**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज-
【 संसार चक्र】-
कल से आगे-
दुलारेलाल- अरे अगर तेरा बेटा खो गया होता, रुपया पैसा खो गया होता तो ढूंढ देते , तेरा पिस्सू कहां ढूंढे?
दीवाना- रुपया पैसा क्या पिस्सू से कम काटता है? जाओ गोदावरी के किनारे ढूंढो।
इंदुमती- तुम अपनी काटने वाली चीज क्यों चाहते हो?
दीवाना- तुम अपनी काटने वाली चीज क्यों चाहते हो?
( सब हंस पड़ते हैं।)
दुलारेलाल -अच्छा लो पैसा( पैसा देता है।) क्या खाओगे?
दीवाना -कब ?
दुलारेलाल- अब ?
दीवाना -जो मिल जाएगा?
दुलारेलाल -और सुबह?
दीवाना- सुबह से पूछो।
इंदुमती - वाह क्या अच्छा जवाब है। लो एक और पैसा लो।
दीवाना -नहीं लेते।
इंदुमती- अच्छा सुनो तो! दीवाना नहीं सुनते।
(यह कहकर दीवाना चल देता है। पैसा उछालता है और गाता है।)
दीवाना- यह पैसा- मुझे भेजा- मेरे मौला- तू-ने ।
दुलारेलाल- अरे पैसा फेंको मत, खो जाएगा।
दीवाना-( खड़ा होकर गर्दन हिलाकर) यह बहुतो को खो चुका है, इसका भी खोने वाला होना चाहिए( मुंह फाड़ कर) हाँ।
( सब हंसते हैं। पैसा दूर जा गिरता है। एक लड़का उठा लेता है और दीवाने को दिखाता है।)
लड़का- दीवाने! यह देखो तुम्हारा पैसा।
दीवाना- नहीं देखते।
लडके-लो पैसा।
दीवाना-नही लेते।
( सब चले जाते हैं। दीवाना एक तरफ को झुक कर और घोड़े की शक्ल बनाकर अपना कल्रा थपकता हुआ भागता है।)
दुलारेलाल-(इंदुमती) इस दुनिया का कुछ पता ही नहीं चलता। एक यह शख्स है जो हमसे ज्यादा अक्ल की बातें करता है और अपने हाल में मस्त है लेकिन लोग इसे दीवाना कहते हैं और एक हम हैं इसके बराबर वकूफ नहीं रखते और दुखी हैं लेकिन राजा व अक्लमंद कहलाते हैं! भगवान की माया बिचित्र ही है। इंदुमती जी !क्या कभी है गोरखधंधा सुलझेगा?
इंदुमती- भगवान की कृपा होने पर सब गोरखधंधे सुलझ जाते हैं। हमें किसी हालत में निराश नहीं होना चाहिए।
दुलारेलाल-( हाथ उठा कर के) हे भगवान! कृपा करो , कृपा करो, कृपा करो दीन दयाल कृपा करो .
क्रमशः
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**...
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