**परम गुरु हजूर साहबजी महाराज-
रोजाना वाकिआत- कल का शेष -
रात के सत्संग में एक मद्रासी जिज्ञासु के सवालात के जवाबात दिए गये। यह साहब तीर्थ करने निकले हैं और इत्तेफाक से दयालबाग आ गये। उनका मजहब रामानुज वेदांत है। आपने सवाल किया- दुनिया में सैकड़ों मजहब जारी है, द्वैत,अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, ब्रह्मों समाज, आर्य समाज वगैरा-वगैरा।
राधास्वामी मत में इन सब से उत्तमतर बात क्या है। जवाब दिया गया कि राधास्वामी मत अंतरी साधन पर जोर देता है दूसरे लोग नहीं देते। उन्होंने कहा अगर कोई मजहब अंतरी साधन पर जोडर देता हो तो? जवाब दिया गया तो उसके मुकाबले राधास्वामी मत की नई बात ना होगी । उसके बाद बयान किया गया कि जितने भी महापुरुष है सभों ने इंसान की बेहतरी के लिए कोशिश की जो जिस मुकाम से आया उसने उस मुकाम का भेद बयान किया।इसलिए हर बुजुर्ग की तालीम आदर के काबिल है ।
अलबत्ता हर शख्स को चाहिए कि जिज्ञासु बनकर मजहबी तहकीकात करें और जो तालीम अच्छी लगे अख्तियार करके उस पर कार्यरत हो। इसके बाद आपने जात पाँत और खाने-पीने के मुतअल्लिक़ सवालात किये। जवाब में बताया गया कि हमारे आस्था के बमूजिब सभी इंसान मालिक के बच्चे हैं। बढ़ई या लोहार का काम करने से कोई शख्स मालिक की नजर में गिर नहीं जाता और हमारा भाई।
बदस्तूर बना रहता है। खाने-पीने और ब्याह शादी का मामला सोशल है आध्यात्मिक नहीं है ।आप चाहे किसी के साथ खाना खाएं चाहे ना खायें। आप चाहे जिससे शादी करें ।अलबत्ता ख्याल रखें कि आपकी औलाद तंदरुस्त और अच्छी हो वगैरह-वगैरह। उसके बाद दरियाफ्त करने पर राधास्वामी नाम के अर्थ बयान किए गए।।
🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**
**परम गुरु हुजूर महाराज-
प्रेम पत्र- भाग 1- कल से आगे- (8)
जो कोई मुझे पूरी सुरत यानी आत्मा की कुब्बत को नहीं जगावे तो उसको मुनासिब है कि कुछ मेहनत करके थोड़ा बहुत कुछ कुव्वत को जरूर जगावे, ताकि उसको इस दुनिया में भी आराम मिले और वह परलोक में भी सुख पावे,यानी जो थोड़ी बहुत मेहनत करके सुरत शब्द का अभ्यास करता रहे और सच्ची सरन पूरे गुरु और सच्चे मालिक राधास्वामी दयाल की धारण करें, तो वे अपनी मेहर से उसको संसार सागर से पार ले जाएंगे और महासुख का स्थान बख्शेंगे।
और जो इस बचन को नहीं माने तो उसको इख्तियार है, पर उसको जन्म मरण भुगतना पड़ेगा और देहियों के साथ ऊंचे नीचे दर्जे में सदा दुःख सहना रहेगा और आत्मघाती यानी अपने जीव का आप नुकसान और कल्याण और अकल्याण करने वाला करार दिया जाएगा।।
(9) सब मत वाले और कुछ जी कहते हैं कि मालिक हर जगह मौजूद है यानी सर्व व्यापक है और जो ऐसा है तो वह आदमी और जानदारों में भी मौजूद है। आदमी में मालिक का तख्त उसके मस्तक यानी दिमाग में है,तो मालिक का तख्त बहर सूरत इस स्थान से ऊँचे पर मस्तक में होना चाहिए, जहां से यह सूरत की धार उतर कर पहले ब्रह्मांड में और फिर पिंड में आंखों के स्थान पर ठहरी और वहां से तमाम देह में पैरों तक रगों के वसीले से व्यापक हुई। क्रमशः
🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**
*मालिक जब किसी से नाराज़ होता है तो वह उसका रिज्क नहीं बन्द करता और न ही जीव को कोई दुख देता है और न ही सूर्य को आज्ञा देता है कि इसके आंगन को रोशनी नहीं देना बल्कि मालिक जब किसी से नाराज़ होता है तो वह उसका वो वक्त छीन लेता है जिस वक्त वह बन्दगी कर सके।
कुल मालिक की बन्दगी न कर सकना उस परमात्मा की नाराज़गी की सबसे बड़ी निशानी है।और जो जीव हर रोज भजन बन्दगी करते हैं तो वह खुशनसीब हैं कि मालिक उस जीव से बहुत खुश हैं।और जीव को पल पल परमात्मा का शुक्रिया अदा करना चाहिए।*
**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज -
【संसार चक्र】-
कल से आगे -
दूसरा दृश्य -(शाम का वक्त है-
दरियाय गोदावरी के किनारे राजा दुलारेलाल और रानी इंदुमती टहल रहे हैं , बातें करते-करते मामूल से ज्यादा फासले पर निकल जाते हैं।)
दुलारेलाल -(दरिया की तरफ देखकर ) भगवान! तेरी अजब माया है, कितना बड़ा पाट है ! "गंगा से भी बड़ी गोदावरी"। जहां तक नजर जाती है पानी ही पानी नजर आता है। यह प्रभो! आप भी दया के सिंधु कहलाते हैं, आपकी दया भी ऐसी ही अपार होगी । पर जिसने आपके दर्शन नहीं किए और आपकी अपार दया का अनुभव नहीं किया वह आपका और आपकी दया का क्या अनुभव कर सकता है? जिसने गोदावरी का पाट नहीं देखा वह लफ्ज़ गोदावरी से इस महान जलाशय का क्या अनुमान कर सकता है?
इंदुमती -यह आप क्या कहते हैं? भगवान ने हम पर अपार दया की है। वह दया ना करते तो हम भी उस दीवाने की तरह गलियों में मारे मारे करते हैं या कुरुक्षेत्र ही में खत्म हो जाते । अब 7 महीने होने को आए हैं, हम राजा पेद्दापुरम के बदले में ठहरे हैं , ना किसी तरह का खटक है ना फिक्। जो आराम इन दिनों पाया है उम्र भर याद रहेगा। पवित्र तीर्थस्थान, सुंदर देश ,सुहावनी नदी। हृदय से बार-बार भगवान का नाम निकलता है। आंखों ने भगवान को नहीं देखा- ना सही, दिल ने तो बार बार देखा है ।
दुलारेलाल- यह तो ठीक है पर इन बातों से मेरी शांति नहीं होती।।
इंदुमती-( उंगली से सामने की तरफ इशारा करके) वह सामने क्या हो रहा है? बड़ी भीड़ जमा है। ( दोनों टकटकी लगा कर मजमें की तरफ ताकते हैं। इतने में उस तरफ से एक अजनबी सड़क पर गुजरता है और उनको भीड कहा जानने का ख्वाहिशमंद महसूस करके कहता है।) अजनबी- देखते क्या हो? बढे जाओ, बड़ी अच्छी कथा हो रही है।
इंदुमती- हम इतने दिनों से गोदावरी में है पर इस तरफ कभी नहीं आये। अच्छा ना हो आज कथा भी सुन लें?
दुलारेलाल- चलो चलें।।
क्रमशः
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
No comments:
Post a Comment