**राधास्वामी!! 19-04-2020- आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ:- (1) खोजी जन सरस मन, सुन सुन गुरु बचना।। (प्रेमबानी-3-शब्द-6,पृ.सं.226) (2) अजब जहाँ के बीच काल ने जाल बिछाया अपना है। अंग अंग से बँधे जीव सब छुटन भया अति कठिना है।। साध संत के ग्रंथ छाँट कर मन भाया सो गहना है। जा करनी से मन मरता था पिंड छुडाया अपना है।। (प्रेमबिलास-शब्द100,पृ.सं.146-47) (3) सतसंग के उपदेश-भाग तीसरा-कल से आगे। 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
Sunday, April 19, 2020
राधास्वामी शाम का सत्संग 19/04
**राधास्वामी!! 19-04-2020- आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ:- (1) खोजी जन सरस मन, सुन सुन गुरु बचना।। (प्रेमबानी-3-शब्द-6,पृ.सं.226) (2) अजब जहाँ के बीच काल ने जाल बिछाया अपना है। अंग अंग से बँधे जीव सब छुटन भया अति कठिना है।। साध संत के ग्रंथ छाँट कर मन भाया सो गहना है। जा करनी से मन मरता था पिंड छुडाया अपना है।। (प्रेमबिलास-शब्द100,पृ.सं.146-47) (3) सतसंग के उपदेश-भाग तीसरा-कल से आगे। 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
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