Monday, July 13, 2020

संसारचक्र (नाटक ) / 14072020





संसारचक्र


**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज -

【संसार चक्र 】

-कल से आगे -(चौथा दृश्य )

                         

  (तीहरे पहर का वक्त है। तुलसी बाबा राजा पेद्दापुरम के बंगले की तरफ राजा दुलारेलाल से मिलने की गरज से जा रहे हैं ।एक पेड़ के नीचे कुछ लोग बैठे हैं और बातें करते हैं।)

एक शख्स- अरे वह देखो तुलसी बाबा आ रहे हैं!

  दूसरा शख्स- कौन तुलसी बाबा?

 पहला शख्स- वही जो कथा करते थे । 

दूसरा शख्स- मैं कथा में नहीं गया, घर के धंधो से छुट्टी मिले तो कथाओं में जावें।

तीसरा शख्स -सच है, कथा वार्ता फुर्सती आदमियों के काम है ।

पहला शख्स -नहीं, कथाओं में जाना हम सबका धर्म है ।

 चौथा शख्स- हमारी जगह काम तुम कर दिया करो तो हम भी कर्म धर्म कर लिया करेंगे ।मारता है नाहक की बातें, पकी पकाई पेट में पड़ जाती है तो धर्म की सूझती है ।

 तीसरा शख्स- बाप की कमाई पर गुलछर्रे उड़ा रहे है और धर्मी बनता है ।

(इतने में तुलसी बाबा पेड़ के नीचे आ जाते हैं और धूप से आराम लेने की गरज से वहां ठहर जाते हैं।)

पहला शख्स- बाबा जी नमस्कार!

 तुलसी बाबा- नमोनारायण, कल्याण हो !

चौथा शख्स- बाबा जी! कितने रुपए हाथ लगे ? सच सच कहना।

दूसरा शख्स -यह क्या बकवास करते हो, बाबा जी धर्मात्मा पुरुष है, उनका सत्कार करना चाहिए, कथा में नहीं जा सकते तो घर आयों का सत्कार तो करो।

तीसरा शख्स - अरे भाई ! मैं तो कथा में भी गया था , पर हाथ पल्ले कुछ नहीं पडा।

पहला शख्स - गिरह से भी तो कुछ खो नहीं गया ? बगैर कौड़ी खर्चे भले पुरुष के संग बैठ आया, इतना ही सही।

चौथा शख्स -बाबा जी !कथा का फल आपको मिलेगा या चढ़ावा चढ़ाने वाले को?

तीसरा शख्स- बाबा जी की निगाह टकों में रहीं उनको टके मिल गए, लोगों की निगाह कथा में रही उनको कथा का फल मिलना चाहिये।

तुलसी बाबा- मेरी निगाह रुपयों में नहीं रही ।

चौथा शख्स-  रुपए सिंहासन ही पर छोड आये या अपने घर ले गये।

तुलसी बाबा मालूम होता है आप लोगों को मेरी कथा नागवार गुजरी।

तीसरा शख्स-  बाबा जी ! बात यह है कि हम दिन भर काम करते हैं और मुश्किल से चार आना कमाते हैं और आप एक घंटा काम करते हैं और 8 दिन में सो दो सो रुपया कमा लेते हैं।

चौथा शख्स- और काम भी क्या करते हैं?  जमीन आसमान की बातें मिलाते हैं, जिनका न कही सिर पैर ।

  तुलसी बाबा- क्या आप लोग कथा सुनने के लिए गये और कुछ समझ में नहीं आया?

तीसरा शख्स- हमारे तो कुछ भी हाथ पल्ले नहीं पड़ा।

 तुलसी बाबा -कथा में परमात्मा के दर्शन, मोक्ष बगैरह का जिक्र हुआ वह भी तुम्हारे समझ में नहीं आया ?

 पहला शख्स- महाराज! सच्ची बात तो यह है कि हमारे मन बड़े मलीन और चंचल है । ऊपर से तो हम कथा सुनते हैं पर मन हमारा कहीं का कहीं चला जाता है । इतना है की कथा से उठने को जी नहीं चाहता था । कुछ न सुनते या समझते हुए भी मन को शांति सी रहती थी।

 तीसरा व चौथा शख्स-( मिलकर) यह तो ठीक है, इसकी तो हम भी गवाही देंगे।

तुलसी बाबा - मुआमला यह है कि तुम लोगों को विद्या हासिल नहीं है इसलिए तुम्हारी वृद्धि कथा की बातें ग्रहण नहीं कर सकती पर तुम्हारे मन किसी कदर शुद्ध है इसलिए उन पर महात्माओं के उपदेश का प्रभाव पड़ता है। अच्छा अब जाते हैं , नमो नारायण। ( जाता है )
                         
तीसरा शख्स- भाई! बाबा जी हैं तो अच्छे आदमी।

चौथा शख्स - हाँ आज तो बहुत अच्छे मालूम हुये

( सब लोग इधर उधर चले जाते हैं)

क्रमशः.                   

 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**





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