Thursday, July 9, 2020

रोजाना वाक्यात




**परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज

-रोजाना वाकिआत- 22 नवंबर 1932-

 मंगलवार-

यूनिटी कॉन्फ्रेंस की कामयाबी पर बहुत से लोग मालवीया जी को मुबारकबाद भेज रहे हैं। मैंने भी आज एक खत भेजा है । वाकई मालवीया जी ने इस मौके पर कमाल बुद्धिमानी व साहस से काम लिया है जिसके लिए हिंदुस्तान के सभी शुभचिंतक उनके कृतज्ञ हैं ।।     
                               

दिसंबर माह के जलसे के संबंध में अभी से लोग आने शुरू हो गए हैं। अगर यही हाल रहा तो क्रिसमस के दिनों में उम्मीद से ज्यादा भीड़ हो जाएगी । कुछ लोग मद्रास से आये हैं कुछ लाहौर से ।

 इसके अलावा जगह-जगह से मकानों के लिए चिट्टियां आ रही है। फंड में आज पूरा ₹30000 जमा हो गया है और सब इंतजाम जोर-शोर से जारी है । लेकिन साथ ही सर्दी भी दिन-ब-दिन रौनक पकड़ रही है ।

अगर दया शामिल हाल रही तो इरादा है कि संगत के सामने नया व्यापारिक प्रोग्राम पेश करूं और अगर उस प्रोग्राम पर अमल शुरू हो गया और कुछ अर्सा जारी रहा तो तमाम संगत की सूरत शक्ल निखर जाएगी।

इस वक्त हम लोगों के अंदर पहले हिन्द की सी सभी कमियाँ हैं। हमारे हौसले पस्त है । इसलिए जरा से नफा नुकसान की सूरत में हमारे मन जेर और जबर हो जाते हैं ।

हमें बेहतरी के लिए योजनाएं नहीं सूझती इसलिये तेली के  बैल की तरह एक ही केंद्र के गिर्द घूमते हैं । हममें मालिक की दया हासिल करने और उनसे फायदा उठाने की योग्यता नहीं है इसलिए अपना बहुत सा वक्त खेलकूद में नष्ट कर देते हैं।  हमें एक दूसरे के दु:ख दर्द का बहुत ही कम अहसाइ है। इसलिए एक दूसरे की मदद नहीं करते।

अगर संगत ने मेरा मशवरा कुबूल किया तो यह सब खामियां रफ्ता रफ्ता आप से आप दूर हो जाएगी। इसी उम्मीद पर क्रिसमस की जलसे का बोझ सर ने मंजूर किया है।


🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻**


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