Friday, July 10, 2020

11/07 को सुबह के सतसंग में पाठ





*सतगुरुजी.....*


*रूतबा  मेरे  सर  को  तेरे  दर  से  मिला  है ,*
*हालांकि  ये  सर  भी  मुझे  तेरे  दर  से  मिला  है ,*
*ओरो  को  जो  मिला  है  वो  मुकद्दर  से  मिला  है ,*
*हमें  तो  मुकद्दर  भी  तेरे  दर  से  मिला  है  !*

*रहे  सलामत  दुनिया  उनकी*
*जो  मेरे  सतगुरू  को  प्यार  करते  हैं*
*सतगुरू  उनको  जिन्दगी  भर  खुशियां  दे  जो ,*
*मेरे  सतगुरू  का  सिमरन  सुबह  और  शाम  करते  हैं


🌹🙏🏻*राधा स्वामी जी*







 **राधास्वामी!! 11-07-2020-

आज सुबह के सतसंग में पढे गये पाठ- 

                        

 (1) भर भर प्रेम आरती गाऊँ। नई उमँग अब चित्त समाऊँ।। दूसर आरत सतगुरू कीन्ही। सत्तलोक गई सुरत प्रबीनी।।-(राधास्वामी  पुरूष। अपारा। कहूँ कहा कुछ अजब बहारा।।) (सारबचन-शब्द-9वाँ,पृ.सं.132)                               

 (2) सुरतिया बुंद अंस।। आज सिंध सँग करत बिलास।। -(अधर चढत निस दिन स्रुत प्यारी। नभ में लखती जोत प्रकाश।। ) (प्रेमबानी-2-शब्द-137,पृ.सं.268)                     

  🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**


*सतगुरुजी.....*
*रूतबा  मेरे  सर  को  तेरे  दर  से  मिला  है ,*
*हालांकि  ये  सर  भी  मुझे  तेरे  दर  से  मिला  है ,*
*ओरो  को  जो  मिला  है  वो  मुकद्दर  से  मिला  है ,*
*हमें  तो  मुकद्दर  भी  तेरे  दर  से  मिला  है  !*

*रहे  सलामत  दुनिया  उनकी*
*जो  मेरे  सतगुरू  को  प्यार  करते  हैं*
*सतगुरू  उनको  जिन्दगी  भर  खुशियां  दे  जो ,*
*मेरे  सतगुरू  का  सिमरन  सुबह  और  शाम  करते  हैं  🌹🙏🏻*राधा स्वामी जी*




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