प्रस्तुति - उषा रानी /राजेंद्र प्रसाद सिन्हा
आज शाम के सतसंग में पढे गये पाठ:-
(1) मैं हुई सखी अपने प्यारे की प्यारी।।टेक।। (प्रेमबानी-3,शब्द-3,पृ.सं.197)
(2) आज तुम चेत करो गुरू संग। धार कर हियरे भक्ति ढंग।। छुटती देखो मन की जंग।प्रेम गुरु चढता देखों रंग।। (प्रेमबिलास-शब्द-81,पृ.सं. 114-115)
(3) सतसंग के उपदेश-भाग तीहरा-कल से आगे।
🙏🏻राधास्वामी🙏🏻*
:*राधास्वामी!! 14-03 -2020
आज शाम के सत्संग में पढ़ा गया बचन-
कल से आगे-
( 82)-
सत्संग की शिक्षा थोड़े से शब्दों में बयान की जा सकती है और चार या पांच बातों के समझ लेने से सब शिक्षा समझ में आ जाती है।
पहली बात यह है कि सत्संग से सिखलाता है कि ऐ इंसान! तू संसार के सामान अच्छी तरह भोग, तुझे कोई मना नहीं करता लेकिन तू अपनेतई उन में उलझा मत यानी अपनेतई उनका दास मत बना। तू पानी पी, पानी में स्नान कर , तैर और पानी का आनंद ले लेकिन पानी में डूब मत। तू कपड़े पहन, ओढ और बिछा , बढ़िया से बढ़िया कपड़े इस्तेमाल कर लेकिन अपनेतई कपड़ों से जकड़बंद मत कर।
दूसरी बात यह सिखलाता है कि ऐ इंसान ! अपने शरीर को स्वस्थ व स्वच्छ रख और उसकी मुनासिब रक्षा कर लेकिन उसे अपना असली स्वरूप मत जान। यह शरीर सिर्फ तेरे आत्मा का वस्त्र है। एक दिन तुझे यह पुराने कंबल की तरह उतार कर फेंकना होगा।
🙏🏻 राधास्वामी🙏🏻
(सत्संग के उपदेश भाग तीसरा)*
राधास्वामी दयाल की दया राधास्वामी सहाय
राधास्वामी।।
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