: राधास्वामी!! 08-07-2020-
आज सुबह के सतसंग में पढे गये पाठ-
(1) सुरत सखी आज करत आरती। शब्द गुरू मन अपने धारती।। कूडा करकट सभी जलाया। महल आपना साफ कराया।।-(महिमा ताकि कही न जाई। गूँगे का गुड हो गया भाई।।) (सारबचन-शब्द-8वाँ,पृ.स.129-130)
(2) सुरतिया दूर बसे। हरदम गुरु चरन निहार।। निज स्वरुप के दर्शन कारन। गुरु चरनन में रही पुकार।।-(फिर फिर करूँ बीनती गहिरी। हे राधास्वामी पिता दयार।।) (प्रेमबानी-2-शब्द-135,पृ.सं.267)
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻
राधास्वामी!!
08-07-2020-
आज.शाम के सतसंग में पढे गये पाठ-
(1) आज मैं गुरु सँग खेलूँगी होरी।।टेक।। -(शब्द रुप प्यारे राधास्वामी का। घट में दरस करुँ री।।) (प्रेमबानी-3-शब्द-14,पृ.सं.304)
(2) इतनी अरज हमारी। सुन लो पिता पियारे। चरनों में आ गिरा हूँ। मैं दास अब तुम्हारे।। बिछडा तुम्हारे सँग से। बहने लगा सर्व अँग से। स्वामी तुम्हारा सेवकः भौजल में बिन तुम्हारे।।-(हे दयाल मानो बिन्ती। दासी की मेटो चिन्ती। धुर घर की मेहर माँगूँ। राधास्वामी ओट धारे।।) (प्रेमबिलास-शब्द-7,पृ.स.9-10)
(3) यथार्थ-प्रकाश-भाग पहला-कल से आगे:--------
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
**राधास्वामी!!
08-07- 2020
-आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-
कल से आगे-
( 43) जो मत रचना का आदि मानते हैं वे स्वीकार करते हैं कि रचना से पहले कुलमालिक के अतिरिक्त और कुछ ना था।़़ यदि यह ठीक है तो यह मानना होगा कि उस समय यह वर्तमान जगत् कुलमालिक में गुप्त था।
फिर यह भी मानते हैं कि रचनात्मक क्रिया के आरंभ होने पर कुलमालिक में आदिक्षोभ( हिलोर) हुआ , क्योंकि यदि कुल मालिक में कोई नई क्रिया ना होती तो रचना से पूर्व की वहीं अवस्था ज्यों की त्यों बनी रहती।
आदि हिलोर के उठने पर कुलमालिक से आदिधार प्रकट हुई क्योंकि प्रत्येक शक्ति के केंद्र में क्षोभ होने पर शक्ति की धार उत्थित होती है।
जोकि कुलमालिक चैतन्य शक्ति का भंडार है इसलिए उस आदिधार में, जो उससे प्रकट हुई, 2 गुण होने चाहिएँ- प्रथम यह कि वह धार चैतन्य शक्ति की धार होनी चाहिए, दूसरे यह कि उसमें रचना करने की सामर्थ्य अर्थात रचना करने का संकल्प और रचना की सामग्री भी विद्यमान होनी चाहिएँ। अब देखिए इन बातों से क्या क्या परिणाम निकलते हैं।।
🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻
यथार्थ प्रकाश- भाग पहला-
परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!**
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