**राधास्वामी!! 13-07-2020-
आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ-
(1) सुरत प्यारी खेलन आई फाग। धार गुरू चरनन में अनुराग।।-(चरन राधास्वामी कीना प्यार। प्रेम का फगुआ लीना सार।।) (प्रेमबानी-3,शब्द-19,पृ.सं.308)
(2) शेरो शखुन का गाना कोई हमसे सीख जाय। कहता हूँ एक तराना कोई हमसे सीख जाय।।-( मुर्शिद की आँख बीच से है रास्ता चला। उस आँख में समाना कोई हम से सीख जाय।। ) ( प्रेमबिलास-शब्द-10,पृ.सं.13)
(3) यथार्थ प्रकाश-भाग पहला-कल से आगे।।
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**
**राधास्वामी 13-07 -2020
आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-
कल से आगे-( 48)
यह बात जगतप्रसिद्ध है कि राधा एक गोपी का नाम था जो कृष्णजी की प्रेमिन थी पर कुछ अनुसंधान करने वालों का मत है कि राधा नाम की कोई गोपी न थी।
ख्वाजा हसन निजामी साहब अपनी 'कृष्णबीती' नामक पुस्तक में लिखते हैं कि राधा नाम की किसी स्त्री का कृष्णजी से संबंध ना था। इसके अतिरिक्त बाबू धीरेंद्रनाथ पाल ने अपनी अंग्रेजी पुस्तक'Shri Krishna,His Life and Teachings' के पृष्ठ 128 तथा 129 पर पूरी खोज के उपरांत सिद्ध किया है कि राधा नाम की स्त्री का उल्लेख न महाभारत में आया है, ना विष्णु पुराण में, न हरिवंश में, और ना ही श्रीमद्भागवत में।
हाँ, ब्रह्मवैवर्त पुराण के रचयिता ने पहले पहल राधा नाम की गोपी की कथा कल्पित की और पीछे से लोगों ने अपनी काव्योचित उत्प्रेक्षा की सहायता से राधा के प्रेम के संबंध में मनमानी बातें प्रचलित कीं।
अनुसंधान करने वालों का मत है कि राधा शब्द का अर्थ "आराधना अर्थात पूजा तथा प्रेम करने वाली" है। इस अर्थ के अनुसार प्रत्येक गोपी तथा प्रत्येक कृष्णभक्त इस नाम का अधिकारी हो सकता है।
राधास्वामी मत की पुस्तकों में 'राधा' शब्द का प्रयोग आदिध्वनि ,आदि चैतन्य धार तथा आदिसुरत के लिए किया गया है और जैसा कि आरंभ की 3 कड़ियों से प्रकट है ,इसका न किसी स्त्री के नाम से संबंध है, न किसी कथा वार्ता से
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻
यथार्थ प्रकाश- भाग पहला-
परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज!**
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