**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज-
रोजाना वाकिआत- 23 नवंबर 1932 बुधवार-
तमाम दुनिया महात्मा गांधी को मुबारकबाद दे रही है कि उपवास करके ऊंची जात के हिंदुओं और अछूतों को एक दूसरे के नजदीकतर ला दिया।
मगर कुछ मुस्लिम अखबार महात्मा गांधी की इस कार्रवाई की सख्त आलोचना कर रहे हैं। यह दुरुस्त है कि महात्मा गांधी का कहना हिंदुओं के लिए ईश्वरीय आदेश नहीं है और न सब के सब ऊंची जात वाले हिंदू अछूतों से समानता का बर्ताव करने के लिए तैयार है।
मगर यह हर किसी को मानना होगा कि महात्मा गांधी के व्रत के बाद अधिक संख्या हिंदुओं की मानसिकता में जबरदस्त परिवर्तन हो गया है । आपत्तिकर्ता का ख्याल गलत है कि गांधीजी के अछूत उद्धार के मुतालिक ख्याल को हिंदू कुछ महत्व देने के लिए तैयार है। अर्सा से लाखों लोग हिंदू खुद ही महसूस कर रहे हैं कि अछूतों से अलग हो जाने से हिंदू कौम के नष्ट हो जाने की आशंका है। इस ख्याल के लोग महात्मा गांधी के शब्दों को खुदा के शब्द कल्पना करते हैं।।
अहमदिया जमाअत से बहुत से भाई वाकिफ है । चंद साल गुजरे जब सत्संग का कयाम शिमला में था एक अहमदी भाई कई दिन से तर्क वितर्क के बाद सत्संग में सम्मिलित होने के लिए ख्वाहिशमंद हुआ। मैंने उसे मशवरा दिया कि अव्वल हजरत खलीफा साहब से इजाजत हासिल कर लो।
वह अहमदी भाई दिल का सच्चा और इरादे का पक्का था।उसने अपने दिल का हाल साफ-साफ लिख भेजा । हजरत खलीफा साहब ने इजाजत दे दी लेकिन लेखन फरमाया कि राधास्वामी सत्संग में "रुहानियत खाक नही है "। मुझे अब तक यहीं ताज्जुब रहा कि यहां के लोगों ने शग्ल कर कर मन को रेत डाला और मालिक की दया से आला से आला रूहानी तजरबात से लाभान्वित हो गए और वहां हजरत खलीफा साहब बिना सत्संग से कोई ताल्लुक कायम किये इस किस्म का फतवा पारित करवा रहे हैं । खैर इस अर्सा से चंद अहमदी भाइयों से मिलने और बातचीत करने का मौका हुआ।
सबको जबान का मीठा मजहब का पाबंद और समझदार पाया। जिससे प्राकृतिक रूप से मेरे दिल में उन भाइयों के लिए गहरी इज्जत कायम है। मगर किसी साहब ने यह वजह न बतलाई कि खलीफा साहब ने सत्संग के लिए ऐसे सख्त अल्फाज क्यों इस्तेमाल फरमाये। आज इत्तिफाक से कादियान का मशहूर अखबार अल फजल मुद्रित 22 नवंबर अवलोकन से गुजरा।
उसमें हजरत मौलाना मौलवी शेर अली साहब का भाषण मुद्रित कहां हुआ 11 नवंबर 1932 दर्द है। यह खुत्बा बा हजरत खलीफा- उल- मशीह -उलन सानी के आदेश पर फरमाया गया।
इसमें जाहिर किया गया है कि मौजूदा जमाने का धर्म के लिए युद्ध आर्थिक कुरबानी है और अहमदी भाइयों को चंदा देने के लिए सख्त चेतावनी दी गई है ।
क्रमशः
🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**
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