🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
**राधास्वामी!! 12-07 -2020-
आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-
कल से आगे:-(47)
बहुत से मूर्ख आक्षेपकारी राधास्वामी मत की शिक्षा को कलंकित करने के आशय से मशहूर करते हैं कि राधास्वामी- नाम एक कल्पित नाम है अर्थात राधास्वामी मत के संस्थापक की धर्मपत्नी का नाम राधा था और स्वामी स्वयं उनकी उपाधि थी। इन दोनों नामों को जोड़कर राधास्वामी नाम बना लिया।
हरचंद हजारों मनुष्य जानते हैं कि स्वामीजी महाराज की धर्मपत्नी जी का शुभ नाम श्रीमती नारायन देवी जी था। हाँ, राधास्वामी - मत के स्थापित होने के कुछ काल के उपरांत जब सत्संग में निरर्थक और और पौराणिक नामों के बदले सार्थक तथा प्रभावशाली परमार्थी नाम रखने की प्रथा प्रचलित हुई और प्रायः प्रत्येक सत्संगी स्त्री तथा पुरुष ने नया प्रमार्थी नाम रखवाया उस समय उनका नाम राधा जी रक्खा गया।
Iपर राधास्वामी- संगत में राधा और उसे जोड़कर बनाए हुए दूसरे नाम सैकड़ों स्त्रियों के हैं। यदि सीताराम और राधाकृष्ण आदि नामों की तरह ' राधास्वामी ' नाम की उत्पत्ति किसी विशेष स्त्री और पुरुष के नाम जोड़ने से होती तो राधा ,कृष्ण ,सीता और राम नामों की तरह राधा और स्वामी दोनों नामों का प्रचार राधास्वामी -संगत में दिखलाई देता , पर एक भी व्यक्ति का नाम स्वामी नहीं है।
इसके अतिरिक्त किसी व्यक्ति को ऐसी बातों की कल्पना करने की कैसे अनुमति दी जा सकती है कि जबकि स्वयं स्वामीजी महाराज ने अपनी पुस्तक सारबचन के बचन नंबर 2 तथा बचन नंबर 10 में राधास्वामी नाम की असलियत और महिमा स्पष्ट शब्दों में लेखबद्ध कर दी है।
देखिए लिखा हैः-
राधा धुन का नाम सुनाऊँ।
●स्वामी शब्द भेद बतलाऊँ।● ●राधा प्रीत लगावन हारी।
स्वामी प्रीतम नाम कहा री●
●राधा आदि सुरत का नाम।
स्वामी आदि शब्द निज धाम ●
इन स्थानों के अतिरिक्त और भी शब्दों में राधास्वामी नाम की महिमा का वर्णन आया है। जैसे:-
● राधास्वामी नाम जो गावे सोही तरे।
कल क्लेश सब नाश सुख पावे सब दुख हरे।
ऐसा नाम अपार कोई भेद न जानई।
जो जाने सो पार बहुरि न जग में जन्मई।
राधास्वामी गायकर जन्म सुफल करले।
यही नाम निज नाम है मन अपने धरले।●
● राधास्वामी आए प्रगट हुए जब से।
राधास्वामी नाम सुनावें तब से।● ●पिऊँ अमी राधास्वामी धुन से।
जाय रलूँ राधास्वामी सुन से।●
●कहूँ क्या आरत गावत न्यारी।
लगी मोहि राधास्वामी धुन अब प्यारी।● ● राधास्वामी जप निज नामा।
सत्तलोक पावे तक धामा।● ● अलग अगम की दया समाई ।
राधास्वामी नाम सुनाई।● ●राधास्वामी धुन सुन पाई, करी बहुत पहिचान।● * राधास्वामी राधास्वामी उठी धुन हिय से। सूरत सुहागिन अब मिली पिय से।●
●राधास्वामी उठत धाम धुन, बैठ मगन अबिनासी।●
● मंत्र दिया गुरुदेव काल मारा फनी।
राधास्वामी नाम चित्त दे अब सुनी।●
इन उल्लेखों से परिचय प्राप्त हो जाने पर तो अक्षेपकारियों को मुहँ खोलने का साहस न होना चाहिये।
🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻
यथार्थ प्रकाश भाग पहला-
परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!**
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