Monday, July 13, 2020

प्रेमपत्र और रोजनामचा /13072020




*परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज

- रोजाना वाकिआत- 25 नवंबर 1932 -शुक्रवार-

मॉडल इंडस्ट्रीज ने अव्वल मर्तबा बाइसिकिल के पुर्जों को हाथ लगाया है । आज एक पुर्जा तैयार होकर पेश हुआ जो कि काबिलेतारीफ था ।

सर गणेशदत्त सिंह साहब ने बाइसिकिलों की तैयारी पर बहुत जोर दिया था। मुझे उनके अल्फाज याद है। उम्मीद है कि रफ्ता रफ्ता बाइसिकल बनाने की नौबत आ जायेगी । फिलहाल तीन पूर्जे हाथ में लिये हैं।

 इनके अलावा सुइयाँ बनाने की कोशिश जारी है । सुई देखने में निहायत तुच्छ चीज है लेकिन इसका बनाना निहायत कठिन है।

                                                         

  टेक्सटाइल फैक्ट्री ने एक नए नमूने का ऊनी कपड़ा पेश किया । जो निहायत सुंदर है। उम्मीद है कि सर्वप्रिय होगा । प्रबंधकों का कारखानाजात को मेरी जानिब से यही निर्देश रहता है कि जो चीज बनाओ दर्जा बल्कि बनाओ।भद्दी या कुरूप चीजें मत बनाओ। बहुत से हिंदुस्तानी भाई इस सिद्धांत को नापसंद करते हैं ।

तो भद्दी, मोटी बदनुमा चीजों के इस्तेमाल से इंसान के मिजाज पर बुरा असर पड़ता है। सादगी की जिंदगी बसर करने एक बात है और भद्देपन की जिंदगी बसर करने दूसरी बात।।                 

 रियासत कोटा के एक प्रतिष्ठित जिज्ञासु के सवाल करने पर सुबह कॉरस्पॉडेंस में गीता के श्लोकों के मानी बयान हुए। जो उन्हें पसंद आये। इससे उम्मीद होती है कि गीता के उपदेश की तैयारी के मुतअल्लिक़ जो तकलीफ उठानी पड़ती है वह निष्फल न जायेगी ।।

                                               

उसी जिज्ञासु के सवाल करने पर रात को 'ओम'  शब्द की महिमा बयान की गई। यह सब किसी जबान का शब्द नहीं है क्योंकि यह उस वक्त भी मौजूद था जब कोई इंसान पैदा नहीं हुआ था। और जब इंसान ना था तो जवानों का क्या जिक्र?  ब्रह्म पुरुष की जो गायत्री मंत्र में 'सविता' शब्द से संबोधित किया गया है, शक्ति की धारों से धुन प्रकट हो रही है, अगर उसकी इंसानी बोली में नकल उतार जावे तो 'ओम' शब्द बनता है यह ब्रह्म का धुन्यात्मक व निज नाम है।।          हजरत खामोश की डायरी पढी मालूम होता है कि प्रेम प्रचारक को अपने हाथों में पहुंचने का प्रतिष्ठा हासिल हो गई है आपको प्रेम प्रचारक की मेल जोल ढूढंना पसंद आई।।                             

🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**





**परम गुरु हुजूर महाराज-

 प्रेम पत्र- भाग 1- कल से आगे-( 3)

 ऊपर के हाल से फर्क और तफावत रचना का एक दर्जे और सब दर्जो में समझ लो । यह बसबब मिलौनी खोल यानी माया के हुआ है और इस फर्क से कर्ता की हस्ती पर किसी तरह का दोष नहीं आ सकता है, क्योंकि निर्मल चेतन देश में , सत्तलोक और अलख लोक और अगम लोक की रचना में , किसी तरह का फर्क और तफावत नहीं है और नीचे के लोकों में, जहाँ से की माया का जन्म हुआ थोड़ा थोड़ा फर्क और तफावत पैदा होता गया और नीचे के मंडलों में ज्यादा बढ़ता गया।

यह रचना जो सतलोक के नीचे हुई है , ब्रह्म और माया की करी हुई है यानु सत्तपुरुष से सेवा करते इजाजत लेकर यह रचना करी है।

सो इन माया ब्रह्म की निस्बत अलबत्ता इस कदर दोष लगाया जा सकता है कि उन्होंने जीवो को सत्तपुरुष का भेद नहीं दिया और वास्ते बढ़ाने को कायम रखने रचना के अपनी हद में अनेक तरह के धोखे देकर जीवो को अपनी हुकूमत में रखा और अनेक मत जारी करके उनको भरमा और भुला दिया। इसी वजह से संत फरमाते हैं कि ब्रह्म देश के पार जाना चाहिए ।

इस कर्ता का स्वरूप किसी कदर नाकिस है , यानी बसबब संगत माया के सफाई पूरी इसमें नहीं है। इसी सबब से इसकी रचना में भी कसर है।

इस तीन लोक की रचना की उम्र है, यानी हद मुकर्र है, जैसे कि आदमी की उम्र है। यह सदा एक रस नहीं रहेगी। इसी वजह से संत कहते हैं कि इस देश में जन्म मरण से बचाव नहीं होगा। इस वास्ते जरूरी है कि ब्रह्म देश के पार जाना चाहिये। क्रमशः     
      
 🙏🏻राधास्वामी🙏🏻**


No comments:

Post a Comment

पूज्य हुज़ूर का निर्देश

  कल 8-1-22 की शाम को खेतों के बाद जब Gracious Huzur, गाड़ी में बैठ कर performance statistics देख रहे थे, तो फरमाया कि maximum attendance सा...