Tuesday, July 14, 2020

14/07 को शाम के सतसंग का वचन और पाठ




**राधास्वामी!! 14-07-2020

-आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ-                       

 (1)क्या सोय रही उठ जाग सखी। आज गुरू सँग खेलो री होरी।।-(चरन सरन राधास्वामी दृढ कर। सतपुर जाय बसो री।।) (प्रेमबानी-3-शब्द-20,पृ.सं. 306)                                       

 (2) शेरो सखुन का गाना कोई हमसे सीख जाय। कहता हूँ एक तराना कोई हमसे सीख जाय।। आँखो की पुतली खींच कर कस कर कमान को। नावक का फिर चलाना कोई हमसे सीख जाय।।-(सोहबत का राधास्वामी की गर शौक हो गया। उनकी जुगत कमाना कोई हमसे सीख जाय।।) (प्रेमबिलास-शब्द-10,पृ।सं.14)                                 

(3) यथार्थ प्रकाश-भाग पहला

-कल से आगे।     
    
   🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**

**राधास्वामी!! 14-07 -2020

-आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-

 कल से आगे -(49)

आक्षेपको का यह भी कटाक्ष है कि जब स्पष्टतः  राधास्वामी एक मनुष्य का नाम था तो यह कुल मालिक का नाम कैसे हो सकता है, यद्यपि यर्थात बात यह है कि कुल मालिक का तो यह नाम आदि अर्थात रचना के आरंभ से था और परम पुरुष स्वामीजी महाराज के लिए उनके प्रकट होने पर उपाधि रूप से प्रयुक्त होने लगा।

श्रद्धालुओं की धारणा के अनुसार स्वामीजी महाराज कुल मालिक राधास्वामी दयाल के अवतार थे, और जैसे उपनिषदों की शिक्षा 'ब्रह्मविद ब्रह्मौव भवती' के अनुसार ब्रह्म को जानने वाला ब्रह्म ही होता है ऐसे ही राधास्वामी मत की शिक्षा के अनुसार राधास्वामी को जानने वाला राधास्वामी ही होता है।।                     

  🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻

यथार्थ प्रकाश -भाग पहला-

 परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!**




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