प्रस्तुति - कृति शरण, सृष्टि शरण,
दृष्टि शरण, मेहर स्वरूप
: *12- 03- 2020
-आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन
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कल से आगे -(80)-
संसार के इंतजाम इस किस्म के रहे हैं कि उनके जरिए इंसानों के दिल में ख्वामख्वाह खुदगर्जी और अहंकार पैदा होते हैं। मसलन हर शख्स मजबूरन अपने शरीर, अपने मकान, अपनी आमदनी, अपनी जायदाद, अपनी स्त्री ,अपने बच्चे ,अपने खानदान, अपने शहर , अपने सूबे और अपने मुल्क के लिए जब तब ख्याल व भाव उठाता है और ये ख्याल व भाव ख्वामख्वाह उसके दिल को तंग करते हैं तो उसे मिल कर काम करने के नाकाबिल बनाते हैं और दूसरों के मुकाबले शरीर ,धन, विद्या, मान प्रतिष्ठा वगैरह बेहतर मिलने से उसके दिल में आप से आप इन चीजों का अहंकार हो जाता है जिससे जिंदगी और भी बिगड़ जाती हैं । इस खराबी को दूर करने के लिए हर कौम व मुल्क के बुजुर्गों ने त्यौहार के दिन कायम किये। उन दिनों में बड़े छोटे ,अमीर गरीब , लिखे पढ़े व अनपढ़ हर किस्म के भेदभाव को भुलाकर, एक कुटुम्ब के आदमियों की तरह मिलते हैं और खुशी मनाते हैं और इससे लोगों के दिलों में खुदगर्जी व खुदपरस्ती के बजाय दूसरों से प्रेम करने और दिल मिलाने का भाव पैदा होता है । चुनाँचे इसी गरज से सतसंग के अंदर भी त्यौहार के दिन कायम किए गये है।🙏🏻राधास्वामी🙏🏻 (सतसंग के उपदेश- भाग तीसरा)*
[12/03, 14:07] +91 94162 65214: *राधास्वामी!! 12-03-2020 आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ:- (1) मैं गुरु प्यारे के चरनों की दासी।।टेक।। (प्रेमबानी-3 (प्रेम तरंग-भाग चौथा),शब्द-1,पृ.सं.195) (2) सरन पडें की लाज प्रभु राखो राखनहार ।।टेक।। (प्रेमबिलास-शब्द-80,पृ.सं.113) (3) सतसंग के उपदेश-भाग तीसरा -कल से आगे।। 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻*
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