**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज
-रोजाना वाकिआत-24 नवंबर 1932-
बृहस्पतिवार- करीबन 1 माह से ब्रह्मा की एक कंपनी ने कारखानाजात दयालबाग से रिश्ता जोड़ा था और बड़े जोर व शोर से काम शुरू किया था लेकिन आज खबर मिली कि कंपनी फेल हो गई और कारखानाजात कि सब उम्मीदें खाक में मिल गई। किसी इंसान का असर लेने से यही दुर्गति होती है।
रात के सत्संग में मगरिब में मजहब व खुदा के खिलाफ युद्ध के विषय पर बातचीत हुई ।वाकई मगरिब बेचारा क्या करें। न तो खुदा ही नजर आता है ना कोई ईश्वर भक्त। इंसान किताबें पढ़कर या दलीलें लबाकर मालिक में निश्चय करता है कि आनीशनवादी लेखकों की रचनाएं पढ़कर और अक्ल व उम्मीद के खिलाफ वाकिआते जिंदगी देखकर उसका निश्चय डोल जाता है ।
इसलिए बड़ी जरूरत इस बात की है कि इंसान को ऐसे बुजुर्गों की सोहबत व निकटता हासिल हो जिन्हे मालिक का आंखों देखा विश्वास हासिल है। वह मुल्क मुबारक है और वह सोसाइटी मुबारक है जिसमें ऐसे पूरे पुरुष मौजूद हों। उसी मुल्क के बाशिंदों और उसी सोसाइटी के मेंबरों के लिए मुमकिन है कि मालिक की हस्ती में सच्चा और टिकाऊ आस्था कायम करके प्रमार्थ के रास्ते की कोई मंजिल तय कर सके ।
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
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