Thursday, March 12, 2020

प्रार्थना की शक्ति






प्रस्तुति - कृष्ण मेहता


*🍎प्रार्थना में शक्ति🍎*

         *एक वृद्ध महिला एक सब्जी की दुकान पर जाती है, उसके पास सब्जी खरीदने के पैसे नहीं होते है।*

     *वो दुकानदार से प्रार्थना करती है कि उसे सब्जी उधार दे दे पर दुकानदार मना कर देता है।*

      *उसके बार-बार आग्रह करने पर दुकानदार खीज कर कहता है, तुम्हारे पास कुछ ऐसा है , जिसकी कोई कीमत हो , तो उसे इस तराजू पर रख दो,  मैं उसके वज़न के बराबर सब्जी तुम्हे दे दूंगा।*

*वृद्ध महिला कुछ देर सोच में पड़ जाती है। क्योंकि, उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं था।*

     *कुछ देर सोचने के बाद वह, एक मुड़ा-तुड़ा कागज़ का टुकड़ा निकलती है और उस पर कुछ लिख कर तराजू पर रख देती है।*

     *दुकानदार ये देख कर हंसने लगता है।*

     *फिर भी वह थोड़ी सब्जी उठाकर तराजू पर रखता है।*

*आश्चर्य...!!!*

     *कागज़ वाला पलड़ा नीचे रहता है और सब्जी वाला ऊपर उठ जाता है।*

    *इस तरह वो और सब्जी रखता जाता है, पर कागज़ वाला पलड़ा नीचे नहीं होता।*

      *तंग आकर दुकानदार उस कागज़ को उठा कर पढता है और हैरान रह जाता है ।*

      *📝 कागज़ पर लिखा था...''हे श्री ईश्वर, तुम सर्वज्ञ हो, अब सब कुछ तुम्हारे हाथ में है''..👏🏻👏🏻*

     *दुकानदार को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था।*

     *वो उतनी सब्जी वृद्ध महिला को दे देता है।*

     *पास खड़ा एक अन्य ग्राहक दुकानदार को समझाता है, कि भाई, आश्चर्य मत करो।*

     *केवल ईश्वर ही जानते हैं की प्रार्थना का क्या मोल होता है?*

    *वास्तव में प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है। चाहे वो एक घंटे की ही हो या एक मिनट की।*

     *यदि सच्चे मन से की जाये, तो ईश्वर अवश्य सहायता करते हैं..❗❗*

     *अक्सर लोगों के पास ये बहाना होता है, कि हमारे पास वक्त नहीं।*

      *मगर सच तो यह है कि ईश्वर को याद करने का कोई समय नहीं होता...❗❗*

*🔹🔹प्रार्थना के द्वारा मन के विकार दूर हो जाते हैं, और एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।*

*🔸🔸जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का बल मिलता है।*

*🔹🔹ज़रूरी नहीं कि कुछ मांगने के लिए ही प्रार्थना की जाये।*

*🔸जो हमारे पास है, हमें उसका धन्यवाद करना चाहिए।*

*🔸इससे हमारे अन्दर का अहम् नष्ट होगा और कहीं अधिक समर्थ व्यक्तित्व का निर्माण होगा।*

*🔸प्रार्थना करते समय मन को ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध घृणा जैसे विकारों से मुक्त रखना चाहिए।*

☀☀☀☀☀☀☀☀☀
*जिंदगी* संभालती रही हमें
      उम्र भर *दो पैरों* पर

      *मौत* के *नख़रे* तो देखिए
       आते ही  *चार कंधे* मांगती है ।

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