*
प्रस्तुति - अरूण अगम यादव
राधास्वामी!! 13-03-2020 आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ:- (1) मैं पडी अपने गुरु प्यारे की सरना।।टेक।। (प्रेमबानी-3-शब्द-2-पृ.सं.196) (2) आज तुम चेत करो गुरु संग। धार कर हियरे भक्ति ढंग।। (प्रेमबिलास-शब्द-81,पृ.सं.114)
(3) सतसंग के उपदेश-भाग तीसरा-कल से आगे)
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻*
सत्संग एक धोबीघाट सा है
*
13-03 -2020 -
आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन
- कल से आगे
-(81)
सत्संग को अगर धोबी का घाट का आ जावे तो बेजा न होगा क्योंकि सत्संग में सुरत या रुह की चादर से जन्मा जन्म की मैल छुड़ाई जाती है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि जैसे बाज लोग मैंले कपड़े पहन कर खुश होते हैं क्योंकि वे उन्हें गर्दखोरे व सूफियाने ख्याल करते हैं और उन्हें गुमान है कि मैले कपड़े पहनने से सर्दी कम लगती है। ऐसे ही बहुत से लोग अपनी सुरत की चादर मैली ही रखना पसंद करते हैं और इसलिए अपने स्वयं को सत्संग से दूर रखते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि सत्संग में शरीक होने पर उनके खान-पान व रहन-सहन पर रोक टोक लगेगी । सत्संग में शरीक होने के लिए उत्तम संस्कारों की जरूरत है ।।
🙏🏻राधास्वामी 🙏🏻
(सत्संग के उपदेश -भाग तीसरा)*
प्रस्तुति - अरूण अगम यादव
राधास्वामी!! 13-03-2020 आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ:- (1) मैं पडी अपने गुरु प्यारे की सरना।।टेक।। (प्रेमबानी-3-शब्द-2-पृ.सं.196) (2) आज तुम चेत करो गुरु संग। धार कर हियरे भक्ति ढंग।। (प्रेमबिलास-शब्द-81,पृ.सं.114)
(3) सतसंग के उपदेश-भाग तीसरा-कल से आगे)
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻*
सत्संग एक धोबीघाट सा है
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13-03 -2020 -
आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन
- कल से आगे
-(81)
सत्संग को अगर धोबी का घाट का आ जावे तो बेजा न होगा क्योंकि सत्संग में सुरत या रुह की चादर से जन्मा जन्म की मैल छुड़ाई जाती है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि जैसे बाज लोग मैंले कपड़े पहन कर खुश होते हैं क्योंकि वे उन्हें गर्दखोरे व सूफियाने ख्याल करते हैं और उन्हें गुमान है कि मैले कपड़े पहनने से सर्दी कम लगती है। ऐसे ही बहुत से लोग अपनी सुरत की चादर मैली ही रखना पसंद करते हैं और इसलिए अपने स्वयं को सत्संग से दूर रखते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि सत्संग में शरीक होने पर उनके खान-पान व रहन-सहन पर रोक टोक लगेगी । सत्संग में शरीक होने के लिए उत्तम संस्कारों की जरूरत है ।।
🙏🏻राधास्वामी 🙏🏻
(सत्संग के उपदेश -भाग तीसरा)*
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