Friday, July 10, 2020

प्रेम पत्र भाग -1 11072020





**परम गुरु हुजूर महाराज-


प्रेम पत्र -भाग 1- कल से आगे-( 27)-


【 जवाब थोड़े से सवालों के जो एक सत्संगी ने भेजें】


-(1)  सत्पुरुष से जोत और निरंजन दो कला प्रगट हुई ।और यह दोनों कला चैतन्य हैं और इन्होंने तीन लोक की रचना करी, पहले ब्रह्म सृष्टि और बाद उसके और किस्म की रचना, यानी सुर,नर और चारों खान और यह रचना तीन धारों से प्रकट हुई और एक तीन धारे ब्रह्म और माया से, मुकाम सहसदलकँवल  से, निकली और वह तीन गुण कहलाती है।


सहदलकवँल तक माया चैतन्य और निहायत  लतीफ है, सहसदलकँवल और तीन गुणों के मंडल के नीचे जड़ता शुरू हुई और जिस कदर उतार नीचे होता गया स्थूलता यानी जड़ता बढ़ती गई। सबब इसका यह है कि सतलोक तक निर्मल चेतन देश है और उसके नीचे हल्की खोल चैतन्य पर थी।सो जब ऊपर से धार आई , उसने उस खोल को और निर्मल चेतन को जुदा करके रचना करी और वह खोल जो अलग हुआ उससे नीचे की रचना की देह जाहिर हुई।


और इसी तरह हर मुकाम से गिलाफ या खोल जो कि बनिस्बत ऊपर के ज्यादा मोटा होता गया, खारिज करके नीचे को गिरा दिया गया और निर्मल चेतन अलहदा कर दिया गया और उसी गिलास या खोल के मसाले से नीचे की रचना की देह जाहिर होती गई ।


गरज कि इस मुकाम पर जहां की इंसानी और उससे भी नीचे की रचना है, गिलाफ ज्यादा मोटा था और वह कारण इस मोटाई के महज जड़ हो गया , जैसे कि किसी दरख्त पर बहुत चमडी जो चढी होती है, वह कुछ अरसे बाद खुश्क होकर  गिर जाती और उसमें तरी बिल्कुल नहीं रहती। यही हाल नीचे बढ़ता गया।क्रमशः         


 🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**



No comments:

Post a Comment

पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...