*सतगुरुजी.....*
*रूतबा मेरे सर को तेरे दर से मिला है ,*
*हालांकि ये सर भी मुझे तेरे दर से मिला है ,*
*ओरो को जो मिला है वो मुकद्दर से मिला है ,*
*हमें तो मुकद्दर भी तेरे दर से मिला है !*
*रहे सलामत दुनिया उनकी*
*जो मेरे सतगुरू को प्यार करते हैं*
*सतगुरू उनको जिन्दगी भर खुशियां दे जो ,*
*मेरे सतगुरू का सिमरन सुबह और शाम करते हैं
🌹🙏🏻*राधा स्वामी जी*
**राधास्वामी!! 11-07-2020-
आज सुबह के सतसंग में पढे गये पाठ-
(1) भर भर प्रेम आरती गाऊँ। नई उमँग अब चित्त समाऊँ।। दूसर आरत सतगुरू कीन्ही। सत्तलोक गई सुरत प्रबीनी।।-(राधास्वामी पुरूष। अपारा। कहूँ कहा कुछ अजब बहारा।।) (सारबचन-शब्द-9वाँ,पृ.सं.132)
(2) सुरतिया बुंद अंस।। आज सिंध सँग करत बिलास।। -(अधर चढत निस दिन स्रुत प्यारी। नभ में लखती जोत प्रकाश।। ) (प्रेमबानी-2-शब्द-137,पृ.सं.268)
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
*सतगुरुजी.....*
*रूतबा मेरे सर को तेरे दर से मिला है ,*
*हालांकि ये सर भी मुझे तेरे दर से मिला है ,*
*ओरो को जो मिला है वो मुकद्दर से मिला है ,*
*हमें तो मुकद्दर भी तेरे दर से मिला है !*
*रहे सलामत दुनिया उनकी*
*जो मेरे सतगुरू को प्यार करते हैं*
*सतगुरू उनको जिन्दगी भर खुशियां दे जो ,*
*मेरे सतगुरू का सिमरन सुबह और शाम करते हैं 🌹🙏🏻*राधा स्वामी जी*
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