Monday, July 13, 2020

प्रेमपत्र संसारचक्र और राजना वाक्यात






**परम गुरु हुजूर महाराज-

 प्रेम पत्र -भाग 1-

 कल से आगे- (4)

इस लोक की हद इस सूरज मंडल के ताल्लुक है, यानी यह सूरज मंडल जहां तक कि है वहां तक इस दर्जे की रचना की हद है। मगर वह रचनाn जो नीचे तरफ है वह इस लोक की घटना से ही कम दर्जे की है और इसी तरह नीचे के दर्जात में और ज्यादा कमी ताकत की होती गई है। और सबसे नीचे रचना नही है, वहाँ इस कदर मोटे खोल चैतन्य पर चढे हुए हैं कि मोटे से मोटे रचना भी वहाँ नहीं हो सकती।

वह जगह बतौर खाली मैदान के पड़ी हुई है, वहाँ रचना किसी वक्त में भी नहीं होगी। मगर तादाद उसके फासले में और विस्तार की कुछ नहीं कही जा सकती, क्योंकि अगर महाशंख को एक अलग तजवीज करके शुमार किया जावे तो भी हिसाब नहीं लग सकता। वहाँ बिनती का शुमार नहीं हो सकता है और न इस तादाद के जानने की कुछ जरुरत है। मनुष्य को अपने उद्धार यानी ऊपर को चढने की फिक्र करनी चाहिए और रचना के हिसाब में, जोकि बेशुमार है , ज्यादा पडना भी बेफायदा है , सिर्फ खास कायदे को जान लेना चाहिए।

 और जोकि कानून कुदरत का सब जगह यकसाँ है, उसको समझ कर सब जगह की चाल का अनुमान करके, अपने मन को तसल्ली देकर, अपने खास काम को, जो अपने जीवन का कल्याण है, शुरू करना चाहिए

 क्रमशः           

 🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**


संसारचक्र


**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज -

【संसार चक्र 】

-कल से आगे -(चौथा दृश्य )

                       

  (तीहरे पहर का वक्त है। तुलसी बाबा राजा पेद्दापुरम के बंगले की तरफ राजा दुलारेलाल से मिलने की गरज से जा रहे हैं ।एक पेड़ के नीचे कुछ लोग बैठे हैं और बातें करते हैं।)

एक शख्स- अरे वह देखो तुलसी बाबा आ रहे हैं!

  दूसरा शख्स- कौन तुलसी बाबा?

 पहला शख्स- वही जो कथा करते थे ।

दूसरा शख्स- मैं कथा में नहीं गया, घर के धंधो से छुट्टी मिले तो कथाओं में जावें।

तीसरा शख्स -सच है, कथा वार्ता फुर्सती आदमियों के काम है ।

पहला शख्स -नहीं, कथाओं में जाना हम सबका धर्म है ।

 चौथा शख्स- हमारी जगह काम तुम कर दिया करो तो हम भी कर्म धर्म कर लिया करेंगे ।मारता है नाहक की बातें, पकी पकाई पेट में पड़ जाती है तो धर्म की सूझती है ।

 तीसरा शख्स- बाप की कमाई पर गुलछर्रे उड़ा रहे है और धर्मी बनता है ।

(इतने में तुलसी बाबा पेड़ के नीचे आ जाते हैं और धूप से आराम लेने की गरज से वहां ठहर जाते हैं।)

पहला शख्स- बाबा जी नमस्कार!

 तुलसी बाबा- नमोनारायण, कल्याण हो !

चौथा शख्स- बाबा जी! कितने रुपए हाथ लगे ? सच सच कहना।

दूसरा शख्स -यह क्या बकवास करते हो, बाबा जी धर्मात्मा पुरुष है, उनका सत्कार करना चाहिए, कथा में नहीं जा सकते तो घर आयों का सत्कार तो करो।

तीसरा शख्स - अरे भाई ! मैं तो कथा में भी गया था , पर हाथ पल्ले कुछ नहीं पडा।

पहला शख्स - गिरह से भी तो कुछ खो नहीं गया ? बगैर कौड़ी खर्चे भले पुरुष के संग बैठ आया, इतना ही सही।

चौथा शख्स -बाबा जी !कथा का फल आपको मिलेगा या चढ़ावा चढ़ाने वाले को?

तीसरा शख्स- बाबा जी की निगाह टकों में रहीं उनको टके मिल गए, लोगों की निगाह कथा में रही उनको कथा का फल मिलना चाहिये।

तुलसी बाबा- मेरी निगाह रुपयों में नहीं रही ।

चौथा शख्स-  रुपए सिंहासन ही पर छोड आये या अपने घर ले गये।

तुलसी बाबा मालूम होता है आप लोगों को मेरी कथा नागवार गुजरी।

तीसरा शख्स-  बाबा जी ! बात यह है कि हम दिन भर काम करते हैं और मुश्किल से चार आना कमाते हैं और आप एक घंटा काम करते हैं और 8 दिन में सो दो सो रुपया कमा लेते हैं।

चौथा शख्स- और काम भी क्या करते हैं?  जमीन आसमान की बातें मिलाते हैं, जिनका न कही सिर पैर ।

  तुलसी बाबा- क्या आप लोग कथा सुनने के लिए गये और कुछ समझ में नहीं आया?

