प्रस्तुति - कृति, सृष्टि, दृष्टि, अमी.
[08/03, 03:04]
स्वामी!! 08-03-2020
आज सुबह के सतसंग में पढे गये पाठ
-(1( राधास्वामी नाम सुनाया राधास्वामी। राधास्वामी रुप दिखाया राधास्वामी।। राधास्वामी शब्द बतावें राधास्वामी। राधास्वामी देस बुझावें राधास्वामी।।(सारबचन-शब्द-तीसरा,पृ.सं.50)
(2) सुरतिया भजन करत। हुई घट में आज निहाल। (प्रेमबानी-2,शब्द-83,पृ.सं. 200)
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻
राधास्वामी!!
08-03-2020
आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन
- कल का शेष:-
ऐसे पुरुष की अध्यायों के पालन के फल के बारे में हुजूर राधास्वामी दयाल का बचन है कि सच्चे सतगुरु की आज्ञा से जो कुछ काम जीव करता है वह उसे भक्ति का फल देने वाला होता है। भक्ति के अर्थ सच्चे मालिक के चरणो में सच्चा प्रेम है। यह प्रेम ही जीव के शुभ-अशुभ कर्मों और उसकी स्थूल व सूक्ष्म वासनाओं को साफ कर सकता है। इस प्रेम ही की सहायता से जीव अंतरी साधन करके अपनी सोई हुई आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत कर सकता है और आध्यात्मिक शक्तियों के जगने की ही से मोक्ष प्राप्त हो सकता है। इसलिए अगर किसी शख्स का मन सत्संग में शरीक होने पर भी रुखा फीका रहता है तो जाहिर है कि वह सतगुरु की आज्ञाओं का पालन नहीं करता और वह जितने कर्म करता है अपने मन की प्रेरणा से करता है और अपने शुभ कर्मों का फल सुख और मंद कर्मों का फल दुख भोगता है। इस बयान से जाहिर होना चाहिए कि अशुभ या मंद कर्मों के मुकाबले शुभ कर्म अच्छे हैं लेकिन मोक्ष के अभिलाषी के लिए दोनों प्रकार के कर्म व्यर्थ हैं ।।
🙏🏻राधास्वामी
🙏🏻 (सत्संग के उपदेश भाग तीसरा)*
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