Thursday, March 11, 2021

_अनंत धैर्य रखना।

 ⭕ _*धैर्य रखना! प्रतिक्षा से सुंदर फूल अवश्य खिलेंगे!!*_>>>>>>>>


_किस्मत को दोष मत देना।_

_अगर न मिले परमात्मा तो अपने प्रयास की कमी समझना,_

_अपनी प्रार्थना का अधूरापन समझना।_

_और धैर्य रखना! कहते हैं पलटू काहे होत अधीर!_

_अनंत धैर्य रखना। अनंत को पाने चले हो,_

_अनंत धैर्य के बिना न पा सकोगे।_

_और स्मरण रखना,_

_सब चीजें अपने समय पर आसान हो जाती हैं।_

_जो बात किसी और मौसम में नहीं हो सकती,_

_वह वसंत में होगी।_

_जो बात गर्मी में नहीं हो सकती, वह वर्षा में होगी।_

_जो वर्षा में नहीं हो सकती,_

_वह किसी और ऋतु में होगी।_

_इतनी ऋतुएं हैं इसीलिए तो कि_

_जगत विभिन्न अभिव्यक्तियों से भर जाए!_

_लेकिन जो बात एक ऋतु में संभव है,_

_वह दूसरी ऋतु में संभव नहीं है।_

_इसलिए बीज बोना ठीक समय पर और फिर प्रतीक्षा करना,_

_ठीक समय पर टूटेंगे, निश्चित टूटेंगे!_


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