Thursday, March 12, 2020

मिश्रित मनमोहन उक्तियां

नमस्कार


[12/03, 09:40] anami sharan: *बीत गई होली..देकर*
*अपने निशां..*
*रंगे चेहरे...रंगी दीवारें..*
*रंगे फर्श... कर रहे हैं बयां...*
*रंगी बाल्टियां.....*
*और रंगीन गलियां....*
*लेकर वादा....*
*मैं आऊंगी अगले बरस....*
*तब तलक....*
*ये उत्साह...ये उमंग.....*
*ये प्यार... और ये दोस्ताना....*
*ये प्रीत के रंग.....*
*दिलों में अपने कायम रखना....*

*आपके द्वारा भेजी गयीं, मधुरमयी शुभकामनाएं ह्रदय से स्वीकार एवं सपरिवार आभार।*
        🙏🏼🙏🏼🤝🏼👈🏼☺
[12/03, 10:18] anami sharan: ✍✍ *"पैर" को लगने वाली* *"चोट"......*
  *"संभल" कर चलना* *सिखाती है....,,*
        *....... और........*
  *"मन" को लगने वाली* *"चोट".....*,
 *"समझदारी" से जीना* *सिखाती है....!!!*
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                     

          *🙏सुप्रभातम् 🙏*
[12/03, 10:20] anami sharan: 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷*फूल रखिए ना रखिए,*
*किसी की राहों में, ...*
*पर लबों पे सब के लिए*
  *दुआ जरूर रखिए..!!!*
*🙏आप सबका हर पल मंगलमय हो🙏*
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
[12/03, 10:20] anami sharan: *संस्कारों से बङी कोई वसीयत नहीं और ईमानदारी से बङी कोई विरासत नहीं।*
          🇮🇳 Jai Hind 🇮🇳
[12/03, 10:20] anami sharan: 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹


*दुनिया के लाखों पेड़ गिलहरियों की देन हैं ! वे खुराक के लिए बीज जमीन में छुपा देती है ...और फिर जगह भूल जाती है !*
*अच्छे कर्म करो और भूल जाईये! समय आने पर फलेंगे जरूर।*

*🌷🌷🙏🏻सुप्रभात🙏🏻🌷🌷*
[12/03, 10:22] anami sharan: 🙏🙏🙏🙏  प्रणाम  🙏🙏🙏🙏

*जैसे बच्चा अपने अंगुठे को मुँह में रखकर समझता है कि उसमें से दूध आता है, परन्तु अंगूठे में दूध नही है, बच्चे को केवल भ्रांति है ।*

*वैसे ही संसार के प्रत्येक पदार्थ में वास्तविक सुख नहीं है ओर उसमें सुख मानना केवल भ्रांति है ।*

🙏🙏 शुभ प्रभात 🙏जय जिनेन्द्र 🙏🙏
[12/03, 10:22] anami sharan: 🙏🙏🙏🙏  प्रणाम  🙏🙏🙏🙏

*जीवन में श्वास और विश्वास की,*

*एक समान जरूरत होती है !*

*श्वास खत्म तो जिंदगी का अंत,*

*विश्वास खत्म तो संबंध का अंत !*

🙏🙏 शुभ प्रभात 🙏जय जिनेन्द्र 🙏🙏
[12/03, 10:22] anami sharan: 🙏🙏🙏🙏  प्रणाम  🙏🙏🙏🙏

*जो व्यक्ति जिज्ञासु होता है,*

*पढ़ता है,*
*लिखता है,*
*देखता है,*
*प्रश्न पूछता है,*
*बुद्धिमानों का आश्रय लेता है,*

*उसकी बुद्धि उसी प्रकार बढ़ती है जैसे कि सूर्य की किरणों से कमल की पंखुड़ियाँ ।*

🙏🙏 शुभ प्रभात 🙏जय जिनेन्द्र 🙏🙏
[12/03, 10:22] anami sharan: 🙏🙏🙏🙏  प्रणाम  🙏🙏🙏🙏

*प्रकृति तमाम रहस्यों से भरी है, जहाँ नित्य नई नई खोज होती है ।*

*शरीर की रचना का अग्र भाग पृष्ठ भाग की तुलना में उज्ज्वल है, जिसे सजाने संवारने पर हम अधिक ध्यान देते है ।*

*ये भी एक प्रकृतिस्थ संदेश है कि -*

*हमें पिछली कमजोरियों को भूलकर भविष्य को संवारने की ओर अग्रसर रहना चाहिए .......!!*

🙏🙏 शुभ प्रभात 🙏जय जिनेन्द्र 🙏🙏
[12/03, 15:20] anami sharan: *जब मन खराब हो तब बुरे शब्द ना बोलें, क्योंकि खराब मन को बदलने के मौके बहुत मिल जायेंगे लेकिन शब्दों को बदलने के मौके फिर नहीं मिलेंगे*

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