तीसरा शख्स- हमारे तो कुछ भी हाथ पल्ले नहीं पड़ा।

 तुलसी बाबा -कथा में परमात्मा के दर्शन, मोक्ष बगैरह का जिक्र हुआ वह भी तुम्हारे समझ में नहीं आया ?

 पहला शख्स- महाराज! सच्ची बात तो यह है कि हमारे मन बड़े मलीन और चंचल है । ऊपर से तो हम कथा सुनते हैं पर मन हमारा कहीं का कहीं चला जाता है । इतना है की कथा से उठने को जी नहीं चाहता था । कुछ न सुनते या समझते हुए भी मन को शांति सी रहती थी।

 तीसरा व चौथा शख्स-( मिलकर) यह तो ठीक है, इसकी तो हम भी गवाही देंगे।

तुलसी बाबा - मुआमला यह है कि तुम लोगों को विद्या हासिल नहीं है इसलिए तुम्हारी वृद्धि कथा की बातें ग्रहण नहीं कर सकती पर तुम्हारे मन किसी कदर शुद्ध है इसलिए उन पर महात्माओं के उपदेश का प्रभाव पड़ता है। अच्छा अब जाते हैं , नमो नारायण। ( जाता है )
                       
तीसरा शख्स- भाई! बाबा जी हैं तो अच्छे आदमी।

चौथा शख्स - हाँ आज तो बहुत अच्छे मालूम हुये

( सब लोग इधर उधर चले जाते हैं)

क्रमशः.                 

 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**


रोजाना वाक्यात


**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज

-रोजाना वाकिआत- 26 नवंबर 1932- शनिवार-

कोटा के जिज्ञासु भाई के लिए सुबह कॉरेस्पोंडेंस में गीता के दो और श्लोकों के मानी बयान किये। बातचीत के बीच में ज्ञात हुआ कि महाराजा कोटा भी गीता के प्रेमी है और रियासत में बहुत से अहलकार गीता के उपदेशों में दिलचस्पी लेते हैं।                       

  रूस ने अव्वल कृषि के मुतअल्लिक पंचवर्षीय प्रोग्राम बनाया और उसमें किसी कदर कामयाब होकर इंसान को परेशानी में डाला। उसके बाद उद्योग का पंचवर्षीय योजना प्रोग्राम शुरू किया और उसमें किसी कदर कामयाब होकर दुनिया को परेशान कर रहा है ।

 अब खुदा वह मजहब के खिलाफ पंचवर्षीय प्रोग्राम बनाकर खुदा और मजहब को धमका रहा है। बकौल मॉर्निंग पोस्ट प्रोग्राम हस्ब जैल है- मई सन 1937 तक क्षेत्र रूसिया के अंदर कोई पूजा स्थल ना रहेगी हो न किसी के जेहन में खुदा का ख्याल बाकी रहेगा। क्योंकि इन दोनों ने गरीब मजदूरों पर मिडल एज्स मध्य युग के वक्त से अब तक बराबर जुल्म ही किया है ।

पहले साल के अंदर तमाम मजहबी विद्यालय बंद कर दी जाएगी और मजहबी तालीम देने वालों के हर किस्म के एलाउंस बंद कर दिए जाएंगे । न उन्हें खाना मिलेगा न दूसरी जीवन की आवश्यकता है।

और रूस के तमाम बड़े शहरों के गिरजाघर और हर मजहब के इबादत खाने मई सन 1934 तक बंद कर दिए जाएंगे। और आइंदा साल शहर शहर गांव गांव घर घर के अंदर खुदा के खिलाफ जेहाद उपस्थित किया जाएगा और जनसाधारण के दिलों में खुदा के मुतअल्लिक रीजनल अनबिलिफ माकूल और अविश्वास पैदा करने की कोशिश की जाएगी ।

 और प्रोग्राम के बकिया सालों में गिरजाघरों और दुकानों व कल्बों, तस्वीरखानों वगैरह में तब्दील करके खुदा व मजहब का मुल्क के अंदर से नामो निशान मिटा दिया जायेगा।।                               

 क्या हम बीसवीं सदी की बातें पढ़ रहे हैं यह कश्यप के जमाने के ख्वाब देख रहे हैं। मालूम होता है कि इसी बहाने से मालिक मजबूर होकर इंसानों पर गहरी दया पर फरमावेगा।.           

🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**





No comments:

Post a Comment

पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...