Wednesday, July 8, 2020

संसारचक्र (नाटक )





**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज -

【संसार चक्र】-

कल से आगे -

दूसरा दृश्य -(शाम का वक्त है-

दरियाय गोदावरी के किनारे राजा दुलारेलाल और रानी इंदुमती टहल रहे हैं , बातें करते-करते मामूल से ज्यादा फासले पर निकल जाते हैं।) 

दुलारेलाल -(दरिया की तरफ देखकर ) भगवान! तेरी अजब माया है, कितना बड़ा पाट है ! "गंगा से भी बड़ी गोदावरी"। जहां तक नजर जाती है पानी ही पानी नजर आता है। यह प्रभो! आप भी दया के सिंधु कहलाते हैं, आपकी दया भी ऐसी ही अपार होगी । पर जिसने आपके दर्शन नहीं किए और आपकी अपार दया का अनुभव नहीं किया वह आपका और आपकी दया का क्या अनुभव कर सकता है?  जिसने गोदावरी का पाट नहीं देखा वह लफ्ज़ गोदावरी से इस महान जलाशय का क्या अनुमान कर सकता है?

इंदुमती -यह आप क्या कहते हैं?  भगवान ने हम पर अपार दया की है।  वह दया ना करते तो हम भी उस दीवाने की तरह गलियों में मारे मारे करते हैं या कुरुक्षेत्र ही में खत्म हो जाते । अब 7 महीने होने को आए हैं, हम राजा पेद्दापुरम के बदले में ठहरे हैं , ना किसी तरह का खटक है ना फिक्। जो आराम इन दिनों पाया है उम्र भर याद रहेगा। पवित्र तीर्थस्थान, सुंदर देश ,सुहावनी नदी। हृदय से बार-बार भगवान का नाम निकलता है। आंखों ने भगवान को नहीं देखा- ना सही, दिल ने तो बार बार देखा है ।

 दुलारेलाल- यह तो ठीक है पर इन बातों से मेरी शांति नहीं होती।।       

इंदुमती-( उंगली से सामने की तरफ इशारा करके) वह सामने क्या हो रहा है? बड़ी भीड़ जमा है। ( दोनों टकटकी लगा कर मजमें की तरफ ताकते हैं। इतने में उस तरफ से एक अजनबी सड़क पर गुजरता है और उनको भीड कहा जानने का ख्वाहिशमंद महसूस करके कहता है।)  अजनबी- देखते क्या हो? बढे जाओ, बड़ी अच्छी कथा हो रही है।

                 
 इंदुमती- हम इतने दिनों से गोदावरी में है पर इस तरफ कभी नहीं आये। अच्छा ना हो आज कथा भी सुन लें?

दुलारेलाल- चलो चलें।।           
      
क्रमशः

🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**

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