा है ,अग्निहोत्र का समय है अब आधी नींद से उठने के कारण क्रोधित ऋषि बोले की " अरे पापिन तूने मेरा अपमान किया है क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वाश है कि ज़ब तक मैं नहीं उठता तब तक सूर्यास्त नहीं होगा, अतः अब मैं तेरा त्याग करता हूँ, पत्नी के लाख समझाने पर भी मुनि नहीं माने और अपनी पत्नी का त्याग कर दिया,
दोस्तों इस कथा मे जो स्थिति उत्पन्न हुयी उसका कारण यह कथा है, जैसा कि आप जानते है कि कद्रू ने अपने सर्प पुत्रों को श्राप दिया था कि तुम सब का सर्वनाश हो जायेगा, जनमेजय के सर्पयज्ञ मे, जिससे सभी सर्प घबरा गए, और श्राप के उपाय के लिए सभी सर्प ब्रम्हा जी के पास गए, तब ब्रम्हा जी ने बताया था कि जरत्कारु नामक ऋषि से जो संतान उत्पन्न होंगी, वही सन्तान सर्पों के विनाशक यज्ञ को रोक सकता है, यही कारण था कि ऋषि जरत्कारु कि कथा का जन्म हुआ,
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अर्थेन किं कृपणहस्तगतेन तेन रूपेण किं गुणपराक्रमवरजितेन।
* ज्ञानेन किं बहुजनैःकृतमत्सरेण मित्रेण कि व्यसनकालपराङमुखेन।। * उस धन से क्या जो कंजूस के हाथ मे है?उस रूप से क्या जो गुणो व पराक्रम से रहित है?उस ज्ञान से क्या जिससे बहुत लोग जलते हो ? उस मित्र से क्या जो मुसीबत मे मुंह मोङ लेता हो।
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